एनसीईआरटी समाधान कक्षा 1 आनंदमय गणित अध्याय 4: 10 बनाएँ
कक्षा 1 आनंदमय गणित अध्याय 4 – 10 बनाएँ एनसीईआरटी समाधान – प्रश्न उत्तर तथा अभ्यास के अन्य प्रश्नों के हल सत्र 2026-27 के लिए यहाँ से निशुल्क प्राप्त किए जा सकते हैं। कक्षा 1 गणित का यह अध्याय उस मोड़ पर आता है जहाँ विद्यार्थी पहली बार दो अंकों की संख्याओं की दुनिया में कदम रखते हैं। पिछले पाठ “स्वादिष्ट आम” में 1 से 9 तक की गिनती सीखने के बाद अब बारी है शून्य को समझने की, 10 बनाने के जोड़े ढूँढने की और 0 से 20 तक की गिनती सीखने की। इस पाठ में तीन बड़ी अवधारणाएँ एक साथ आती हैं जो गणित की बुनियाद को और मज़बूत बनाती हैं — शून्य की पहचान, 5 और 10 के संख्या-जोड़, और 10 से आगे गिनने की समझ। “बिंदुओं वाला कीड़ा”, “टूटते बटन” की कहानी और “दसवाँ जन्मदिन” जैसे रोचक संदर्भों से यह सब इस तरह सिखाया गया है कि विद्यार्थी को लगे जैसे वे पढ़ नहीं, बल्कि कोई कहानी सुन रहे हों।
एनसीईआरटी कक्षा 1 आनंदमय गणित अध्याय 4 समाधान (2026-27 के लिए)
कक्षा 1 आनंदमय गणित अध्याय 4 के सभी प्रश्नों के हल तथा उत्तर
कक्षा 1 आनंदमय गणित पाठ 4 एनसीईआरटी समाधान – हिंदी और अंग्रेजी में
कक्षा 1 गणित पाठ 4 की मुख्य अवधारणाएँ एक नज़र में
| विषय | क्या और कैसे |
|---|---|
| शून्य की पहचान | टूटते बटन की कहानी से – चार से घटते-घटते शून्य तक |
| 5 के जोड़ | 1+4, 2+3, 3+2, 4+1 – पाँच बनाने के सभी तरीके |
| 10 के जोड़ | 1+9, 2+8, 3+7… उँगलियों और कार्ड खेल से |
| 0 से 20 तक गिनती | संतरे के डिब्बे के उदाहरण से 10+1=11, 10+2=12… |
| बड़ी-छोटी संख्या | 20 तक की संख्याओं में तुलना और क्रम |
| डॉट-टू-डॉट | 1 से 20 तक बिंदुओं को जोड़कर चित्र बनाना |
कक्षा 1 आनंदमय गणित: “टूटते बटन” – जब कहानी बन जाए गणित
इस पाठ की सबसे यादगार चीज़ है “टूटते बटन” की कहानी। गोला बंदर 4 बटन वाली कमीज़ पहनकर केले के बाग जाता है। केले खाने की लत में उसकी कमीज के बटन एक-एक करके टूटते जाते हैं – चार, तीन, दो, एक और आखिर में शून्य। यह कहानी दो काम एक साथ करती है। पहला – शून्य की अवधारणा बिना किसी उलझन के समझ आ जाती है। दूसरा – विद्यार्थी यह भी सीखते हैं कि ज़रूरत से अधिक खाना सेहत के लिए ठीक नहीं। जब गणित और जीवन मूल्य एक साथ आएँ, तो सीख ज़्यादा गहरी होती है। घर पर इसे और मज़ेदार बनाने के लिए – बटन या सिक्के लें और एक-एक हटाते जाएँ। जब सब हट जाएँ तो पूछें – अब कितने बचे? यही है शून्य।
कक्षा 1 आनंदमय गणित: “मज़ेदार पाँच और दस” – जोड़ की पहली नींव
इस पाठ में विद्यार्थी पहली बार यह सीखते हैं कि किसी एक संख्या को दो हिस्सों में बाँटा जा सकता है। जैसे 5 को 1 और 4 में, 2 और 3 में — और 10 को 1 और 9 में, 2 और 8 में। यह संख्या-विभाजन यानी संख्या बंध की समझ आगे चलकर जोड़ और घटाव दोनों की बुनियाद बनती है। उँगलियों के खेल से यह इतने स्वाभाविक ढंग से सिखाया गया है कि विद्यार्थी को अलग से कुछ याद नहीं करना पड़ता — खेलते-खेलते याद हो जाता है। अभिभावक घर पर यह खेल आज़माएँ: एक हाथ से कुछ उँगलियाँ दिखाएँ और विद्यार्थी से कहें कि 10 बनाने के लिए कितनी और उँगलियाँ चाहिए?
