एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसरुभाषा

कक्षा 8 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसरुभाषा एनसीईआरटी समाधान में संस्कृत भाषा की महिमा, सौन्दर्य और महत्व का अत्यंत सुंदर वर्णन किया गया है। इस पाठ में बताया गया है कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान और साहित्य की आधारशिला है। इसमें वेद, उपनिषद, काव्य तथा शास्त्रों के माध्यम से संस्कृत के वैश्विक प्रभाव को दर्शाया गया है। यह अध्याय छात्रों को संस्कृत भाषा के प्रति सम्मान, रुचि और समझ विकसित करने में सहायक है, साथ ही इसमें प्रश्न-उत्तर, शब्दार्थ और व्याकरण (समास) का भी सरल अभ्यास दिया गया है।
अध्याय 7 का संस्कृत से हिंदी अनुवाद

एनसीईआरटी कक्षा 8 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न उत्तर

अभ्यासात् जायते सिद्धिः

1. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां एकपदेन उत्तरं लिखत –

(क) सन्दु रसरभाषा कस्य वचनातीता?
(ख) संस्कृतभाषा कुत्र विजयते?
(ग) संस्कृतभाषा कस्य आशा?
(घ) संस्कृते कति रसाः सन्ति?
(ङ) कस्याः ध्वनिश्रवणने सुखं वर्धते?
उत्तर:
(क) मम
(ख) धरायाम्
(ग) जीवनस्य
(घ) नव
(ङ) संस्कृतभाषायाः

2. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत –

(क) संस्कृतभाषा केषां जीवनस्य आशा अस्ति?
(ख) केषां विचाराः जनान् अभिप्रेरयन्ति?
(ग) कैः रसैः समृद्धा साहित्यपरम्परा विराजते?
(घ) संस्कृतभाषा केषु शास्त्रेषु विहरति?
(ङ) संस्कृतभाषायाः कानि कानि सम्बोधनपदानि अत्र प्रयुक्तानि?
उत्तर:
(क) संस्कृतभाषा पौराणिक-सामान्यजनानां जीवनस्य आशा अस्ति।
(ख) वेदविषय-वेदान्त-पुराणादीनां विचाराः जनान् अभिप्रेरयन्ति।
(ग) साहित्यपरम्परा नवरसैः समृद्धा विराजते।
(घ) संस्कृतभाषा वैद्य-व्योम-शास्त्रादिषु विहरति।
(ङ) अयि मातः, श्रुतिसुखनिनदे, सकलप्रमोदे, सरसविनोदे, काव्यविशारदे इति सम्बोधनपदानि प्रयुक्तानि।

3. रेखाङ्कितपदानि आश्रित्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत –

कक्षा 8 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न 3 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 8 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न 3 के उत्तर का चित्र

4. अधः प्रदत्तानां पदानाम् उदाहरणानुसारं विभक्तिं वचनं च लिखत –

कक्षा 8 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न 4 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 8 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न 4 के उत्तर का चित्र

5. अधोलिखितानां पद्यांशानां यथायोग्यं मेलनं कुरुत –

कक्षा 8 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न 5 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 8 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न 5 के उत्तर का चित्र

6. उदाहरणानुसारम् अधः प्रदत्तानां पदानाम् एकपदेन अर्थं लिखत –

कक्षा 8 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न 6 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 8 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न 6 के उत्तर का चित्र

7. पेटिकातः पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –

कक्षा 8 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न 7 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 8 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न 7 के उत्तर का चित्र

8. अधोलिखितविकल्पेषु प्रसङ्गानुसारम् अर्थं चिनुत –

(क) “मञ्जुलमञ्जूषा” इत्यस्य अर्थः कः?
(i) कठोरभाषा
(ii) शोचनीया भाषा
(iii) मनोहररूपेण संकलिता
(iv) सामान्यभाषा
उत्तर:
(iii) मनोहररूपेण संकलिता

(ख) सुन्दरसरभाषा केषां जीवनस्य आशा उच्यते?
(i) केवलं कवीनाम्
(ii) बालकानाम्
(iii) पौराणिक–सामान्यजनानाम्
(iv) छात्राणाम्
उत्तर:
(iii) पौराणिक–सामान्यजनानाम्

