एनसीईआरटी समाधान कक्षा 12 राजनीति विज्ञान अध्याय 5 समकालीन दक्षिण एशिया

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 12 राजनीति विज्ञान अध्याय 5 समकालीन दक्षिण एशिया भाग 1 पाठ 5 के अभ्यास के प्रश्न उत्तर शैक्षणिक सत्र 2024-25 के लिए यहाँ से निशुल्क प्राप्त करें। ये समाधान हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओँ में दिए गए हैं ताकि सभी विद्यार्थी इसका लाभ उठा सकें। पूरे अध्याय को विडियो के माध्यम से सरल भाषा में समझाया गया है, जो पूरे पाठ को समझने में विद्यार्थियों के लिए मददगार है।

कक्षा 12 राजनीति विज्ञान अध्याय 5 एनसीईआरटी समाधान

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देशों की पहचान करें।

(क) राजतंत्रा, लोकतंत्र-समर्थक समूहों और अतिवादियों के बीच संघर्ष के कारण राजनीतिक अस्थिरता का वातावरण बना।
(ख) चारों तरफ भूमि से घिरा देश।
(ग) दक्षिण एशिया का वह देश जिसने सबसे पहले अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण किया।
(घ) सेना और लोकतंत्र-समर्थक समूहों के बीच संघर्ष में सेना ने लोकतंत्र के ऊपर बाजी मारी।
(ङ) दक्षिण एशिया के केंद्र में अवस्थित । इस देश की सीमाएँ दक्षिण एशिया के आधिकांश देशों से मिलती हैं।
(च) पहले इस द्वीप में शासन की बागडोर सुल्तान के हाथ में थी। अब यह एक गणतंत्र है।
(छ) ग्रामीण क्षेत्र में छोटी बचत और सहकारी ऋण की व्यवस्था के कारण इस देश को गरीबी कम करने में मदद मिली है।
(ज) एक हिमालयी देश जहाँ संवैधानिक राजतंत्र है। यह देश भी हर तरफ से भूमि से घिरा है।

उत्तर:

(क) नेपाल
(ख) नेपाल
(ग) श्रीलंका
(घ) पाकिस्तान
(ङ) भारत
(च) मालदीव
(छ) बांग्लादेश
(ज) भूटान

दक्षिण एशिया के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?

(क) दक्षिण एशिया में सिर्फ एक तरह की राजनीतिक प्रणालि चलती है।
(ख) बांग्लादेश और भारत ने नदी-जल की हिस्सेदारी के बारे में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
(ग) ‘साफ्टा’ पर हस्ताक्षर इस्लामाबाद के 12वें सार्क सम्मेलन में हुए।
(घ) दक्षिण एशिया की राजनीति में चीन और संयुक्त राज्य अमरीका महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उत्तर:

(क) दक्षिण एशिया में सिर्फ एक तरह की राजनीतिक प्रणालि चलती है।

पाकिस्तान के लोकतंत्रीकरण में कौन-कौन सी कठिनाईयाँ है?

पाकिस्तान के लोकतंत्रीकरण में नि.लि. कठिनाईयाँ हैपाकिस्तान में सैनिक तानाशाही लोकतंत्र की सबसे बड़ी समस्या है। पाकिस्तान का भारत के साथ विवाद बना रहता है। पाकिस्तान में कट्टरपंथी, धार्मिक नेताओं तथा सेना का दबाव हमेशा बना रहता है जो कि पाकिस्तान के लोकतंत्रीकरण के समक्ष प्रमुख कठिनाई है। देश में आर्थिक विकास तथा जीवन-स्तर को सुधारने के लिए विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिससे जनता में असंतोष का भाव बना रहता है। जो भी सरकारें निर्वाचित की जाती है वे भ्रष्टाचार से प्रशासन को मुक्त नहीं करा सकी।

नेपाल के लोग अपने देश में लोकतंत्र को बहाल करने में कैसे सफल हुए?

नेपाल में अधिक समय तक राजा और लोकतंत्र समर्थकों में उलझने चलती रही। अब नेपाल की राजनीति में माओवादी भी प्रभावी हो गये हैं। नेपाल में सन् 2002 में वहाँ के राजा ज्ञानेंद्र ने शासन को अपने हाथों में ले लिया तत्पश्चात् नेपाल में लोकतंत्र संकट पैदा हो गया। इसके बाद नेपाल में कई आंदोलन हुए। नेपाल में आपातकाल के दौरान लोगों की स्वतंत्रता को भंग किया गया तथा नेताओं को नज़रबंद कर दिया। नेपाल के 7 राजनीतिक दलों सने मिलकर नये संविधान की रचना की और राजतंत्र को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया। 15 अगस्त 2008 को संविधान सभा में प्रधानमंत्री के निर्वाचन के लिए चुनाव हुआ । माओवादियों के विरोध के कारण वहाँ के प्रधानमंत्री को 2010 में प्रधानमंत्री पद से त्याग-पत्र देना पड़ा। आधुनिक समय में नेपाल में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल हुई है।

श्रीलंका के जातीय-संघर्ष में किनकी भूमिका प्रमुख है?

