एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान के अध्याय 5 सार्वभौमिक मताधिकार और भारत की निर्वाचन प्रणाली

भारत एक विशाल लोकतांत्रिक देश है, जहाँ प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार के साथ मतदान करने का अवसर मिलता है। कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान के अध्याय 5 सार्वभौमिक मताधिकार और भारत की निर्वाचन प्रणाली में सार्वभौमिक मताधिकार, निर्वाचन प्रणाली और भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका को विस्तार से समझाया गया है। यह अध्याय बताता है कि कैसे चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से जनता अपने प्रतिनिधियों का चयन करती है और लोकतंत्र को मजबूत बनाती है। साथ ही, इसमें मतदान के महत्व, चुनाव की प्रक्रिया, ईवीएम, नोटा, आचार संहिता और चुनाव से जुड़ी चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला गया है, जो विद्यार्थियों को एक जागरूक नागरिक बनने में मदद करता है।

एनसीईआरटी कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान के अध्याय 5 के प्रश्न उत्तर

पेज 117: महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

1. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार क्या है?
उत्तर:
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार वह व्यवस्था है जिसमें किसी देश के सभी वयस्क नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के मतदान करने का अधिकार दिया जाता है। भारत में यह अधिकार 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के प्रत्येक नागरिक को प्राप्त है। इसका अर्थ है कि जाति, धर्म, लिंग, भाषा, शिक्षा, संपत्ति या सामाजिक स्थिति के आधार पर किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाता। हर नागरिक का वोट समान महत्व रखता है। यह लोकतंत्र की मूल भावना को दर्शाता है, क्योंकि इससे सभी लोगों को शासन में भाग लेने का अवसर मिलता है। भारत में स्वतंत्रता के बाद से ही इस व्यवस्था को अपनाया गया, जो उस समय एक साहसिक और प्रगतिशील निर्णय था। इससे देश में समानता, न्याय और जनभागीदारी को बढ़ावा मिला तथा लोकतंत्र मजबूत हुआ।

2. निर्वाचन प्रणाली क्या है?
उत्तर:
निर्वाचन प्रणाली वह संगठित प्रक्रिया है जिसके माध्यम से नागरिक अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं। यह एक व्यवस्थित ढांचा होता है जिसमें मतदान, उम्मीदवारों का चयन, चुनाव प्रचार, मतदान की विधि, मतगणना और परिणाम की घोषणा जैसे सभी चरण शामिल होते हैं। इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि चुनाव निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र रूप से संपन्न हों। निर्वाचन प्रणाली में निर्वाचन क्षेत्र, मतदाता सूची, मतदान केंद्र, मतदान मशीनें (जैसे ईवीएम) और चुनाव अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। भारत में यह प्रणाली बहुत व्यापक और सुव्यवस्थित है, क्योंकि देश की जनसंख्या बहुत बड़ी है। यह प्रणाली लोकतंत्र का आधार है, क्योंकि इसके माध्यम से जनता अपनी पसंद की सरकार चुनती है और शासन में भागीदारी करती है।

3. भारत की निर्वाचन प्रणाली कैसे कार्य करती है?
उत्तर:
भारत की निर्वाचन प्रणाली एक सुव्यवस्थित और विस्तृत प्रक्रिया के माध्यम से कार्य करती है, जिसे भारत निर्वाचन आयोग संचालित करता है। सबसे पहले मतदाता सूची तैयार की जाती है, जिसमें योग्य नागरिकों के नाम दर्ज होते हैं। इसके बाद चुनाव की तिथि घोषित की जाती है और उम्मीदवार अपने नामांकन दाखिल करते हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उम्मीदवार जनता को अपने विचार और योजनाएँ बताते हैं। मतदान के दिन मतदाता मतदान केंद्र पर जाकर अपनी पहचान सत्यापित करवाते हैं और ईवीएम के माध्यम से गुप्त रूप से अपना वोट डालते हैं। मतदान के बाद मतगणना की जाती है और जिस उम्मीदवार को सबसे अधिक वोट मिलते हैं, उसे विजयी घोषित किया जाता है। इस प्रक्रिया में आदर्श आचार संहिता का पालन भी आवश्यक होता है ताकि चुनाव निष्पक्ष रहे। इस प्रकार भारत की निर्वाचन प्रणाली लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखते हुए सरकार के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