(ग) सुन्दरसरभाषा कुत्र विजयते?
(i) आकाशे
(ii) जलधौ
(iii) धरायाम्
(iv) पवने
उत्तर:
(iii) धरायाम्

(घ) सुन्दरसरभाषायां किं नास्ति?
(i) शास्त्रज्ञानम्
(ii) संस्कृतिः
(iii) वेदान्तचिन्तनम्
(iv) अशुद्धिः
उत्तर:
(iv) अशुद्धिः

(ङ) कविः सुन्दरसरभाषां केन पदेन सम्बोधयति?
(i) पितः
(ii) मातः
(iii) भ्रातः
(iv) दातः
उत्तर:
(ii) मातः

अध्याय 7 का संस्कृत से हिन्दी में अनुवाद नीचे दिया गया है ताकि विद्यार्थी इस पाठ को सरलता और स्पष्टता से समझ सकें।

कक्षा 8 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 का हिंदी अनुवाद

भगिनि ! अद्य श्रावणी पूर्णिमा अस्ति । वयम् एतस्याः किं वैशिष्ट्यम् ?
हिंदी अनुवादभगिनी! आज श्रावणी पूर्णिमा है। हम इसकी क्या विशेषता (जानें)?

सत्यम् । किं भवत्याः विद्यालये संस्कृतदिवसम् अधिकृत्य तेषां च विशिष्टानां कार्यक्रमाणां योजना कृता ?
हिंदी अनुवादसत्य (है)। क्या आपके विद्यालय में संस्कृत दिवस के लिए और उन विशिष्ट कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है?

अहं जानामि अद्य संस्कृतदिवसः अस्ति । वयम् एतम् आसप्ताहम् आचरामः ।
हिंदी अनुवादमैं जानती हूँ आज संस्कृत दिवस है। हम इसे सप्ताह भर मनाते हैं।

आम् ओमिते ! मम विद्यालये अनेकेषां कार्यक्रमाणां योजना रचितासि ।
हिंदी अनुवादहाँ ओमिता! मेरे विद्यालय में अनेक कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है।

अहो एवम् ! किं तत्र भवती भागं ग्रहीष्यसि ?
हिंदी अनुवादअरे ऐसा! क्या वहाँ आप भाग लेंगी?

आम् ओमिते ! अहं तु गीतगायनप्रतियोगितायां भागं ग्रहीष्यामि ।
हिंदी अनुवादहाँ ओमिता! मैं तो एक गायन प्रतियोगिता में भाग लूँगी।

भगिनि ! अहम् अपि आगन्तुम् इच्छामि ।
हिंदी अनुवादभगिनी! मैं भी आना चाहती हूँ।

अवश्यम् । अहं भवत्याः कृते अनया एव निमन्त्रणपत्रं यच्छामि ।
हिंदी अनुवादअवश्य। मैं आपके लिए इसी से निमंत्रण  दे रही  हूँ।

भगिनि ! तत्र भवती किं नीतिं कार्यति ? कृपया माम् अपि श्रावयतु ।
हिंदी अनुवादभगिनी! वहाँ आप क्या गतिविधि करती हैं? कृपया मुझे भी सुनाइए।

अस्तु अहं गायामि, भवती अनुगायतु ।
हिंदी अनुवादमुझे गाने दो, और तुम मेरे साथ गाओ।

श्लोक १:
मुनिवरविकसित-कविवरविलसित-मञ्जुलमञ्जूषा, सुन्दरसुरभाषा । अजि मातः! तव पोषणक्षमता मम वचनातीता, सुन्दरसुरभाषा ॥ १ ॥
हिंदी अनुवादमहान मुनियों द्वारा विकसित और श्रेष्ठ कवियों द्वारा सुशोभित मनोहर पेटी (रूपी), सुन्दर देवभाषा। हे माता! तुम्हारी पोषण शक्ति मेरी वाणी से परे है, हे सुन्दर देवभाषा॥ १॥

