एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 10 पादपों में जैव प्रक्रम

कक्षा 7 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 10 पादपों में जैव प्रक्रम के एनसीईआरटी समाधान में पौधों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को सरल और रोचक तरीके से समझाया गया है। इस अध्याय में बताया गया है कि पौधे कैसे भोजन बनाते हैं, उनकी वृद्धि किन कारकों पर निर्भर करती है तथा प्रकाश संश्लेषण, श्वसन और परिवहन जैसी प्रक्रियाएँ कैसे कार्य करती हैं। साथ ही, विभिन्न प्रयोगों के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि जल, सूर्य का प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड और हरित लवक पौधों के जीवन के लिए कितने आवश्यक हैं।

एनसीईआरटी कक्षा 7 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 10 के प्रश्न उत्तर

1. निम्नलिखित तालिका को पूरा कीजिए —

कक्षा 7 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 10 के प्रश्न 1 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 7 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 10 के प्रश्न 1 के उत्तर का चित्र

2. ऐसी परिस्थिति की कल्पना कीजिए जहाँ पृथ्वी पर प्रकाश संश्लेषण करने वाले सभी जीव विलुप्त हो गए हैं। सजीवों पर इसका क्या प्रभाव होगा?
उत्तर:
यदि पृथ्वी पर प्रकाश संश्लेषण करने वाले सभी जीव विलुप्त हो जाएँ तो सभी सजीवों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा।पौधे ही सभी जीवों के लिए भोजन का मुख्य स्रोत हैं। पौधों के न रहने पर शाकाहारी जंतुओं के पास खाने के लिए कुछ नहीं बचेगा और वे मर जाएँगे। उनके मरने से मांसाहारी जंतु भी मर जाएँगे क्योंकि उनका भोजन समाप्त हो जाएगा। प्रकाश संश्लेषण के दौरान ऑक्सीजन निर्मुक्त होती है जिसे सभी सजीव श्वास लेने के लिए उपयोग करते हैं। ऑक्सीजन के बिना श्वसन संभव नहीं होगा और सभी सजीव मर जाएँगे। वायु में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती जाएगी जो पर्यावरण के लिए हानिकारक होगी। इस प्रकार प्रकाश संश्लेषण करने वाले जीवों के बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं रहेगा।

3. आलू का एक टुकड़ा आयोडीन विलयन से परीक्षण करने पर मंड की उपस्थिति दर्शाता है। आलू में मंड कहाँ से आता है? पौधे में भोजन का संश्लेषण कहाँ पर होता है और यह आलू तक कैसे पहुँचता है?
उत्तर:
आलू में मंड पौधे की पत्तियों से आता है। पौधे की हरी पत्तियाँ पौधे की भोजन-निर्माणशाला होती हैं जहाँ प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा सूर्य के प्रकाश, पर्णहरित, जल और कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति में ग्लूकोस बनता है। यह ग्लूकोस बाद में मंड के रूप में बदल जाता है।
पत्तियों में बना यह भोजन पोषवाह (फ्लोएम) नामक पतली नलियों द्वारा पौधे के सभी भागों तक पहुँचाया जाता है। इसी तरह यह भोजन आलू तक भी पहुँचता है और आलू में मंड के रूप में भंडारित हो जाता है।

4. क्या पत्ती की चौड़ी और सपाट संरचना पौधों को प्रकाश संश्लेषण के लिए अधिक सक्षम बनाती है? इसका औचित्य बताइए।
उत्तर:
हाँ, पत्ती की चौड़ी और सपाट संरचना पौधों को प्रकाश संश्लेषण के लिए अधिक सक्षम बनाती है।
इसका कारण यह है कि पत्ती की चौड़ी और सपाट संरचना होने से उसका सतही क्षेत्रफल अधिक होता है। अधिक सतही क्षेत्रफल होने से पत्ती अधिक मात्रा में सूर्य के प्रकाश को ग्रहण कर सकती है जो प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक है।
इसके साथ ही चौड़ी पत्ती पर अधिक रंध्र होते हैं जिनसे कार्बन डाइऑक्साइड अधिक मात्रा में अंदर आ सकती है। कार्बन डाइऑक्साइड भी प्रकाश संश्लेषण के लिए अनिवार्य है। इस प्रकार पत्ती की चौड़ी और सपाट संरचना पौधों को अधिक सूर्य प्रकाश और कार्बन डाइऑक्साइड उपलब्ध कराकर प्रकाश संश्लेषण को अधिक प्रभावी बनाती है।