पेज 118: आइए पता लगाएँ

1. भारत ने 1988 में मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी। चर्चा कीजिए कि क्या यह एक अच्छा निर्णय था।
उत्तर:
भारत ने 1988 में मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष करना एक अच्छा निर्णय था। इससे युवाओं को लोकतंत्र में भाग लेने का अवसर मिला और उनकी आवाज़ को महत्व मिला। 18 वर्ष की आयु में व्यक्ति काफी समझदार हो जाता है और अपने भविष्य से जुड़े निर्णय ले सकता है। इससे अधिक लोगों की भागीदारी बढ़ी और लोकतंत्र मजबूत हुआ। हालांकि कुछ लोग इसे कम आयु मानते हैं, फिर भी यह निर्णय युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनाने में सहायक है।

पेज 120: आइए पता लगाएँ

1. भारत में 1947 में लगभग 14 प्रतिशत व्यक्ति साक्षर थे, जिसमें लगभग 8 प्रतिशत महिलाएँ थीं। कुछ लोगों के अनसुार केवल साक्षर व्यक्तियों को मताधिकार दिया जाना चाहिए। अपने समहू में चर्चा करें कि संविधान-निर्माताओं ने स्वतंत्रता प्राप्‍त‍ि के साथ ही सार्वभौमिक मताधिकार देने का निश्चय क्यों किया।
उत्तर:
संविधान-निर्माताओं ने स्वतंत्रता के समय ही सार्वभौमिक मताधिकार देने का निर्णय इसलिए किया क्योंकि वे सभी नागरिकों को समान अधिकार देना चाहते थे। यदि केवल साक्षर लोगों को मताधिकार दिया जाता, तो बड़ी संख्या में गरीब और अशिक्षित लोग अपने अधिकारों से वंचित रह जाते। लोकतंत्र का मूल सिद्धांत समानता है, इसलिए हर वयस्क नागरिक को मतदान का अधिकार देना आवश्यक था। इससे सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित हुई और देश में न्याय, समानता तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में मदद मिली।

पेज 121: आइए पता लगाएँ

1. समहू में चर्चा करें कि इस प्रकार के उपाय लोकतंत्र में क्या भमिूका निभाते हैं? क्या इन उपायों से लाभान्वित हुए किसी व्यक्ति को आप जानते हैं? इन उपायों से मतदाताओं की भागीदारी कैसे बढ़ सकती है? तकनीकी इसमें कैसे सहायक हो सकती है?
उत्तर:
इन उपायों की लोकतंत्र में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है, क्योंकि ये सभी नागरिकों को मतदान का समान अवसर देते हैं। जैसे दिव्यांग, बुजुर्ग या दूर-दराज़ के लोगों के लिए विशेष सुविधाएँ देने से वे भी आसानी से मतदान कर पाते हैं। इससे लोकतंत्र अधिक समावेशी और मजबूत बनता है।
मैंने ऐसे लोगों के बारे में सुना है जिन्हें व्हीलचेयर, रैंप या घर से मतदान जैसी सुविधाओं से लाभ मिला।
इन उपायों से मतदाताओं की भागीदारी बढ़ती है क्योंकि बाधाएँ कम हो जाती हैं और लोग मतदान के लिए प्रेरित होते हैं।
तकनीक भी इसमें सहायक है, जैसे ऑनलाइन पंजीकरण, जानकारी देने वाले ऐप, ईवीएम और वीवीपैट जैसी मशीनें मतदान को आसान, तेज और पारदर्शी बनाती हैं।

