एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान अध्याय 3 मराठा साम्राज्य का उदय
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान अध्याय 3 मराठा साम्राज्य का उदय में मराठों के उद्भव, उनके राजनीतिक विकास, तथा भारतीय इतिहास पर उनके गहरे प्रभाव का विस्तृत वर्णन किया गया है। इस अध्याय में बताया गया है कि किस प्रकार दक्कन क्षेत्र के मराठा, विशेषकर छत्रपति शिवाजी महाराज के नेतृत्व में, एक शक्तिशाली साम्राज्य के रूप में उभरे। उनके साहस, कुशल प्रशासन, गुरिल्ला युद्धनीति और सांस्कृतिक पुनरुत्थान ने भारत के इतिहास की दिशा बदल दी। साथ ही, मराठा शासन व्यवस्था, सैन्य शक्ति, व्यापार, तथा उनके सांस्कृतिक योगदान का भी विस्तार से अध्ययन किया गया है। यह अध्याय छात्रों को न केवल ऐतिहासिक घटनाओं से परिचित कराता है, बल्कि नेतृत्व, राष्ट्रनिर्माण और स्वराज्य की भावना को भी समझने में सहायता करता है।
एनसीईआरटी कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान अध्याय 3 के प्रश्न उत्तर
पेज 61: महत्वपूर्ण प्रश्न
1. मराठा कौन थे? वे ब्रिटिश शासन स्थापित होने से पूर्व भारतवर्ष की सबसे बड़ी अखिल भारतीय शक्ति कैसे बने?
उत्तर:
मराठा दक्कन पठार, विशेष रूप से वर्तमान महाराष्ट्र के निवासी थे, जो मराठी भाषा बोलते थे। 17वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी के नेतृत्व में उन्होंने एक संगठित शक्ति के रूप में उभरकर ‘स्वराज्य’ की स्थापना की। उन्होंने गुरिल्ला युद्ध नीति, मजबूत किलों और प्रभावी प्रशासन के बल पर मुगलों और अन्य शक्तियों को चुनौती दी। समय के साथ मराठों ने अपने साम्राज्य का विस्तार कर भारत के बड़े भाग पर नियंत्रण स्थापित किया और एक प्रमुख राजनीतिक शक्ति बन गए।
2. उनके शासन प्रणाली की प्रमुख विशेषताएँ क्या थीं?
उत्तर:
मराठा शासन प्रणाली संगठित और कुशल थी। शिवाजी ने केंद्रीकृत प्रशासन स्थापित किया और अधिकारियों को वेतन राज्य कोष से दिया। ‘अष्टप्रधान मंडल’ नामक मंत्रिपरिषद शासन में सहायता करती थी। भूमि राजस्व व्यवस्था व्यवस्थित थी और किसानों के हितों का ध्यान रखा जाता था। सेना तीन भागों—पैदल, घुड़सवार और नौसेना—में विभाजित थी। न्याय व्यवस्था सरल और प्रभावी थी। साथ ही, मराठों ने चौथ और सरदेशमुखी जैसे करों से आय प्राप्त की और व्यापार को भी प्रोत्साहित किया।
3. भारतीय इतिहास पर मराठा साम्राज्य का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
मराठा साम्राज्य ने भारतीय इतिहास की दिशा को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया। उन्होंने मुगल साम्राज्य की शक्ति को कमजोर किया और भारतीय उपमहाद्वीप में नई राजनीतिक संरचना स्थापित की। मराठों ने स्वराज्य की भावना को बढ़ावा दिया और स्थानीय शासन को मजबूत किया। सांस्कृतिक रूप से उन्होंने मराठी भाषा, साहित्य और भारतीय परंपराओं का संरक्षण किया। उनके संघर्षों ने अंग्रेजों के उदय का मार्ग भी प्रशस्त किया, जिससे आगे चलकर भारत में औपनिवेशिक शासन स्थापित हुआ।
पेज 63: आइए पता लगाएँ
1. क्या आपने कभी ‘भक्ति’ शब्द सुना है? आपके लिए इसका क्या अर्थ है? भारत के किसी भी भक्ति सनत का चयन कर उनके जीवन, उपदेशों और संदेशों का अध्ययन कीजिए। आप उनकी कोई कविता या भजन ढूँढ़कर उसे अपने सहपाठियों के साथ साझा कीजिए।
उत्तर:
हाँ, मैंने ‘भक्ति’ शब्द सुना है। मेरे लिए भक्ति का अर्थ है भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा, प्रेम और समर्पण। मैंने संत तुकाराम का अध्ययन किया। वे महाराष्ट्र के महान भक्ति संत थे और भगवान विट्ठल के भक्त थे। उनका जीवन सरल था और उन्होंने अपने अभंगों के माध्यम से प्रेम, समानता और सच्चाई का संदेश दिया। वे जाति-पाति के विरोधी थे। उनका एक भजन सिखाता है कि भगवान हर जगह हैं और सच्चे मन से भक्ति करने पर ही उनकी कृपा मिलती है।
पेज 65: आइए पता लगाएँ
1. यदि आप भूतकाल में यात्रा करके शिवाजी से मिल सकें तो आप उनसे कौन-से तीन प्रश्न पूछेंगे और क्यों?
