एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान अध्याय 1 प्राकृतिक संसाधन एवं उनका उपयोग

प्राकृतिक संसाधन हमारे जीवन का आधार हैं, जिनके बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना संभव नहीं है। जल, वायु, मिट्टी, खनिज और ऊर्जा स्रोत जैसे संसाधन न केवल हमारी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करते हैं, बल्कि आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान के अध्याय 1 प्राकृतिक संसाधन एवं उनका उपयोग, में प्राकृतिक संसाधनों की परिभाषा, प्रकार, उनका वर्गीकरण, वितरण, उपयोग तथा संरक्षण के तरीकों को सरल भाषा में समझाया गया है। साथ ही, यह अध्याय हमें संसाधनों के संतुलित और जिम्मेदार उपयोग की आवश्यकता के बारे में जागरूक करता है, ताकि वर्तमान के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी संसाधन सुरक्षित रह सकें।

एनसीईआरटी कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान के अध्याय 1 के प्रश्न उत्तर

पेज 1: महत्वपूर्ण प्रश्न

1. हम प्राकृतिक संसाधनों का वर्गीकरण कैसे करते हैं?
उत्तर:
प्राकृतिक संसाधनों का वर्गीकरण विभिन्न आधारों पर किया जाता है। पहला आधार उनके उपयोग के अनुसार है, जैसे— जीवन के लिए आवश्यक संसाधन (जल, वायु), सामग्री के संसाधन (लकड़ी, धातु) और ऊर्जा के संसाधन (कोयला, सूर्य ऊर्जा)। दूसरा आधार नवीकरणीय और अनवीकरणीय संसाधनों का है। नवीकरणीय संसाधन वे होते हैं जो समय के साथ पुनः उत्पन्न हो सकते हैं, जैसे— जल, वन, पवन। अनवीकरणीय संसाधन वे हैं जो सीमित होते हैं और जल्दी समाप्त हो जाते हैं, जैसे— कोयला, पेट्रोलियम। इस प्रकार वर्गीकरण से संसाधनों को समझना और उनका सही उपयोग करना आसान होता है।

2. जीवन के विभिन्न पक्षों और प्राकृतिक संसाधनों के वितरण के मध्य क्या संबंध है?
उत्तर:
प्राकृतिक संसाधनों का वितरण मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं को गहराई से प्रभावित करता है। जहाँ संसाधन अधिक होते हैं, वहाँ बसावट, उद्योग और आर्थिक विकास तेजी से होता है। उदाहरण के लिए, जल और उपजाऊ मिट्टी वाले क्षेत्रों में कृषि विकसित होती है, जबकि खनिज संपन्न क्षेत्रों में उद्योग स्थापित होते हैं। संसाधनों की कमी वाले क्षेत्रों में विकास धीमा रहता है और लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, संसाधनों का असमान वितरण व्यापार, प्रवास और कभी-कभी संघर्ष का कारण भी बनता है। इसलिए संसाधनों का वितरण मानव जीवन की गुणवत्ता और विकास को सीधे प्रभावित करता है।

3. प्राकृतिक संसाधनों के असंधारणीय उपयोग/अतिशोषण से क्या आशय है?
उत्तर:
प्राकृतिक संसाधनों का असंधारणीय उपयोग या अतिशोषण का अर्थ है संसाधनों का इस प्रकार उपयोग करना जिससे उनकी पुनः पूर्ति संभव न हो सके। जब मनुष्य अपनी आवश्यकताओं से अधिक और बिना योजना के संसाधनों का दोहन करता है, तो वे धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं। उदाहरण के लिए, अत्यधिक वनों की कटाई, भूजल का अत्यधिक उपयोग, और जीवाश्म ईंधनों का अधिक प्रयोग। इससे पर्यावरण असंतुलन, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता की हानि जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। इसलिए संसाधनों का संतुलित और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग आवश्यक है ताकि वे भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी उपलब्ध रह सकें।

पेज 7: आइए पता लगाएँ

1. अपने आस-पास के उन मानवीय क्रियाकलापों की पहचान कीजिए जिनके परिणामस्वरूप प्रकृति अपनी पुनर्स्थापन और पुनर्जनन की क्षमता खो रही है। प्रकृति के चक्र को पुनर्स्थापित करने के लिए किस प्रकार के हस्तक्षेप किए जा सकते हैं?
उत्तर:
हमारे आसपास कई मानवीय गतिविधियाँ प्रकृति की पुनर्स्थापन और पुनर्जनन क्षमता को प्रभावित कर रही हैं। जैसे— वनों की अंधाधुंध कटाई, औद्योगिक अपशिष्ट को नदियों में छोड़ना, प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अधिक प्रयोग तथा भूजल का अत्यधिक दोहन। इन गतिविधियों से मिट्टी की उर्वरता घटती है, जल स्रोत प्रदूषित होते हैं और जैव विविधता में कमी आती है।
प्रकृति के चक्र को पुनर्स्थापित करने के लिए हमें वृक्षारोपण करना चाहिए, जल संरक्षण के उपाय अपनाने चाहिए, अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर बनाना चाहिए तथा जैविक खेती को बढ़ावा देना चाहिए। इसके साथ ही, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग और पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी आवश्यक है। इन उपायों से प्राकृतिक संतुलन बनाए रखा जा सकता है।