पेज 123: आइए पता लगाएँ

1. लगभग 34 प्रतिशत मतदाताओं ने 2024 के चनुावों में मताधिकार का प्रयोग नहीं किया। आपके विचार से ऐसा क्यों है? लोग अपने अधिकारों का प्रयोग करने में किन-किन चुनौतियों का सामना करते हैं? इन प्रश्‍नों के उत्तर के लिए अपने परिवार और पड़़ोस में बड़ों के साथ एक लघु सर्वेक्षण करें। सर्वेक्षण के निष्कर्षों का विश्लेषण करें और सझुावों के साथ एक प्रति वेदन लिखें कि प्रत्येक व्यक्ति द्वारा अपने मत का उपयोग कैसे सुनिश्‍च‍ित किया जा सकता है।
उत्तर:
प्रतिवेदन (लघु सर्वेक्षण पर आधारित)
विषय: 2024 के चुनाव में कम मतदान के कारण और समाधान
मैंने अपने परिवार और पड़ोस के 10 लोगों से चर्चा की। उनसे पूछा गया कि लोग मतदान क्यों नहीं करते और उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
निष्कर्ष: सर्वेक्षण में पाया गया कि कई लोग उदासीनता के कारण मतदान नहीं करते। कुछ लोग मतदान केंद्र दूर होने, लंबी कतारों और समय की कमी के कारण भी नहीं जा पाते। कुछ के नाम मतदाता सूची में नहीं होते या जानकारी की कमी होती है। कुछ लोग यह सोचते हैं कि उनके एक वोट से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
चुनौतियाँ:

  • जागरूकता की कमी
  • समय और दूरी की समस्या
  • मतदाता सूची में नाम न होना
  • सुविधाओं का अभाव (बुजुर्ग/दिव्यांग के लिए)

सुझाव:

  1. लोगों में जागरूकता बढ़ाई जाए।
  2. मतदान केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए।
  3. ऑनलाइन जानकारी और पंजीकरण आसान बनाया जाए।
  4. बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएँ दी जाएँ।
  5. मतदान को एक महत्वपूर्ण कर्तव्य के रूप में समझाया जाए।

यदि सरकार और समाज मिलकर प्रयास करें, तो हर व्यक्ति को मतदान के लिए प्रेरित किया जा सकता है और लोकतंत्र को मजबूत बनाया जा सकता है।

पेज 125: आइए पता लगाएँ

1. इस प्रकरण में चुनावी प्रक्रिया के सबसे महत्वपूर्ण पक्ष क्या है?
उत्तर:
इस प्रकरण में चुनावी प्रक्रिया के सबसे महत्वपूर्ण पक्ष निष्पक्षता, पारदर्शिता और गोपनीयता हैं। सभी उम्मीदवारों को समान अवसर मिला और चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। गुप्त मतदान से यह सुनिश्चित हुआ कि कोई दबाव न हो और विद्यार्थी अपनी स्वतंत्र इच्छा से वोट दे सकें। नियमों का पालन, मतों की सही गणना और परिणाम की घोषणा भी महत्वपूर्ण थे। इससे चुनाव की विश्वसनीयता बनी रही और लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत हुई।

2. गुप्त मतपत्र का होना क्यों महत्वपूर्ण था?
उत्तर:
गुप्त मतपत्र का होना इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि इससे मतदाता बिना किसी डर, दबाव या पक्षपात के अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट दे सकते हैं। इससे उनकी पहचान सुरक्षित रहती है और कोई यह नहीं जान पाता कि किसने किसे वोट दिया। यह निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करता है। गुप्त मतदान से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ता है तथा लोकतंत्र मजबूत होता है।

3. अपने प्रत्याशी का चयन करते समय विद्यार्थियों ने किन-किन बातों पर विचार किया होगा?
उत्तर:
विद्यार्थियों ने अपने प्रत्याशी का चयन करते समय कई बातों पर विचार किया होगा। उन्होंने उम्मीदवार के वादों, जैसे स्वच्छता, पढ़ाई में सुधार या सहपाठियों की मदद, को ध्यान में रखा होगा। साथ ही उम्मीदवार का व्यवहार, नेतृत्व क्षमता, जिम्मेदारी निभाने की योग्यता और सभी के लिए काम करने की भावना भी देखी होगी। कुछ विद्यार्थियों ने अपने व्यक्तिगत अनुभव और भरोसे के आधार पर भी निर्णय लिया होगा।

