एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 7 प्रकृति में ऊष्मा का स्थानांतरण

कक्षा 7 विज्ञान की पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा का अध्याय 7 प्रकृति में ऊष्मा का स्थानांतरण हमें यह समझाता है कि ऊष्मा एक स्थान से दूसरे स्थान पर कैसे जाती है। इस अध्याय में तीन मुख्य प्रक्रियाओं — चालन, संवहन और विकिरण — को सरल प्रयोगों और रोजमर्रा के उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया है। साथ ही यह अध्याय बताता है कि धातुएँ ऊष्मा की सुचालक क्यों होती हैं और लकड़ी-काँच जैसे पदार्थ ऊष्मा के कुचालक क्यों माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त, स्थल समीर और समुद्र समीर, जल चक्र, जल का अंत:स्यंदन और जलभृत जैसी महत्वपूर्ण प्राकृतिक परिघटनाओं की भी विस्तृत व्याख्या इस अध्याय में की गई है, जो हमारे पर्यावरण को समझने में अत्यंत सहायक है।

एनसीईआरटी कक्षा 7 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 7 के प्रश्न उत्तर

1. प्रत्येक के लिए एक सही विकल्प चुनिए —
(i) आपके पिताजी ने एक सॉसपैन खरीदा जो दो भिन्न पदार्थों (क) एवं (ख) से बना है। पदार्थ (क) और (ख) के निम्नलिखित गुणधर्म हैं —
(क) ‘क’ और ‘ख’ दोनों ऊष्मा के सुचालक हैं।
(ख) ‘क’ और ‘ख’ दोनों ऊष्मा के कुचालक हैं।
(ग) ‘क’ ऊष्मा का सुचालक है और ‘ख’ कुचालक है।
(घ) ‘क’ ऊष्मा का कुचालक है और ‘ख’ सुचालक है।

कक्षा 7 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 7 के प्रश्न 1 का चित्र

उत्तर:
(ग) ‘क’ ऊष्मा का सुचालक है और ‘ख’ कुचालक है।
चित्र में सॉसपैन का मुख्य भाग धातु से बना होता है जो ऊष्मा का सुचालक है इसलिए भोजन जल्दी पक सके। इसका हत्था लकड़ी या प्लास्टिक जैसे ऊष्मा के कुचालक पदार्थ से बना होता है ताकि हम इसे पकड़ते समय जल न जाएँ। इसलिए (क) सुचालक और (ख) कुचालक है।

(ii) चित्र 7.15 में दर्शाया अनुसार मोम के साथ एक धातु-पट्टी पर पिनों को चिपकाया जाता है और एक जलती हुई मोमबत्ती पट्टी के नीचे रखी जाती है। निम्नलिखित में से क्या घटित होगा?
(क) सभी पिन लगभग समान समय पर गिरेंगी।
(ख) पिन 1 और 2, पिन 3 और 4 से पहले गिरेंगी।
(ग) पिन 1 और 2, पिन 3 और 4 के बाद में गिरेंगी।
(घ) पिन 2 और 3 लगभग समान समय पर गिरेंगी।

कक्षा 7 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 7 के प्रश्न 2 का चित्र

उत्तर:
(ख) पिन 1 और 2, पिन 3 और 4 से पहले गिरेंगी।
मोमबत्ती पट्टी के नीचे पिन 1 और 2 के पास रखी है। ऊष्मा चालन द्वारा पट्टी के गरम छोर से ठंडे छोर की ओर जाती है यानी पिन 1 से शुरू होकर पिन 4 की ओर। इसलिए पिन 1 सबसे पहले, फिर पिन 2, फिर 3 और अंत में 4 गिरेगी। अत: पिन 1 और 2 पिन 3 और 4 से पहले गिरेंगी।