श्रीलंका को जातीय संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है जिसकी माँग है कि श्रीलंका के एक क्षेत्र को अलग राष्ट्र बनाया जाए। आजादी के पश्चात् श्रीलंका की राजनीति पर बहुसंख्यक सिंहली समुदाय का प्रमुख दबदबा रहा है। श्रीलंका के आजाद होने के बाद भी तमिलों के बसने का कार्य चलता रहा। सिंहली लोगों ने तमिलों के श्रीलंका में बसने का विरोध किया । सिंहली राष्ट्रवादियों का मानना है कि इन तमिलों के साथ कोई रियायत नहीं बरतनी चाहिए। श्रीलंका के उत्तर-पूर्वी भाग पर लिट्टे का अधिकार है। 1987 में भरतीय सरकार श्रीलंका के तमिल मामले में प्रत्यक्ष रूप से सम्मिलित हुए। भारतीय सेना लिट्टे के साथ फंस गई। 1983 के पश्चात् एक उग्र संगठन ‘लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम’ श्रीलंका की सेना के साथ सशस्त्र संघर्ष करता आ रहा है।

भारत और पाकिस्तान के बीच हाल में क्या समझौते हुए?

भारत और पाकिस्तान के बीच निम्नलिखित समझौते हुए:
सिंधु जल समझौताः 19 सितंबर 1960 को हुए इस समझौते में भारत और पाकिस्तान के मध्य विश्व बैंक ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई। यह समझौता 1960 में भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू तथा पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के मध्य हुआ।
शिमला समझौताः इस समझौते में भारत की तरफ से इंदिरा गांधी तथा पाकिस्तान की तरफ से जुल्फिकार भुट्टों सम्मिलित थे। 1971 के भारत-पाक युद्ध के पश्चात् इस संधि पर हस्ताक्षर किए गए।
ताशकंद समझौताः 1966 में हुआ। भारत तथा पाकिस्तान ने कला, संस्कृति, साहित्य तथा वीज़ा प्रदान करने जैसी चीजों पर आपस में समझौता किया।
भारत-पाक के मध्य वर्ष 2004 में श्रीनगर–मुजफ्फराबाद के बीच बस सेवा की शुरूआत पर दोनों देशों में सहमती बनी।

ऐसे दो मसलों के नाम बताएँ जिन पर भारत-बांग्लादेश के बीच आपसी सहयोग है और इसी तरह दो ऐसे मसलों के नाम बताएँ जिन पर असहमति है।

सहयोग के मुद्दे:
1. भारत तथा बांग्लादेश आतंकवाद के मुद्दे पर हमेशा एक रहे हैं।
2. भारत तथा बांग्लादेश ने गंगा-जल बंटवारे पर दिसम्बर, 1996 में समझौता किया।
3. आपदा प्रबंधन का मुद्दा।
4. व्यापार का मुद्दा।
असहयोग के मुद्दे:
1. बांग्लादेश में कई बार भारत विरोधी गतिविधियाँ देखी गई हैं।
2. चकमा शरणार्थी भारत तथा बांग्लादेश के मध्य असहयोग का एक मुद्दा बना हुआ है।
3. भारत को प्राकृतिक गैस निर्यात न करने का फैसला।
4. गंगा ब्रह्मपुत्र नदी जल में हिस्सेदारी।

दक्षिण एशिया में द्विपक्षीय संबंधों को बाहरी शक्तियाँ कैसे प्रभावित करती हैं?

दक्षिण एशिया में द्विपक्षीय संबंधों को बाहरी शक्तियाँ निम्न प्रकार से प्रभावित करती हैं:
1. यह कथन सत्य है कि दक्षिण एशिया में द्विपक्षीय संबंधों को बाहरी शक्तियाँ प्रभावित करती हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका तथा चीन दोनों ही दक्षिण एशिया की राजनीतिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभाते हैं। शीतयुद्ध के बाद दक्षिण एशिया में अमेरिका का प्रभाव तीव्र गति से देखने का मिला है। शीतयुद्ध के बाद अमेरिका ने भारत व चीन दोनों से ही अपने रिश्ते बेहतर बनाए रखे हैं। दोनों देशों ने उदारीकरण की नीति अपनाई है इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि अमेरिका इन दोनों देशों के मध्य में मध्यस्थता की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
2. चीन के संबंध पाकिस्तान के साथ अच्छे होने के कारण भारत व चीन के रिश्ते तनावपूर्ण हो गये हैं।

दक्षिण एशिया के देशों के बीच आर्थिक सहयोग की राह तैयार करने में दक्षेस (सार्क) ज्यादा बड़ी भूमिका और सीमाओं का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें। दक्षिण एशिया की बेहतरी में ‘दक्षेस’ (सार्क) ज्यादा बड़ी भूमिका निभा सके, इसके लिए आप क्या सुझाव देंगे?

