एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान भाग 1 अध्याय 2 मौसम को समझना
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 2 भाग 1 मौसम को समझना – अभ्यास के प्रश्न-उत्तर तथा अतिरिक्त प्रश्नों के हल हिंदी और अंग्रेजी मीडियम में यहाँ से मुफ्त प्राप्त किए जा सकते हैं। एनसीईआरटी द्वारा सत्र 2026-27 के लिए जारी की गई नई कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान भाग-1 की पाठ्यपुस्तक “भारत और उसके आगे” का दूसरा अध्याय “मौसम को समझना” पर आधारित है। इस अध्याय में विद्यार्थियों को मौसम की परिभाषा, वायुमंडल की परतें, मौसम के पाँच प्रमुख तत्वों – तापमान, वर्षण, वायुमंडलीय दाब, पवन और आर्द्रता – तथा इन्हें मापने वाले उपकरणों (थर्मामीटर, रेन गेज, बैरोमीटर, एनीमोमीटर, हाइग्रोमीटर) के बारे में विस्तार से बताया गया है। साथ ही इसमें मौसम केंद्र, स्वचालित मौसम केंद्र, प्रकृति के संकेतों से मौसम का पूर्वानुमान लगाने की पारंपरिक विधियाँ और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की भूमिका को भी सरल भाषा में समझाया गया है। यह अध्याय बच्चों को दैनिक जीवन में मौसम की भविष्यवाणी के महत्व को समझने और वैज्ञानिक सोच विकसित करने में मदद करता है।
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान पाठ 2 के त्वरित लिंक:
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एनसीईआरटी कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान भाग 1 अध्याय 2 समाधान
कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान पाठ 2 अभ्यास प्रश्न उत्तर
पेज 27 – महत्वपूर्ण प्रश्न
1. हम अपने आस-पास के मौसम का आकलन एवं निरीक्षण किस प्रकार कर सकते हैं?
उत्तर:
हम मौसम का आकलन और निरीक्षण निम्नलिखित तरीकों से कर सकते हैं:
- अनुभव से: हम अपने शरीर पर गर्मी, ठंड, हवा या नमी को महसूस करके।
- आँखों से: आसमान में बादलों को देखकर, वर्षा या बर्फबारी को देखकर।
- उपकरणों से: तापमान को तापमापी से, वर्षा को वर्षामापी से और हवा को पवन वेगमापी से मापकर।
- प्रकृति के संकेतों से: जैसे, पक्षियों को कम ऊँचाई पर उड़ते देखकर या मेंढकों की टर्राहट सुनकर।
2. भारी वर्षा, तूफान, सूखा और ताप लहर (हीट वेव) जैसी घटनाओं के लिए तैयार रहने में मौसम की भविष्यवाणियाँ किस प्रकार हमारी सहायता करती हैं?
उत्तर:
मौसम की भविष्यवाणियाँ हमें इन घटनाओं के लिए तैयार रहने में बहुत मदद करती हैं:
- जीवन रक्षा: तूफान (चक्रवात) और भारी वर्षा की चेतावनी मिलने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा सकता है।
- कृषि: किसान वर्षा या सूखे के पूर्वानुमान के अनुसार बुवाई या कटाई की योजना बना सकते हैं।
- यात्रा: पायलट, नाविक और मछुआरे यात्राएँ टाल सकते हैं या मार्ग बदल सकते हैं।
- ऊर्जा/स्वास्थ्य: ताप लहर की चेतावनी मिलने पर लोग पर्याप्त पानी पीने और धूप से बचने के लिए तैयार रहते हैं।
पेज 28 – आइए पता लगाएँ
आप अपनी स्थानीय भाषा में मौसम का वर्णन करने के लिए किन-किन शब्दों का प्रयोग करते हैं? हॉट, कोल्ड, वॉर्म, चिली, क्रिस्प, प्लेजेंट, आदि सामान्यत: अंग्रेज़ी भाषा में उपयोग किए जाने वाले शब्द हैं।
उत्तर:
मेरी स्थानीय भाषा (हिंदी) में मौसम का वर्णन करने के लिए कई शब्द उपयोग होते हैं, जैसे—गरम, ठंडा, सुहावना, उमस भरा, ठिठुरन, तपता हुआ, हल्की ठंड, तेज गर्मी, बादलों भरा, बारिश वाला, शुष्क और हवादार। ये शब्द हमें मौसम की स्थिति को आसानी से समझाने में मदद करते हैं।
पेज 29 – आइए पता लगाएँ
आपके अनुसार मौसम के अधिक सटीक आकलन के क्या लाभ हो सकते हैं? (संकेत – कुछ घंटों अथवा कुछ दिन पहले मौसम के विषय में पूर्व जानकारी आपको कुछ गतिविधियों की योजना बनाने में किस प्रकार सहायता करेगी?)