(iii) एक धूम्र-संसूचक यंत्र वह यंत्र है जो धुएँ का पता लगाता है और अलार्म बजा देता है। मान लीजिए आप अपने कमरे में एक धूम्र-संसूचक यंत्र लगा रहे हैं। इस यंत्र को लगाने का सबसे उपयुक्त स्थान होगा —
(क) फर्श के पास
(ख) दीवार के मध्य में
(ग) छत पर
(घ) कमरे में कहीं पर भी
उत्तर:(ग) छत पर
जब कोई पदार्थ जलता है तो धुआँ गरम गैसों और सूक्ष्म कणों का मिश्रण होता है। गरम वायु हल्की होती है इसलिए संवहन के कारण ऊपर उठती है। अत: धुआँ भी ऊपर की ओर जाएगा और छत के पास जमा होगा। इसीलिए धूम्र-संसूचक यंत्र को छत पर लगाना सबसे उपयुक्त होगा।

2. एक दुकानदार आपको एक गिलास में ठंडी लस्सी देता है। संयोगवश गिलास में एक छोटा सा रिसाव है। आपको दुकानदार एक और गिलास देता है ताकि आप रिसाव वाला गिलास उसमें रख लें। क्या यह व्यवस्था आपकी लस्सी को अधिक देर तक ठंडा रखने में सहायता कर सकती है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
हाँ, यह व्यवस्था लस्सी को अधिक देर तक ठंडा रखने में सहायता कर सकती है।
जब रिसाव वाले गिलास को दूसरे बड़े गिलास में रखा जाता है तो दोनों गिलासों के बीच एक वायु की परत बन जाती है। वायु ऊष्मा की कुचालक होती है इसलिए यह बाहरी वातावरण से ऊष्मा को लस्सी तक पहुँचने से रोकती है। यह ठीक उसी तरह काम करता है जैसे दो पतले कंबल एक मोटे कंबल से अधिक गरम रखते हैं क्योंकि उनके बीच वायु की कुचालक परत होती है। इसी कारण यह व्यवस्था लस्सी को अधिक समय तक ठंडा रखेगी।

3. कारण सहित बताइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं अथवा असत्य?
(क) ठोस में ऊष्मा का स्थानांतरण संवहन द्वारा होता है।
(ख) चालन में ऊष्मा का स्थानांतरण कणों की वास्तविक गति के द्वारा होता है।
(ग) मृदा की सतह वाले क्षेत्रों से बालू की सतह वाले क्षेत्रों की तुलना में जल का रिसाव अधिक होता है।
(घ) स्थल से समुद्र की ओर ठंडी हवा के गमन को स्थल समीर कहते हैं।
उत्तर:
(क) असत्य।
ठोस में ऊष्मा का स्थानांतरण मुख्य रूप से चालन द्वारा होता है। ठोस में कण एक स्थान पर स्थिर रहते हैं और अपनी स्थिति नहीं बदलते। जब ठोस का एक हिस्सा गरम होता है तो गरम कण अपने पड़ोसी कणों को ऊष्मा स्थानांतरित करते हैं और यह प्रक्रिया आगे बढ़ती रहती है। संवहन में कणों की वास्तविक गति होती है जो केवल द्रव और गैस में होती है।

(ख) असत्य।
चालन में कण अपनी स्थिति से नहीं हटते। गरम होने पर एक कण अपने संपर्क में आने वाले दूसरे कण को ऊष्मा स्थानांतरित करता है परंतु स्वयं अपने स्थान पर ही रहता है। कणों की वास्तविक गति संवहन प्रक्रिया में होती है।

(ग) असत्य।
बालू की सतह वाले क्षेत्रों में मृदा की सतह की तुलना में जल का रिसाव अधिक होता है। बालू के कणों के बीच के स्थान मृदा के कणों के बीच के स्थानों से अधिक चौड़े होते हैं जिससे जल सरलता से रिसता है। बजरी से तो और भी तेज रिसाव होता है।

(घ) सत्य।
रात के समय स्थल जल की अपेक्षा शीघ्र ठंडा होता है इसलिए समुद्र के ऊपर की हवा गरम होकर ऊपर उठती है और स्थल से ठंडी हवा समुद्र की ओर बहती है। इस स्थल से समुद्र की ओर ठंडी हवा के गमन को स्थल समीर कहते हैं।

