एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान भाग 1 अध्याय 5 साम्राज्यों का उदय

एनसीईआरटी कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 5 भाग 1 साम्राज्यों का उदय समाधान – अभ्यास के क्रियाकलाप तथा प्रश्न-उत्तर, अतिरिक्त प्रश्नों के हल यहाँ से निशुल्क प्राप्त किए जा सकते हैं। एनसीईआरटी द्वारा सत्र 2026-27 के लिए जारी की गई नई कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान भाग-1 की पाठ्यपुस्तक “समाज का अध्ययन: भारत और उसके आगे” का पाँचवाँ अध्याय “साम्राज्यों का उदय” ‘अतीत के चित्रपट’ खंड का दूसरा अध्याय है। इस अध्याय में साम्राज्य की अवधारणा, राज्य से साम्राज्य बनने की प्रक्रिया, मगध के उदय, नंद वंश, सिकंदर (एलेक्जेंडर) के भारत अभियान, चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा मौर्य साम्राज्य की स्थापना, कौटिल्य का सप्तांग सिद्धांत तथा सम्राट अशोक की उपलब्धियों – कलिंग युद्ध, धम्म नीति और शिलालेखों – का रोचक कथा-शैली में वर्णन किया गया है। साथ ही मौर्यकालीन जीवन, कला-वास्तुकला (सारनाथ स्तंभ, साँची स्तूप) और साम्राज्यों के पतन के कारणों को भी विस्तार से समझाया गया है।

एनसीईआरटी कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान भाग 1 अध्याय 5 समाधान

कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान पाठ 5 अभ्यास प्रश्न उत्तर

पेज 85 – महत्वपूर्ण प्रश्न

1. साम्राज्य क्या होता है?

उत्तर:

  • साम्राज्य: अनेक छोटे-छोटे राज्यों या क्षेत्रों से मिलकर बना एक बहुत बड़ा भू-भाग होता है।
  • सर्वोच्च सत्ता: इस पर एक शक्तिशाली शासक का राज होता है जिसे ‘सम्राट’ कहते हैं।
  • विशालता: यह एक साधारण राज्य से बहुत बड़ा और शक्तिशाली होता है।
  • विविधता: इसमें अलग-अलग भाषाओं, धर्मों और संस्कृतियों को मानने वाले लोग एक साथ रहते हैं।

2. साम्राज्यों का उदय कैसे हुआ और उन्होंने भारतीय सभ्यता को कैसे आकार दिया?

उत्तर:

  • उदय: जब शक्तिशाली महाजनपदों (जैसे मगध) के राजाओं ने अपने आस-पास के छोटे राज्यों को जीतना शुरू किया, तो वे बड़े होते गए और अंततः साम्राज्यों में बदल गए। उदाहरण के लिए, नंद और मौर्य साम्राज्य।
  • सभ्यता को आकार: साम्राज्यों ने भारतीय सभ्यता को गहराई से प्रभावित किया:
  • राजनीतिक एकता: इन्होंने पहली बार भारत के बड़े हिस्से को एक शासन के नीचे लाया।
  • शांति और समृद्धि: छोटे राज्यों की आपसी लड़ाइयां कम हुईं, जिससे व्यापार और खुशहाली बढ़ी।
  • विकास: अच्छी सड़कें, सिक्के, व्यवस्थित प्रशासन और सुंदर वास्तुकला (जैसे स्तूप और स्तंभ) का विकास हुआ।

3. राज्य से साम्राज्य बनने में कौन-कौन से तत्व सहायक हुए?

उत्तर:
एक राज्य को साम्राज्य बनने में निम्नलिखित तत्वों ने मदद की:

  • संसाधन: उपजाऊ जमीन (अच्छी खेती के लिए), लोहे की खदानें (मजबूत हथियार बनाने के लिए) और जंगलों से लकड़ी व हाथी।
  • सेना: एक विशाल और स्थायी सेना जो दूसरे राज्यों को जीत सके और रक्षा कर सके।
  • नेतृत्व: चंद्रगुप्त मौर्य जैसे साहसी राजा और चाणक्य (कौटिल्य) जैसे बुद्धिमान मंत्री।
  • अर्थव्यवस्था: व्यापार और कर से होने वाली आय, जिससे विशाल सेना और प्रशासन का खर्च उठाया जा सके।

4. छठी शताब्दी सा.सं.पू. से दूसरी शताब्दी सा.सं.पू. तक का जीवन कैसा था?