उत्तर:
- गतिविधियों की योजना: यात्रा, खेल या पिकनिक की बेहतर योजना बनाई जा सकती है।
- आपदा प्रबंधन: चक्रवात और बाढ़ के आने से पहले तैयारी का समय मिलता है।
- फसल सुरक्षा: किसान अपनी फसलों को मौसम के अनुसार सुरक्षित कर सकते हैं।
पेज 30 – आइए पता लगाएँ
अपने आस-पड़ोस के बुजुर्गों से बात कीजिए और उनसे पूछिए कि वे मौसम का पूर्वानुमान कैसे लगाते हैं? वे किन संकेतकों का अवलोकन करते हैं? अपनी क्षेत्रीय भाषा में प्रचलित कुछ कहावतें, जो मौसम के पूर्वानुमान से संबंधित हों, उन्हें लिखिए।
उत्तर:
बुजुर्ग लोग अक्सर अपने अनुभवों और प्रकृति के संकेतों से मौसम का अनुमान लगाते हैं। यहाँ कुछ सामान्य तरीके और कहावतें दी गई हैं:
- बुजुर्ग मौसम का अनुमान (संकेत):
हवा की दिशा: अगर हवा पुरवाई (पूर्व दिशा से) चल रही हो, तो नमी और बारिश आने की संभावना होती है।
पक्षियों की उड़ान: अगर चिड़िया बहुत नीचे उड़ रही हैं, तो बारिश हो सकती है।
शरीर में दर्द: कुछ बुजुर्गों को बारिश आने से पहले जोड़ों (घुटनों) में दर्द महसूस होने लगता है।
आसमान का रंग: सुबह के समय आसमान का लाल होना बारिश का संकेत माना जाता है। - मौसम से जुड़ी कुछ प्रसिद्ध हिंदी कहावतें:
“चींटी ले अण्डे, तो वर्षा के डंडे।” (अर्थात: जब चींटियाँ अपने अंडे लेकर सुरक्षित जगह जाने लगें, तो समझ लो जोर से बारिश होने वाली है)।
“सावन के बादलों का क्या भरोसा, कभी धूप तो कभी छाँव। ”
काला बादल डरावना, भूरा बादल बरसावना।” (काले बादल सिर्फ डराते हैं, लेकिन भूरे बादल अक्सर बरसते हैं)।
पेज 32 – आइए पता लगाएँ
यहाँ मध्य प्रदेश में एक नगर के तापमान को एक तालिका द्वारा प्रस्तुत किया गया है। सप्ताह में अधिकतम और न्यूनतम तापमान कितना है? ताप सीमा (रेंज) का आकलन कीजिए।
| दिनांक | अधिकतम तापमान (सेल्सियस) | न्यूनतम तापमान (सेल्सियस) |
|---|---|---|
| 28.02.2025 | 29 | 16 |
| 01.03.2025 | 30 | 15 |
| 02.03.2025 | 31 | 17 |
| 03.03.2025 | 32 | 18 |
| 04.03.2025 | 30 | 17 |
| 05.03.2025 | 28 | 14 |
| 06.03.2025 | 29 | 15 |
उत्तर:
तालिका को देखने पर:
- सप्ताह का अधिकतम तापमान: 32°C (जो 03 मार्च को दर्ज किया गया)।
- सप्ताह का न्यूनतम तापमान: 14°C (जो 05 मार्च को दर्ज किया गया)।
- ताप सीमा = (सप्ताह का सबसे गर्म तापमान) – (सप्ताह का सबसे ठंडा तापमान)
= 32 – 14 = 18°C
कृष्णन और आमिर के बीच हुए वार्तालाप को याद करें। अगर कृष्णन कहता है कि चेन्नई में तापमान 20 डिग्री सेल्सियस है और उसे थोड़ी ठंड लग रही है, तो उसके और आमिर के पास कोई साधन होगा जिससे वे दोनों इसे समझ सकते हों। आमिर द्वारा कृष्णन के कथन पर दी गई प्रतिक्रिया के बारे में आप क्या सोचते हैं? (संदर्भ: कृष्णन चेन्नई में 20°C को ठंड बता रहा है।)
उत्तर:
प्रतिक्रिया का कारण: मौसम का अनुभव ‘सापेक्ष’ होता है। चेन्नई हमेशा गर्म रहता है, इसलिए वहाँ के लोगों (कृष्णन) के लिए 20°C का गिरता तापमान ठंड जैसा है। वहीं, कश्मीर में रहने वाले आमिर के लिए 20°C एक गर्म और सुहावना तापमान है क्योंकि वह माइनस डिग्री वाली ठंड का आदी है।
इसीलिए हमें ‘ठंड’ या ‘गर्मी’ जैसे शब्दों के बजाय डिग्री सेल्सियस जैसे मानक पैमाने की जरूरत होती है ताकि दोनों सही स्थिति समझ सकें।
पेज 34 – आइए पता लगाएँ

ऊपर दर्शाए गए चित्रानुसार एक वर्षामापी बनाइए। वर्षामापी को खुले स्थान में रखिए और ऐसी वस्तुओं से दूर रखिए, जो वर्षा के जल संग्रहण में बाधक हो सकती हैं। यह भी सुनिश्चित कीजिए कि वर्षा मापी समतल सतह पर हो और हवा से झुके अथवा गिरे नहीं। मापक की सहायता से वर्षा की मात्रा को प्रतिदिन एक ही समय पर एक महीने तक अभि लेखित कीजिए (यदि हिमपात होता है, तो उसे मापने से पहले पिघलने दीजिए)। उस महीने के प्रत्येक सप्ताह में होने वाली औसत वर्षा की गणना कीजिए तथा सप्ताह दर सप्ताह में होने वाली वर्षा के अंतर पर टिप्पणी किजिए।
उत्तर:
वर्षामापी को खुले और समतल स्थान पर रखकर प्रतिदिन एक ही समय पर वर्षा की मात्रा दर्ज की जाती है। एक महीने के आंकड़ों से प्रत्येक सप्ताह की औसत वर्षा निकाली जाती है। तुलना करने पर पता चलता है कि कुछ सप्ताह में अधिक वर्षा हुई, जबकि कुछ में कम। इससे वर्षा के बदलाव और पैटर्न को समझने में सहायता मिलती है।
पेज 35 – आइए विचार करें
आपके अनुसार वायुमंडलीय दाब को मापना क्यों महत्वपूर्ण है? वे कौन हैं जिन्हें इस प्रकार के मापनों की सर्वाधिक आवश्यकता होती है?