पेज 8: आइए पता लगाएँ

1. अपने क्षेत्र में नवीकरणीय संसाधनों के प्रकारों का आकलन करने के लिए एक छोटा शोध-अध्ययन करें। आप अपने शिक्षक के साथ अपने अध्ययन के भौगोलिक क्षेत्र और आवश्यक जानकारी प्राप्त करने के स्रोतों पर चर्चा कर सकते हैं। समय के साथ उनकी स्थिति में क्या परिवर्तन आया है? एक छोटी-सी रिपोर्ट बनाएँ जिसमें परिवर्तन के कारणों तथा आगे क्या किया जा सकता है, इसका उल्लेख हो।
उत्तर:
मैंने अपने क्षेत्र में नवीकरणीय संसाधनों का अध्ययन किया। यहाँ मुख्य रूप से जल, सूर्य ऊर्जा, पवन और वनस्पति प्रमुख नवीकरणीय संसाधन हैं। जल स्रोत के रूप में नल, हैंडपंप और वर्षा जल उपलब्ध है। सूर्य का प्रकाश पूरे वर्ष पर्याप्त मात्रा में मिलता है, जिससे सौर ऊर्जा की संभावना अधिक है। कुछ स्थानों पर पेड़-पौधे भी पर्याप्त हैं, जो पर्यावरण को संतुलित रखते हैं।

  • समय के साथ इन संसाधनों की स्थिति में बदलाव आया है। पहले जल अधिक मात्रा में उपलब्ध था, लेकिन अब भूजल स्तर कम हो रहा है। पेड़ों की संख्या भी शहरीकरण और कटाई के कारण घट रही है।
  • इन परिवर्तनों के मुख्य कारण जनसंख्या वृद्धि, अत्यधिक जल उपयोग, वनों की कटाई और प्रदूषण हैं। भविष्य में सुधार के लिए हमें वर्षा जल संचयन करना चाहिए, अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए, जल का बचाव करना चाहिए और सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना चाहिए।

2. वे कौन-से अनवीकरणीय संसाधन हैं जिनका आप प्रतिदिन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उपयोग करते हैं? उनके संभावित नवीकरणीय विकल्प क्या है? नवीकरणीय ऊर्जा की ओर अग्रसर होने के लिए हम कौन-से उपाय कर सकते है?
उत्तर:
हम अपने दैनिक जीवन में कई अनवीकरणीय संसाधनों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उपयोग करते हैं। जैसे— पेट्रोल और डीज़ल (वाहनों में), कोयला (बिजली उत्पादन में), एलपीजी गैस (खाना बनाने में) तथा खनिज पदार्थ (लोहे, प्लास्टिक आदि के निर्माण में)। ये संसाधन सीमित होते हैं और जल्दी समाप्त हो सकते हैं।

  • इनके नवीकरणीय विकल्प भी उपलब्ध हैं। जैसे— पेट्रोल-डीज़ल की जगह सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और विद्युत वाहन, एलपीजी की जगह बायोगैस, तथा कोयले की जगह सौर और जलविद्युत ऊर्जा का उपयोग किया जा सकता है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ने के लिए हमें कुछ उपाय करने चाहिए। जैसे— सौर पैनल का उपयोग बढ़ाना, बिजली की बचत करना, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना, पेड़ लगाना और लोगों में जागरूकता फैलाना। इन उपायों से हम पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं और संसाधनों को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं।

पेज 9: आइए पता लगाएँ

1. चित्र 1.11 में दिए गए मानचित्र को ध्यान से दखिेए। महत्वपूर्ण खनिजों के असमान वितरण पर ध्यान दीजिए। आपके क्षेत्र में किस प्रकार के संसाधन उपलब्ध हैं? उनका वितरण कैसे हुआ है?
उत्तर:
चित्र 1.11 को देखने पर स्पष्ट होता है कि खनिज संसाधन भारत में समान रूप से वितरित नहीं हैं, बल्कि कुछ विशेष क्षेत्रों में अधिक पाए जाते हैं। जैसे— कोयला और लौह अयस्क कुछ राज्यों में ही केंद्रित हैं।