उत्तर:
यदि मैं भूतकाल में जाकर शिवाजी से मिलता, तो मैं उनसे निम्नलिखित तीन प्रश्न पूछता:
- पहला, आपने कम संसाधनों में इतना शक्तिशाली साम्राज्य कैसे बनाया? इससे मुझे नेतृत्व सीखने को मिलेगा।
- दूसरा, आपने गुरिल्ला युद्ध की योजना कैसे बनाई? इससे युद्ध-रणनीति समझने में मदद मिलेगी।
- तीसरा, आप अपनी प्रजा के प्रति इतने न्यायपूर्ण और दयालु कैसे बने रहे?
इससे मुझे एक अच्छे शासक के गुण जानने को मिलेंगे। ये प्रश्न मुझे उनके जीवन से प्रेरणा लेने में सहायता करेंगे।
पेज 66: आइए पता लगाएँ
1. गुरिल्ला युद्ध के बारे में अधिक जानने का प्रयास करें। दुनिया के अन्य किन देशों में यह पद्धति अपनाई गई? उन्होंने इसके लिए किन भौगोलिक लाभों का उपयोग किया? अपने निष्कर्षों पर समूहों में चर्चा करें।
उत्तर:
गुरिल्ला युद्ध एक ऐसी युद्ध पद्धति है जिसमें छोटी-छोटी टुकड़ियाँ अचानक हमला करके दुश्मन को नुकसान पहुँचाती हैं। यह पद्धति वियतनाम, अफगानिस्तान और स्पेन जैसे देशों में अपनाई गई। इन देशों ने घने जंगलों, पहाड़ों और कठिन रास्तों का लाभ उठाया। इससे वे दुश्मन से छिपकर हमला कर सकते थे और जल्दी वापस लौट जाते थे। इस प्रकार भूगोल ने उन्हें युद्ध में बहुत मदद दी।
पेज 69: आइए पता लगाएँ
1. शिवाजी के जीवन की किसी एक घटना का चयन कीजिए और अपने सहपाठियों के साथ मिलकर नाटक के रूप में उसका मंचन कीजिए।
उत्तर:
मैं छत्रपति शिवाजी महाराज और अफजल खान की मुलाकात की घटना चुनूँगा। इस नाटक में एक दृश्य होगा जहाँ दोनों प्रतापगढ़ किले के पास मिलने आते हैं। अफजल खान धोखे से हमला करने की कोशिश करता है, लेकिन शिवाजी अपनी चतुराई से ‘वाघ-नख’ का उपयोग कर उसे परास्त कर देते हैं। इसके बाद मराठा सैनिक गुरिल्ला युद्ध करके दुश्मन की सेना को हरा देते हैं। यह नाटक शिवाजी की बहादुरी, बुद्धिमत्ता और युद्ध-कौशल को दर्शाएगा।
पेज 79: आइए पता लगाएँ
1. क्या आपने ‘भरतनाट्यम’ नृत्यशैली के विषय में सुना है? क्या आप जानते हैं कि नृत्यशैली का मराठाओं से गहरा संबंध है? क्या आप यह ज्ञात कर सकते हैं कि यह संबंध क्या था?