उत्तर:
वायुमंडलीय दाब को मापना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि:
- मौसम का पूर्वानुमान: दाब में बदलाव मौसम बदलने का संकेत देता है। अगर दाब अचानक गिरता है (निम्न दाब), तो इसका मतलब है कि तूफान, आँधी या बारिश आने वाली है।
- स्वास्थ्य सुरक्षा: ऊँचे पहाड़ों पर दाब कम होता है, जिससे ऑक्सीजन कम हो जाती है। इसे मापने से हम साँस लेने में दिक्कत जैसी समस्याओं के लिए पहले से तैयार हो सकते हैं।
वायुमंडलीय दाब के माप की सबसे ज्यादा जरूरत इन्हें होती है:
- पायलट: हवाई जहाज उड़ाते समय उन्हें हवा के दबाव की सही जानकारी चाहिए होती है।
- पर्वतारोही: ऊँचे पहाड़ों पर जाने वाले लोगों को, ताकि वे ऑक्सीजन की कमी के लिए तैयार रहें।
- मौसम वैज्ञानिक: ताकि वे हमें तूफान या चक्रवात की चेतावनी दे सकें।
- नाविक: समुद्र में तूफान आने का पता लगाने के लिए।
पेज 36 – आइए विचार करें
क्या आपने बीजों को इस प्रकार से पवन में उड़ते देखा है? अगर पवन न होती तो इन बीजों का क्या होता?

उत्तर:
हाँ, मैंने देखा है। यदि पवन (हवा) नहीं होती, तो इन बीजों का क्या होता, इसके मुख्य बिंदु यहाँ दिए गए हैं:
- फैलाव नहीं होता: बीज हवा में उड़कर दूर जाने के बजाय सीधे अपने मूल पौधे के नीचे ही गिर जाते।
- भीड़ और संघर्ष: एक ही जगह पर बहुत सारे पौधे उगने की कोशिश करते, जिससे उनके बीच धूप, पानी और जगह के लिए आपस में संघर्ष होता।
- विकास में बाधा: संसाधनों की कमी के कारण नए पौधे ठीक से विकसित नहीं हो पाते और उनमें से कई जीवित नहीं रह पाते।
पवन बीजों को दूर-दूर तक फैलाने में मदद करती है, जिससे नए जंगल उगते हैं और पौधे स्वस्थ रहते हैं।
पेज 37 – आइए पता लगाएँ
कोच्चि और जयपुर में कहाँ अधिक आर्द्रता होने की संभावना है? इसके बारे में आप क्या सोचते हैं? आप अनुमान लगा सकते हैं कि समुद्र के निकट होने के कारण कोच्चि में जयपुर की तुलना में अधिक आर्द्रता होगी। किंतु हम निश्चित रूप से इसे कैसे जान सकते हैं? यदि हमे कोच्चि और मंगलुरू के बीच आर्द्रता की तुलना करनी हो, तो हम यह कैसे करेंगे? अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।
उत्तर:
- कोच्चि में जयपुर की तुलना में अधिक आर्द्रता होने की संभावना है।
कारण: कोच्चि समुद्र के तट पर स्थित है। समुद्र के पानी के वाष्पीकरण के कारण वहाँ की हवा में जलवाष्प की मात्रा अधिक होती है, जिससे उमस और नमी बनी रहती है। इसके विपरीत, जयपुर राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में है और समुद्र से दूर है, इसलिए वहाँ की हवा सूखी होती है। - केवल अनुमान लगाने से हम सटीक तुलना नहीं कर सकते, विशेषकर जब दो शहर (जैसे कोच्चि और मंगलुरू) दोनों ही समुद्र के पास हों।
मापने का तरीका: आर्द्रता को सटीक रूप से मापने के लिए हम एक विशेष उपकरण का उपयोग करते हैं जिसे आर्द्रतामापी कहते हैं।
विधि: हम आर्द्रतामापी का उपयोग करके कोच्चि और मंगलुरू दोनों जगहों पर हवा में नमी का प्रतिशत मापेंगे। जिस शहर में हाइग्रोमीटर अधिक रीडिंग दिखाएगा, वहाँ आर्द्रता अधिक होगी।
पेज 38 – आइए विचार करें
यदि दिल्ली में आर्द्रता 52 प्रतिशत और कोच्चि में 84 प्रतिशत हो, तो दोनों स्थानों में से कहाँ गीले कपड़ों के जल्दी सूखने की संभावना है? यदि दोनों स्थानों पर तापमान समान है, तो कहाँ आपको अधिक पसीना आने की संभावना है?
उत्तर:
- दिल्ली में गीले कपड़े जल्दी सूखेंगे।
कारण: दिल्ली में आर्द्रता (52%) कम है। जब आर्द्रता कम होती है, तो हवा में नमी कम होती है, जिससे वह कपड़ों से पानी को तेजी से सोख लेती है (वाष्पीकरण तेज होता है)। कोच्चि में आर्द्रता (84%) बहुत अधिक है, जिसका अर्थ है कि हवा पहले से ही पानी से भरी हुई है, इसलिए वहाँ कपड़े धीरे सूखेंगे। - कोच्चि में आपको अधिक पसीना आने (या पसीना महसूस होने) की संभावना है।
कारण: कोच्चि में उच्च आर्द्रता (84%) है। जब हवा में नमी ज्यादा होती है, तो हमारे शरीर का पसीना जल्दी वाष्पित नहीं हो पाता (सूखता नहीं है)। पसीना न सूखने के कारण हमें शरीर पर चिपचिपाहट और अधिक गर्मी महसूस होती है। जबकि दिल्ली की सूखी हवा में पसीना तुरंत सूख जाएगा, जिससे शरीर को ठंडक मिलेगी।
पेज 41 – आइए पता लगाएँ
विभिन्न परिस्थितियों में मौसम का पूर्वानुमान किस प्रकार सहायक हैं, इसकी चर्चा समूह में कीजिए। एक सूची बनाइए और बनाने के बाद अपने निकट बैठे समूह के साथ इसे साझा कर चर्चा कीजिए। आप अलग-अलग परिस्थितियों की कितनी श्रेणियों की पहचान कर सकते हैं?