  • मेरे क्षेत्र में मुख्य रूप से जल, मिट्टी और वनस्पति जैसे प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं। यहाँ नदियाँ, भूजल और वर्षा जल प्रमुख जल स्रोत हैं। मिट्टी उपजाऊ है, जिससे खेती करना संभव होता है। कुछ स्थानों पर पेड़-पौधे भी पाए जाते हैं, जो पर्यावरण को संतुलित रखते हैं।
  • इन संसाधनों का वितरण प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। जहाँ वर्षा अधिक होती है, वहाँ जल संसाधन अधिक होते हैं, जबकि उपजाऊ मिट्टी वाले क्षेत्रों में कृषि अधिक होती है। इस प्रकार, मेरे क्षेत्र में संसाधनों का वितरण भौगोलिक स्थितियों के अनुसार असमान है।

पेज 10: आइए पता लगाएँ

1. किन्हीं दो प्राकृतिक संसाधनों का चयन कीजिए। भारत के विभिन्न भागों में उनकी उपलब्धता के विषय में जानकारी एकत्र कीजिए। उन्हें मानचित्र पर अंकित कीजिए। आप उनके वितरण के बारे में क्या देखते हैं? उनसे जुड़ी आर्थिक गतिविधियाँ किस प्रकार की हैं?
उत्तर:
मैंने दो प्राकृतिक संसाधनों कोयला और पेट्रोलियम का अध्ययन किया।

  • भारत में कोयला मुख्य रूप से झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में पाया जाता है, जबकि पेट्रोलियम असम, गुजरात और मुंबई तट के पास मिलता है।
  • मानचित्र में देखने पर पता चलता है कि ये संसाधन पूरे देश में समान रूप से वितरित नहीं हैं, बल्कि कुछ विशेष क्षेत्रों में ही अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। इस असमान वितरण के कारण उन क्षेत्रों में उद्योग अधिक विकसित हुए हैं।
  • इन संसाधनों से जुड़ी आर्थिक गतिविधियाँ जैसे— खनन, बिजली उत्पादन, परिवहन और उद्योग हैं। कोयले से बिजली बनाई जाती है और पेट्रोलियम से ईंधन तैयार किया जाता है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।

2. उन भागों में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के वर्तमान और भावी पीढ़ियों पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा कीजिए। प्रकृति के उपहारों का विवेकपूर्ण उपयोग करने की विधियाँ सुझाइए।
उत्तर:
प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन से वर्तमान और भविष्य दोनों पीढ़ियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आज के समय में प्रदूषण, वनों की कटाई और जल की कमी जैसी समस्याएँ बढ़ रही हैं। यदि संसाधनों का इसी प्रकार उपयोग होता रहा, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए ये संसाधन समाप्त हो सकते हैं।
इस समस्या से बचने के लिए हमें संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए। जैसे— अनावश्यक उपयोग से बचना, नवीकरणीय संसाधनों का अधिक उपयोग करना, पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) को बढ़ावा देना और पेड़ लगाना। इसके साथ ही, सरकार और लोगों को मिलकर पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पालन करना चाहिए।

3. अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ में ऐसे किसी संघर्ष के विषय में जानकारी प्राप्त कीजि‍ए। अपने अन्वेषण पर कक्षा में चर्चा करे।
उत्तर:
मैंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जल संसाधन से जुड़े संघर्ष के बारे में अध्ययन किया। इसका एक उदाहरण है नील नदी का जल विवाद। यह नदी अफ्रीका के कई देशों जैसे मिस्र, सूडान और इथियोपिया से होकर गुजरती है।
इथियोपिया ने नील नदी पर एक बड़ा बाँध (डैम) बनाया है, जिससे पानी का प्रवाह कम हो सकता है। इससे मिस्र और सूडान को डर है कि उन्हें पानी की कमी का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि उनकी खेती और जीवन इस नदी पर निर्भर है। इसी कारण इन देशों के बीच तनाव और विवाद की स्थिति बनी हुई है।
इस उदाहरण से हमें पता चलता है कि प्राकृतिक संसाधनों का असमान वितरण देशों के बीच संघर्ष का कारण बन सकता है। इसलिए संसाधनों का न्यायपूर्ण और समझदारी से उपयोग बहुत आवश्यक है।

पेज 11

1. आपके विचार से विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को सक्षम बनाने के लिए कौन-कौन से इनपुट आवश्यक हैं?
उत्तर:
मेरे विचार से प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग करने के लिए कई महत्वपूर्ण इनपुट आवश्यक होते हैं।

