एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 संस्कृत दीपकम् अध्याय 4 प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 संस्कृत दीपकम् अध्याय 4 प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः में महान समाजसेवी और स्वतंत्रता सेनानी गोपबन्धु दास के जीवन, त्याग और सेवा भावना का प्रेरणादायक वर्णन किया गया है। इस पाठ के माध्यम से विद्यार्थियों को न केवल संस्कृत भाषा का ज्ञान मिलता है, बल्कि मानवता, देशभक्ति और परोपकार जैसे उच्च जीवन-मूल्यों की भी शिक्षा मिलती है। जलप्लाव (बाढ़) जैसी प्राकृतिक आपदा के समय पीड़ितों की सहायता करने की भावना को विशेष रूप से उजागर किया गया है, जिससे छात्रों में सामाजिक जिम्मेदारी का विकास होता है।
अध्याय 4 का संस्कृत से हिंदी अनुवाद
एनसीईआरटी कक्षा 8 संस्कृत दीपकम् अध्याय 4 के प्रश्न उत्तर
अभ्यासात् जायते सिद्धिः
1. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरं लिखत –
(क) समाज-दिनपत्रिकायाः प्रतिष्ठाता कः?
(ख) गोपबन्धुः कस्मै स्वभोजनं दत्तवान्?
(ग) मरणासन्नः कः आसीत्?
(घ) गोपबन्धुः केन उपाधिना सम्मानितः अभवत्?
(ङ) गोपबन्धुः कति वर्षाणि कारावासं प्राप्तवान्?
उत्तर:
(क) गोपबन्धुः।
(ख) भिक्षुकाय।
(ग) गोपबन्धुः।
(घ) उत्कलमणिः।
(ङ) द्वे वर्षे।
2. एकवाक्येन उत्तरं लिखत –
(क) गोपबन्धुः किमर्थम् अश्रुपूर्णनयनः अभवत्?
(ख) कीदृशं पुत्रं विहाय गोपबन्धुः समाजसेवाम् अकरोत्?
(ग) गोपबन्धोः कृते “उत्कलमणिः” इति उपाधिः किमर्थं प्रदत्ता?
(घ) गोपबन्धुः कुत्र जन्म लब्धवान्?
(ङ) गोपबन्धुः सर्वदा केषाम् उपयोगं कृतवान्?
उत्तर:
(क) करुणध्वनिं श्रुत्वा गोपबन्धुः अश्रुपूर्णनयनः अभवत्।
(ख) मरणासन्नं पुत्रं विहाय गोपबन्धुः समाजसेवाम् अकरोत्।
(ग) देशसेवायाः समाजसेवायाश्च कारणेन गोपबन्धोः कृते “उत्कलमणिः” इति उपाधिः प्रदत्ता।
(घ) गोपबन्धुः ओडिशाराज्यस्य परीजनपदस्य साण्डो-ग्रामे जन्म लब्धवान्।
(ङ) गोपबन्धुः सर्वदा स्वदेशस्य वस्त्राणां वस्तूनां च उपयोगं कृतवान्।
3. कोष्ठके दत्तानि पदानि उपयुज्य वाक्यानि रचयत –

उत्तर:

4. चित्रं दृष्ट्वा पञ्च वाक्यानि रचयत –

उत्तर:

5. समुचितेन पदेन श्लोकं पूरयत –

उत्तर:

6. उदाहरणानुसारं क्रियापदानि स्त्रीलिङ्गे परिवर्तयत –

उत्तर:

7. समुचितेन पदेन सह स्तम्भौ मेलयत –

उत्तर:

8. घटनाक्रमेण वाक्यानि पुनः लिखत –
(क) भिक्षुकं भिक्षुं च तद्भोजितवान्।
(ख) प्रफुल्लचन्द्ररायः गोपबन्धुं उत्कलमणिः इति उपाधिना सम्मानितवान्।
(ग) गोपबन्धुः अश्रुपूर्णनयनोऽभवत्।
(घ) अतिथयः हस्तपादं क्षालयित्वा आसनेषु उपविष्टवन्तः।
(ङ) दिनत्रयात् किमपि न भुक्तम्।
उत्तर:
(क) अतिथयः हस्तपादं क्षालयित्वा आसनेषु उपविष्टवन्तः।
(ख) दिनत्रयात् किमपि न भुक्तम्।
(ग) गोपबन्धुः अश्रुपूर्णनयनोऽभवत्।
(घ) भिक्षुकं भिक्षुं च तद्भोजितवान्।
(ङ) प्रफुल्लचन्द्ररायः गोपबन्धुं उत्कलमणिः इति उपाधिना सम्मानितवान्।
अध्याय 4 का संस्कृत से हिन्दी में अनुवाद नीचे दिया गया है ताकि विद्यार्थी इस पाठ को सरलता और स्पष्टता से समझ सकें।
कक्षा 8 संस्कृत दीपकम् अध्याय 4 का हिंदी अनुवाद
(एकदा जलप्लावपीडितानां साहाय्यार्थं शिक्षकाः छात्राश्च सभागारे चर्चां कुर्वन्ति।)
हिंदी अनुवाद(एक बार बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए शिक्षक और छात्र सभागार में चर्चा कर रहे हैं।)
नमस्ते छात्राः! ह्यस्तनीं वार्तां श्रुतव्यः किम्?
हिंदी अनुवादनमस्ते छात्रो! आज की बात सुननी चाहिए क्या?
नमो नमः आचार्य!
हिंदी अनुवादनमस्कार नमस्कार आचार्य जी!
ओडिशा-राज्यस्य केन्द्रापदा-जनपदे महानद्यां भयङ्करः जलप्लावः सम्भूतः।
हिंदी अनुवादओडिशा राज्य के केन्द्रापड़ा जिले में महानदी में भयंकर बाढ़ आई है।
जलप्लावेन तत्र महती हानिः सञ्जाता।
हिंदी अनुवादबाढ़ से वहाँ बहुत बड़ी हानि हुई है।
आम्, हिमानि! त्वं सत्यं वदसि।
हिंदी अनुवादहाँ, हिमानी! तुम सत्य कह रही हो।
जलप्लावेन वासगृहाणि नष्टानि, केचित् अस्वस्थाः चिकित्सालये मृत्युना सह युध्यन्ते।
हिंदी अनुवादबाढ़ से घर नष्ट हो गए हैं, कुछ बीमार लोग अस्पताल में मृत्यु से जूझ रहे हैं।
अन्ये च अनाहारेण कष्टं सहन्ते।
हिंदी अनुवादऔर दूसरे लोग भोजन न मिलने से कष्ट सह रहे हैं।
बहवः गृहपालिताः पशवोऽपि नदीस्रोतसा प्रवाहिताः मृताश्च।
हिंदी अनुवादबहुत से पालतू पशु भी नदी के प्रवाह से बह गए और मर गए।
महोदय! ते सम्प्रति अतिदुःखिताः भवेयुः खलु?
हिंदी अनुवादमहोदय! वे अभी बहुत दुखी होंगे न?
सत्यम्, अशोक! ते सर्वे अतिदुःखेन जीवन्ति।
हिंदी अनुवादसत्य है, अशोक! वे सभी बहुत दुःख से जी रहे हैं।
अस्माभिः एतादृशानां दुःखितानां सहाय्यता करणीया।
हिंदी अनुवादहम लोगों को ऐसे दुखियों की सहायता करनी चाहिए।
यथा उत्कलमणिः गोपबन्धुः जलप्लावपीडितानाम् अकुण्ठं सेवां कृत्वा अद्यापि जनमानसेषु समादृतोऽस्ति।
हिंदी अनुवादजैसे उत्कलमणि गोपबन्धु ने बाढ़ पीड़ितों की निःसंकोच सेवा करके आज भी लोगों के मन में सम्मानित हैं।
महोदय! एषः गोपबन्धुः कः?
हिंदी अनुवादमहोदय! यह गोपबन्धु कौन हैं?
भवन्तः सर्वे एतत् चित्रं पश्यन्तु। एषः अस्ति दीनबन्धुः गोपबन्धुः।
हिंदी अनुवादआप सभी इस चित्र को देखिए। यह हैं दीनबन्धु गोपबन्धु।
सम्प्रति वयं तस्य विषये जानीमः।
हिंदी अनुवादअभी हम उनके विषय में जानते हैं।
एकदा आचार्यः हरिहरदासः सत्यवादि-वनविद्यालयस्य सर्वान् अध्यापकान् भोजनाय आमन्त्रितवान्।