उत्तर:
इस दौरान जीवन काफी उन्नत और व्यवस्थित था:

  • नगर: पाटलिपुत्र, तक्षशिला और उज्जैन जैसे बड़े और सुंदर नगरों का विकास हुआ।
  • कृषि: किसान साल में दो फसलें उगाते थे और अकाल से बचने के लिए अन्न का भंडार रखा जाता था।
  • व्यापार: सड़कों और नदियों के रास्ते दूर-दूर तक व्यापार होता था। व्यापारियों के अपने संगठन (श्रेणियाँ) थे।
  • प्रशासन: राजा के अधिकारी, न्यायाधीश और संदेशवाहक समाज को व्यवस्थित रखते थे।

पेज 89 – आइए पता लगाएँ

साम्राज्य विस्तृत भूभागों में फैले हुए होते थे, जिनमें अनेक प्रकार की भाषाएँ, परंपराएँ और संस्कृतियों वाले जन रहते थे। आपके विचार में सभी लोग सौहार्दपूर्वक रहें, यह सम्राटों ने कैसे सुनिश्चित किया होगा? समूह में विचार-विमर्श करें एवं कक्षा में अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर:
इतने विशाल और विविधतापूर्ण साम्राज्य में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए सम्राटों ने निम्नलिखित तरीके अपनाए होंगे:

  • धार्मिक सहिष्णुता: समझदार सम्राटों ने किसी एक धर्म को थोपने के बजाय सभी धर्मों और परंपराओं का सम्मान किया होगा। उदाहरण के लिए, सम्राट अशोक ने अपनी ‘धम्म’ नीति के जरिए सभी धर्मों के बीच आपसी सम्मान को बढ़ावा दिया।
  • स्थानीय शासन: सम्राट अक्सर स्थानीय राजाओं या प्रमुखों को अपने अधीन शासन करने देते थे। इससे स्थानीय लोगों को यह नहीं लगता था कि उन पर कोई बाहरी संस्कृति थोपी जा रही है।
  • कल्याणकारी कार्य: सड़कें, सराय और अस्पताल जैसी सुविधाएं सभी नागरिकों के लिए बनवाई जाती थीं, जिससे लोगों में राज्य के प्रति अपनत्व की भावना आती थी।
  • निष्पक्ष न्याय: एक मजबूत और निष्पक्ष न्याय व्यवस्था स्थापित की होगी ताकि लोगों के आपसी विवाद सुलझाए जा सकें और किसी के साथ भेदभाव न हो।

एक विशाल साम्राज्य का संचालन करना अनेक प्रकार की कठिनाइयों से भरा होता है, फिर भी कोई राजा अपना राज्य बढ़ाकर सम्राट क्यों बनना चाहता होगा? नीचे कुछ संभावित उत्तर दिए गए हैं, आप चाहें तो इसमें और भी उत्तर जोड़ सकते हैं।

  • ‘संपूर्ण विश्व पर शासन’ करने की महत्वाकांक्षा अर्थात् एक बड़े प्रदेश को नियंत्रण में रखना एक ऐसा रूपक है, जिससे संकेत मिलता है कि वह विशाल क्षेत्र पर अधिकार करना चाहता था तथा यह सुनिश्चित करना चाहता था कि भावी पीढ़ियाँ उन्हें याद रखेंगी।
  • एक विशाल भू-प्रदेश को अपने अधीन कर, वहाँ के संसाधनों का प्रयोग कर अपनी आर्थिक एवं सैन्य शक्ति बढ़ाने की इच्छा।
  • स्वयं एवं अपने साम्राज्य के लिए महान संपदा प्राप्त करने की उत्कंठा।