उत्तर:
हाँ, मैंने भरतनाट्यम नृत्यशैली के बारे में सुना है। यह दक्षिण भारत की एक प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यशैली है। इसका मराठाओं से संबंध तंजावुर के मराठा शासकों के संरक्षण से है। जब मराठाओं ने तंजावुर पर शासन किया, तब उन्होंने कला और संस्कृति को बढ़ावा दिया। उनके संरक्षण में भरतनाट्यम का विकास और विस्तार हुआ। मराठा शासकों ने नर्तकों और कलाकारों को प्रोत्साहित किया, जिससे यह नृत्यशैली और अधिक समृद्ध और प्रसिद्ध बन गई।
पेज 81: प्रश्न और क्रियाकलाप
1. विश्लेषण करें कि किस प्रकार भूगोल (विशेषकर पर्वत और समुद्रु तट) ने मराठा सैन्य रणनीति और राज्य-निर्माण को निर्धारित किया था।
उत्तर:
मराठा सैन्य रणनीति और राज्य-निर्माण में भूगोल की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
- पश्चिमी घाट के ऊँचे पर्वतों और दुर्गम किलों ने उन्हें सुरक्षा और छिपकर आक्रमण (गुरिल्ला युद्ध) करने में सहायता दी।
- संकरे घाट और जंगल दुश्मन के लिए कठिन थे, जिससे मराठों को बढ़त मिली। समुद्र तटों ने व्यापार और नौसेना के विकास में मदद की।
- मजबूत तटीय किलों और नौसेना के कारण वे विदेशी शक्तियों का मुकाबला कर सके।
इस प्रकार पर्वत और समुद्र दोनों ने मराठा शक्ति को मजबूत बनाया।
2. कल्पना कीजिए कि आप विद्यार्थियों के लिए किसी मराठा नेता की संक्षिप्त जीवनी लिख रहे हैं। किसी एक व्यक्तित्व (कान्हहोजी आंग्रे, बाजीराव प्रथम, महादजी शिंदे, अहिल्याबाई होलकर या ताराबाई) का चयन कीजिए और उनकी प्रेरणादायक विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए तीन-चार अनुच्छेद लिखिए। किसी एक चनुौती का वर्णन कीजिए जिस पर उन्होंने विजय प्राप्त की।
उत्तर:
मैं अहिल्याबाई होलकर की संक्षिप्त जीवनी प्रस्तुत करता हूँ। वे मराठा साम्राज्य की एक महान और आदर्श शासिका थीं। उनका जन्म एक साधारण परिवार में हुआ, लेकिन अपने गुणों और बुद्धिमत्ता के कारण वे इंदौर की शासिका बनीं।
अहिल्याबाई बहुत न्यायप्रिय, दयालु और धार्मिक थीं। उन्होंने अपनी प्रजा का हमेशा ध्यान रखा और राज्य में शांति और समृद्धि बनाए रखी। उन्होंने अनेक मंदिरों, घाटों और धर्मशालाओं का निर्माण कराया। उनके जीवन की सबसे बड़ी चुनौती उनके पति और पुत्र की मृत्यु थी। इस कठिन समय में भी उन्होंने साहस नहीं खोया और सफलतापूर्वक राज्य का शासन संभाला।
अहिल्याबाई का जीवन हमें धैर्य, सेवा और सच्चे नेतृत्व की प्रेरणा देता है।
3. यदि आपको आज किसी एक मराठा दुर्ग (जैसे — रायगढ़, सिंधुदुर्ग, जिंजी या प्रतापगढ़) को देखने का अवसर मिले तो आप कि से चनेुंगे और क्यों? उसके इतिहास, वास्तुकला और सामरिक महत्व का अध्ययन कीजिए। कक्षा में अपने निष्कषों को डिजिटल या
पोस्टर रूप में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
मैं रायगढ़ किला को देखना चुनूँगा, क्योंकि –
- यह मराठा साम्राज्य की राजधानी था और यहीं छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ था।
- इतिहास की दृष्टि से यह किला मराठा शक्ति का केंद्र था।
- वास्तुकला के अनुसार यह ऊँचे पहाड़ पर स्थित है, जहाँ पहुँचने के लिए संकरी चढ़ाई और मजबूत द्वार बने हैं, जो सुरक्षा प्रदान करते थे।
- सामरिक रूप से यह किला दुश्मनों के लिए कठिन था, जिससे मराठों को युद्ध में लाभ मिलता था।
पोस्टर में मैं इसका नक्शा, चित्र और मुख्य विशेषताएँ दिखाऊँगा।
4. अध्याय में लिखा है कि अंग्रेजों ने भारत को मुगुलों या किसी भी अन्य शक्ति से अधिक मराठों से छीना। आपके विचार में इसका क्या अर्थ है? अध्याय में दिए गए कौन-से प्रमाण इस विचार का समर्थन करते हैं?
उत्तर:
इस कथन का अर्थ है कि अंग्रेजों ने भारत में सबसे अधिक शक्ति और क्षेत्र मराठों से छीनकर अपना शासन स्थापित किया। मराठा उस समय भारत की सबसे बड़ी और प्रभावशाली शक्ति थे, जिनका नियंत्रण उत्तर, मध्य और दक्षिण भारत के बड़े भागों पर था।
मराठों ने दिल्ली, लाहौर और पेशावर तक अपना अधिकार स्थापित किया था। 1775 से 1818 के बीच हुए तीन आंग्ल-मराठा युद्धों में अंततः अंग्रेजों ने मराठों को हराकर उनके क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया। इससे स्पष्ट होता है कि अंग्रेजों ने सबसे अधिक क्षेत्र मराठों से ही प्राप्त किया।
5. तुलना कीजिए कि शिवाजी और उत्तरवर्ती मराठों ने धार्ममिक स्थलों और विभिन्न धर्म के लोगों के साथ किस प्रकार का व्यवहार किया। इस अध्याय में कौन-सा प्रमाण धार्मिक विविधता के प्रति उनके दृष्टिकोण को दर्शाता है?