हिंदी अनुवादएक बार आचार्य हरिहरदास ने सत्यवादी वन विद्यालय के सभी अध्यापकों को भोजन के लिए आमन्त्रित किया।
आमन्त्रिताः सर्वे अतिथयः हस्तपादं क्षालयित्वा आसनेषु उपविष्टवन्तः।
हिंदी अनुवादआमन्त्रित सभी अतिथियों ने हाथ-पैर धोकर आसनों पर बैठ गए।
बहूनि सुस्वादूनि व्यञ्जनानि कदलीपत्रेषु परिवेषितानि।
हिंदी अनुवादबहुत से स्वादिष्ट व्यंजन केले के पत्तों में परोसे गए।
हसन् गोपबन्धुः अवदत् – अरे!
हिंदी अनुवादहँसते हुए गोपबन्धु ने कहा – अरे!
भोजनस्यातिदौर्लभ्यं जीवनयात्रा सुखप्रदम्।
हिंदी अनुवादभोजन की अत्यधिक दुर्लभता जीवन यात्रा को सुखप्रद (बनाती है)।
तदर्थं भोजनं कुर्यात्त्वाः मया शरीरे द्यायं कुरु॥
हिंदी अनुवादइसलिए भोजन करना चाहिए, मेरे शरीर में दया करो (अर्थात् शरीर को भोजन से वंचित न रखो)।
एतच्छ्रुत्वा सर्वे उच्चैः हसितवन्तः।
हिंदी अनुवादयह सुनकर सभी जोर से हँसे।
तदानीमेव बहिः कश्चन करुणधवनिः गोपबन्धोः कर्णयोः अगुञ्जत् –
हिंदी अनुवादउसी समय बाहर से कोई करुण ध्वनि गोपबन्धु के कानों में गूँजी –
“मातः, मातः! बुभुक्षितोऽस्मि, कृपया किञ्चित् भोजनं देहि।
हिंदी अनुवाद“माता, माता! मैं भूखा हूँ, कृपया कुछ भोजन दो।
दिनत्रयात् किमपि न भुक्तम्।
हिंदी अनुवादतीन दिनों से कुछ भी नहीं खाया है।
भोजनं देहि मातः! भोजनं देहि। आँ आँ…” इति
हिंदी अनुवादभोजन दो माता! भोजन दो। आँ आँ…” ऐसा
क्रन्दनधवनिं श्रुत्वचैवाद्याविगलितहृद्यः गोपबन्धुः अश्रुपूर्णनयनोऽभवत्।
हिंदी अनुवादरोने की आवाज सुनकर और दया से पिघले हुए हृदय वाले गोपबन्धु आँसू से भरी आँखों वाले हो गए।
किमपि अविचिन्त्य झटिति स्वस्मिन्न् परिवेषितं भोजनं हस्ते गृहीत्वा बहिरागतवान्।
हिंदी अनुवादकुछ भी न सोचकर तुरंत अपने लिए परोसा गया भोजन हाथ में लेकर बाहर आ गए।
भिक्षुकञ्च तद्दोजितवान्।
हिंदी अनुवादऔर भिखारी को वह (भोजन) दे दिया।
असौ महान् समाजसेवकः आसीत् गोपबन्धुदासः।
हिंदी अनुवादवह महान समाज सेवक थे गोपबन्धु दास।
असौ सत्यवादि-वनविद्यालयस्य अध्यापकः, प्रसिद्धेषु पञ्चमित्रेषु अन्यतमः स्वतन्त्रतासङ्ग्रामी चासीत्।
हिंदी अनुवादवह सत्यवादी वन विद्यालय के अध्यापक, प्रसिद्ध पाँच मित्रों में से एक और स्वतन्त्रता सेनानी थे।
ओडिशाराज्यस्य पुरीजनपदस्य साक्षी गोपालसमीपे सुआण्डो-ग्रामे जन्म लब्धवान्।
हिंदी अनुवादओडिशा राज्य के पुरी जिले के साक्षी गोपाल के समीप सुआण्डो गाँव में जन्म लिया।
अध्ययनकालादेव सः दरिद्राणां रोगिणां च सेवामकरोत्।
हिंदी अनुवादअध्ययन काल से ही उन्होंने गरीबों और रोगियों की सेवा की।
सत्यवादि-वनविद्यालये स छात्रान् निःशुल्कम् अपाठयत्।
हिंदी अनुवादसत्यवादी वन विद्यालय में उन्होंने छात्रों को निःशुल्क पढ़ाया।
निरक्षरतादूरीकरणाय सः सततं यतते स्म।
हिंदी अनुवादनिरक्षरता दूर करने के लिए वह सदा प्रयत्न करते थे।
कार्पासवस्त्र निर्माणाय सः स्वयमेव सूत्रप्रस्तुतिमकरोत्।
हिंदी अनुवादकपास के वस्त्र निर्माण के लिए उन्होंने स्वयं ही सूत की प्रस्तुति की (धागा काता)।
जन्मभूमेः दुर्दशामवलोक्य स सर्वदा चिन्ताकुलो भवति स्म।
हिंदी अनुवादजन्मभूमि की दुर्दशा देखकर वह सदा चिन्ता से व्याकुल रहते थे।