4. क्या आप सोचते हैं कि गुरमत के कक्षा प्रतिनिधि निर्वाचित होने के बाद विद्यार्थियों के कोई उत्तरदायित्व हैं? यदि हाँ, तो वे क्या है?
उत्तर:
हाँ, गुरमत के कक्षा प्रतिनिधि बनने के बाद विद्यार्थियों के भी कुछ उत्तरदायित्व होते हैं। उन्हें उसके कार्यों में सहयोग करना चाहिए और कक्षा के नियमों का पालन करना चाहिए। विद्यार्थियों को अपनी समस्याएँ और सुझाव उसके साथ साझा करने चाहिए ताकि वह उन्हें शिक्षकों तक पहुँचा सके। साथ ही, उन्हें ईमानदारी से भागीदारी करनी चाहिए और चुने गए प्रतिनिधि का सम्मान करना चाहिए, ताकि कक्षा का वातावरण अच्छा और व्यवस्थित बना रहे।

5. सुश्री उषा ने क्या भूमिका निभाई? यह क्यों महत्वपूर्ण थी?
उत्तर:
सुश्री उषा ने चुनाव अधिकारी (निर्वाचन अधिकारी) की भूमिका निभाई। उन्होंने चुनाव की पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमों के अनुसार संचालित किया। उन्होंने मतदान की व्यवस्था की, गुप्त मतदान सुनिश्चित किया, सभी विद्यार्थियों को नियम समझाए और मतों की सही गणना करवाई।
उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी क्योंकि इससे चुनाव में किसी प्रकार का पक्षपात या गड़बड़ी नहीं हुई। इससे सभी विद्यार्थियों का चुनाव प्रक्रिया पर विश्वास बना और लोकतांत्रिक तरीके से सही प्रतिनिधि का चयन संभव हुआ।

6. सुश्री उषा द्वारा नेहा के लिए ब्रेल मतपत्र की व्यवस्था करना क्यों महत्वपूर्ण था?
उत्तर:
सुश्री उषा द्वारा नेहा के लिए ब्रेल मतपत्र की व्यवस्था करना इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि इससे नेहा, जो दृष्टिबाधित है, स्वतंत्र और गोपनीय रूप से अपना मत दे सकी। इससे उसे दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ा और उसके अधिकारों का सम्मान हुआ। यह समावेशी लोकतंत्र का अच्छा उदाहरण है, जहाँ सभी को समान अवसर मिलता है। इससे चुनाव प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष, समान और सभी के लिए सुलभ बनती है।

7. यदि कक्षा के अनेक विद्यार्थियों ने किसी भी विकल्प पर चिह्न अंकित न किया होता तो क्या होता?
उत्तर:
यदि कक्षा के अनेक विद्यार्थियों ने किसी भी विकल्प पर चिह्न अंकित न किया होता, तो ऐसे मतपत्र अमान्य घोषित कर दिए जाते। इन मतों को गणना में शामिल नहीं किया जाता। इससे कुल वैध मतों की संख्या कम हो जाती और परिणाम केवल सही तरीके से डाले गए मतों के आधार पर तय होता। यदि बहुत अधिक मत अमान्य होते, तो चुनाव की स्पष्टता और प्रतिनिधित्व पर भी प्रभाव पड़ सकता था।

पेज 128: आइए पता लगाएँ

1. अपने विद्यालय या आस-पास उन शिक्षकों की पहचान करें जिन्होने चुनाव कार्य (ड्यूटी) किया हो। अपनी कक्षा में उन्हें अपने अनभुव साझा करने के लिए आमंत्रित करें।
उत्तर:
मैंने अपने विद्यालय और आसपास के क्षेत्र में जानकारी ली। हमारे विद्यालय के एक शिक्षक ने चुनाव ड्यूटी की थी। उन्होंने बताया कि चुनाव कार्य बहुत जिम्मेदारी भरा होता है। उन्हें मतदाता सूची की जाँच, पहचान पत्र देखना, उंगली पर स्याही लगाना और मतदान प्रक्रिया को सही तरीके से करवाना होता है।
उन्होंने यह भी बताया कि सभी काम निष्पक्ष और नियमों के अनुसार करना बहुत जरूरी होता है। कभी-कभी लंबी ड्यूटी और भीड़ की वजह से कठिनाई भी होती है, लेकिन यह देश के लोकतंत्र को मजबूत बनाने का महत्वपूर्ण कार्य है।
हम उन्हें कक्षा में आमंत्रित कर सकते हैं ताकि वे अपने अनुभव साझा करें और हमें चुनाव प्रक्रिया के बारे में और जानकारी मिले।

