कक्षा 7 भूगोल अध्याय 6 एनसीईआरटी समाधान – मानव पर्यावरण अन्योन्यक्रिया उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्ण प्रदेश

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 भूगोल अध्याय 6 मानव – पर्यावरण अन्योन्यक्रिया: उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्ण प्रदेश के प्रश्न उत्तर सीबीएसई तथा राजकीय बोर्ड सत्र 2023-24 के लिए मुफ़्त में डाउनलोड करें। कक्षा 7 भूगोल के ये समाधान सरल तथा विस्तृत रूप में दिए गए हैं। पीडीएफ के साथ साथ विडियो के रूप में भी समाधान तथा पाठ का विवरण दिया है। विद्यार्थी इन अध्ययन सामग्री का प्रयोग करके आसानी से कक्षा 7 भूगोल के पाठ 6 को पूरा याद कर सकते हैं।

कक्षा 7 भूगोल अध्याय 6 के लिए एनसीईआरटी समाधान

एनसीईआरटी समाधान

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अमेज़न बेसिन में जीवन

अमेजन नदी सबसे अधिक जलप्रवाह वाली नदी है। इसमें बहुत सारी सहायक नदियाँ मिलती हैं। यह नदी बेसिन ब्राजील के भागों, पेरू के कुछ भागों, बोलीविया, इक्वाडोर, कोलंबिया तथा वेनेजुएला के छोटे भाग से अपवाहित होती है। यह पश्चिम में पर्वतों से निकल कर पूर्व में अंधमहासागर में कैसे पहुँचती है। अमेजन और उसकी सहायक नदियाँ एक बहुत बड़े भूभाग को आच्छादित करती है। जिसका अधिकाँश भाग ब्राजील में पड़ता है यहाँ घने और सदाबहार वनस्पतियों के घने जंगल हैं जिसमें अनेक प्रकार के जीव जन्तु पाए जाते हैं।

जलवायु

जैसा कि अब आप जानते हैं अमेज़न बेसिन भूमध्य रेखा के आस-पास फैला है और पूरे वर्ष यहाँ गर्म एवं नम जलवायु रहती है। यहाँ का मौसम दिन एवं रात दोनों ही समय लगभग समान रूप से गर्म एवं आर्द्र होता है तथा शरीर में चिपचिपाहट महसूस होती है। इस प्रदेश में लगभग प्रतिदिन वर्षा होती है और वह भी बिना किसी पूर्व चेतावनी के। दिन का तापमान उच्च एवं आर्द्रता अति उच्च होती है। रात के समय तापमान कम हो जाता है लेकिन आर्द्रता वैसी ही बनी रहती है।

वर्षा वन

इन प्रदेशों में अत्यधिक वर्षा के कारण यहाँ की भूमि पर सघन वन उग जाते हैं। वन इतने सघन होते हैं कि पत्तियों तथा शाखाओं से ‘छत’ सी बन जाती है जिसके कारण सूर्य का प्रकाश धरातल तक नहीं पहुँच पाता है। यहाँ की भूमि प्रकाश रहित एवं नम बनी रहती है। यहाँ केवल वही वनस्पति पनप सकती है जिसमें छाया में बढ़ने की क्षमता हो। परजीवी पौधों के रूप में यहाँ आर्किड एवं ब्रोमिलायड पैदा होते हैं।

अमेजन के जंगलो में कौन से जीव-जन्तु पाए जाते हैं?

वर्षावन में प्राणिजात की प्रचुरता होती है। टूकन, गुंजन पक्षी, रंगीन पक्षति वाले पक्षी एवं भोजन के लिए बड़ी चोंच वाले विभिन्न प्रकार के पक्षी जो भारत में पाए जाने वाले सामान्य पक्षियों से भिन्न होते हैं यहाँ पाए जाते हैं। प्राणियों में बंदर, स्लॉथ एवं चीटीं खाने वाले टैपीर भी यहाँ पाए जाते हैं। साँप एवं सरीसर्प की विभिन्न प्रजातियाँ भी इन वनों में पाई जाती हैं। मगर, साँप, अजगर तथा एनाकोंडा एवं बोआ कुछ ऐसी ही प्रजातियाँ हैं। इसके अतिरिक्त हज़ारों कीड़े-मकोड़े भी इस बेसिन में निवास करते हैं। मांस खाने वाली पिरान्या मत्स्य समेत मछलियों की विभिन्न प्रजातियाँ भी अमेज़न नदी में पाई जाती हैं। इस प्रकार जीवों की विविधता की दृष्टि से यह बेसिन असाधारण रूप से समृद्ध है।