उत्तर:
मौसम का पूर्वानुमान हमारे जीवन के कई क्षेत्रों में बहुत मददगार होता है। हम इसे निम्नलिखित मुख्य श्रेणियों में बाँट सकते हैं:
- कृषि: किसानों के लिए मौसम की जानकारी सबसे जरूरी है। वे बारिश के पूर्वानुमान के आधार पर ही यह तय करते हैं कि बीज कब बोने हैं, सिंचाई कब करनी है या फसल कब काटनी है।
- सुरक्षा और आपदा प्रबंधन: बाढ़, तूफान, चक्रवात या भारी बारिश की चेतावनी पहले मिलने से सरकार और लोग सतर्क हो जाते हैं। इससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने और जान-माल की रक्षा करने में मदद मिलती है।
- दैनिक जीवन की योजना: हम घर से निकलने से पहले तय कर पाते हैं कि छाता या रेनकोट साथ लेना है या नहीं। स्कूल के कार्यक्रम, खेल-कूद या पिकनिक की योजना मौसम देखकर ही बनाई जाती है।
- यातायात और परिवहन: पायलटों को उड़ान भरने के लिए हवा की गति और तूफानों की जानकारी चाहिए होती है। नाविकों और जहाजों के लिए समुद्र में उठने वाली लहरों और तूफान की जानकारी जरूरी है।
- मछुआरों के लिए: यदि समुद्र में तूफान या ऊँची लहरें उठने की संभावना होती है, तो मछुआरों को पहले ही चेतावनी दे दी जाती है कि वे समुद्र में मछली पकड़ने न जाएँ।
- स्वास्थ्य: अत्यधिक गर्मी (लू) या कड़ाके की ठंड (शीत लहर) की चेतावनी मिलने पर बुजुर्ग और बच्चे अपनी सेहत का ध्यान रख सकते हैं और घर से बाहर निकलना कम कर सकते हैं।
आप उस दिन क्या-क्या घटित होते हुए देखते हैं? वे कौन-कौन सी परिस्थितियाँ हैं, जिनके बारे में भारतीय मौसम विभाग लोगों को सचेत कर रहा है?
उत्तर:
उस दिन भारत में दो विपरीत मौसम परिस्थितियाँ एक साथ घट रही हैं। उत्तर भारत में भीषण गर्मी है, जबकि दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में बारिश हो रही है। मौसम विभाग मुख्य रूप से ‘ताप लहर’ और ‘भारी वर्षा/गरज और चमक’ के बारे में लोगों को सचेत कर रहा है।
किन राज्यों में चेतावनी के संकेत हैं?
उत्तर:
मानचित्र में लाल और नारंगी रंग चेतावनी दर्शाते हैं। चेतावनी के संकेत मुख्य रूप से इन राज्यों में हैं:
• गर्मी के लिए: राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश।
• वर्षा के लिए: केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक (तटीय क्षेत्र) और पूर्वोत्तर राज्य (जैसे मेघालय, असम, त्रिपुरा)
भारत के कौन-से भाग भीषण मौसमी घटनाओं से मुक्त हैं?
उत्तर:
मानचित्र में हरे रंग वाले क्षेत्र किसी भी चेतावनी से मुक्त हैं। इसमें मुख्य रूप से मध्य भारत (जैसे छत्तीसगढ़, ओडिशा, विदर्भ, पूर्वी मध्य प्रदेश) और लद्दाख के क्षेत्र शामिल हैं।
किन राज्यों में ताप लहर की संभावना है?
उत्तर:
राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में ताप लहर की प्रबल संभावना है। यहाँ मानचित्र में थर्मामीटर (तापमान) के निशान बने हुए हैं।
त्रिपुरा और लक्षद्वीप में चेतावनी के क्या कारण हैं?
उत्तर:
- त्रिपुरा: यहाँ ‘भारी वर्षा’ और आंधी-तूफान के कारण चेतावनी दी गई है।
- लक्षद्वीप: यह समुद्र में स्थित द्वीप है, यहाँ ‘तेज धरातलीय हवाएँ’ और ‘उष्ण और आर्द्र’ मौसम या भारी बारिश के कारण चेतावनी है।
पेज 42 – प्रश्न और क्रियाकलाप
1. मौसम के तत्वों का उनके मापने वाले उपकरणों के साथ मिलान कीजिए।

उत्तर:

2. ज्योत्सना यह सोच रही है कि जून में मुंबई में अपनी विद्यालय यात्रा के समय कौन-से कपड़े साथ ले जाए। वह मौसम के पूर्वानुमान को देखती है, जो 29 डिग्री सेल्सियस और 84 प्रतिशत आर्द्रता की भविष्यवाणी करता है। आप उसको क्या सलाह देंगे?