पेज 130: आइए पता लगाएँ

1. भारत की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ई.वी.एम.) और मतदाता सत्यापन योग्य पेपर ऑडिट ट्रेल (वी.वी.पी.ए.टी.) प्रणाली का
उपयोग नामीबिया और भटूान जैसे देशों में भारत निर्वाचन आयोग की सहायता से किया जाता है। अन्य देशों ने भी इस प्रौद्योगिकी
का अध्ययन किया है और अपने देशों में इसे अपनाने के लिए भारत से प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
उत्तर:
भारत की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ई.वी.एम.) और वीवीपैट प्रणाली का अन्य देशों में उपयोग यह दर्शाता है कि भारतीय चुनाव प्रणाली विश्वसनीय और उन्नत है। नामीबिया और भूटान जैसे देशों द्वारा इसका उपयोग करना भारत की तकनीकी क्षमता और अनुभव को प्रमाणित करता है।
इससे चुनाव प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और निष्पक्ष बनती है। अन्य देशों का इसे अपनाने के लिए प्रशिक्षण लेना यह बताता है कि भारत चुनाव प्रबंधन में एक आदर्श बन चुका है। इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा भी बढ़ती है।

2. मतदाता सत्यापन योग्य पेपर ऑडिट ट्रेल (वी.वी.पी.ए.टी.) एक ऐसी प्रणाली है जो मतदाता के वोट की पर्ची निकालती है, जिससे मतदाता यह जान लेते हैं कि उनका इलेक्ट्रॉनिक वोट सही से दर्ज हो गया है। यह पर्ची विवाद की स्थिति में सत्यापन और पुनः गणना के लिए एक बैकअप प्रमाण के रूप में उपलब्ध कराती है, विशेषतः उस स्थिति में जब इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली में कोई त्रुटि उत्पन्न हो।
उत्तर:
मतदाता सत्यापन योग्य पेपर ऑडिट ट्रेल (वी.वी.पी.ए.टी.) प्रणाली चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाती है। जब मतदाता वोट देता है, तो एक पर्ची निकलती है जिससे वह सुनिश्चित कर सकता है कि उसका वोट सही उम्मीदवार को गया है।
यह प्रणाली विवाद की स्थिति में बहुत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि पर्चियाँ प्रमाण के रूप में उपयोग की जा सकती हैं और पुनः गणना संभव होती है। इससे चुनाव में गड़बड़ी की संभावना कम होती है और मतदाताओं का विश्वास बढ़ता है।

पेज 131: आइए पता लगाएँ

1. यहाँ कुछ प्रकार की शिकायतें दी गई हैं जिनका निवारण भारत निर्वाचन आयोग करता हैं, आपके विचार में ये आचार संहिता के उल्लंघन क्यो है?
उत्तर:
ये सभी शिकायतें आचार संहिता के उल्लंघन हैं क्योंकि ये चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं रहने देतीं। मतदाताओं को उपहार या पैसे देना उन्हें प्रभावित करने का गलत तरीका है। विरोधी उम्मीदवार के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग चुनावी मर्यादा के विरुद्ध है। सरकारी अधिकारियों का किसी दल के पक्ष में प्रचार करना भी गलत है, क्योंकि उन्हें निष्पक्ष रहना चाहिए। ऐसे कार्य चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं और लोकतंत्र की मूल भावना—समानता और निष्पक्षता—को कमजोर करते हैं।

