एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 संस्कृत दीपकम् अध्याय 1 संगच्छध्वं संवदध्वम्
कक्षा 8 संस्कृत दीपकम् अध्याय 1 संगच्छध्वं संवदध्वम् एनसीईआरटी समाधान में एकता, सहयोग और सामंजस्य का अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश दिया गया है। यह पाठ ऋग्वेद के प्रसिद्ध संज्ञान सूक्त पर आधारित है, जिसमें मानव जीवन में मिल-जुलकर रहने, एक साथ विचार करने और सामूहिक रूप से कार्य करने की प्रेरणा दी गई है। इस अध्याय के माध्यम से विद्यार्थियों को यह सिखाया जाता है कि सफलता प्राप्त करने के लिए आपसी सहयोग, प्रेम, और एकता अत्यंत आवश्यक हैं। समाज, परिवार और राष्ट्र के विकास में एकजुटता की भूमिका को सरल और प्रभावी ढंग से समझाया गया है।
अध्याय 1 का संस्कृत से हिंदी अनुवाद
एनसीईआरटी कक्षा 8 संस्कृत दीपकम् अध्याय 1 के प्रश्न उत्तर
अभ्यासात् जयते सिद्धि:
1. सज्ञानसूक्तं सस्वरं पठत, स्मरत, लिखत च।
उत्तर:
वयं सज्ञानसूक्तं सस्वरं पठामः, तं स्मरामः तथा शुद्धरूपेण लिखामः।
2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखत—
(क) सर्वेषां मनः कीदृशं भवेत्?
(ख) “संगच्छध्वं संवदध्वम्” इत्यस्य कः अभिप्रायः?
(ग) सर्वे किं परित्यज्य ऐक्यभावेन जीवितुं शक्नुवन्ति?
(घ) अस्मिन् पाठे का प्रेरणा अस्ति?
उत्तर:
(क) सर्वेषां मनः समानं सौहार्दपूर्णं च भवेत्।
(ख) “संगच्छध्वं संवदध्वम्” इत्यस्य अभिप्रायः अस्ति यत् सर्वे मिलित्वा गच्छेयुः तथा एकस्वरेण विचार-विनिमयं कुर्वन्तु।
(ग) सर्वे परस्परं मनोभेदं द्वेषभावं च परित्यज्य ऐक्यभावेन जीवितुं शक्नुवन्ति।
(घ) अस्मिन् पाठे एकता, सहयोगः, सौहार्दं च इति विषयेषु प्रेरणा अस्ति।
3. रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत –

उत्तर:

4. पट्टिकातः शब्दान् अधोलिखितेषु मन्त्रेषु रिक्तस्थानानि पूरयत –

उत्तर:

5. पाठे प्रयुक्तान् शब्दान् भावानुसारं परस्परं योजयत –

उत्तर:

6. लट्-लकारस्य वाक्यानि लोट्-लकारेण परिवर्तयत –

उत्तर:

अध्याय 1 का संस्कृत से हिन्दी में अनुवाद नीचे दिया गया है ताकि विद्यार्थी इस पाठ को सरलता और स्पष्टता से समझ सकें।
कक्षा 8 संस्कृत दीपकम् अध्याय 1 का हिंदी अनुवाद
नमस्ते आचार्य! अस्माकं विद्यालयस्य क्रीडोत्सवे पादकन्दुक-क्रीडायां प्रांतवर्यं विजयं प्राप्तवन्तः।
हिंदी अनुवादनमस्ते आचार्य! हमारे विद्यालय के खेलोत्सव में फुटबॉल खेल में प्रांतीय विजय प्राप्त की है।
वर्धापनानि , अभिनन्दनं भवताम्। अपि भवन्त: जानन्त्ति यत् भवता प्रतिद्वन्द्विनः कथं पराजिता:?
हिंदी अनुवादबधाई और अभिनन्दन तुम्हें। क्या तुम जानते हो कि तुमने विरोधियों को कैसे हराया?