उत्तर:
पाठ्यपुस्तक में दिए गए बिंदुओं के अलावा, राजाओं के सम्राट बनने की चाहत के कुछ अन्य कारण ये भी हो सकते हैं:

  • अधिक राजस्व की प्राप्ति: राज्य जितना बड़ा होगा, वहां से मिलने वाला कर भी उतना ही अधिक होगा। इससे राजा अपना खजाना भर सकता था।
  • व्यापारिक मार्गों पर नियंत्रण: बड़े क्षेत्र को जीतने से महत्वपूर्ण रास्तों और बंदरगाहों पर राजा का कब्जा हो जाता था, जिससे व्यापार से भारी मुनाफा होता था।
  • सुरक्षा: एक विशाल साम्राज्य के पास बड़ी सेना होती है, जिससे पड़ोसी राज्यों के हमलों का डर कम हो जाता है और राज्य सुरक्षित रहता है।
  • संसाधनों की आवश्यकता: कभी-कभी राजा उन क्षेत्रों को जीतने के लिए हमला करते थे जहाँ विशेष संसाधन मौजूद हों, जैसे- हाथियों के लिए जंगल या लोहे की खदानें।

पेज 91 – आइए पता लगाएँ

आपके विचार से शासकों ने अपने साम्राज्य विस्तार के लिए युद्ध के अतिरिक्त दूसरे और कौन-कौन से उपाय अपनाए होंगे? अपने विचार लिखिए और अपनी कक्षा में साझा कीजिए।

उत्तर:
इतिहास को देखने पर पता चलता है कि समझदार शासक हमेशा युद्ध नहीं लड़ते थे, क्योंकि युद्ध में धन और जान-माल का बहुत नुकसान होता है। साम्राज्य विस्तार के लिए उन्होंने युद्ध के अलावा निम्नलिखित कूटनीतिक और शांतिपूर्ण उपाय अपनाए होंगे:

  • वैवाहिक संबंध: कई राजा दूसरे शक्तिशाली राज्यों की राजकुमारियों से विवाह करते थे। इससे दो राज्यों के बीच रिश्ते मजबूत होते थे और अक्सर दहेज या उपहार के रूप में नए क्षेत्र प्राप्त होते थे। (उदाहरण: चंद्रगुप्त मौर्य और सेल्यूकस की संधि)।
  • मित्रता और संधियाँ: शासक पड़ोसी राज्यों के साथ मित्रता की संधियाँ करते थे। वे छोटे राजाओं को सुरक्षा का वादा करते थे और बदले में वे छोटे राजा उनकी अधीनता स्वीकार कर लेते थे और उन्हें कर देते थे।
  • कूटनीति और जासूसी: कौटिल्य (चाणक्य) जैसे मंत्रियों की सलाह से, राजा ‘भेद-नीति’ का उपयोग करते थे। वे जासूसों के जरिए दुश्मन राज्य में आंतरिक कलह पैदा करवाते थे या उनकी कमजोरियों का फायदा उठाकर बिना लड़े उन्हें अपने साथ मिला लेते थे।
  • उपहार और सम्मान: दूसरे राज्यों के राजाओं या प्रमुखों को महंगे उपहार और सम्मान देकर उन्हें अपने पक्ष में कर लिया जाता था।
  • आर्थिक नियंत्रण: महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों और नदियों पर कब्जा करके शासक दूसरे राज्यों पर दबाव बनाते थे, जिससे वे राज्य आर्थिक लाभ के लिए खुद ही बड़े साम्राज्य में शामिल हो जाते थे।

पेज 93 – आइए पता लगाएँ

व्यापारिक मार्गों के मानचित्र का अवलोकन करें। उन भौगोलिक विशेषताओं की पहचान करें, जिन्होंने व्यापारियों को उपमहाद्वीप में यात्रा करने में सहायता की।

उत्तर:
भौगोलिक विशेषताएँ जिन्होंने सहायता की – मानचित्र को देखने पर पता चलता है कि व्यापारियों ने यात्रा के लिए भारत की प्रमुख भौगोलिक विशेषताओं का लाभ उठाया:

  • नदियाँ: गंगा, यमुना और सोन जैसी बड़ी नदियों ने प्राकृतिक जलमार्ग प्रदान किया। नदियाँ न केवल सस्ती यात्रा का साधन थीं, बल्कि उनके किनारे-किनारे समतल भूमि पर सड़कें बनाना भी आसान था।
  • समतल मैदान: उत्तर भारत का विशाल समतल मैदान (गंगा का मैदान) उबड़-खाबड़ नहीं था। इससे ‘उत्तरापथ’ जैसा लंबा राजमार्ग बनाना संभव हुआ जो तक्षशिला से पाटलिपुत्र तक जाता था।
  • तटीय क्षेत्र: भारत की लंबी तटरेखा ने बंदरगाहों (जैसे- भरुकच्छ और ताम्रलिप्ति) के विकास में मदद की, जिससे समुद्री व्यापार संभव हुआ।

उन सड़कों पर तत्कालीन समय में परिवहन के कौन-कौन से साधन उपलब्ध रहे होंगे? अनुमान लगाएँ।

उत्तर:
परिवहन के साधन: उस समय (मौर्य काल के आसपास) इन सड़कों और मार्गों पर परिवहन के लिए निम्नलिखित साधन उपलब्ध रहे होंगे:

  • बैलगाड़ियाँ: यह माल ढोने और लंबी दूरी की यात्रा का सबसे प्रमुख साधन था।
  • जानवर: व्यापारियों के काफिले सामान लादने के लिए घोड़ों, खच्चरों, गधों और रेगिस्तानी इलाकों में ऊंटों का उपयोग करते थे। राजसी लोग या भारी सामान के लिए हाथियों का भी प्रयोग होता था।
  • जल परिवहन: नदियों को पार करने या जलमार्ग से व्यापार करने के लिए नावों और समुद्र के लिए बड़े जहाजों का इस्तेमाल होता था।
  • पैदल यात्रा: भिक्षु, संदेशवाहक और सामान्य लोग अक्सर समूहों में पैदल ही यात्रा करते थे।

पेज 94 – आइए पता लगाएँ

उपर्युक्त शिल्प-पट्टिका का सूक्ष्म अवलोकन करें। आप इनमें कितने प्रकार के शस्त्रों की पहचान कर सकते हैं? आपको लोहे के कौन-कौन से उपयोग दिखाई देते हैं?

उत्तर:
साँची के स्तूप की इस पट्टिका को ध्यान से देखने पर हमें निम्नलिखित शस्त्र और लोहे के उपयोग दिखाई देते हैं:

  • भाले: सैनिकों के हाथों में लंबी छड़ें हैं जिनके आगे नुकीले फलक लगे हैं।
  • धनुष और बाण: कुछ सैनिक धनुष-बाण लिए हुए हैं।
  • तलवारें: कुछ सैनिकों के पास तलवारें भी दिखाई दे रही हैं।
  • ढाल: आत्मरक्षा के लिए सैनिकों के पास ढालें हैं।
  • लोहे के उपयोग: उस समय तक युद्ध में लोहे का प्रयोग बढ़ गया था। इन हथियारों में भाले की नोक, तीर के अग्रभाग और तलवार की धार लोहे की बनी होती थी। लोहे के कारण ये हथियार तांबे या कांसे के हथियारों से ज्यादा मजबूत और खतरनाक होते थे।

शिल्प-पट्टिका के बाएँ भाग में कलश के ऊपर एक छत्र रखा हुआ है, जिसमें बुद्ध के अवशेष रखे हैं। आपके विचार में ऐसा क्यों किया गया होगा?

उत्तर:
प्राचीन भारतीय परंपरा में ‘छत्र’ (छाता) केवल धूप या बारिश से बचने की वस्तु नहीं थी, बल्कि यह राजसी सत्ता, प्रभुत्व और सर्वोच्च सम्मान का प्रतीक था।
बुद्ध के अवशेषों वाले कलश के ऊपर छत्र रखने का अर्थ है कि लोग बुद्ध को एक महान राजा या देवता के समान आदर देते थे। यह दर्शाता है कि उस कलश में रखी वस्तु अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण है।

पेज 97 – इसे अनदेखा न करें

फारसी और ग्रीक साम्राज्यों में प्रांतों के शासक क्षत्रप थे, जिन्हें सम्राट (जैसे – एलेक्जेंडर) ने सुदूर प्रदेशों का प्रबंधन करने के लिए पीछे छोड़ दिया था। मात्र अधिकारी होने के बावजूद इन क्षत्रपों के पास महत्वपूर्ण शक्ति और स्वतंत्रता थी। क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि उनके लिए इतनी शक्ति का प्रयोग करना कैसे संभव था?