पेज 132: आइए पता लगाएँ

1. जिस क्षेत्र में आप रहते हैं, वहाँ अगला चुनाव कब होने वाला है? क्या वह राज्य स्तर, शहरी स्थानीय निकाय या पंचायत का चुनाव है?
उत्तर:
मेरे क्षेत्र में अगला चुनाव संभवतः राज्य स्तर या शहरी स्थानीय निकाय का होने वाला है। आमतौर पर विधान सभा चुनाव हर 5 वर्ष में होते हैं, जबकि नगर निगम/नगर पालिका के चुनाव भी नियमित अंतराल पर कराए जाते हैं। अभी सटीक तिथि घोषित नहीं हुई है, लेकिन चुनाव की तैयारी समय-समय पर शुरू हो जाती है। ये चुनाव महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इनमें चुने गए प्रतिनिधि हमारे क्षेत्र के विकास और समस्याओं के समाधान में भूमिका निभाते हैं।

पेज 134: आइए पता लगाएँ

1. आपके निर्वाचन क्षेत्र से सांसद और विधायक कौन हैं? (एक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में दो या अधिक विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र हो सकते हैं।)
उत्तर:
मेरे क्षेत्र से सांसद मोहनलाल हैं और विधायक योगेश भंडारी हैं। ये दोनों अपने-अपने स्तर पर जनता की समस्याओं का समाधान करने और विकास कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

2. इनमें से प्रत्येक किस राजनीतिक दल से संबंधित है?
उत्तर:
ये दोनों प्रत्याशी भारतीय जनता पार्टी से संबंधित है, हमारे क्ष्रेत्र में सभी सीटों पर इसी पार्टी के उमीदवार जानता द्वारा चुने गए है।

3. सांसद और विधायक क्रमशः किन विषयों की चिंता करते हैं?
उत्तर:
सांसद (MP) और विधायक (MLA) अलग-अलग स्तर पर काम करते हैं, इसलिए उनकी चिंताएँ भी अलग होती हैं।
सांसद- राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों की चिंता करते हैं, जैसे देश की नीतियाँ, रक्षा, अर्थव्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े बड़े निर्णय। वे संसद में पूरे देश के हित में कानून बनाते हैं।
विधायक- राज्य स्तर के मुद्दों की चिंता करते हैं, जैसे सड़क, बिजली, पानी, स्कूल, अस्पताल और स्थानीय विकास कार्य। वे अपने क्षेत्र की समस्याओं को राज्य सरकार तक पहुँचाते हैं और उनके समाधान के लिए काम करते हैं।

पेज 136: आइए पता लगाएँ

1. आपके विचार से उपरोक्त समूह भारत के राष्ट्रपति के निर्वाचन में क्यों सम्मिलित नहीं होते? आम जनता राष्ट्रपति के निर्वाचन में क्यों सम्मिलित नहीं होती है?
उत्तर:
मेरे विचार से उपरोक्त समूहों को राष्ट्रपति के चुनाव में शामिल नहीं किया जाता क्योंकि राष्ट्रपति का चुनाव केवल सीधे चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा होना चाहिए। मनोनीत सदस्य जनता द्वारा नहीं चुने जाते, इसलिए उन्हें इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाता।
आम जनता को सीधे शामिल नहीं किया जाता क्योंकि भारत में राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है। इससे प्रक्रिया सरल और व्यवस्थित रहती है। चुने गए सांसद और विधायक जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए उनके माध्यम से जनता की इच्छा राष्ट्रपति के चुनाव में व्यक्त होती है।

पेज 138: प्रश्न और क्रियाकलाप

1. एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर:
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार लोकतंत्र की आधारशिला है क्योंकि यह सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करता है। इससे हर व्यक्ति, चाहे वह किसी भी जाति, धर्म, लिंग या आर्थिक स्थिति से हो, शासन में भाग ले सकता है। यह व्यवस्था समानता और न्याय को बढ़ावा देती है। जब सभी नागरिक मतदान करते हैं, तो सरकार वास्तव में जनता की इच्छाओं का प्रतिनिधित्व करती है। इससे नागरिकों में जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होती है। यदि कुछ लोगों को मतदान से वंचित किया जाए, तो लोकतंत्र अधूरा रह जाता है। इसलिए सार्वभौमिक मताधिकार लोकतंत्र को मजबूत, समावेशी और प्रतिनिधिक बनाता है।