पदच्छेदः – मुनिवर-विकसित-कविवर-विलसित-मञ्जुल-मञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा । अजि मातः ! तव पोषणक्षमता मम वचनातीता सुन्दरसुरभाषा ।
हिंदी अनुवादपदों का अलग-अलग विभाजन – मुनिवर-विकसित-कविवर-विलसित-मञ्जुल-मञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा। हे माता! तुम्हारी पोषणक्षमता मेरी वाणी से परे है सुन्दरसुरभाषा।

अन्वयः – (त्वं) मुनिवरविकसितकविवरविलसितमञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा (असि) । अजि मातः ! तव पोषणक्षमता मम वचनातीता अस्ति ।
हिंदी अनुवादसही क्रम में अर्थ – (तुम) महान मुनियों द्वारा विकसित और श्रेष्ठ कवियों द्वारा सुशोभित मनोहर पेटी सुन्दर देवभाषा (हो)। हे माता! तुम्हारी पोषण शक्ति मेरी वाणी से परे है।

भावार्थः – संस्कृतभाषा अतीव सुन्दरभाषा देवभाषारूपेण च परिचिता अस्ति । मुख्याः अर्थाः संस्कृतभाषायाः विकासं कृतवन्तः । एषा भाषा भूमिष्ठानां भारतीयभाषाणां, तथा विश्वस्य बहूनां भाषाणां च जननी-भाषा (स्रोतो-भाषा) गुरुभाषा (पूर्व-भाषा) वा अस्ति । बहवः कवयः काव्यरचनया अस्याः सौन्दर्यं वर्णितवन्तः । कोमलपदावल्या परिपूर्णा एषा ज्ञानपेटिका अस्ति । संस्कृतभाषा स्व पदावलिभिः अन्याः भाषाः ज्ञानं विज्ञानं च परिपोषयति । संस्कृतभाषायाः गौरवं वर्णनातीतम् अस्ति ।
हिंदी अनुवादभावार्थ – संस्कृत भाषा अत्यंत सुंदर भाषा है और देवभाषा के रूप में प्रसिद्ध है। मुख्य अर्थ यह है कि महान ऋषियों ने संस्कृत भाषा का विकास किया। यह भाषा पृथ्वी की भारतीय भाषाओं की तथा विश्व की बहुत सी भाषाओं की जननी-भाषा (स्रोत-भाषा) या गुरु-भाषा (पूर्व-भाषा) है। अनेक कवियों ने काव्य रचना से इसकी सुंदरता का वर्णन किया है। कोमल शब्दावली से परिपूर्ण यह ज्ञान की पेटी है। संस्कृत भाषा अपनी शब्दावली से अन्य भाषाओं को ज्ञान और विज्ञान से पोषित करती है। संस्कृत भाषा का गौरव वर्णन से परे है।

श्लोक २:
वेदव्यास-वाल्मीकि-मुनीनां कालिदास-बाणादिकवीनाम् । पौराणिक-सामान्य-जनानां जीवनस्य आशा, सुन्दरसुरभाषा ॥ २ ॥
हिंदी अनुवादवेदव्यास, वाल्मीकि मुनियों के, कालिदास, बाण आदि कवियों के, पौराणिक और सामान्य जनों के जीवन की आशा, सुन्दर देवभाषा॥ २॥

पदच्छेदः – वेदव्यास-वाल्मीकि-मुनीनाम् कालिदास-बाणादिकवीनाम् पौराणिक-सामान्य-जनानाम् जीवनस्य आशा सुन्दरसुरभाषा ।
हिंदी अनुवादपदों का अलग-अलग विभाजन – वेदव्यास-वाल्मीकि-मुनियों के, कालिदास-बाण आदि कवियों के, पौराणिक-सामान्य-जनों के जीवन की आशा सुन्दरसुरभाषा।

अन्वयः – (त्वं) वेदव्यासवाल्मीकिमुनीनां कालिदास-बाणादिकवीनां पौराणिक-सामान्यजनानां जीवनस्य आशा (असि) । त्वं सुन्दरसुरभाषा (असि) ।
हिंदी अनुवादसही क्रम में अर्थ – (तुम) वेदव्यास, वाल्मीकि मुनियों के, कालिदास-बाण आदि कवियों के, पौराणिक-सामान्य जनों के जीवन की आशा (हो)। तुम सुन्दर देवभाषा (हो)।