उत्तर:
क्षत्रपों के लिए इतनी शक्ति का प्रयोग करना इसलिए संभव था क्योंकि:

  • दूरी: वे सम्राट की राजधानी से बहुत दूर के प्रदेशों में शासन करते थे। उस समय संचार और यात्रा में बहुत समय लगता था, इसलिए सम्राट हर छोटी बात पर नज़र नहीं रख सकता था।
  • स्वायत्तता: उन्हें अपने क्षेत्र में कर वसूलने और सेना रखने का अधिकार मिला हुआ था, जिससे वे व्यवहारिक रूप से एक राजा की तरह ही शक्तिशाली हो जाते थे।

पेज 97 – आइए विचार करें

आपके विचार में एलेक्जेंडर संपूर्ण विश्व पर राज क्यों करना चाहता था? इससे वह क्या प्राप्त करना चाहता था?

उत्तर:
एलेक्जेंडर (सिकंदर) के विश्व विजय के सपने के पीछे कई कारण हो सकते हैं:

  • महत्वाकांक्षा: वह दुनिया का सबसे महान और शक्तिशाली विजेता कहलाना चाहता था ताकि इतिहास में उसका नाम हमेशा के लिए अमर हो जाए।
  • ग्रीक संस्कृति का प्रसार: वह अपनी ग्रीक संस्कृति और विचारों को पूरी दुनिया में फैलाना चाहता था।
  • संसाधन और धन: वह फारसी साम्राज्य और भारत जैसे देशों की अपार धन-संपदा और संसाधनों पर कब्जा करना चाहता था।

पेज 97 – आइए पता लगाएँ

जब युद्ध के उपरांत एलेक्जेंडर ने राजा पुरु से पूछा कि उसके साथ कैसा व्यवहार किया जाए, तब पुरु ने उत्तर दिया – “एक राजा की तरह”। इस उत्तर से प्रभावित होकर एलेक्जेंडर ने उन्हें उनके ही राज्य का क्षत्रप नियुक्त कर दिया। अपने शिक्षकों की सहायता से राजा पुरु और एलेक्जेंडर के मध्य हुए युद्ध के विषय में और अधिक विवरण प्राप्त करें।

उत्तर:
राजा पुरु और एलेक्जेंडर के युद्ध का विवरण:

  • युद्ध का नाम: इसे ‘हाइडेस्पीज का युद्ध’ या ‘झेलम का युद्ध’ कहा जाता है।
  • समय: यह युद्ध 326 ईसा पूर्व में लड़ा गया था।
  • स्थान: यह झेलम नदी (जिसे ग्रीक में हाइडेस्पीज कहा जाता था) के किनारे लड़ा गया था।
  • सेना: राजा पुरु की सेना में शक्तिशाली हाथी थे, जिन्होंने एलेक्जेंडर की सेना को कड़ी टक्कर दी। ग्रीक सैनिकों ने इससे पहले हाथियों का इतना भयानक सामना नहीं किया था।
  • परिणाम: यद्यपि एलेक्जेंडर की जीत हुई, लेकिन पुरु की बहादुरी और स्वाभिमान ने उसे इतना प्रभावित किया कि उसने पुरु को न केवल उनका राज्य लौटा दिया, बल्कि आस-पास के और भी इलाके उन्हें सौंप दिए।

पेज 103 – आइए विचार करें

कौटिल्य कहते हैं, “एक राजा को अपनी प्रजा के कल्याण को बढ़ावा देकर अपनी शक्ति मे वृद्धि करनी चाहिए, क्योंकि शक्ति ग्राम-क्षेत्र से आती है, जो समस्त आर्थिक गतिविधियों का स्रोत है। (राजा को) ग्रामीण क्षेत्र में उन लोगों पर विशेष अनुग्रह करना चाहिए, जो लोगों को लाभ पहुँचाने वाले कार्य करते हैं, जैसे – तटबंध या सड़क-पुल बनाना, गाँवों का सौंदर्याकरण करना अथवा उनकी रक्षा करने में सहायता प्रदान करना।”

आपके अनुसार ग्रामीण क्षेत्र का विशेष ध्यान रखना क्यों महत्वपूर्ण था?