5. X, Y के उपयोग द्वारा विघटित होकर कार्बन डाइऑक्साइड Z और ऊर्जा निर्मुक्त करती है।
X + Y → कार्बन डाइऑक्साइड + Z + ऊर्जा
X, Y और Z प्रक्रिया के तीन भिन्न घटक हैं। X, Y और Z किन्हें प्रदर्शित करते हैं?
उत्तर:
यह समीकरण श्वसन की प्रक्रिया को दर्शाता है।
X = ग्लूकोस (पौधों द्वारा प्रकाश संश्लेषण में बना भोजन)
Y = ऑक्सीजन (श्वसन के लिए आवश्यक गैस)
Z = जल (श्वसन के दौरान उत्पन्न होता है)
पूरा समीकरण इस प्रकार है — ग्लूकोस + ऑक्सीजन → कार्बन डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा

6. कृष्णा ने दो गमलों में लगे समान आमाप के दो पौधों से एक प्रयोग का व्यवस्थापन किया। उसने उनमें से एक गमले को सूर्य के प्रकाश में रखा और दूसरे को एक अँधेरे कमरे में रखा जैसे कि चित्र 10.10 में दर्शाया गया है।

कक्षा 7 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 10 के प्रश्न 6 का चित्र

(i) इस प्रयोग के द्वारा वह किसकी जाँच कर रही है?
(ii) दोनों स्थितियों में पौधों में क्या अंतर दिखाई दे रहे हैं?
(iii) आपके अनुसार किस पौधे की पत्तियाँ मंड की उपस्थिति के लिए आयोडीन परीक्षण की पुष्टि करेंगी?
उत्तर:
(i) कृष्णा यह जाँच कर रही है कि पौधों में प्रकाश संश्लेषण के लिए सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है या नहीं अर्थात क्या सूर्य का प्रकाश मंड बनाने के लिए अनिवार्य है।

(ii) सूर्य के प्रकाश में रखे पौधे की पत्तियाँ हरी और स्वस्थ दिखाई देती हैं। अँधेरे कमरे में रखे पौधे की पत्तियाँ पीली और कमजोर दिखाई देती हैं क्योंकि वहाँ प्रकाश संश्लेषण नहीं हुआ।

(iii) सूर्य के प्रकाश में रखे पौधे की पत्तियाँ आयोडीन परीक्षण की पुष्टि करेंगी क्योंकि सूर्य के प्रकाश में प्रकाश संश्लेषण होने से मंड बना होगा। आयोडीन डालने पर उसकी पत्तियाँ नीली-काली हो जाएँगी।

7.  वाणी का मानना है कि कार्बन डाइऑक्साइड प्रकाश संश्लेषण के लिए अनिवार्य है। उसने अपने विचार के स्वीकृति या अस्वीकृति के लिए चित्र 10.11 में दर्शाए गए अनुसार एक प्रयोग का व्यवस्थापन किया।

कक्षा 7 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 10 के प्रश्न 7 का चित्र

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(i) उपर्युक्त व्यवस्थापनों के किन पौधों में मंड बनेगा?
(ii) उपर्युक्त व्यवस्थापनों के किन पौधों में मंड नहीं बनेगा?
(iii) उपर्युक्त व्यवस्थापनों के किन पौधों में ऑक्सीजन उत्पन्न होगी?
(iv) उपर्युक्त व्यवस्थापन के किस पौधे में ऑक्सीजन उत्पन्न नहीं होगी?

उत्तर:
(i) केवल व्यवस्थापन (क) में मंड बनेगा जहाँ सूर्य का प्रकाश और कार्बन डाइऑक्साइड दोनों उपस्थित हैं। प्रकाश संश्लेषण के लिए दोनों अनिवार्य हैं।
(ii) व्यवस्थापन (ख), (ग) और (घ) में मंड नहीं बनेगा। (ख) में कार्बन डाइऑक्साइड नहीं है, (ग) में सूर्य का प्रकाश नहीं है और (घ) में न सूर्य का प्रकाश है और न कार्बन डाइऑक्साइड।
(iii) केवल व्यवस्थापन (क) में ऑक्सीजन उत्पन्न होगी क्योंकि प्रकाश संश्लेषण केवल वहीं होगा जहाँ सूर्य का प्रकाश और कार्बन डाइऑक्साइड दोनों उपस्थित हैं।
(iv) व्यवस्थापन (ख), (ग) और (घ) में ऑक्सीजन उत्पन्न नहीं होगी क्योंकि इन सभी में प्रकाश संश्लेषण के लिए कोई न कोई आवश्यक चीज़ अनुपस्थित है।