उत्तर:
छत्रपति शिवाजी महाराज ने धार्मिक स्थलों और विभिन्न धर्मों के लोगों के साथ बहुत सम्मानजनक व्यवहार किया। उन्होंने मंदिरों की रक्षा की, लेकिन साथ ही अन्य धर्मों के लोगों को भी सुरक्षा दी। वे किसी भी धर्म के प्रति भेदभाव नहीं करते थे और धार्मिक सहिष्णुता का पालन करते थे। उत्तरवर्ती मराठों ने भी सामान्यतः इसी नीति को अपनाया, हालांकि कुछ स्थानों पर अनुशासन की कमी भी देखी गई।
अध्याय में प्रमाण मिलता है कि शिवाजी ने सूरत पर आक्रमण के समय धार्मिक स्थलों को नुकसान नहीं पहुँचाया। इससे उनके धार्मिक विविधता के प्रति सम्मानपूर्ण दृष्टिकोण का पता चलता है।
6. इस अध्याय में वर्णित है कि मराठों के लिए दुर्ग ‘राज्य की आधारशिला’ थे। वे इतने महत्वपूर्ण क्यों थे? उन्होंने मराठो को शक्तिशाली शत्रुओं के विरुद्ध खड़े रहने में किस प्रकार सहायता की?
उत्तर:
मराठों के लिए दुर्ग ‘राज्य की आधारशिला’ थे क्योंकि वे उनकी सुरक्षा और शक्ति का मुख्य आधार थे। छत्रपति शिवाजी महाराज ने अनेक किलों का निर्माण और नियंत्रण किया, जो ऊँचे पर्वतों और कठिन स्थानों पर स्थित थे।
ये दुर्ग शत्रुओं से बचाव के लिए सुरक्षित स्थान थे, जहाँ मराठा सैनिक छिपकर रणनीति बना सकते थे। युद्ध के समय वे गुरिल्ला पद्धति अपनाकर अचानक हमला करते और फिर दुर्गों में लौट जाते थे।
इस प्रकार दुर्गों ने मराठों को शक्तिशाली शत्रुओं के विरुद्ध लंबे समय तक टिके रहने और अपनी शक्ति बनाए रखने में सहायता की।
7. आपको मराठा सिक्कों का मुख्य अभिकल्पक (डिजाइनर) नियुक्त किया गया है। एक ऐसे सिक्के का रूपांकन कीजिए, जो मराठा उपलब्धियों और मूल्यों का प्रतिनिधित्व करे। अपने द्वारा चुने गए प्रतीकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
यदि मुझे मराठा सिक्कों का डिजाइनर बनाया जाए, तो मैं एक ऐसा सिक्का बनाऊँगा जो मराठा शक्ति और मूल्यों को दर्शाए। सिक्के के एक ओर छत्रपति शिवाजी महाराज की आकृति होगी, जो साहस और नेतृत्व का प्रतीक है।
दूसरी ओर एक दुर्ग का चित्र होगा, जो सुरक्षा और शक्ति को दर्शाता है। साथ ही “स्वराज्य” शब्द अंकित होगा, जो स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
मैं किनारों पर तलवार और भगवा ध्वज बनाऊँगा, जो वीरता, धर्म और एकता को दर्शाते हैं। यह सिक्का मराठा गौरव और उनके आदर्शों को प्रदर्शित करेगा।
8. मराठा काल की इस भूमिका अध्ययन करने के पश्चात आपके विचार में भारतीय इतिहास में उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान क्या था? अध्याय से उदाहरण लेकर अपने विचार का समर्थन करते हुए एक अनुच्छेद लिखिए। अपने विचारों को सहपाठियों के साथ साझा कर उन पर चर्चा किजिए।
उत्तर:
मेरे विचार में मराठों का भारतीय इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण योगदान ‘स्वराज्य’ की स्थापना और विदेशी शक्तियों को चुनौती देना था। छत्रपति शिवाजी महाराज ने एक संगठित और मजबूत राज्य बनाया, जिसने मुगलों जैसी बड़ी शक्ति का सामना किया। मराठों ने गुरिल्ला युद्ध, दुर्गों और नौसेना का प्रभावी उपयोग किया।
आगे चलकर उन्होंने दिल्ली सहित भारत के बड़े भागों पर नियंत्रण स्थापित किया। इससे भारतीयों में आत्मविश्वास और स्वतंत्र शासन की भावना जागृत हुई, जो आगे चलकर स्वतंत्रता आंदोलन के लिए प्रेरणा बनी।