(संकेत– इस अध्याय के आरंभ में आपने जो पढ़ा है, उस पर पुनः विचार कीजिए।)
उत्तर:
कौटिल्य के अनुसार और उस समय की परिस्थितियों को देखते हुए, ग्रामीण क्षेत्र (गाँवों) का विशेष ध्यान रखना इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि:

  • आर्थिक शक्ति का आधार: जैसा कि कौटिल्य ने कहा, सारी ‘शक्ति’ ग्राम-क्षेत्र से ही आती थी। उस समय अर्थव्यवस्था पूरी तरह कृषि पर निर्भर थी। गाँव ही खेती और उत्पादन के केंद्र थे।
  • कर और राजस्व: राजा के खजाने (राजकोष) के लिए सबसे अधिक धन (टैक्स) किसानों और गाँवों से ही आता था। यदि गाँव खुशहाल होंगे, तो वे अधिक कर दे पाएंगे और राज्य का खजाना भरा रहेगा।
  • सेना के लिए संसाधन: एक विशाल सेना रखने के लिए भोजन, और युद्ध के लिए हाथी व लकड़ी जैसे संसाधन गाँवों और पास के जंगलों से ही मिलते थे। मगध के शक्तिशाली होने का एक बड़ा कारण वहां के जंगलों में हाथियों की उपलब्धता थी।
  • राज्य की स्थिरता: यदि ग्रामीण जनता सुखी और सुरक्षित होगी, तो वे राजा के प्रति वफादार रहेंगे। अगर वे दुखी होंगे (जैसे धनानंद के समय में), तो विद्रोह हो सकता है और साम्राज्य गिर सकता है।

पेज 103 – आइए पता लगाएँ

अपनी कक्षा में एक सामहिूक चर्चा आयोजित करें और कौटिल्य के साम्राज्य के प्रति विचारों की विशेषताओं की तुलना आधुनिक राष्ट्र से करें।

उत्तर:
कौटिल्य के अनुसार साम्राज्य में एक शक्तिशाली राजा होता था, जो पूरी व्यवस्था को नियंत्रित करता था। उन्होंने प्रशासन, सेना, कर-व्यवस्था, कानून और प्रजा के कल्याण पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उनके ‘सप्तांग सिद्धांत’ में राज्य के सात अंग बताए गए हैं, जैसे – राजा, अमात्य, जनपद आदि।
आधुनिक राष्ट्र में भी शासन, कानून, सुरक्षा और जनता के कल्याण पर जोर दिया जाता है, लेकिन यहाँ शक्ति केवल एक व्यक्ति के पास नहीं होती, बल्कि संविधान और लोकतंत्र के अनुसार जनता द्वारा चुनी गई सरकार चलाती है।
इस प्रकार, दोनों में समानता है पर आधुनिक राष्ट्र अधिक लोकतांत्रिक है।

पेज 104 – आइए विचार करें

अशोक ने अपने शिलालेखों में कलिंग युद्ध का उल्लेख किया है। वे चाहते तो इसका उल्लेख न करके भविष्य की पीढ़ियों के समक्ष स्वयं को एक शांतिपूर्ण, परोपकारी राजा के रूप में प्रस्तुत कर सकते थे। आपके विचार में उन्होंने इस विनाशकारी युद्ध का उल्लेख अपने शिलालेखों में क्यों किया?