आम्, जानामि आचार्य! अस्माकं दलस्य क्रीडकेषु परस्परं सम्यक् सामञ्जस्यम् आसीत्, किन्तु विपक्षि-दले तत् नासीत्।
हिंदी अनुवादहाँ, जानता हूँ आचार्य! हमारे दल के खिलाड़ियों में आपस में उचित सामंजस्य था, किन्तु विपक्षी दल में वह नहीं था।
सत्यम् आचार्य! तस्य दलस्य क्रीडकेषु परस्परं मनोवेदः द्वेषभावः च आसीत्। ते अन्योन्यं सहयोगं न कृतवन्तः।
हिंदी अनुवादसही है आचार्य! उस दल के खिलाड़ियों में आपस में मतभेद और द्वेष का भाव था। उन्होंने एक-दूसरे का सहयोग नहीं किया।
तर्हि वदन्तु, विजयप्राप्तयर्थं किं किम् आवश्यकम्?
हिंदी अनुवादतो फिर मुझे बताइए, जीतने के लिए क्या जरूरी है?
सत्यम् एव उक्तम्। एष एव सन्देशः वेदे ‘संगच्छध्वं संवदध्वम्’ इत्येव प्रदत्तः।
हिंदी अनुवादसही कहा। यही संदेश वेद में ‘एक साथ चलो, एक साथ बोलो’ इस प्रकार दिया गया है।
मिलित्वा कार्यकरणम्, एकता, परस्परं सामञ्जस्यं च आवश्यकम्।
हिंदी अनुवादमिलकर काम करना, एकता और आपसी सामंजस्य आवश्यक है।
आचार्य! कस्मात् वेदात् गृहीतः एष सन्देशः? कः च अस्य अभिप्रायः?
हिंदी अनुवादआचार्य! किस वेद से लिया गया है यह संदेश? और इसका क्या अभिप्राय है?
ऋग्वेदे – ‘संज्ञान-सूक्तस्य’ एषः महत्त्वांशः। एतत् ‘संघटन-सूक्तम्’ इत्यपि प्रख्यातम्।आगच्छन्तु, वयम् अस्य सूक्तस्य प्रतिनिधित्वीन् मन्त्रान् पठामः।
हिंदी अनुवादऋग्वेद में – ‘संज्ञान-सूक्त’ का यह महत्वपूर्ण अंश है। इसे ‘संघटन-सूक्त’ भी कहा जाता है।आइए, हम इस सूक्त के प्रतिनिधि मंत्रों को पढ़ें।
प्राचीन-भारतीयज्ञान-परम्परायां ‘वेदः साक्षात् ब्रह्ममुखनिःसृता पवित्रतमा दैवी वाक्’ इति मन्यते।
हिंदी अनुवादप्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा में, ‘वेदों को ब्रह्मा के मुख से प्रत्यक्ष रूप से प्रकट होने वाला सबसे पवित्र दिव्य वचन माना जाता है।’
वेदस्य चत्वारः संहिताः सन्ति – ऋग्वेदः, यजुर्वेदः, सामवेदः, अथर्ववेदः चेति।
हिंदी अनुवादवेद की चार संहिताएँ हैं – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद।
इमे वेदाः अद्य विश्वस्य प्राचीनतम-साहित्य-रूपेण विद्वद्भिः मन्यन्ते।
हिंदी अनुवादये वेद आज विश्व के प्राचीनतम साहित्य के रूप में विद्वानों द्वारा माने जाते हैं।
भवन्त: सर्वे स्नात्वा , शुद्धवस्त्राणि परिधाय, पादत्त्राण बहिः स्थापयित्वा, अस्यां प्रार्थनासभायां समुपस्थिताः सन्ति।
हिंदी अनुवादतुम सब स्नान करके, शुद्ध वस्त्र धारण करके, जूते बाहर रखकर, इस प्रार्थना में उपस्थित हो।
अतः आगच्छन्तु, प्रणामाञ्जलिं कृत्वा, नेत्रे मीलयित्वा, एकाग्रचित्तेन, समवेतस्वरेण च वेदमन्त्राणाम् उच्चारणं कुर्मः –
हिंदी अनुवादअतः आओ, प्रणाम की अंजलि बनाकर, आँखें बंद करके, एकाग्र चित्त से और एक स्वर में वेद मंत्रों का उच्चारण करें –
संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्।
हिंदी अनुवादएक साथ चलो, एक साथ बोलो, तुम्हारे मन एक जैसे हों।