भावार्थः – संस्कृतभाषा अति रमणीया भाषा अस्ति । वाल्मीकि-वेदव्यास-इत्यादयः मुख्याः रामायण-महाभारत-पुराणादीन् ग्रन्थान् रचितवन्तः । कालिदास-बाणभट्ट-प्रभृतयः विशिष्टाः कवयः अपि उपादेयानि काव्यानि रचितवन्तः । प्राचीनकालाद् आरभ्य इदानीं यावत् सामान्यजनानां जीवनं संस्कृतभाषया रचितैः काव्यैः प्रभावितम् अस्ति । संस्कृतभाषा बहूनां लक्ष्याणां प्राप्तिका अस्ति । अतः संस्कृतभाषा सुन्दरभाषा अस्ति ।
हिंदी अनुवादभावार्थ – संस्कृत भाषा अत्यंत रमणीय भाषा है। वाल्मीकि, वेदव्यास आदि महान ऋषियों ने रामायण, महाभारत, पुराण आदि ग्रंथों की रचना की। कालिदास, बाणभट्ट आदि विशिष्ट कवियों ने भी उपयोगी काव्यों की रचना की। प्राचीन काल से लेकर अब तक सामान्य जनों का जीवन संस्कृत भाषा में रचित काव्यों से प्रभावित है। संस्कृत भाषा अनेक लक्ष्यों को प्राप्त करने वाली है। अतः संस्कृत भाषा सुंदर भाषा है।

श्लोक ३:
श्रुतिसुखनिनदे सकलप्रमोदे स्मृतिहितवरदे सरसविनोदे । गति-मति-प्रेरक-काव्यविशारदे तव संस्कृतिः एषा, सुन्दरसुरभाषा ॥ ३ ॥
हिंदी अनुवादसुनने में सुखद, सबको आनंद देने वाली, स्मृति और हित देने वाली, रसयुक्त विनोद वाली। गति-मति को प्रेरित करने वाली, काव्य में निपुण, तुम्हारी यह संस्कृति है, सुन्दर देवभाषा॥ ३॥

पदच्छेदः – श्रुतिसुखनिनदे सकलप्रमोदे स्मृतिहितवरदे सरसविनोदे गति-मति-प्रेरक-काव्यविशारदे तव संस्कृतिः एषा सुन्दरसुरभाषा ।
हिंदी अनुवादपदों का अलग-अलग विभाजन – सुनने में सुखद ध्वनि वाली, सबको आनंद देने वाली, स्मृति और हित देने वाली, रसयुक्त विनोद वाली, गति-मति को प्रेरित करने वाली, काव्य में निपुण, तुम्हारी यह संस्कृति है सुन्दरसुरभाषा।

अन्वयः – हे ! श्रुतिसुखनिनदे ! सकलप्रमोदे ! स्मृतिहितवरदे ! सरसविनोदे ! गति-मति-प्रेरक-काव्यविशारदे ! तव एषा संस्कृतिः (अस्ति) । (त्वं) सुन्दरसुरभाषा (असि) ।
हिंदी अनुवादसही क्रम में अर्थ – हे सुनने में सुखद ध्वनि वाली! सबको आनंद देने वाली! स्मृति और हित देने वाली! रसयुक्त विनोद वाली! गति-मति को प्रेरित करने वाली काव्य में निपुण! तुम्हारी यह संस्कृति (है)। (तुम) सुन्दर देवभाषा (हो)।