उत्तर:
ज्योत्सना को हमारी सलाह निम्नलिखित होगी:
- हल्के सूती कपड़े: उसे हल्के रंग के और ढीले-ढाले सूती कपड़े साथ ले जाने चाहिए।
कारण: 29°C तापमान के साथ 84% आर्द्रता का अर्थ है कि हवा में बहुत नमी होगी। ऐसे मौसम में पसीना बहुत आता है और हवा में नमी होने के कारण वह जल्दी नहीं सूखता। सूती कपड़े पसीना सोख लेते हैं और शरीर को ठंडक पहुँचाते हैं। - छाता या बरसाती: उसे अपने साथ एक छाता या रेनकोट जरूर रखना चाहिए।
कारण: जून का महीना मुंबई में मानसून के आगमन का समय होता है। 84% आर्द्रता भी इस बात का संकेत है कि बारिश होने की प्रबल संभावना है। - सिंथेटिक कपड़ों से बचें: उसे नायलॉन या सिंथेटिक कपड़े नहीं ले जाने चाहिए क्योंकि वे पसीना नहीं सोखते और ऐसे उमस भरे मौसम में त्वचा के लिए आरामदायक नहीं होते।
3. कल्पना कीजिए कि आपका एक छोटा समूह वर्षामापी यंत्र स्थापित कर रहा है। यहाँ उसे स्थापित करने के स्थान के कुछ विकल्प दिए गए हैं –
1. विद्यालय का सब्जी उद्यान।
2. विद्यालय भवन की छत।
3. ऊँचे चबूतरे के साथ खुला मैदान।
4. विद्यालय परिसर की दीवार।
5. विद्यालय प्रयोगशाला का बरामदा।
अपने समूह के साथ चर्चा कीजिए और सर्वाधिक उपयुक्त स्थान का निर्धारण कीजिए। अपने निर्णय के कारणों को लिखिए।
उत्तर:
सर्वाधिक उपयुक्त स्थान: विकल्प 3 – ऊँचे चबूतरे के साथ खुला मैदान।
कारण:
हमें वर्षामापी स्थापित करने के लिए इस स्थान को चुनने के निम्नलिखित कारण हैं:
1. कोई रुकावट नहीं: वर्षामापी को हमेशा खुले स्थान में रखना चाहिए जहाँ आसमान साफ हो। खुले मैदान में कोई पेड़, दीवार या छत नहीं होती, जिससे बारिश का पानी सीधा कीप में गिर सके। यदि इसे बरामदे या दीवार के पास रखेंगे, तो इमारत बारिश को रोक सकती है।
2. छींटों से बचाव: इसे ऊँचे चबूतरे पर रखना सबसे अच्छा है। यदि इसे सीधे जमीन पर रखा जाए, तो जमीन से टकराकर उछलने वाले पानी की बूंदें इसके अंदर जा सकती हैं, जिससे माप गलत हो सकता है।
3. स्थिरता: एक चबूतरा समतल और ठोस सतह प्रदान करता है। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि यंत्र हवा से झुके या गिरे नहीं। छत पर हवा बहुत तेज हो सकती है और दीवार पर इसे संतुलित करना मुश्किल हो सकता है।
4. अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
- विद्यालय प्रयोगशाला का बरामदा: ऊपर छत होने के कारण इसमें बारिश का पानी नहीं गिरेगा।
- विद्यालय भवन की छत: यहाँ हवा की गति बहुत तेज हो सकती है, जो बारिश की बूंदों को कीप से दूर उड़ा सकती है, जिससे माप कम आएगा।
- सब्जी उद्यान: पौधों की पत्तियाँ बारिश के पानी को रोक सकती हैं।
4. नीचे भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, जम्मू और कश्मीर से ली गई एक सारणी है। उपलब्ध आँकड़ों को देखते हुए, दिखाए गए दिन को, जम्मू और कश्मीर के विभिन्न भागों में मौसम की स्थिति को दर्ज करने हेतु एक लघु आलेख लिखिए। (संकेत – ताप सीमा, अधिकतम और न्यूनतम तापमान, आर्द्रता, वर्षा आदि को सम्मिलित करें।)

उत्तर:
दैनिक मौसम रिपोर्ट: जम्मू और कश्मीर
दिनांक: 01-02-2024 (1 फरवरी 2024)
दी गई सारणी के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर, 1 फरवरी 2024 को जम्मू और कश्मीर में मौसम की स्थिति का विवरण इस प्रकार है:
- सामान्य स्थिति: पूरे क्षेत्र में कड़ाके की ठंड और अत्यधिक नमी वाला मौसम है। आसमान में बादल छाए रहने और बारिश या बर्फबारी होने की स्थिति बनी हुई है।
- तापमान: सबसे ठंडा स्थान: ‘गुलमर्ग’ सबसे ठंडा स्थान रहा, जहाँ अधिकतम तापमान भी शून्य से नीचे (-2.6°C) और न्यूनतम तापमान -7.6°C दर्ज किया गया।
- सबसे गर्म स्थान: ‘मुजफ्फराबाद’ में दिन का तापमान अन्य स्थानों की तुलना में थोड़ा अधिक (8.5°C) रहा।
- शून्य से नीचे तापमान: अधिकांश स्थानों (काजीगुंड, पहलगाम, कुपवाड़ा, कूकेरंग और गुलमर्ग) पर रात का तापमान (न्यूनतम) 0°C से नीचे (माइनस में) चला गया है, जो जमा देने वाली ठंड को दर्शाता है।
- वर्षण और हिमपात: काजीगुंड, पहलगाम, कूकेरंग और गुलमर्ग में वर्षा के साथ-साथ बर्फबारी भी दर्ज की गई है। काजीगुंड में सर्वाधिक 10.0 सेमी बर्फ गिरी। श्रीनगर और कुपवाड़ा में हल्की बारिश हुई है लेकिन बर्फबारी नहीं (0.0 सेमी)।
- आर्द्रता: हवा में नमी की मात्रा बहुत अधिक है। सभी केंद्रों पर आर्द्रता 89% से लेकर 100% तक है। गुलमर्ग में शाम के समय 100% आर्द्रता दर्ज की गई, जिसका अर्थ है कि हवा पूरी तरह से जलवाष्प से संतृप्त है, जिससे वहां घना कोहरा होने की संभावना है।
1 फरवरी 2024 को जम्मू-कश्मीर में गंभीर शीतकालीन मौसम था, जहाँ भारी ठंड, नमी और पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी ने जनजीवन को प्रभावित किया होगा।
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 2 से परीक्षा के लिए अतिरिक्त प्रश्न उत्तर
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान पाठ 2 पर आधारित अतिलघुउत्तरीय प्रश्न उत्तर
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
1. मौसम किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंकिसी समय और स्थान विशेष पर पृथ्वी की वायुमंडलीय दशाओं को मौसम कहते हैं।
2. क्षोभमंडल की एक मुख्य विशेषता बताइए।
उत्तर देखेंयह पृथ्वी की सबसे निकटतम परत है जहाँ लगभग सभी मौसम संबंधी घटनाएँ घटित होती हैं।
3. वर्षण के कोई दो रूप लिखिए।
उत्तर देखेंवर्षण के रूपों में वर्षा, हिम, सहिमवृष्टि या ओले सम्मिलित हैं।
4. वायुमंडलीय दाब को किस यंत्र से मापा जाता है?
