एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 भूगोल अध्याय 2

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान भूगोल अध्याय 2 भारत का भौतिक स्वरुप के प्रश्न उत्तर सरल तथा आसान भाषा में विद्यार्थी सीबीएसई सत्र 2022-2023 के लिए यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं। ये सभी समाधान ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों की प्रारूपों में उपलब्ध है। कक्षा 9 भूगोल एनसीईआरटी समाधान पीडीएफ को डाउनलोड करने के लिए किसी लॉगइन अथवा पंजीकरण की कोई आवश्यकता नहीं होती है।

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एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 भूगोल अध्याय 2

कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान भूगोल अध्याय 2 के प्रश्न उत्तर

भाबर क्या है?

भाबर मैदान की वह संकीर्ण पट्टी है जो कंकड़ से ढकी होती है और सिंधु से तिस्ता तक शिवालिकों की तलहटी में स्थित है। इस पट्टी का निर्माण पहाड़ियों से नीचे उतरने वाली कई धाराओं द्वारा किया जाता है।

हिमालय के तीन प्रमुख विभागों के नाम उत्तर से दक्षिण के क्रम में बताइए?

उत्तर से दक्षिण तक हिमालय के तीन प्रमुख विभाग हैं:

    1. सबसे उत्तरी श्रेणी जिसे महान हिमालय या भीतरी हिमालय या हिमाद्री के रूप में जाना जाता है।
    2. हिमाद्री के दक्षिण में पड़ी सीमा जिसे हिमाचल या कम हिमालय के नाम से जाना जाता है।
    3. हिमालय की सबसे बाहरी श्रेणी जिसे शिवालिक के नाम से जाना जाता है। ये तलहटी पर्वतमाला हैं और हिमालय के सबसे दक्षिणी भाग का प्रतिनिधित्व करती हैं।
अरावली और विंध्याचल की पहाड़ियों में कौन-सा पठार स्थित है?

मालवा का पठार या मध्य अधित्यका

भारत के उन द्वीपों के नाम बताइए जो प्रवाल भित्ति के हैं।

लक्षद्वीप समूह।

निम्नलिखित में अंतर स्पष्ट कीजिए: बांगर और खादर

उत्तरी मैदान की मिट्टी की आयु के अनुसार उन्हें दो नामों से विभेदित किया गया है: (1) बांगर और (2) खादर। इन दोनों के बीच का अंतर नीचे उल्लिखित है:

    1. बांगर – ये पुराने जलोढ़ या पुरानी मिट्टी हैं और उत्तरी मैदानों का सबसे बड़ा हिस्सा हैं। वे नदियों के बाढ़ मैदानों के ऊपर स्थित होते हैं और संरचना की तरह एक छत पेश करते हैं। यह भूमि कम उपजाऊ होती है तथा खेती के लिए आदर्श नहीं होते।
    2. खादर – बाढ़ के मैदानों की नई और छोटी जमा राशि को ‘खादर’ के नाम से जाना जाता है। ये नए जलोढ़ या नई मिट्टी हैं और बहुत उपजाऊ होते हैं। इस प्रकार, खादर गहन कृषि के लिए आदर्श है।
भारत के उत्तरी मैदान का वर्णन कीजिए।

उत्तरी मैदान पश्चिम में पंजाब मैदान से पूर्व में ब्रह्मपुत्र घाटी तक फैला हुआ है। उत्तरी मैदान का निर्माण तीन प्रमुख नदी प्रणालियों के अंतः-सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र के साथ-साथ उनकी सहायक नदियों द्वारा हुआ है। लाखों वर्षों से हिमालय के दक्षिण में तलहटी में स्थित एक विशाल बेसिन में जलोढ़ के जमाव ने इस उपजाऊ मैदान का निर्माण किया। यह 7 लाख वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है। मैदान लगभग 2400 किमी लंबा और 240-320 किमी चौड़ा है। प्रचुर मात्रा में जल आपूर्ति और अनुकूल जलवायु के साथ समृद्ध मिट्टी के आवरण ने कृषि की दृष्टि से भारत का एक बहुत ही उत्पादक हिस्सा बना दिया। इस कारक की वजह से भारत के सभी भौगोलिक विभाजनों में जनसंख्या का घनत्व भी इस क्षेत्र में सबसे अधिक है। उत्तरी मैदान को मोटे तौर पर तीन खंडों में विभाजित किया गया है:

    • पंजाब मैदान – यह सिंधु और उसकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित उत्तरी मैदान का पश्चिमी भाग है। इस खंड में दो आबका वर्चस्व है।
    • गंगा का मैदान – यह उत्तरी मैदान का सबसे बड़ा हिस्सा है और घग्गर और तीस्ता नदियों के बीच फैला हुआ है।
    • ब्रह्मपुत्र का मैदान – यह ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों द्वारा उत्तरी मैदान का पूर्वी भाग बनाता है। यह गंगा के मैदान से संकरा है और बाढ़ प्रवण क्षेत्र है।
      उत्तरी मैदान के दक्षिण-पूर्व में गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा है जो दुनिया का सबसे बड़ा डेल्टा है।
मध्य हिमालय पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए।