वर्षावन के निवासी

यहाँ के लोग छोटे-से क्षेत्र में वन के कुछ वृक्षों को काटकर अपने भोजन के लिए पसल उगाते हैं। यहाँ के पुरुष शिकार करते हैं तथा नदी में मछली पकड़ते हैं जबकि महिलाएँ पसलों का ध्यान रखती हैं। वे मुख्यत: टेपियोका, अनन्नास एवं शकरकंद उगाते हैं। क्योंकि मछली या शिकार मिलना अनिश्चित होता है ऐसे में महिलाएँ ही अपनी उगाई शाक-सब्जियों से अपने परिवार का भरण-पोषण करती हैं। वे “कर्तन एवं दहन कृषि पद्धति” का प्रयोग करते हैं। इनका मुख्य आहार मेनियोक है, जिसे कसावा भी कहते हैं तथा यह आलू की तरह जमीन के अदंर पैदा होते हैं ये चींटियों की रानी एवं अंडकोष भी खाते हैं। कॉपी, मक्का एवं कोको जैसी नगदी पसल भी यहाँ उगाई जाती हैं।

कर्तन एवं दहन कृषि पद्धति क्या होती है?

प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि को कर्तन दहन खेती भी कहते हैं। ऐसा करने के लिये सबसे पहले जमीन के किसी टुकड़े की वनस्पति को काटा जाता और फिर उसे जला दिया जाता है। वनस्पति के जलाने से राख बनती है उसे मिट्टी में मिला दिया जाता है। उसके बाद फसल उगाई जाती है।

गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन

गंगा तथा ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियाँ मिलकर भारतीय उपमहाद्वीप में गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन का निर्माण करती है। घाघरा, सोन, चंबल, गंडक, कोसी जैसी गंगा की सहायक नदियाँ एवं ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियाँ इसमें अपवाहित होती हैं। गंगा एवं ब्रह्मपुत्र के मैदान, पर्वत एवं हिमालय के गिरिपाद तथा सुंदरवन डेल्टा बेसिन क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की स्थलाकृति हैं। जनसंख्या के वितरण में पर्यावरण की प्रमुख भूमिका होती है। तीव्र ढाल वाले पर्वतीय क्षेत्र बसने के लिए प्रतिकूल हैं अत: गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन के पर्वतीय क्षेत्र में कम लोग रहते हैं। मानव प्रवास के लिए मैदानी क्षेत्र सबसे उपयुक्त है, अत: यहाँ जनसंख्या घनत्व अधिक है। यहाँ की मिट्टी उपजाउ है। जिन स्थानों पर फसल उगाने के लिए समतल भूमि उपलब्ध है वहाँ के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि है। धान यहाँ की मुख्य फसल है। चूँकि धान की खेती के लिए पर्याप्त जल की आवश्यकता होती है, यह उसी क्षेत्र में उगाया जाता है जहाँ अधिक वर्षा होती है।

गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन में उगाई जाने वाली मुख्य फसल कौन सी है?

यहाँ उगायी जाने वाली अन्य फसलें गेहूँ, मक्का, ज्वार, चना एवं बाजरा हैं। गन्ना एवं जूट जैसी नगदी फसलें भी उगायी जाती हैं। मैदान के कुछ क्षेत्रों में केले के बागान भी देखे जाते हैं। पश्चिम बंगाल एवं असम में चाय के बागान मिलते हैं। बिहार एवं असम के कुछ भागों में सिल्क के कीड़ों का संवर्धन कर सिल्क का उत्पादन किया जाता है। मंद ढलान वाले पर्वतों एवं पहाड़ियों पर वेदिकाओं में फसलें उगायी जाती हैं।

गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन में कौन से जीव पाए जाते हैं?

बेसिन में विविध प्रकार के वन्यजीव पाए जाते हैं। इनमें हाथी, बाघ, हिरण एवं बंदर आदि सामान्य रूप से पाए जाने वाले जीव हैं। एक सींग वाला गैंडा ब्रह्मपुत्र के मैदानों में पाया जाता है। डेल्टा क्षेत्र में बंगाल टाइगर, मगर एवं घड़ियाल पाए जाते हैं। नदी के साप़्ा जल, झील एवं बंगाल की खाड़ी में प्रचुर मात्रा में जलीय जीव पाए जाते हैं। रोहू, कतला एवं हिलसा मछलियों की सबसे लोकप्रिय प्रजातियाँ हैं। मछली एवं चावल इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों का मुख्य आहार है।

कक्षा 7 भूगोल अध्याय 6 एनसीईआरटी समाधान - मानव पर्यावरण
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