4. किसी पात्र में रखे बर्फ के टुकड़े कुछ समय पश्चात पिघलकर जल बन जाते हैं। इस रूपांतरण के लिए बर्फ के टुकड़ों को ऊष्मा कहाँ से प्राप्त होती है?
उत्तर:
बर्फ को ऊष्मा मुख्य रूप से अपने आस-पास के पर्यावरण से प्राप्त होती है। यह ऊष्मा कई तरीकों से बर्फ तक पहुँचती है —
पहला, पात्र के माध्यम से — यदि पात्र धातु का बना हो तो चालन द्वारा आस-पास की हवा की ऊष्मा पात्र के जरिए बर्फ तक पहुँचती है। दूसरा, वायु से — बर्फ के संपर्क में आने वाली कमरे की गरम वायु से संवहन और चालन द्वारा ऊष्मा मिलती है। तीसरा, विकिरण द्वारा — आस-पास की सभी गरम वस्तुएँ विकिरण द्वारा ऊष्मा उत्सर्जित करती हैं जो बर्फ तक पहुँचती है। इन सभी स्रोतों से प्राप्त ऊष्मा से बर्फ पिघलकर जल बन जाती है।

5. एक अगरबत्ती को नीचे की दिशा में उलटा कर के लगाया गया है। इस अगरबत्ती से निकलने वाला धुआँ किस दिशा में जाएगा? एक चित्र बनाकर धुएँ की गति की दिशा को दर्शाइए।
उत्तर:
अगरबत्ती को उलटा लगाया जाए तो भी धुआँ ऊपर की ओर ही जाएगा।

कक्षा 7 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 7 के प्रश्न 5 के उत्तर का चित्र

6. चित्र 7.16 में दिखाए अनुसार जलयुक्त परखनलियों को एक मोमबत्ती द्वारा समान समय तक गरम किया जाता है। चित्र 7.16 (क) अथवा चित्र 7.16 (ख) में दिखाए गए दोनों तापमापियों में से कौन-सा अधिक तापमान मापेगा और क्यों?

कक्षा 7 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 7 के प्रश्न 6 का चित्र

उत्तर:
चित्र 7.16 (ख) वाला तापमापी अधिक तापमान मापेगा।
चित्र 7.16 (क) में मोमबत्ती परखनली के नीचे है और तापमापी जल के ऊपरी भाग में लगा है। जल को गरम करने पर गरम जल हल्का होकर ऊपर उठता है और ठंडा जल नीचे आता है — यह संवहन है। इसलिए ऊपर वाला हिस्सा गरम होगा और तापमापी अधिक तापमान दर्शाएगा।
चित्र 7.16 (ख) में मोमबत्ती परखनली के नीचे है परंतु तापमापी जल के ऊपरी भाग में है। इसमें भी संवहन के कारण गरम जल ऊपर उठेगा। दोनों व्यवस्थाओं की तुलना करने पर जिस परखनली में जल के ऊपरी भाग को सीधे मोमबत्ती की लौ से गरम किया जा रहा है वहाँ तापमान अधिक होगा क्योंकि ऊपर का जल गरम होने के साथ-साथ ऊपर बना भी रहता है।

7. गरम जलवायु वाले क्षेत्रों में घरों की बाहरी दीवारों को खोखली ईंटों द्वारा क्यों बनाया जाता है?
उत्तर:
खोखली ईंटों के अंदर वायु भरी होती है। वायु ऊष्मा की कुचालक होती है यानी यह ऊष्मा को आसानी से अपने अंदर से नहीं जाने देती। गरम जलवायु वाले क्षेत्रों में बाहर से बहुत अधिक गरमी होती है। खोखली ईंटों में मौजूद वायु की परत बाहर की गरम ऊष्मा को घर के अंदर नहीं पहुँचने देती। इस प्रकार घर का अंदरूनी हिस्सा ठंडा बना रहता है। इसी तरह सर्दियों में यह वायु की परत अंदर की गरमी को बाहर नहीं जाने देती इसलिए घर गरम भी रहता है।