2. ‘गुप्त मतदान’ का क्या अर्थ है? यह लोकतंत्र में क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर:
गुप्त मतदान का अर्थ है कि मतदाता किसे वोट दे रहा है, यह जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहती है। कोई भी व्यक्ति यह नहीं जान सकता कि किसी ने किस उम्मीदवार को वोट दिया।
यह लोकतंत्र में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे मतदाता बिना किसी डर, दबाव या लालच के स्वतंत्र रूप से अपना निर्णय ले सकता है। यदि मतदान गुप्त न हो, तो लोग दूसरों के प्रभाव में आ सकते हैं या डर के कारण सही उम्मीदवार को वोट नहीं दे पाएंगे। गुप्त मतदान निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करता है और लोकतंत्र की स्वतंत्रता को बनाए रखता है।

3. प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष चुनावों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
प्रत्यक्ष चुनाव वे होते हैं जिनमें जनता सीधे अपने प्रतिनिधियों को चुनती है। उदाहरण के लिए, लोकसभा और राज्य विधानसभा के चुनाव प्रत्यक्ष चुनाव हैं, जहाँ नागरिक सीधे मतदान करते हैं।
अप्रत्यक्ष चुनाव वे होते हैं जिनमें जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि किसी अन्य पद के लिए चुनाव करते हैं। उदाहरण के लिए, भारत के राष्ट्रपति और राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है।
इस प्रकार, दोनों प्रकार के चुनाव लोकतंत्र में अलग-अलग उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाते हैं।

4. लोकसभा के सदस्यों का चुनाव, राज्यसभा के सदस्यों के चुनाव से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर:
लोकसभा के सदस्य प्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से चुने जाते हैं, जहाँ जनता सीधे अपने प्रतिनिधि को वोट देती है। इसमें जो उम्मीदवार सबसे अधिक वोट प्राप्त करता है, वह विजयी होता है।
इसके विपरीत, राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष चुनाव से चुने जाते हैं। इसमें राज्य के विधायक (MLA) मतदान करते हैं और उम्मीदवारों को वरीयता के आधार पर चुना जाता है।
इसके अलावा, लोकसभा एक अस्थायी सदन है जिसे भंग किया जा सकता है, जबकि राज्यसभा स्थायी सदन है जिसे कभी भंग नहीं किया जाता। इस प्रकार, दोनों के चुनाव और कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण अंतर है।

5. आपके विचार से मतपत्रों की तुलना में ई.वी.एम. के क्या-क्या लाभ हैं?
उत्तर:
ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) के कई लाभ हैं। यह मतदान प्रक्रिया को तेज और सरल बनाती है। मतगणना जल्दी होती है और परिणाम शीघ्र घोषित किए जा सकते हैं।
इसके अलावा, ईवीएम से गलत या अवैध वोट की संभावना कम हो जाती है। इसमें कागज की आवश्यकता नहीं होती, जिससे पर्यावरण की भी रक्षा होती है।
ईवीएम अधिक सुरक्षित और पारदर्शी होती है, खासकर वीवीपैट के साथ, जिससे मतदाता अपने वोट की पुष्टि कर सकता है। इस प्रकार, ईवीएम आधुनिक और प्रभावी मतदान प्रणाली है।

6. भारत के कुछ नगरीय क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत में कमी आ रही है। इस प्रवृत्तिृ के क्या कारण हो सकते हैं और अधिक लोगों को मतदान हेतु प्रोत्साहित करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
उत्तर:
नगरीय क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत कम होने के कई कारण हो सकते हैं। शहरों में लोग व्यस्त जीवनशैली के कारण मतदान के लिए समय नहीं निकाल पाते। कुछ लोग यह सोचते हैं कि उनके एक वोट से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जागरूकता की कमी, मतदान केंद्र की दूरी, और नाम मतदाता सूची में न होना भी कारण हैं।
अधिक लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करने हेतु जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए। मतदान केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए और सुविधाएँ बेहतर की जाएँ। ऑनलाइन जानकारी और पंजीकरण आसान बनाया जाए। युवाओं को विशेष रूप से मतदान के महत्व के बारे में शिक्षित किया जाए, ताकि लोकतंत्र मजबूत हो सके।