मध्य हिमालय
मध्य हिमालय हिमाद्रि के दक्षिण में फैला हुआ है। इन पर्वतों की औसत चौड़ाई लगभग 50 किलोमीटर और ऊंचाई 3700 से 4500 मीटर तक है। मध्य हिमालय में कश्मीर की पीर पंजाल श्रेणी और जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में फैली धौलाधार श्रेणी है। महाभारत श्रेणी जो नेपाल में इसी का हिस्सा है। सभी प्रमुख पर्वतीय नगर डलहौजी, धर्मशाला, शिमला, मसूरी, नैनीताल, दार्जिलिंग आदि मध्य हिमालय में ही स्थित है।

मध्य उच्च भूमि पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए।

मध्य उच्च भूमि
प्रायद्वीपीय क्षेत्र का वह भाग जो नर्मदा नदी के उत्तर में पड़ता है और मालवा के पठार के एक बड़े हिस्से पर फैला है उसे मध्य उच्चभूमि कहा जाता है। यह दक्षिण में विंध्य श्रेणी और उत्तर-पश्चिम में अरावली की पहाड़ियों से घिरा है। आगे जाकर यह पश्चिम में भारतीय मरुस्थल से मिल जाता है जबकि पूर्व दिशा में इसका विस्तार छोटानागपुर के पठार द्वारा प्रकट होता है। इस क्षेत्र में नदियाँ दक्षिण- पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर बहती हैं। इस क्षेत्र के पूर्वी विस्तार को स्थानीय रूप से बुन्देलखण्ड, बाघेलखण्ड और छोटानागपुर पठार कहा जाता है। छोटानागपुर पठार आग्नेय चट्टानों बना है। आग्नेय चटानों में खनिज भरपूर मात्रा में होते हैं और इसलिए इस पठार को खनिजों का भण्डार कहा जाता है।

भारत के द्वीप समूह पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए।

भारत के द्वीप समूह
लक्ष्यद्वीप मुख्यभूमि के दक्षिण-पश्चिम में अरब सागर में केरल के मालाबार तट के पास स्थित है । पहले इनको लाकाद्वीप, मीनीकाय तथा एमीनदीव के नाम से जाना जाता था। 1973 में इनका नाम लक्ष्यद्वीप रखा गया। इनका निर्माण अल्पजीवी सूक्ष्म प्रवाल जीवों के अवशेषों के जमा होने से हुआ है। इनमें से बहुत द्वीपों की आकृति घोड़े की नाल या अंगूठी की तरह है।

कक्षा 9 भूगोल अध्याय 2 के अतिरिक्त प्रश्न उत्तर

भौतिक दृष्टि से भारत की भूमि की क्या दशा है?

भारत की भूमि बहुत अधिक भौतिक विभिन्नताओं को दर्शाती है। भूगर्भीय तौर पर प्रायद्वीपीय पठार पृथ्वी की सतह का प्राचीनतम भाग है। इसे भूमि का एक बहुत ही स्थिर भाग माना जाता था। परंतु हाल के भूकंपों ने इसे गलत साबित किया है। हिमालय एवं उत्तरी मैदान हाल में बनी स्थलाकृतियाँ हैं। उत्तरी मैदान जलोढ़ निक्षेपों से बने हैं। प्रायद्वीपीय पठार आग्नेय तथा रूपांतरित शैलों वाली कम ऊँची पहाड़ियों एवं चौड़ी घाटियों से बना है।

भौगोलिक दृष्टि से भारत भूमि का वर्गीकरण कीजिये?

भारत की भौगोलिक आकृतियों को निम्नलिखित वर्गों में विभाजित किया जा सकता है:

    1. हिमालय पर्वतशृंखला
    2. उत्तरी मैदान
    3. प्रायद्वीपीय पठार
    4. भारतीय मरुस्थल
    5. तटीय मैदान
    6. द्वीप समूह

हिमालय पर्वत श्रृंखला भारत के किस भाग में स्थित है? तथा इसका विस्तार किस प्रकार है?

हिमालय विश्व की सबसे ऊँची पर्वत श्रेणी है और एक अत्यधिक विसम अवरोधों में से एक है। ये 2,400 कि॰मी॰ की लंबाई में फैले एक का निर्माण करते हैं। इसकी चौड़ाई कश्मीर में 400 कि॰मी॰ एवं अरुणाचल में 150 कि॰मी॰ है। पश्चिमी भाग की अपेक्षा पूर्वी भाग की ऊँचाई में अधिक विविधता पाई जाती है। अपने पूरे देशांतरीय विस्तार के साथ हिमालय को तीन भागों में बाँट सकते हैं। इन श्रंखलाओं के बीच बहुत अधिक संख्या में घाटियाँ पाई जाती हैं। सबसे उत्तरी भाग में स्थितश्रृंखला को महान या आंतरिक हिमालय या हिमाद्रि कहते हैं। यह सबसे अधिक सतत्‌श्रृंखला हैए जिसमें 6,000 मीटर की औसत उँचाई वाले सर्वाधिक उँचे शिखर हैं। इसमें हिमालय के सभी मुख्य शिखर हैं।

शिवालिक पर्वत श्रृंखला कहाँ पर स्थित है?