भावार्थः – वस्तुतः रमणीया देवत्वविशिष्टा संस्कृतभाषा संस्कृतेः जननी सदृशी अस्ति । संस्कृतभाषायाः ध्वनिश्रवणेन सुखं वर्तते, सर्वे जनाः आनन्दिताः भवन्ति । संस्कृतभाषा वररूपेण संस्कारजन्यं ज्ञानं प्रयच्छति, सरसं विनोदभावं च प्रदायति । मानवजीवने उत्तमां गतिं बुद्धिं च प्रददाति । काव्यशास्त्रपरिपूर्णा संस्कृतभाषा अस्माकं संस्कृतिं रक्षति प्रसारयति च ।
हिंदी अनुवादभावार्थ – वास्तव में रमणीय और दिव्य विशिष्टता वाली संस्कृत भाषा संस्कृति की जननी के समान है। संस्कृत भाषा की ध्वनि सुनने से सुख मिलता है, सभी लोग आनंदित होते हैं। संस्कृत भाषा वर के रूप में संस्कार से उत्पन्न ज्ञान देती है, रसयुक्त विनोद भाव देती है। मानव जीवन में उत्तम गति और बुद्धि प्रदान करती है। काव्य-शास्त्र से परिपूर्ण संस्कृत भाषा हमारी संस्कृति की रक्षा और प्रसार करती है।

श्लोक ४:
नवरस-रुचिरालङ्कृतिधारा वेदविष्य-वेदान्त-विचारा । वैद्य-व्योम-शास्त्रादि-विहारा विज्ञते धरायाम्, सुन्दरसुरभाषा ॥ ४ ॥
हिंदी अनुवादनौ रसों की रुचिकर अलंकृति की धारा, वेद-विषय और वेदान्त-विचार वाली। वैद्य (चिकित्सा), व्योम (अंतरिक्ष) शास्त्र आदि में विहार करने वाली, पृथ्वी पर प्रसिद्ध है, सुन्दर देवभाषा॥ ४॥

पदच्छेदः – नवरस-रुचिरा अलङ्कृतिधारा वेदविष्य-वेदान्त-विचारा । वैद्य-व्योम-शास्त्रादि-विहारा विज्ञते धरायाम् सुन्दरसुरभाषा ।
हिंदी अनुवादपदों का अलग-अलग विभाजन – नौ रसों की रुचिकर अलंकृति की धारा, वेद-विषय और वेदान्त-विचार वाली। वैद्य (चिकित्सा), व्योम (अंतरिक्ष), शास्त्र आदि में विहार करने वाली, पृथ्वी पर प्रसिद्ध है सुन्दरसुरभाषा।

अन्वयः – नवरस-रुचिरा अलङ्कृतिधारा वेदविष्यवेदान्तविचारा वैद्यव्योमशास्त्रादिविहारा धरायां सुन्दरसुरभाषा विज्ञते ।
हिंदी अनुवादसही क्रम में अर्थ – नौ रसों की रुचिकर अलंकृति की धारा, वेद-विषय और वेदान्त-विचार वाली, वैद्य (चिकित्सा), व्योम (अंतरिक्ष), शास्त्र आदि में विहार करने वाली सुन्दर देवभाषा पृथ्वी पर प्रसिद्ध है।

भावार्थः – संस्कृतकाव्यशास्त्रेषु शृङ्गार-हास्य-करुण-रौद्र-वीर-भयानक-बीभत्स-अद्भुत-शान्त-प्रभृतयः नवसंख्याकाः रुचिराः रसाः सन्ति । शब्दार्थपूर्णाः विविधाः अलङ्काराः शोभन्ते । वेद-उपनिषद्-वेदान्त-पुराणादीनां विचाराः जनान् अभिप्रेरयन्ति । चिकित्सासाविज्ञान-खगोलशास्त्रादिभिः सह संस्कृतभाषा पृथिव्यां विहरति । एवं संस्कृतभाषा सर्वत्र विज्ञते ।
हिंदी अनुवादभावार्थ – संस्कृत काव्य-शास्त्रों में शृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, बीभत्स, अद्भुत, शांत आदि नौ संख्या के रुचिकर रस हैं। शब्दार्थ से परिपूर्ण विविध अलंकार शोभायमान हैं। वेद, उपनिषद, वेदान्त, पुराण आदि के विचार लोगों को प्रेरित करते हैं। चिकित्सा विज्ञान, खगोल शास्त्र आदि के साथ संस्कृत भाषा पृथ्वी पर विहार करती है। इस प्रकार संस्कृत भाषा सर्वत्र प्रसिद्ध है।