एनसीईआरटी समाधान कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 2 संयुक्त-व्यञ्जनानि
सत्र 2026-27 के लिए छात्र, एनसीईआरटी समाधान कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 2 संयुक्त-व्यञ्जनानि, यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। एनसीईआरटी कक्षा 6 संस्कृत पाठ्यपुस्तक दीपकम् का दूसरा पाठ संयुक्त-व्यञ्जनानि संस्कृत भाषा की लिखावट और उच्चारण को गहराई से समझने का पाठ है। पहले पाठ में जहाँ वर्णमाला और उच्चारण-स्थान सीखे, वहीं इस पाठ में बताया गया है कि जब दो या दो से अधिक व्यञ्जन-वर्ण आपस में मिलते हैं तो संयुक्त-व्यञ्जन बनते हैं। उदाहरण के लिए क् और ष् मिलकर क्ष बनाते हैं, त् और र् मिलकर त्र बनाते हैं, ज् और ञ् मिलकर ज्ञ बनाते हैं।
इस पाठ में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संयुक्त-व्यञ्जन कोई नए वर्ण नहीं हैं, बल्कि पृथक्-पृथक् व्यञ्जन-वर्णों की विशिष्ट लेखन-शैली है। पाठ के दो मुख्य अभ्यास हैं — वर्ण-वियोग (किसी शब्द को उसके अलग-अलग वर्णों में तोड़ना) और वर्ण-संयोग (अलग-अलग वर्णों को जोड़कर शब्द बनाना)। चाणक्यः, इन्द्रः, राष्ट्रम्, संस्कृतम् जैसे परिचित शब्दों के उदाहरणों से यह पाठ बच्चों के लिए रोचक और सरल बन जाता है। सत्र 2026-27 के एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के अनुसार इस पाठ के सभी अभ्यास-प्रश्नों के हल यहाँ हिंदी में उपलब्ध हैं।
एनसीईआरटी कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 2 के प्रश्न उत्तर
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कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् पाठ 2 – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संयुक्त-व्यञ्जन किसे कहते हैं — क्या यह दीपकम् में पहली बार पढ़ाया जा रहा है?
हाँ, दीपकम् पाठ 2 में पहली बार संयुक्त-व्यञ्जन विधिवत रूप से पढ़ाए जाते हैं। जब दो या दो से अधिक व्यञ्जन-वर्ण आपस में मिलते हैं तो जो नया रूप बनता है उसे संयुक्त-व्यञ्जन कहते हैं। जैसे क् + ष् = क्ष, त् + र् = त्र, ज् + ञ् = ज्ञ। ध्यान रहे ये नए वर्ण नहीं हैं, केवल मिली हुई लेखन-शैली है।
क्ष, त्र और ज्ञ — ये तीन संयुक्त-व्यञ्जन परीक्षा में क्यों सबसे ज़रूरी हैं?
क्ष, त्र और ज्ञ परीक्षा में सबसे अधिक पूछे जाते हैं क्योंकि ये संस्कृत और हिंदी दोनों में सबसे अधिक प्रयुक्त संयुक्त-व्यञ्जन हैं। क्ष = क् + ष्, त्र = त् + र् और ज्ञ = ज् + ञ् — इन तीनों का वर्ण-वियोग परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है।
कक्षा 6 दीपमक पुस्तक के अनुसार, वर्ण-वियोग और वर्ण-संयोग में क्या अंतर है?
वर्ण-वियोग का अर्थ है किसी शब्द को उसके अलग-अलग वर्णों में तोड़ना। जैसे — दाशरथिः = द् + आ + श् + अ + र् + अ + थ् + इ + ः। वर्ण-संयोग इसका उल्टा है यानी अलग-अलग दिए गए वर्णों को जोड़कर पूरा शब्द लिखना। दोनों अभ्यास इस पाठ में दिए गए हैं और दोनों परीक्षा में अलग-अलग प्रश्नों के रूप में आते हैं।
क्या कक्षा 6 दीपकम के पाठ 2 में सभी संयुक्त-व्यञ्जन याद करने होंगे?
पाठ में सभी संयुक्त-व्यञ्जन याद करना अनिवार्य नहीं है। पुस्तक स्वयं कहती है कि सर्वैः व्यञ्जनैः सह मेलनं सम्भवति अर्थात् सभी व्यञ्जनों का आपस में मेल सम्भव है इसलिए अनगिनत संयुक्त-व्यञ्जन बन सकते हैं। छात्रों को केवल पाठ में दिए गए उदाहरणों और अभ्यास के शब्दों का वर्ण-वियोग और वर्ण-संयोग करना आना चाहिए।
इस पाठ के शब्दार्थ में कौन-कौन से कठिन शब्द हैं जो परीक्षा में पूछे जा सकते हैं?
पाठ की शब्दार्थ सूची में जो शब्द परीक्षा में सबसे अधिक पूछे जाते हैं वे हैं — अर्णवः (सागर), उष्ट्रः (ऊँट), वज्रम् (इन्द्र का शस्त्र या हीरा), जाह्नवी (गंगा), सप्तर्षिः (सात महान ऋषियों का समूह), राष्ट्रम् (देश), संयमः (आत्म-नियन्त्रण) और पङ्कजम् (कमल)। इन शब्दों के संस्कृत अर्थ और हिंदी अर्थ दोनों याद रखें।
परियोजना कार्य में क्या करना है और उसे कैसे पूरा करें?
इस पाठ का परियोजना कार्य यह है कि पहले दो पाठों को छोड़कर पुस्तक के शेष पाठों में से दस ऐसे शब्द ढूँढें जिनमें संयुक्त-व्यञ्जन हों और फिर उनका वर्ण-वियोग करें। उदाहरण के लिए — वृक्षः (तृतीय-पाठे) = व् + ऋ + क् + ष् + अ + ः। यह कार्य पुस्तक के आगे के पाठ पढ़ते हुए करते जाएँ और एक अलग पृष्ठ पर लिखते रहें।
क्या कक्षा 6 संस्कृत के पाठ 2 का संबंध पाठ 1 से है — दोनों एक साथ पढ़ना ज़रूरी है?
हाँ, पाठ 1 और पाठ 2 का आपस में गहरा संबंध है। पाठ 1 में वर्णमाला, स्वर और व्यञ्जन की बुनियाद तैयार होती है। पाठ 2 उसी नींव पर आगे बढ़ता है और बताता है कि व्यञ्जन आपस में कैसे जुड़ते हैं। इसलिए जो छात्र पाठ 1 अच्छी तरह समझ चुके हैं उन्हें पाठ 2 बहुत सरल लगेगा।
हंसः, संवादः, प्रातःकालः जैसे शब्दों में विसर्ग भी संयुक्त-व्यञ्जन का हिस्सा है — यह कैसे समझें?
इस पाठ में विसर्ग के साथ आने वाले संयुक्त रूप जैसे ःख (दुःखम्) और ःक (प्रातःकालः) भी अभ्यास में दिए गए हैं। विसर्ग (ः) एक अयोगवाह वर्ण है और जब यह अगले व्यञ्जन से मिलता है तो वर्ण-वियोग में उसे अलग लिखा जाता है। जैसे — दुःखम् = द् + उ + ः + ख् + अ + म्। यह परीक्षा में गलती होने वाला बिंदु है इसलिए ध्यान से याद रखें।