देवाः भागं यथा पूर्वे संजानाना उपासते॥ १॥
हिंदी अनुवादजैसे पहले देवता एक मन से (अपने-अपने) भाग की सेवा करते थे।
समानो मन्त्रः स समितिः समानी समानं मनः सह चित्तमेषाम्।
हिंदी अनुवाद(उनका) एक जैसा विचार हो, एक जैसा संगठन हो, एक जैसा मन हो, साथ में एक जैसी बुद्धि हो।
समानं मन्त्रमभिमन्त्रये वः समानेन वो हविषा जुहोमि॥ २॥
हिंदी अनुवादमैं तुम्हें एक जैसे मंत्र से दीक्षित करता हूँ, एक जैसी आहुति से तुम्हारे लिए यज्ञ करता हूँ।
समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः।
हिंदी अनुवादतुम्हारे संकल्प एक जैसे हों, तुम्हारे हृदय एक जैसे हों।
समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति॥ ३॥
हिंदी अनुवादतुम्हारा मन एक जैसा हो जिससे तुम अच्छी तरह एकजुट रहो।
मन्त्राणां भावार्थं जानीमः (मंत्रों का भावार्थ जानें)
संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्।
हिंदी अनुवादएक साथ चलो, एक साथ बोलो, तुम्हारे मन एक जैसे हों।
देवाः भागं यथा पूर्वे संजानाना उपासते॥ १॥
हिंदी अनुवादजैसे पहले देवता एक मन से (अपने-अपने) भाग की सेवा करते थे।
पदच्छेदः – संगच्छध्वम्, संवदध्वम्, सम् वः मनांसि जानताम्, देवाः भागम् यथा पूर्वे, संजानानाः उपासते।
हिंदी अनुवादपद-विच्छेद – सं गच्छध्वम्, सं वदध्वम्, सं वः मनांसि जानताम्, देवाः भागम् यथा पूर्वे, संजानानाः उपासते।
अन्वयः – (यूयम्) सं गच्छध्वं सं वदध्वं वः मनांसि सं जानताम्। यथा पूर्वे देवाः भागं संजानानाः उपासते।
हिंदी अनुवादअन्वय – (तुम सब) एक साथ चलो, एक साथ बोलो, तुम्हारे मन एक जैसे हों। जैसे पहले देवता अपने-अपने भाग को जानते हुए सेवा करते थे।
भावार्थः – (वेदस्य ऋषिः ‘आङ्गिरसः’ परमेश्वरस्य संदेशेन मनुष्यान् उपदिशति)
हिंदी अनुवादभावार्थ – (वेद के ऋषि ‘आङ्गिरस’ परमेश्वर के संदेश से मनुष्यों को उपदेश देते हैं)
हे मानवाः! यूयं सर्वे (संगच्छध्वं) स्वस्य परिवारे, गणे, समाजे, राष्ट्रे, विश्वे च मिलित्वा अग्रे गच्छत, सं वूय अभ्युदयं सारयत।
हिंदी अनुवादहे मानवो! तुम सब अपने परिवार, समूह, समाज, राष्ट्र और विश्व में मिलकर आगे बढ़ो, संयुक्त रूप से उन्नति करो।
(संवदध्वं) परस्परं सम्यक् विचारविनिमयं कुर्वन्तः एकस्वरेण वदत।
हिंदी अनुवाद(एक साथ बोलो) आपस में उचित विचार-विनिमय करते हुए एक स्वर में बोलो।
(वः) युष्माकं (मनांसि) परस्परं मनोभावान् (संजानताम्) सम्यक् जानीत। परस्परं मनोवेदः मास्तु।
हिंदी अनुवाद(तुम्हारे) मन परस्पर मनोभावों को अच्छी तरह जानें। आपस में मतभेद न हो।
(यथा पूर्वे) यथा सृष्टेः प्रारम्भे काले, (देवाः) ब्रह्मणा सृष्टाः अग्नि-वायु-आदित्यादयः ब्रह्माण्डीय-शक्तयः (भागं) सृष्टि-निर्माण-यज्ञस्य सफलतार्थं स्वं स्वं कर्तव्यं स्वीकृत्य,
हिंदी अनुवाद(जैसे पहले) जैसे सृष्टि के प्रारंभ में, (देवता) ब्रह्मा द्वारा रचे गए अग्नि-वायु-आदित्य आदि ब्रह्मांडीय शक्तियों ने सृष्टि-निर्माण-यज्ञ की सफलता के लिए अपना-अपना कर्तव्य स्वीकार करके,