उत्तर देखेंवायुमंडलीय दाब को वायुदाबमापी (बैरोमीटर) से मापा जाता है।
5. पवन वेगमापी का क्या कार्य है?
उत्तर देखेंयह पवन की गति को मापता है और बताता है कि पवन कितनी तेज चल रही है।
6. आर्द्रता क्या है?
उत्तर देखेंवायु में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा को आर्द्रता कहते हैं।
7. ताप सीमा कैसे निकाली जाती है?
उत्तर देखेंदिन के अधिकतम तापमान में से न्यूनतम तापमान को घटाकर ताप सीमा निकाली जाती है।
8. वात दिक्सूचक का क्या उपयोग है?
उत्तर देखेंयह यंत्र पवन की दिशा बताने के लिए उपयोग किया जाता है।
9. भारत मौसम विज्ञान विभाग का आदर्श वाक्य क्या है?
उत्तर देखेंइसका आदर्श वाक्य ‘आदित्यात् जायते वृष्टि’ है, जिसका अर्थ है ‘सूर्य से वर्षा होती है’।
10. पहाड़ों पर सांस लेने में कठिनाई क्यों होती है?
उत्तर देखेंऊँचाई पर वायुमंडलीय दाब कम हो जाता है और ऑक्सीजन की मात्रा घट जाती है।
11. सापेक्षिक आर्द्रता क्या है?
उत्तर देखेंवायु की आर्द्रता को प्रतिशत के रूप में मापना सापेक्षिक आर्द्रता कहलाता है।
12. स्वचालित मौसम केंद्र क्या है?
उत्तर देखेंयह एक स्वचालित तंत्र है जो सेंसरों का उपयोग करके मौसम के आँकड़ों को मापता और दर्ज करता है।
13. मेंढक मौसम के बारे में क्या संकेत देते हैं?
उत्तर देखेंमेंढकों की तेज टरटराहट आने वाली वर्षा का संकेत प्रदान करती है।
14. वायुयान चालकों के लिए वात शंकु क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर देखेंयह उन्हें उड़ान भरते और उतरते समय पवन की दिशा का संकेत देता है।
15. किस तापमान पैमाने पर 15°C को 59°F लिखा जाता है?
उत्तर देखेंयह फॉरेनहाइट पैमाने पर होता है।
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान पाठ 2 पर आधारित लघुउत्तरीय प्रश्न उत्तर
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. मौसम के पूर्वानुमान के लिए प्रकृति के किन संकेतों का अवलोकन किया जा सकता है?
उत्तर देखेंपक्षियों का कम ऊँचाई पर उड़ना, चींटियों का अंडे ले जाना, और चीड़ के शंकुओं का बंद होना वर्षा या तूफान का संकेत देते हैं। लोग इन संकेतों से मौसम का अनुमान लगाते हैं।
2. वर्षामापी की कार्यप्रणाली समझाइए।
उत्तर देखेंवर्षामापी में एक संग्राहक कीप होती है जो वर्षा के जल को एक बेलनाकार नली में इकट्ठा करती है। नली पर एक मापक होता है जिससे एकत्रित जल की गहराई को मापकर वर्षा की मात्रा ज्ञात की जाती है।
3. ऊँचाई वाले स्थानों पर जाने पर शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर देखेंऊँचाई पर वायुदाब और ऑक्सीजन कम होने के कारण लोगों को साँस फूलना, चक्कर आना या थकावट महसूस हो सकती है। शरीर को अधिक परिश्रम करना पड़ता है।
4. पवन और वायुदाब के बीच क्या संबंध है?
उत्तर देखेंपवन हमेशा उच्च वायुदाब वाले क्षेत्र से निम्न वायुदाब वाले क्षेत्र की ओर चलती है। वायुदाब में अंतर ही पवन की गति और दिशा निर्धारित करता है।
5. आर्द्रता हमारे पसीने के सूखने को कैसे प्रभावित करती है?
उत्तर देखेंयदि वायु में आर्द्रता अधिक है, तो जल धीरे-धीरे वाष्पित होता है। इसलिए, आर्द्र मौसम में गीले कपड़े या पसीना जल्दी नहीं सूखता और हमें चिपचिपाहट महसूस होती है।
6. मौसम केंद्र का क्या महत्व है?
उत्तर देखेंमौसम केंद्र में तापमान, वर्षा, वायुदाब आदि मापने के सभी उपकरण होते हैं। यहाँ से नियमित अंतराल पर आँकड़े लिए जाते हैं जो मौसम के मानचित्रण और सटीक पूर्वानुमान में मदद करते हैं।
7. ताप लहर और शीत लहर क्या हैं?
उत्तर देखेंयह मौसम की चरम स्थितियां हैं। ताप लहर अत्यधिक गर्म मौसम को दर्शाती है, जबकि शीत लहर अत्यधिक ठंडे मौसम का संकेत है। इनके बारे में मौसम विभाग चेतावनी जारी करता है।
8. चीड़ के शंकु आर्द्रता के प्रति कैसे संवेदनशील होते हैं?