  1. सबसे पहले प्रौद्योगिकी (तकनीक) की आवश्यकता होती है, जिससे संसाधनों का सही तरीके से दोहन किया जा सके। इसके अलावा मानव कौशल और ज्ञान भी जरूरी है, ताकि लोग संसाधनों का सही उपयोग करना जान सकें।
  2. दूसरा महत्वपूर्ण इनपुट पूंजी (धन) है, क्योंकि उद्योग लगाने और संसाधनों के उपयोग के लिए निवेश की आवश्यकता होती है। साथ ही परिवहन और संचार के साधन भी जरूरी हैं, ताकि संसाधनों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाया जा सके।
  3. इसके अलावा सरकारी नीतियाँ और प्रबंधन भी महत्वपूर्ण हैं, जो संसाधनों के संतुलित और सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करते हैं। इन सभी इनपुट के सहयोग से ही प्राकृतिक संसाधनों का प्रभावी और लाभदायक उपयोग संभव हो पाता है।

पेज 19: प्रश्न और क्रियाकलाप

1. आज जो संसाधन नवीकरणीय है, उसे कल अनवीकरणीय कैसे बनाया जा सकता है? कुछ ऐसे उपायों का वर्णन कीजिए जिनसे ऐसा होने से रोका जा सकता है।
उत्तर:
जब किसी नवीकरणीय संसाधन का उपयोग उसकी पुनः उत्पत्ति की गति से अधिक किया जाता है, तो वह धीरे-धीरे समाप्त होने लगता है और अनवीकरणीय जैसा हो जाता है। उदाहरण के लिए यदि जंगलों को तेजी से काटा जाए और नए पेड़ न लगाए जाएँ तो वन समाप्त हो सकते हैं।
इसे रोकने के उपाय:

  • संसाधनों का संतुलित उपयोग करना
  • अधिक वृक्षारोपण करना
  • जल संरक्षण करना
  • पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना
  • पर्यावरण-अनुकूल तकनीक अपनाना

2. पाँच पारिस्थितिकी तंत्र कार्यों के नाम बताइए जो मानव के लिए उपयोगी हैं।
उत्तर:
पारिस्थितिकी तंत्र कई महत्वपूर्ण कार्य करता है जो मानव के लिए उपयोगी हैं।

  1. ऑक्सीजन का उत्पादन करना
  2. जल को प्राकृतिक रूप से शुद्ध करना
  3. मिट्टी के अपरदन को रोकना
  4. पौधों का परागण करना
  5. जीव-जंतुओं को आवास प्रदान करना

ये सभी कार्य पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने में सहायक होते हैं।

3. नवीकरणीय संसाधन क्या हैं? ये अनवीकरणीय संसाधनों से कैसे भिन्न हैं? लोग क्या कर सकते हैं ताकि नवीकरणीय संसाधन आने वाली पीढ़ियों के लिए उपलब्ध रहें? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
नवीकरणीय संसाधन वे संसाधन हैं जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा पुनः उत्पन्न हो जाते हैं, जैसे सूर्य ऊर्जा, जल और वन।
इसके विपरीत, अनवीकरणीय संसाधन वे हैं जिनका निर्माण बहुत लंबे समय में होता है और जिन्हें जल्दी पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता, जैसे कोयला और पेट्रोलियम।
नवीकरणीय संसाधनों को बचाने के लिए लोगों को उनका विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए, वृक्षारोपण करना चाहिए और पर्यावरण संरक्षण के उपाय अपनाने चाहिए।
उदाहरण:

  • सौर ऊर्जा
  • पवन ऊर्जा

4. अपने घर और पड़ोस में ऐसी सांस्कृतिक प्रथाओं की पहचान कीजिए जो प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की ओर संकेत करती हैं।
उत्तर:
हमारे समाज में कई ऐसी सांस्कृतिक प्रथाएँ हैं जो प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देती हैं।
जैसे –

  • तुलसी, पीपल जैसे पेड़ों की पूजा करना
  • नदियों को पवित्र मानना
  • जल और भोजन की बर्बादी न करना
  • पशु-पक्षियों को दाना डालना
  • वृक्षारोपण करना

इन प्रथाओं से लोगों में प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना विकसित होती है।

5. वर्तमान उपयोग के लिए वस्तुओं के उत्पादन में किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए?
उत्तर:
वस्तुओं के उत्पादन के समय यह ध्यान रखना चाहिए कि प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन न हो और पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे। उत्पादन की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे प्रदूषण कम हो और अपशिष्ट पदार्थों का सही प्रबंधन किया जा सके।
इसके साथ-साथ पुनर्चक्रण योग्य सामग्री का उपयोग करना चाहिए ताकि संसाधनों का संरक्षण हो सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी वे उपलब्ध रहें।