8. अनन्या ने चार परखनलियाँ लीं और प्रत्येक परखनली को पानी से तीन-चौथाई भर लिया। उसने उन्हें क, ख, ग, घ नामांकित किया (चित्र 10.12)। परखनली ‘क’ में उसने एक घोंघे को रखा; परखनली ‘ख’ में उसने एक जलीय पौधे को रखा; परखनली ‘ग’ में उसने घोंघे और पौधे दोनों को रखा। परखनली ‘घ’ में केवल जल रखा। अनन्या ने सभी परखनलियों में कार्बन डाइऑक्साइड सूचक डाला। उसने जल के आरंभिक रंग को अभिलेखित किया और 2-3 घंटे बाद पुनः देखा कि क्या परखनलियों के रंग में कोई परिवर्तन हुआ है। आपके विचार से वह क्या पता करना चाहती है? उसे कैसे पता लगेगा कि वह सही है?

कक्षा 7 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 10 के प्रश्न 8 का चित्र

उत्तर:
अनन्या यह पता करना चाहती है कि घोंघा कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न करता है और जलीय पौधा कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करता है। वह यह भी देखना चाहती है कि जब दोनों एक साथ हों तो कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ता है।
अनुमानित परिणाम इस प्रकार होंगे। परखनली ‘क’ में घोंघा श्वसन करता है इसलिए कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ेगी और रंग बदलेगा। परखनली ‘ख’ में पौधा प्रकाश संश्लेषण द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करेगा इसलिए रंग में कम परिवर्तन होगा। परखनली ‘ग’ में घोंघे की कार्बन डाइऑक्साइड को पौधा उपयोग कर लेगा इसलिए रंग में बहुत कम या कोई परिवर्तन नहीं होगा। परखनली ‘घ’ में केवल जल है इसलिए रंग में कोई परिवर्तन नहीं होगा। यदि ये परिणाम मिलते हैं तो अनन्या का विचार सही सिद्ध होगा।

9. पौधों में जल परिवहन गर्म स्थिति में अधिक तीव्र गति से होता है या ठंडी स्थिति में? इसके अवलोकन के लिए एक प्रयोग अभिकल्पित कीजिए।
उत्तर:
पौधों में जल परिवहन गर्म स्थिति में अधिक तीव्र गति से होता है। प्रयोग इस प्रकार किया जा सकता है। दो एक जैसे गिलास लीजिए और उन्हें ‘क’ और ‘ख’ से नामांकित कीजिए। दोनों गिलासों में समान मात्रा में लाल स्याही मिला पानी भर दीजिए। दो एक जैसी सफेद फूलों वाली टहनियाँ लीजिए और उनके तनों को नीचे से काटकर तुरंत एक-एक गिलास में रख दीजिए। गिलास ‘क’ को गर्म स्थान पर रखिए और गिलास ‘ख’ को ठंडे स्थान पर रखिए। कुछ घंटों बाद दोनों टहनियों की पत्तियों और फूलों में लाल रंग के आने की गति की तुलना कीजिए। जिस टहनी में लाल रंग पहले आएगा उसमें जल परिवहन अधिक तीव्र होगा।

10. प्रकाश संश्लेषण और श्वसन प्रकृति में संतुलन बनाए रखने के लिए अनिवार्य हैं। चर्चा कीजिए।
उत्तर:
प्रकाश संश्लेषण और श्वसन दोनों प्रक्रियाएँ प्रकृति में एक-दूसरे की पूरक हैं और मिलकर संतुलन बनाए रखती हैं। प्रकाश संश्लेषण में पौधे कार्बन डाइऑक्साइड और जल का उपयोग करके ग्लूकोस और ऑक्सीजन बनाते हैं। श्वसन में सभी सजीव ग्लूकोस और ऑक्सीजन का उपयोग करके ऊर्जा बनाते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड और जल छोड़ते हैं। इस प्रकार देखें तो श्वसन में जो कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है वही प्रकाश संश्लेषण में काम आती है और प्रकाश संश्लेषण में जो ऑक्सीजन निकलती है वही श्वसन में काम आती है। यह एक चक्र की तरह चलता रहता है। यदि यह संतुलन बिगड़ जाए तो वायुमंडल में ऑक्सीजन या कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा असंतुलित हो जाएगी जिससे सभी सजीवों का जीवन खतरे में पड़ जाएगा। इसलिए ये दोनों प्रक्रियाएँ प्रकृति में संतुलन बनाए रखने के लिए अनिवार्य हैं।