7. आपके विचार में लोकसभा की कुछ सीटें अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित क्यों होती हैं? एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए सीटों का आरक्षण इसलिए किया जाता है ताकि समाज के कमजोर और पिछड़े वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
इतिहास में इन वर्गों को सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा रखा गया था, इसलिए उन्हें समान अवसर प्रदान करने के लिए यह व्यवस्था की गई।
आरक्षण से यह सुनिश्चित होता है कि उनकी समस्याएँ सरकार तक पहुँचें और उनके हितों की रक्षा हो सके। इससे सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा मिलता है।

8. सोशल मीडिया हमारे चुनावी अनभुव के तरीके को बदल रहा है— आकर्षक प्रचार रीलों और लाइव भाषणों से लेकर इंस्टाग्राम और ट्विटर पर राजनैतिक वाद-विवाद तक। क्या यह लोकतंत्र को सशक्त बना रहा है या इसे उलझा रहा है? समूह बनाकर चर्चा
कीजिए — इसके लाभ एवं चुनौतियाँ क्या हैं और डिजिटल युग में चुनावों का भविष्य क्या हो सकता है?
उत्तर:
सोशल मीडिया लोकतंत्र को सशक्त भी बना रहा है और कुछ हद तक उलझा भी रहा है।
लाभ: यह जानकारी को तेजी से फैलाता है, लोगों को जागरूक करता है और नागरिकों को अपनी राय व्यक्त करने का मंच देता है। युवा वर्ग भी अधिक सक्रिय होता है।
चुनौतियाँ: फर्जी खबरें, गलत जानकारी और भ्रामक प्रचार लोकतंत्र को नुकसान पहुँचा सकते हैं। इससे मतदाताओं में भ्रम पैदा हो सकता है।
इसलिए, सोशल मीडिया का सही उपयोग आवश्यक है। यदि इसका जिम्मेदारी से उपयोग किया जाए, तो यह लोकतंत्र को मजबूत बना सकता है।

9. वेबसाइट https://www.indiavotes.com पर जाएँ और किसी भी वर्ष के एक निर्वाचन संसदीय चुनाव क्षेत्र के परिणामों का अध्ययन करें। अपने राज्य के किसी विधान सभा चुनाव का भी इसी प्रकार अध्ययन करें।
उत्तर:
मैंने एक संसदीय (लोकसभा) क्षेत्र और एक राज्य विधानसभा चुनाव के परिणामों का अध्ययन किया।
(1) संसदीय निर्वाचन क्षेत्र (उदाहरण: नई दिल्ली – लोकसभा चुनाव 2019)
नई दिल्ली सीट पर मीनाक्षी लेखी (भारतीय जनता पार्टी) विजयी रहीं। उन्हें लगभग 54% वोट मिले। उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी अजय माकन (कांग्रेस) थे, जिन्हें लगभग 26% वोट मिले। इस चुनाव में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिला और सभी 7 सीटें जीतीं।
(2) राज्य विधानसभा चुनाव (उदाहरण: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020)
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 में अरविंद केजरीवाल की पार्टी आम आदमी पार्टी (AAP) ने 70 में से 62 सीटें जीतकर बड़ी जीत हासिल की। बीजेपी को 8 सीटें मिलीं और कांग्रेस को कोई सीट नहीं मिली।
निष्कर्ष: अध्ययन से पता चलता है कि अलग-अलग चुनावों में जनता का निर्णय बदल सकता है। लोकसभा में राष्ट्रीय मुद्दे और विधानसभा में स्थानीय मुद्दे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। इससे लोकतंत्र में जनता की सोच और प्राथमिकताएँ स्पष्ट होती हैं।