कक्षा 1 आनंदमय गणित: 0 से 20 तक की गिनती – संतरे वाला तरीका
नागपुर की सिमरन अपने पिताजी के साथ संतरे पैक करती है। एक डिब्बे में 10 संतरे आते हैं। जब एक डिब्बा भर जाता है और एक संतरा बाहर रहता है तो कुल हो जाते हैं 11 यानी ग्यारह। दो बाहर रहें तो 12 यानी बारह — और इसी तरह 20 यानी बीस तक। यह तरीका विद्यार्थियों को यह समझाता है कि दो अंकों की संख्याएँ दरअसल “10 का एक समूह और कुछ और” होती हैं। यही दशमलव पद्धति की असली नींव है जो आगे की सभी कक्षाओं में काम आती है। इस पाठ के बाद अध्याय 5 और आगे के पाठों में आने वाले जोड़-घटाव समझना विद्यार्थी के लिए बहुत आसान हो जाता है।
विद्यार्थी इस पाठ 4 में कहाँ अटकते हैं?
- शून्य को “कुछ नहीं” मानकर संख्या न समझना – जबकि शून्य भी 1, 2, 3 जैसी ही एक पूरी संख्या है
- 10 के जोड़ों में 6+4 और 4+6 को अलग-अलग मानना – जबकि दोनों मिलकर 10 ही बनाते हैं
- 11, 12, 13 जैसी संख्याओं में 1 और 2 को अलग-अलग पढ़ना बजाय “ग्यारह, बारह, तेरह” पढ़ने के
- बड़ी-छोटी संख्या तय करते समय केवल अनुमान लगाना, गिनकर निर्णय न करना
- 13 और 31 जैसी संख्याओं को एक जैसा समझना
घर पर करें ये 4 मज़ेदार गतिविधियाँ
- बटन गिनाओ — शून्य सिखाओ 4-5 बटन या सिक्के लें। एक-एक हटाते जाएँ और हर बार पूछें — अब कितने बचे? जब सब हट जाएँ तो बच्चा खुद बोलेगा — “शून्य!” यही इस पाठ की सबसे ज़रूरी सीख है।
- संतरे वाला खेल 10 छोटी वस्तुएँ एक तरफ रखें — यह “भरा डिब्बा” है। फिर 1-2-3 और रखते जाएँ और पूछें — अब कुल कितने? 10+3=13 इस तरह 20 तक पहुँचें। सिमरन की कहानी घर में ज़िंदा हो जाएगी।
- कार्ड का खेल 0 से 10 तक के कार्ड बनाएँ। दो कार्ड उठाएँ — अगर दोनों का जोड़ 10 हो तो वो कार्ड आपके। जिसके पास ज़्यादा कार्ड हों वह जीता। यह खेल सीधे इस पाठ की “कार्ड का खेल” गतिविधि से लिया गया है।
- डॉट-टू-डॉट बनाओ कागज़ पर 1 से 20 तक के बिंदु बनाएँ और विद्यार्थी से कहें कि क्रम से जोड़े। जो चित्र बनेगा उसे देखकर विद्यार्थी खुद बताए — यह पशु है या पक्षी? यह गतिविधि संख्याओं के क्रम को बहुत मज़ेदार तरीके से पक्का करती है।
| जल्दी याद करें | संख्या | कैसे बनती है |
|---|---|---|
| 0 | शून्य | कुछ नहीं बचा |
| 10 | दस | 10 उँगलियाँ, एक पूरा हाथ |
| 11 | ग्यारह | 10 और 1 |
| 12 | बारह | 10 और 2 |
| 15 | पंद्रह | 10 और 5 |
| 20 | बीस | 10 और 10 |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एनसीईआरटी कक्षा 1 आनंदमय गणित के पाठ 4 “10 बनाएँ” में क्या-क्या सिखाया जाता है?