दक्षेस (सार्क) :- सार्क ( SAARC) दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय संगठन (दक्षेस) की स्थापना 8 दिसंबर 1985 को बांग्लादेश, भारत , भूटान, मालदीव, पाकिस्तान, नेपाल तथा श्रीलंका द्वारा मिलकर की गई। यह एशिया के 8 देशों का आर्थिक एवं राजनीतिक संगठन है। 2007 में 14वें शिखर सम्मेलन में अफगानिस्तान को इसके 8वें सदस्य के रूप में जोड़ा गया। सार्क देशों ने वर्ष 2004 में साफ्टा (SAPTA) समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके अनुसार दक्षिण एशिया को मुक्त व्यापार क्षेत्र बना दिया गया। यह जनवरी 2006 से लागू हो गया।
आर्थिक क्षेत्र में सहयोग में सार्क की भूमिका:
1. सदस्य देशों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास करना तथा उनके सामूहिक विकास के लिए कार्यरत रहना।
2. दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना तथा उनके कल्याण को बढ़ावा देना।
3. इस क्षेत्र में सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक प्रगति को प्रोत्साहित करना।
4. अंतर्राष्ट्रीय मंच पर आपसी सहयोग को मजबूत बनाना।
5. क्षेत्रीय संगठनों के लक्ष्यों के साथ सहयोग करना।

सार्क की सीमाएँ :
1. सार्क के सदस्य देशों में अधिक विभिन्नता होने के कारण इन देशों की एकता में रूकावट का एक कारण है।
2. सार्क की सफलता में बहुत से ऐसे मुद्दे हैं जो इसके कार्यों में बाधक बने हुए हैं। जैसे: भारत-बांग्लादेश के मध्य पानी का बँटवारा, भारत-पाक के मध्य अच्छे संबंध न रहना आदि।
सार्क की उपलब्धियाँ:
1. मुक्त व्यापार क्षेत्र (FTA)
2. सार्क एग्रीमेंट ऑन ट्रेड इन सर्विस (SATIS)
3. सार्क विश्वविद्यालय

दक्षिण एशिया के देश एक-दूसरे पर अविश्वास करते हैं। इससे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर यह क्षेत्र एकजुट होकर अपना प्रभाव नहीं जमा पाता। इस कथन की पुष्टि में कोई भी दो उदाहरण दें और दक्षिण एशिया को मजबूत बनाने के लिए उपाय सुझाएँ।

दक्षिण एशिया के देशों में कई बार एक-दूसरे के प्रति अविश्वास का भाव देखने को मिलता है। जिससे वे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सामूहिक रूप से एकता के साथ अपना प्रभाव नहीं जमा पाते। दक्षेस ज्यादा सफल नहीं हो पाया है जिसके कारण इस क्षेत्र के देशों के मध्य शत्रुता, जातीय संघर्ष, नदी विवाद, सीमा विवाद, आतंकवाद आदि समस्याएँ उपस्थित रहती है। विचारों में मतभेद होने के कारण भी ये अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट नहीं दिखते।

दक्षिण एशिया को मजबूत बनाने के लिए सुझाव:
1. दक्षिण एशिया को मजबूत बनाना है तो सर्वप्रथम आपसी विवादों को परस्पर बातचीत द्वारा शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए।
2. दक्षिण एशिया के सभी देशों के मध्य विश्वास का भाव जाग्रत करना होगा।
3. आपसी मनमुटाव तथा सम्स्याओं को निपटाने के लिए बाहरी शक्तियों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।

दक्षिण एशिया के देश भारत को एक बाहुबली समझते हैं जो इस क्षेत्र के छोटे देशों पर अपना दबदबा जमाना चाहता है और उनके अंदरूनी मामलों में दखल देता है। इन देशों की ऐसी सोच के लिए कौन-कौन सी बातें जिम्मेदार हैं?

यह सत्य है कि दक्षिण एशिया के छोटे-छोटे पड़ोसी देश के साथ भारत को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। भारत आकार में बड़ा है तथा शक्तिशाली भी है जिसकी वजह से छोटे देशों में भारत को लेकर अविश्वास नजर आता है। छोटे देशों को लगता है कि भारत दक्षिण एशिया में अपना दबदबा जमाना चाहता है।

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