8. जल के बड़े निकायों की उपस्थिति किस प्रकार आस-पास के क्षेत्रों में तापमान को अधिक बढ़ने से रोकती है। समझाइए।
उत्तर:
जल की ऊष्मा-धारण क्षमता स्थल की तुलना में अधिक होती है यानी जल को गरम होने में अधिक समय लगता है और ठंडा होने में भी। समुद्र, झील या नदी जैसे जल के बड़े निकाय धीरे-धीरे गरम होते हैं इसलिए दिन में बहुत अधिक गरम नहीं होते। जब स्थल बहुत गरम हो जाता है तो वहाँ की हवा गरम होकर ऊपर उठती है और समुद्र से ठंडी हवा उस ओर प्रवाहित होती है — इसे समुद्र समीर कहते हैं। यह ठंडी समुद्र समीर आस-पास के क्षेत्रों के तापमान को कम करती है और बहुत अधिक गरम नहीं होने देती। इसीलिए समुद्र तटीय क्षेत्रों में तापमान मध्यम रहता है।

9. व्याख्या कीजिए कि किस प्रकार जल पृथ्वी की सतह के नीचे की ओर रिसता है और भौम जल के रूप में संग्रहित होता है।
उत्तर:
जब वर्षा होती है तो जल पृथ्वी की सतह पर गिरता है। इस जल का कुछ भाग नदियों, तालाबों और झीलों में जमा हो जाता है लेकिन कुछ भाग मृदा और चट्टानों के बीच के छोटे-छोटे रिक्त स्थानों से नीचे की ओर रिसने लगता है। इस प्रक्रिया को अंत:स्यंदन कहते हैं। जहाँ मृदा और चट्टानों के बीच के स्थान अधिक चौड़े, खुले और परस्पर जुड़े हुए होते हैं वहाँ जल अधिक आसानी से रिस सकता है। जैसे बजरी में मृदा की तुलना में अधिक तेजी से जल रिसता है। रिसकर नीचे जाने वाला यह जल धीरे-धीरे भूमि के नीचे अवसादों और चट्टानों के छिद्रों और दरारों में जमा हो जाता है। यह जमा हुआ जल भौम जल कहलाता है। अवसादों और चट्टानों की भूमिगत परतें जो छिद्रों में जल संग्रहित करती हैं वे जलभृत कहलाती हैं। इन्हीं जलभृतों से कुएँ खोदकर हम जल प्राप्त करते हैं।

10. जल-चक्र पृथ्वी पर जल के पुन:वितरण और पुन:भरण में सहायता करता है। इस कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
जल-चक्र पृथ्वी पर जल का एक निरंतर चलने वाला चक्र है जिसमें जल अपने तीनों रूपों यानी ठोस, द्रव और गैस में परिवर्तित होता रहता है। सूर्य की ऊष्मा से समुद्रों, नदियों और झीलों का जल वाष्पित होकर जलवाष्प के रूप में ऊपर उठता है। पेड़-पौधों से भी वाष्पोत्सर्जन होता है। यह जलवाष्प ऊपर जाकर ठंडी होती है और बादलों के रूप में संघनित होती है। बादलों से जल वर्षा, हिम और ओलों के रूप में पृथ्वी पर वापस आता है। इस प्रकार वर्षा के जल से नदियाँ, झीलें और समुद्र फिर से भर जाते हैं — यह पुन:वितरण है। वर्षा का एक भाग मृदा में रिसकर भौम जल के रूप में जमा होता है — यह पुन:भरण है। इस प्रकार जल-चक्र पृथ्वी पर जल की कुल मात्रा को संरक्षित रखते हुए उसके निरंतर पुन:वितरण और पुन:भरण में सहायता करता है।