(संजानानाः) परस्परम् उत्कृष-सम्मनन-पूर्वकं (उपासते) स्वं स्वं कर्म निर्वहन्।
हिंदी अनुवाद(जानते हुए) परस्पर उत्कृष्ट सम्मान पूर्वक (सेवा करते) अपना-अपना कार्य निर्वहन करते थे।
तथैव यूयं मनुष्याः अपि स्वस्य कुटुम्बस्य, दलस्य, लोकस्य च प्रगतौ नित्यं सं वूय स्व-स्व-कर्तव्यस्य सुचारु निर्वाहं कुरुत।
हिंदी अनुवादउसी प्रकार तुम मनुष्य भी अपने परिवार, दल और समाज की प्रगति में निरंतर मिलकर अपने-अपने कर्तव्य का सुचारु निर्वहन करो।
इत्थं यूयं सर्वे वैमनस्यं परित्यज्य ऐक्यभावेन जीवत, तथा सर्वे अभीष्टफलानि च प्राप्नुत।
हिंदी अनुवादइस प्रकार तुम सब मनमुटाव त्यागकर एकता के भाव से जीओ, और सब इच्छित फलों को प्राप्त करो।
समानो मन्त्रः स समितिः समानी समानं मनः सह चित्तमेषाम्।
हिंदी अनुवादएक जैसा विचार हो, एक जैसा संगठन हो, एक जैसा मन हो, साथ में एक जैसी बुद्धि हो।
समानं मन्त्रमभिमन्त्रये वः समानेन वो हविषा जुहोमि॥ २॥
हिंदी अनुवादमैं तुम्हें एक जैसे मंत्र से दीक्षित करता हूँ, एक जैसी आहुति से यज्ञ करता हूँ।
पदच्छेदः – समानः मन्त्रः, स समितिः, समानी, समानम् मनः, सह चित्तम् एषाम्, समानम् मन्त्रम् अभिमन्त्रये वः, समानेन वः हविषा जुहोमि।
हिंदी अनुवादपद-विच्छेद – समानः मन्त्रः, स समितिः, समानी, समानम् मनः, सह चित्तम् एषाम्, समानम् मन्त्रम् अभिमन्त्रये वः, समानेन वः हविषा जुहोमि।
अन्वयः – एषां मन्त्रः समानः, समितिः समानी, मनः समानं, चित्तं सह (अस्तु)। वः समानं मन्त्रम् अभिमन्त्रये, वः समानेन हविषा जुहोमि।
हिंदी अनुवादअन्वय – इनका विचार एक जैसा हो, संगठन एक जैसा हो, मन एक जैसा हो, बुद्धि भी साथ में एक जैसी हो। मैं तुम्हें एक जैसे मंत्र से दीक्षित करता हूँ, तुम्हारे लिए एक जैसी आहुति से यज्ञ करता हूँ।
भावार्थः – (एषां) एकस्मिन् कर्मणि सह-प्रवृत्तानाम् एषां (मन्त्रः) चिन्तनं (समानः) परस्परं सौहार्दपूर्णं भवतु,
हिंदी अनुवादभावार्थ – (इनका) एक कार्य में साथ लगे हुए इनका (विचार) एक दूसरे के प्रति सौहार्दपूर्ण हो,
एषां च (समितिः) लक्ष्यसिद्धिः (समानी) समाना भवतु, (मनः) मनः च (समानं) सौमनस्यपूर्णम् अस्तु,
हिंदी अनुवादऔर इनकी (सभा) लक्ष्य-सिद्धि (एक जैसी) समान हो, (मन) मन भी (एक जैसा) प्रसन्नतापूर्ण हो,
तथा च (चित्तं) बुद्धिजन्यं ज्ञानम् अपि (सह) एकीभूतम् अस्तु।
हिंदी अनुवादऔर (बुद्धि) बुद्धि से उत्पन्न ज्ञान भी (साथ) एक हो।
गृहे, वर्गे, लोके च परस्परं द्वेषं विना सर्वे सुखेन सौहार्दपूर्णं जीवनं यापयेयुः।
हिंदी अनुवादघर में, समूह में और समाज में आपस में द्वेष के बिना सब सुख से सौहार्दपूर्ण जीवन व्यतीत करें।
हे मनुजाः! (वः) युष्माकम् (समानं मन्त्रम्) अन्योन्य-मन्त्रणं, संघटित-संकल्पं च (अभिमन्त्रये) अहम् संस्करोमि – दिव्यभावेन योजयित्वा प्रकटयामि।
हिंदी अनुवादहे मनुष्यो! (तुम्हारे) एक दूसरे से मंत्रणा और संगठित संकल्प को (दीक्षित करता हूँ) मैं संस्कारित करता हूँ – दिव्य भाव से जोड़कर प्रकट करता हूँ।
