कक्षा 7 इतिहास अध्याय 2 एनसीईआरटी समाधान – राजा और उनके राज्य

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 इतिहास अध्याय 2 नये राजा और उनके राज्य के अभ्यास के प्रश्न उत्तर सीबीएसई तथा अन्य राजकीय बोर्ड के लिए यहाँ दिए गए हैं। कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान इतिहास के ये समाधान शैक्षणिक सत्र 2024-25 के अनुसार संशोधित किए गए हैं। पाठ का समाधान विडियो तथा पीडीएफ दोनों प्रारूपों में दिया गया है ताकि जिन छात्रों को पीडीएफ से समझ न आए वे विडियो के माध्यम से समझ सकें।

कक्षा 7 इतिहास अध्याय 2 के लिए एनसीईआरटी समाधान

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नए राजवंशों का उदय

सातवीं सदी आते-आते उपमहाद्वीप के विभिन्न भागों में बड़े भूस्वामी और योद्धा-सरदार अस्तित्व में आ चुके थे। राजा लोग प्राय: उन्हें अपने मातहत या सामंत के रूप में मान्यता देते थे। अधिक सत्ता और संपदा हासिल करने पर सामंत अपने-आप को महासामंत, महामंडलेश्वर (पूरे मंडल का महान स्वामी) इत्यादि घोषित कर देते थे। कभी-कभी वे अपने स्वामी के आधिपत्य से स्वतंत्र हो जाने का दावा भी करते थे। इस तरह का एक उदाहरण दक्कन में राष्ट्रकूटों का था। शुरुआत में वे कर्नाटक के चालुक्य राजाओं के अधीनस्थ थे। आठवीं सदी के मध्य में एक राष्ट्रकूट प्रधान दंतीदुर्ग ने अपने चालुक्य स्वामी की अधीनता से इंकार कर दिया, उसे हराया और हिरण्यगर्भ (शाब्दिक अर्थ – सोने का गर्भ) नामक एक अनुष्ठान किया। कुछ अन्य उदाहरणों में उद्यमी परिवारों के पुरुषों ने अपनी राजशाही वायम करने के लिए सैन्य-कौशल का इस्तेमाल किया। मिसाल के तौर पर, कदंब मयूरशर्मण और गुर्जर-प्रतिहार हरिचंद्र ब्राह्‌मण थे, जिन्होंने अपने परंपरागत पेशे को छोड़कर शस्त्र को अपना लिया और क्रमश: कर्नाटक और राजस्थान में अपने राज्य सफलतापूर्वक स्थापित किए।

प्रशस्तियाँ और भूमि-अनुदान

प्रशस्तियों में ऐसे ब्यौरे होते हैं, जो शब्दश: सत्य नहीं भी हो सकते। लेकिन ये प्रशस्तियाँ हमें बताती हैं कि शासक खुद को कैसा दर्शाना चाहते थे मिसाल के लिए शूरवीर, विजयी योद्धा के रूप में। ये विद्वान ब्राह्मणों द्वारा रची गई थीं, जो अकसर प्रशासन में मदद करते थे। राजा लोग प्राय: ब्राह्मणों को भूमि अनुदान से पुरस्कृत करते थे। ये ताम्र पत्रों पर अभिलिखित होते थे, जो भूमि पाने वाले को दिए जाते थे।

मंदिर और मूर्तिकला

राजराज और राजेंद्र प्रथम द्वारा बनवाए गए तंजावूर और गंगईकोंडचोलपुरम के बड़े मंदिर स्थापत्य और मूर्तिकला की दृष्टि से एक चमत्कार हैं। मंदिर सिर्फ पूजा-आराधना के स्थान नहीं थे, वे आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन के केंद्र भी थे। मंदिर के साथ जुड़े हुए शिल्पों में सबसे विशिष्ट था, कांस्य प्रतिमाएँ बनाने का काम। चोल कांस्य प्रतिमाएँ संसार की सबसे उत्कृष्ट कांस्य प्रतिमाओं में गिनी जाती हैं। ज़्यादातर प्रतिमाएँ तो देवी-देवताओं की ही होती थीं, लेकिन कुछ प्रतिमाएँ भक्तों की भी बनाई गई थीं।

साम्राज्य का प्रशासन

प्रशासन किस प्रकार संगठित था? किसानों की बस्तियाँ, जो ‘उर’ कहलाती थीं, सिंचित खेती के साथ बहुत समृद्ध हो गई थीं। इस तरह के गाँवों के समूह को ‘नाडु’ कहा जाता था। ग्राम परिषद्‌ और नाडु, न्याय करने और कर वसूलने जैसे कई प्रशासकीय कार्य करते थे। वेल्लाल जाति के धनी किसानों को केंद्रीय चोल सरकार की देख-रेख में ‘नाडु’ के काम-काज में अच्छा-खासा नियंत्रण हासिल था। ब्राह्मणों को समय-समय पर भूमि-अनुदान या ब्रह्मदेय प्राप्त हुआ। परिणामस्वरूप कावेरी घाटी और दक्षिण भारत के दूसरे हिस्सों में ढेरों ब्राह्मण बस्तियाँ अस्तित्व में आर्इं।

राष्ट्रकूट राजवंश का उदय कैसे हुआ?

राष्ट्रकूट शुरुआत में कर्नाटक के चालुक्य राजाओं के अधीनस्थ थे। आठवीं सदी के मध्य में एक राष्ट्रकूट प्रधान दंतीदुर्ग ने अपने चालुक्य स्वामी की अधीनता से इंकार कर दिया, उसे हराया और हिरण्यगर्भ (शाब्दिक अर्थ – सोने का गर्भ) नामक एक अनुष्ठान किया।

चोल राजाओं के शासन काल में स्थापत्य और मूर्तिकला की क्या स्थिति थी?

राजराज और राजेंद्र प्रथम द्वारा बनवाए गए तंजावूर और गंगईकोंडचोलपुरम के बड़े मंदिर स्थापत्य और मूर्तिकला की दृष्टि से एक चमत्कार हैं। चोल कांस्य प्रतिमाएँ संसार की सबसे उत्कृष्ट कांस्य प्रतिमाओं में गिनी जाती हैं। ज़्यादातर प्रतिमाएँ तो देवी-देवताओं की ही होती थीं, लेकिन कुछ प्रतिमाएँ भक्तों की भी बनाई गई थीं।

किसानों की दशा का वर्णन कीजिये।

किसानों की बस्तियाँ, जो ‘उर’ कहलाती थीं, सिंचित खेती के साथ बहुत समृद्ध हो गई थीं। वेल्लाल जाति के धनी किसानों को केंद्रीय चोल सरकार की देख-रेख में ‘नाडु’ के काम-काज में अच्छा-खासा नियंत्रण हासिल था।

कक्षा 7 इतिहास अध्याय 2 एनसीईआरटी समाधान
कक्षा 7 इतिहास अध्याय 2
7वीं इतिहास अध्याय 2 एनसीईआरटी समाधान
कक्षा 7 इतिहास अध्याय 2 के प्रश्न उत्तर