उत्तर देखेंचीड़ के शंकु वातावरणीय आर्द्रता से प्रभावित होते हैं। आर्द्र मौसम में बीजों की सुरक्षा के लिए वे बंद हो जाते हैं और शुष्क मौसम में बीजों को फैलाने के लिए खुल जाते हैं।
9. वात दिक्सूचक यंत्र कैसे काम करता है?
उत्तर देखेंइसमें एक घूमने वाला फलक होता है। जब हवा चलती है, तो वह इसकी पूँछ पर धक्का मारती है, जिससे इसका सूचक (पॉइंटर) पवन जिस दिशा से आ रही है, उस ओर मुड़ जाता है।
10. वायुमंडल को ‘केक’ के समान क्यों कहा गया है?
उत्तर देखेंपृथ्वी के वायुमंडल की तुलना अनेक परतों वाले केक से की जाती है क्योंकि इसमें भी केक की तरह एक के ऊपर एक कई परतें (जैसे क्षोभमंडल, समतापमंडल) होती हैं।
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान पाठ 2 पर आधारित दीर्घउत्तरीय प्रश्न उत्तर
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. मौसम के प्रमुख तत्व कौन-कौन से हैं? संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर देखेंमौसम के प्रमुख तत्व निम्नलिखित हैं:
1. तापमान: वायुमंडल का गर्म या ठंडा होना।
2. वर्षण: आकाश से गिरने वाला जल (वर्षा, हिम, ओले)।
3. वायुमंडलीय दबाव: वायु द्वारा पृथ्वी की सतह पर लगाया गया भार।
4. पवन: वायु की गति और दिशा।
5. आर्द्रता: वायु में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा।
ये सभी मिलकर किसी स्थान के मौसम को परिभाषित करते हैं।
2. क्षोभमंडल हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर देखेंक्षोभमंडल पृथ्वी की सतह के सबसे निकट (6-18 किमी) वाली परत है। यह हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि:
1. सभी स्थलीय वनस्पतियाँ और प्राणी (मानव सहित) यहीं निवास करते हैं और सांस लेते हैं।
2. लगभग सभी मौसम संबंधी घटनाएँ जैसे वर्षा, बादल, आंधी आदि इसी परत में घटित होती हैं।
3. यह ध्रुवों पर पतली और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में मोटी होती है।
3. स्वचालित मौसम केंद्र आधुनिक समय में क्यों उपयोगी हैं?
उत्तर देखेंस्वचालित मौसम केंद्र आधुनिक तकनीक पर आधारित हैं जो बिना मानवीय हस्तक्षेप के काम करते हैं। ये सेंसरों के माध्यम से तापमान, आर्द्रता, वायु गति और वर्षा के सटीक आँकड़े रिकॉर्ड करते हैं। इनका उपयोग दुर्गम स्थानों पर भी किया जा सकता है जहाँ इंसान का रहना मुश्किल है। ये कृषि, विमानन और आपदा प्रबंधन के लिए समय पर चेतावनी देने में बहुत सहायक हैं।
4. वायुमंडलीय दबाव का मौसम और मानव स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर देखेंवायुमंडलीय दबाव मौसम को प्रभावित करता है; निम्न दाब तूफान या चक्रवात का कारण बन सकता है, जबकि उच्च दाब साफ मौसम लाता है। मानव स्वास्थ्य पर भी इसका गहरा असर होता है। ऊँचाई पर दाब कम होने से ऑक्सीजन घट जाती है, जिससे सांस फूलना, चक्कर आना और थकावट जैसी समस्याएं होती हैं। शरीर को समायोजित होने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है।
5. मौसम का पूर्वानुमान क्यों आवश्यक है? इसके क्या लाभ हैं?
उत्तर देखेंमौसम का पूर्वानुमान हमें भविष्य के मौसम (वर्षा, तूफान, तापमान) के बारे में पहले से जानकारी देता है। इसके कई लाभ हैं:
1. आपदा प्रबंधन: चक्रवात या बाढ़ जैसी घटनाओं के लिए सरकार और लोग पहले से तैयार हो सकते हैं।
2. कृषि: किसान वर्षा और हवा के अनुसार खेती की योजना बना सकते हैं।
3. सुरक्षा: मछुआरों और नाविकों को खराब मौसम में समुद्र में न जाने की चेतावनी मिलती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान भाग 1 का अध्याय 2 किस विषय पर आधारित है?
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान भाग 1 (सत्र 2026-27 की नई एनसीईआरटी पुस्तक) का दूसरा अध्याय “मौसम को समझना” पर आधारित है। इसमें बताया गया है कि किसी विशेष समय और स्थान पर पृथ्वी की वायुमंडलीय दशाओं को मौसम कहते हैं। यह अध्याय क्षोभमंडल (ट्रोपोस्फीयर) की संरचना, मौसम के पाँच प्रमुख तत्वों – तापमान, वर्षण, वायुमंडलीय दाब, पवन और आर्द्रता – तथा इन्हें मापने के वैज्ञानिक उपकरणों की जानकारी देता है। इसके साथ ही मौसम केंद्र, स्वचालित मौसम केंद्र और मौसम के पूर्वानुमान का महत्व भी समझाया गया है, जिससे विद्यार्थी मौसम विज्ञान की बुनियादी अवधारणाओं से परिचित होते हैं।
क्या कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान भाग 1 अध्याय 2 पुराने पाठ्यक्रम से अलग है?