इस पाठ में विद्यार्थी शून्य की अवधारणा, 5 और 10 बनाने के संख्या-जोड़, 0 से 20 तक की गिनती और बड़ी-छोटी संख्याओं की तुलना सीखते हैं। “टूटते बटन” और “दसवाँ जन्मदिन” जैसी कहानियों के ज़रिए ये सब अवधारणाएँ विद्यार्थियों तक बहुत स्वाभाविक तरीके से पहुँचती हैं। यह पाठ आगे की कक्षाओं में जोड़-घटाव सीखने की ज़मीन तैयार करता है।
शून्य को विद्यार्थियों को “संख्या” के रूप में कैसे समझाएँ?
शून्य को समझाने का सबसे आसान तरीका है वास्तविक वस्तुओं से दिखाना। जैसे — तीन सेब थे, एक-एक करके खाते गए और अब प्लेट में शून्य सेब हैं। यहाँ यह ज़रूर बताएँ कि शून्य “कुछ नहीं होने की स्थिति” को दर्शाता है, लेकिन यह खुद एक पूरी संख्या है — बिल्कुल 1, 2, 3 की तरह। इसी पाठ में “रात को कितने सूरज दिखते हैं?” जैसे सवाल शून्य को रोज़मर्रा से जोड़कर समझाते हैं।
10 के जोड़ संख्या बंध क्यों ज़रूरी हैं और इन्हें याद कराने का आसान तरीका क्या है?
10 के जोड़ गणित की नींव हैं क्योंकि इनसे बड़े जोड़-घटाव करने की गति और आत्मविश्वास दोनों बढ़ते हैं। याद कराने का सबसे अच्छा तरीका है उँगलियों का खेल — एक हाथ पर कुछ उँगलियाँ दिखाएँ और पूछें कि 10 बनाने के लिए दूसरे हाथ पर कितनी उँगलियाँ चाहिए? रोज़ 2-3 मिनट का यह अभ्यास बहुत जल्दी इन जोड़ों को पक्का कर देता है।
शिक्षक कक्षा में “10 बनाएँ” पाठ को प्रभावशाली तरीके से कैसे पढ़ाएँ?
शिक्षक इस पाठ को तीन चरणों में पढ़ा सकते हैं। पहले “टूटते बटन” कहानी से शून्य की समझ दें और विद्यार्थियों से आसपास की ऐसी चीज़ें पूछें जिनकी संख्या शून्य हो। फिर बिंदु फ्लैश कार्ड से बिना गिने संख्या पहचानने का अभ्यास कराएँ। अंत में 0 से 10 तक के कार्ड बनवाएँ और “कार्ड का खेल” खेलें जिसमें जोड़ 10 बने तो कार्ड मिलें। इस तरह खेल-खेल में पूरा पाठ कवर हो जाता है।
11 से 20 तक की संख्याएँ विद्यार्थियों को अक्सर कठिन क्यों लगती हैं?
इसकी मुख्य वजह यह है कि विद्यार्थी इन संख्याओं को एकल अंकों की तरह रटने की कोशिश करते हैं। जबकि इस पाठ में सिमरन के संतरों वाले उदाहरण से यह बताया गया है कि 13 यानी “10 का एक समूह और 3 और।” जब विद्यार्थी यह समझ जाता है तो 11 से 20 तक की हर संख्या खुद-ब-खुद समझ आ जाती है और रटने की ज़रूरत नहीं रहती।
कक्षा 1 गणित के पाठ 4 के बाद विद्यार्थी की समझ को कैसे परखें?
घर पर एक छोटी-सी जाँच करें – विद्यार्थी के सामने 12 वस्तुएँ रखें और पूछें कि इनमें 10 का समूह बनाओ और बताओ कितनी बचीं। या दो संख्याएँ बोलें — जैसे 7 और 15 — और पूछें कौन-सी बड़ी है और क्यों। यदि विद्यार्थी सोचकर सही जवाब दे सके तो पाठ की समझ पक्की है। यदि केवल अनुमान लगाए तो थोड़ा और अभ्यास ज़रूरी है।
