तथा च (वः) संघटितानां युष्माकं (समानेन) सामूहिकया (हविषा) प्रार्थनया (जुहोमि) अहं ज्ञानयज्ञं सम्पादयामि।
हिंदी अनुवादऔर (तुम) संगठित तुम लोगों के (समान) सामूहिक (आहुति से) प्रार्थना से (यज्ञ करता हूँ) मैं ज्ञान-यज्ञ सम्पन्न करता हूँ।
इत्थम्, ऋषयः महात्मनः च सर्वदा सामञ्जस्यपूर्णं सङ्कल्पं मन्त्रणं च दिव्यभावेन योजयित्वा समाजे प्रचारयन्ति, तस्य सफलतार्थं च परमेश्वरं प्रार्थयन्ते।
हिंदी अनुवादइस प्रकार, ऋषि और महात्मा सदा सामंजस्यपूर्ण संकल्प और मंत्रणा को दिव्य भाव से जोड़कर समाज में प्रचारित करते हैं, और उसकी सफलता के लिए परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं।
समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः।
हिंदी अनुवादतुम्हारे संकल्प एक जैसे हों, तुम्हारे हृदय एक जैसे हों।
समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति॥ ३॥
हिंदी अनुवादतुम्हारा मन एक जैसा हो जिससे तुम अच्छी तरह एकजुट रहो।
पदच्छेदः – समानी वः आकूतिः, समाना हृदयानि वः, समानम् अस्तु वः मनः यथा वः, सु-सह असति।
हिंदी अनुवादपद-विच्छेद – समानी वः आकूतिः, समाना हृदयानि वः, समानम् अस्तु वः मनः यथा वः, सु-सह असति।
अन्वयः – (हे मानवाः!) वः आकूतिः समानी (अस्तु)। वः हृदयानि समाना (सन्तु)। यथा वः सह सु असति, (तथा) वः मनः समानम् अस्तु।
हिंदी अनुवादअन्वय – (हे मानवो!) तुम्हारे संकल्प एक जैसे (हों)। तुम्हारे हृदय एक जैसे (हों)। जैसे तुम साथ में अच्छी तरह रहो, (वैसे) तुम्हारा मन एक जैसा हो।
भावार्थः – हे मानवाः! (वः) युष्माकं (आकूतिः) सङ्कल्पः (समानी) समानः अस्तु।
हिंदी अनुवादभावार्थ – हे मानवो! (तुम्हारा) संकल्प (एक जैसा) समान हो।
(वः हृदयानि) युष्माकं हृदयानि (समाना) सामरस्यपूर्णानि सन्तु।
हिंदी अनुवाद(तुम्हारे हृदय) एकरसतापूर्ण हों।
(यथा) येन (वः) युष्माकं (सह) संघटनं (सु) शोभनम् उत्कृष्टं च (असति) भवति,
हिंदी अनुवाद(जिससे) (तुम्हारा) संगठन (अच्छा) सुन्दर और उत्कृष्ट (होना),
तथा (वः मनः) युष्माकं मनः (समानम्) सामञ्जस्ययुक्तम् एकरूपं च (अस्तु) अस्तु।
हिंदी अनुवादवैसे (तुम्हारा मन) सामंजस्ययुक्त और एक रूप (हो)।
अनेन एव परिवारे, गणे, समाजे, राष्ट्रे, विश्वे च सुखं, शान्तिः, मैत्रीभावः च विराजते।
हिंदी अनुवादइसी से परिवार, समूह, समाज, राष्ट्र और विश्व में सुख, शान्ति और मैत्री का भाव विराजमान होता है।
एतैः मन्त्रैः संघटितरूपेण सहजीवनस्य कृते प्रेरणा लभ्यते।
हिंदी अनुवादइन मंत्रों से संगठित रूप में सामूहिक जीवन के लिए प्रेरणा मिलती है।
एतेन स्वजीवने लोके च प्रसन्नता, सौमनस्यम्, उत्साहः, आयुः, आरोग्यं, विजयः, समृद्धिः, धर्म:, ज्ञानप्राप्तिः, आत्मतृप्तिः च भवति।
हिंदी अनुवादइससे अपने जीवन और समाज में प्रसन्नता, मनःशान्ति, उत्साह, आयु, स्वास्थ्य, विजय, समृद्धि, धर्म, ज्ञान की प्राप्ति और आत्मतृप्ति होती है।