महात्मगान्धेः प्रेरणया भारतीयस्वतन्त्रताऽऽन्दोलने गोपबन्धुः भागं गृहीतवान्।
हिंदी अनुवादमहात्मा गांधी की प्रेरणा से भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन में गोपबन्धु ने भाग लिया।
सः वर्षद्वयं यावत् कारावासं प्राप्तवान्।
हिंदी अनुवादउन्होंने दो वर्ष तक कारावास (जेल) प्राप्त किया।
कारागारे निवसन् सः ‘बन्दी रा आत्मकथा’, ‘कारा-कविता’, ‘धर्मपद’, ‘गो-माहात्म्य’, ‘नचिकेता-उपाख्यान’ इत्यादीनि बहुप्रेरणादायीनि पुस्तकानि ओडिआभाषया विरचितवान्।
हिंदी अनुवादकारागार में रहते हुए उन्होंने ‘बन्दी र आत्मकथा’, ‘कारा-कविता’, ‘धर्मपद’, ‘गो-माहात्म्य’, ‘नचिकेता-उपाख्यान’ इत्यादि बहुत प्रेरणादायक पुस्तकें ओड़िया भाषा में लिखीं।
सर्वदा स्वदेशस्य च वस्त्राणां वस्तूनां च उपयोगं कृतवान्।
हिंदी अनुवादसदा स्वदेश के वस्त्रों और वस्तुओं का उपयोग किया।
मृत्यासन्नं स्वपुत्रमपि विहाय जलप्लावपीडितान् भारतमातुः सहस्रशः पुत्रान् उद्धर्तुं गृहात् बहिः निर्गतः समाजमसेवत च।
हिंदी अनुवादमृत्यु के करीब अपने पुत्र को भी छोड़कर बाढ़ पीड़ित भारत माता के हजारों पुत्रों को उद्धार करने के लिए घर से बाहर निकले और समाज की सेवा की।
देशसेवातत्परस्य गोपबन्धुव्यक्तेः प्रसिद्धं प्रेरणादायकं वचनमुनापि जनमानसेषु राष्ट्रभक्तिं जागरयति।
हिंदी अनुवाददेश सेवा में तत्पर गोपबन्धु व्यक्ति का प्रसिद्ध प्रेरणादायक वचन अभी भी लोगों के मन में राष्ट्रभक्ति जगाता है।
स्वदेशस्य भूमिभागे मम शरीरं विलीनं भवतु।
हिंदी अनुवादस्वदेश की भूमि में मेरा शरीर विलीन हो जाए।
देशवासिनः मम अनुसरणं कुर्वन्तु।
हिंदी अनुवाददेशवासी मेरा अनुसरण करें।
देशस्य स्वतन्त्रतानिमित्तं यत्यत् प्रतिबन्धकाः गताधाः सन्ति, ते सर्वे गताधाः मम अस्थिभिः मांसैश्च परिपूर्णाः भवन्तु।
हिंदी अनुवाददेश की स्वतन्त्रता के लिए जितने भी बाधक गड्ढे हैं, वे सभी गड्ढे मेरी हड्डियों और मांस से भर जाएं।
असौ सत्यवादि-वनविद्यालयस्य, दरिद्रनारायण सेवा-सङ्घस्य, सत्यवादि-मुद्रणालयस्य, समाजः इति दैनिक-वार्तापत्रस्य च प्रतिष्ठाता आसीत्।
हिंदी अनुवादवह सत्यवादी वन विद्यालय के, दरिद्रनारायण सेवा संघ के, सत्यवादी मुद्रणालय के, और समाज नामक दैनिक समाचार पत्र के प्रतिष्ठाता (संस्थापक) थे।
समाजः इति दिनपत्रिका शताब्दिवर्षेभ्यः अधुनापि प्रतिदिनं प्रकाश्यते।
हिंदी अनुवादसमाज नामक दैनिक पत्रिका सौ वर्षों से अभी भी प्रतिदिन प्रकाशित होती है।
समाजसेवायां च देशसेवायां च तस्य असीमं त्यागमनुभवन् विज्ञानिकः आचार्यः प्रफुल्लचन्द्रायः गोपबन्धुम् उत्कलमणिः इति उपाधिना सम्मानितवान्।
हिंदी अनुवादसमाज सेवा में और देश सेवा में उनके असीम त्याग का अनुभव करते हुए वैज्ञानिक आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र (राय) ने गोपबन्धु को उत्कलमणि की उपाधि से सम्मानित किया।
उत्कलमणिरित्याख्यः प्रसिद्धो लोकसेवकः। प्रणम्यो देशभक्त्योऽयं गयोपबन्धुर्महामनाः॥
हिंदी अनुवादउत्कलमणि नाम से प्रसिद्ध लोक सेवक। देशभक्ति से प्रणम्य (नमन योग्य) हैं यह गोपबन्धु महामना (महान मन वाले)॥