हिमालय की सबसे बाहरीशृंखला को शिवालिक कहा जाता है। इनकी चौड़ाई 10 से 50 कि॰मी॰ तथा उँचाई 900 से 1ए100 मीटर के बीच है। ये शृंखलाएँ, उत्तर में स्थित मुख्य हिमालय कीशृंखलाओं से नदियों द्वारा लायी गयी असंपिडित अवसादों से बनी है। ये घाटियाँ बजरी तथा जलोढ़ की मोटी परत से ढँकी हुई हैं। निम्न हिमाचल तथा शिवालिक के बीच में स्थित लंबवत्‌ घाटी को दून के नाम से जाना जाता है। कुछ प्रसिद्ध दून हैं- देहरादून, कोटलीदून एवं पाटलीदून।

उत्तर का मैदान किन नदियों के द्वारा निर्मित हुआ है? इसकी क्या विशेषता है?

उत्तरी मैदान तीन प्रमुख नदी प्रणालियों- सिंधु, गंगा एवं ब्रह्मपुत्र तथा इनकी सहायक नदियों से बना है। यह मैदान जलोढ़ मृदा से बना है। लाखों वर्षों में हिमालय के गिरिपाद में स्थित बहुत बड़े बेसिन (द्रोणी) में जलोढ़ों का निक्षेप हुआए जिससे इस उपजाऊ मैदान का निर्माण हुआ है। इसका विस्तार 7 लाख वर्ग कि॰मी॰ के क्षेत्र पर है। यह मैदान लगभग 2,400 कि०मी० लंबा एवं 240 से 320 कि०मी० चौड़ा है। यह सघन जनसंख्या वाला भौगोलिक क्षेत्र है। समृद्ध मृदा आवरणए प्रर्याप्त पानी की उपलब्धता एवं अनुकूल जलवायु के कारण कृषि की दृष्टि से यह भारत का अत्यधिक उत्पादक क्षेत्र है।

दोआब किसे कहते हैं? भारत में कौन सा दोआब क्षेत्र प्रसिद्ध है?

दोआब’ का अर्थ है, दो नदियों के बीच का भाग। ‘दोआब’ दो शब्दों से मिलकर बना है – दो तथा आब अर्थात्‌ पानी। इसी प्रकार ‘पंजाब’ भी दो शब्दों से मिलकर बना है – पंज का अर्थ है पाँच तथा आब का अर्थ है पानी। भारत में गंगा और यमुना के बीच का भाग प्रमुख दोआब है।

प्रायद्वीपीय पठार किसे कहते हैं?

प्रायद्वीपीय पठार एक मेज की आकृति वाला स्थल है जो पुराने क्रिस्टलीयए आग्नेय तथा रूपांतरित शैलों से बना है। यह गोंडवाना भूमि के टूटने एवं अपवाह के कारण बना था तथा यही कारण है कि यह प्राचीनतम भूभाग का एक हिस्सा है। इस पठारी भाग में चौड़ी तथा छिछली घाटियाँ एवं गोलाकार पहाड़ियाँ हैं। इस पठार के दो मुख्य भाग हैं- ‘मध्य उच्चभूमि’ तथा ‘दक्कन का पठार’।

थार का मरुस्थल भारत के कौन से राज्य में स्थित है?

अरावली पहाड़ी के पश्चिमी किनारे पर थार का मरुस्थल स्थित है। यह बालू के टिब्बों से ढँका एक तरंगित मैदान है। इस क्षेत्र में प्रति वर्ष 150 मि॰मी॰ से भी कम वर्षा होती है। इस शुष्क जलवायु वाले क्षेत्र में वनस्पति बहुत कम है। वर्षा ऋतु में ही कुछ सरिताएँ दिखती हैं और उसके बाद वे बालू में ही विलीन हो जाती हैं। पर्याप्त जल नहीं मिलने से वे समुद्र तक नहीं पहुँच पाती हैं। केवल ‘लूनी’ ही इस क्षेत्र की सबसे बड़ी नदी है।

भारत के प्रायद्वीपीय पठार के तटीय भाग की भौगोलिक स्थिति क्या है?

प्रायद्वीपीय पठार के किनारों संकीर्ण तटीय पट्टीयों का विस्तार है। यह पश्चिम में अरब सागर से लेकर पूर्व में बंगाल की खाड़ी तक विस्तृत है। पश्चिमी तटए पश्चिमी घाट तथा अरब सागर के बीच स्थित एक संकीर्ण मैदान है। इस मैदान के तीन भाग हैं। तट के उत्तरी भाग को कोंकण (मुंबई तथा गोवा)ए मध्य भाग को कन्नड मैदान एवं दक्षिणी भाग को मालाबार तट कहा जाता है। बंगाल की खाड़ी के साथ विस्तृत मैदान चौड़ा एवं समतल है। उत्तरी भाग में इसे ‘उत्तरी सरकार’ कहा जाता है। जबकि दक्षिणी भाग ‘कोरोमंडल’ तट के नाम से जाना जाता है।

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