जी हाँ, यह अध्याय एनसीईआरटी की नई पाठ्यपुस्तक श्रृंखला “समाज का अध्ययन: भारत और उसके आगे” का हिस्सा है, जो सत्र 2026-27 के लिए विशेष रूप से संशोधित करके जारी की गई है। इसमें कक्षा 6 की विज्ञान पुस्तक ‘जिज्ञासा’ में पढ़ाए गए तापमान और जल की अवस्था जैसे विषयों को “पुनरावलोकन करें” बॉक्स के ज़रिए जोड़ा गया है। इसके अलावा भारत मौसम विज्ञान विभाग (1875 में स्थापित), लद्दाख के खारदुंग-ला जैसे वास्तविक उदाहरण, सिक्किम की हिम-झील पर स्थापित स्वचालित मौसम केंद्र और 19 मई 2024 के भारत के मौसम चेतावनी मानचित्र जैसे समसामयिक उदाहरण जोड़े गए हैं, जो पाठ को अधिक व्यावहारिक और रोचक बनाते हैं।
विद्यार्थियों को कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 2 से क्या-क्या सीखने को मिलेगा?
इस अध्याय के माध्यम से विद्यार्थी सीखेंगे कि मौसम क्या है, वायुमंडल की क्षोभमंडल परत का क्या महत्व है, और मौसम के पाँच प्रमुख तत्व — तापमान, वर्षण (वर्षा, हिम, सहिमवृष्टि, ओले), वायुमंडलीय दाब, पवन (गति व दिशा) तथा आर्द्रता — किस प्रकार मापे जाते हैं। बच्चे थर्मामीटर, रेन गेज, बैरोमीटर, विंड वेन, एनीमोमीटर और हाइग्रोमीटर जैसे उपकरणों के काम करने का तरीका समझेंगे। साथ ही उन्हें यह भी पता चलेगा कि चींटियों, मेंढकों और चीड़ के शंकुओं जैसे प्राकृतिक संकेतों से पारंपरिक रूप से मौसम का पूर्वानुमान कैसे लगाया जाता था, और आज के मौसम केंद्र किस प्रकार आधुनिक तकनीक से मौसम की चेतावनियाँ जारी करते हैं।
अभिभावक अपने बच्चे को कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 2 को समझने में कैसे मदद कर सकते हैं?
अभिभावक बच्चों के साथ रोज़ के तापमान, आर्द्रता और मौसम पूर्वानुमान को समाचार-पत्र, मौसम ऐप या टीवी पर देखकर चर्चा करें, ताकि सैद्धांतिक ज्ञान व्यावहारिक अनुभव से जुड़ सके। पुस्तक में दी गई “आइए पता लगाएँ” गतिविधि के अनुसार घर पर सरल वर्षामापी बनाना और एक महीने तक वर्षा दर्ज करना बच्चे के लिए बहुत सीखने योग्य अनुभव हो सकता है। इसके अलावा घर के बड़े-बुज़ुर्गों से मौसम पूर्वानुमान से जुड़ी पारंपरिक कहावतें और संकेत पूछकर बच्चे को स्थानीय भाषा व लोक-ज्ञान से भी जोड़ा जा सकता है, जिससे विषय अधिक रोचक और आत्मीय बन जाता है।
शिक्षक कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 2 को कक्षा में प्रभावी ढंग से कैसे पढ़ा सकते हैं?
शिक्षक इस अध्याय को पढ़ाते समय वास्तविक उपकरणों (यदि उपलब्ध हों) जैसे थर्मामीटर, रेन गेज मॉडल या चित्रों का उपयोग करके विद्यार्थियों को मौसम मापन प्रत्यक्ष रूप से समझा सकते हैं। कक्षा में “आइए विचार करें” बॉक्स के प्रश्नों, जैसे चेन्नई के कृष्णन और कश्मीर के आमिर के तापमान संबंधी वार्तालाप, पर समूह चर्चा कराई जा सकती है। साथ ही चित्र 2.13 में दिए गए भारत के मौसम चेतावनी मानचित्र का विश्लेषण कराकर विद्यार्थियों को वास्तविक आँकड़ों को पढ़ने और व्याख्या करने का अभ्यास कराया जा सकता है। अध्याय के अंत में दी गई सारणी-आधारित गतिविधि (जम्मू-कश्मीर के मौसम आँकड़े) डेटा-विश्लेषण कौशल विकसित करने के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
क्या कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 2 परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है?
जी हाँ, यह अध्याय परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे मौसम के तत्वों और उनके मापन उपकरणों का मिलान करने वाले प्रश्न, ताप सीमा व औसत दैनिक तापमान की गणना, सारणी-आधारित विश्लेषणात्मक प्रश्न और मानचित्र-आधारित प्रश्न (जैसे चित्र 2.13 के आधार पर) पूछे जा सकते हैं। पाठ्यपुस्तक के अंत में दिए गए 4 प्रश्न और क्रियाकलाप, विशेषकर जम्मू-कश्मीर के मौसम आँकड़ों वाली सारणी पर आधारित प्रश्न, विद्यार्थियों की डेटा-व्याख्या क्षमता जाँचने के लिए दिए गए हैं, इसलिए इन्हें अभ्यास के तौर पर ध्यानपूर्वक हल करवाना चाहिए।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के बारे में कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 2 में क्या बताया गया है?
इस अध्याय में बताया गया है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना सन् 1875 में हुई थी, और इसका आदर्श वाक्य ‘आदित्यात् जायते वृष्टि’ है, जिसका अर्थ है ‘सूर्य से वर्षा होती है’। यह वाक्यांश प्राचीन ग्रंथ मनुस्मृति से लिया गया है। आईएमडी आज मौसम केंद्रों और स्वचालित मौसम केंद्रों के माध्यम से तापमान, वर्षा, आर्द्रता, पवन और वायुमंडलीय दाब जैसे आँकड़े एकत्रित करता है और सूखा, बाढ़, चक्रवात, ताप लहर व शीत लहर जैसी घटनाओं के लिए समय रहते चेतावनियाँ जारी करता है, जो स्थानीय सरकारों और आम जनता को आपदा प्रबंधन में सहायता करती हैं।