उत्तर:
अशोक द्वारा अपने शिलालेखों में कलिंग युद्ध की भयावहता का उल्लेख करने के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण हो सकते हैं:

  • सच्चा पश्चाताप: कलिंग युद्ध में हुए भारी विनाश और मृत्यु को देखकर अशोक का हृदय परिवर्तन हो गया था। वे अपनी गलती और गहरे दुख को छिपाना नहीं चाहते थे, बल्कि उसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार करना चाहते थे।
  • आने वाली पीढ़ियों के लिए संदेश: वे भविष्य की पीढ़ियों (अपने पुत्रों और पौत्रों) को यह संदेश देना चाहते थे कि युद्ध केवल दुख और विनाश लाता है। वे चाहते थे कि उनके उत्तराधिकारी युद्ध के मार्ग पर न चलकर शांति और अहिंसा (धम्म) का मार्ग अपनाएं।
  • धम्म विजय का महत्व: वे यह साबित करना चाहते थे कि हथियारों के बल पर प्राप्त की गई जीत (युद्ध विजय) की तुलना में ‘धम्म विजय’ (लोगों का दिल जीतना और नेकी का रास्ता) ही श्रेष्ठ और सच्ची जीत है।
  • पारदर्शिता और ईमानदारी: एक महान राजा वही होता है जो अपनी गलतियों को स्वीकार करे। युद्ध का उल्लेख करके उन्होंने अपनी ईमानदारी का परिचय दिया और दिखाया कि शांति का रास्ता उन्होंने मजबूरी में नहीं, बल्कि समझदारी और करुणा के कारण चुना था।

पेज 107 – आइए पता लगाएँ

अशोक ने अपने एक अभिलेख में अपने अधिकारियों के आचरण संबंधित विस्तृत निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह सुनिश्चित करने की व्यवस्था की कि अधिकारी निष्पक्षता से कार्य करें। निम्नलिखित अनुवाद को पढ़िए और बताइए कि क्या ये उपाय साम्राज्य के प्रबंधन में सहायक सिद्ध हुए होंगे? यदि हाँ, तो कैसे?

‘देवानामप्रिय’ के आदेशानुसार— अधिकारियों और नगर न्यायाधीशों को यह निर्देश दिया गया है— “(…) तुम लोग अनेक सहस्र प्राणियों के ऊपर नियुक्त किए गए हो। तुम्हें मनुष्यों का स्नेह अर्जित करना चाहिए। इस मनुष्य रूपी संतान के समान ही जिस तरह मैं चाहता हूँ कि मेरी संतान इस लोक और परलोक दोनों में मंगल और सुख प्राप्त करे, उसी तरह मैं मनुष्यों के लिए कामना करता हूँ। (…) तुम्हें निष्पक्षता से न्याय करना चाहिए। (…) इन सबका मूल स्रोत का त्याग और धैर्य का पालन है। (…) यह लेख यहाँ इसलिए लिखवाया गया है कि नगर के न्याय शासक हमेशा सावधान रहें कि मनुष्यों को कभी प्रकार के बंधन या यातना न दें। (…) और इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु प्रतिवेदक प्रत्येक वर्ष पाँच बार ब्याज पूर्णिमा मनाएँगे। उनकी सूचना करने के बाद …, यह देखेंगे कि मेरे आदेशों का पालन किया जाता है या नहीं।”
उत्तर:
अशोक के इस निर्देश को पढ़कर मुझे लगता है कि हाँ, ये उपाय साम्राज्य को अच्छे से चलाने में ज़रूर मदद करते होंगे।
सबसे पहली बात, अशोक ने अपने अधिकारियों से कहा कि वे लोगों को अपनी संतान जैसा समझें और उनसे प्यार से पेश आएँ। इससे अधिकारी लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करते होंगे, न कि उन्हें डराते-धमकाते होंगे। जब अधिकारी अच्छे से पेश आते हैं, तो लोग भी राजा और सरकार से खुश रहते हैं और उनका साथ देते हैं।
दूसरी बात, अशोक ने कहा कि न्याय हमेशा निष्पक्षता से होना चाहिए और किसी को बिना वजह सज़ा या यातना नहीं देनी चाहिए। इससे अधिकारी मनमानी नहीं कर पाते होंगे, क्योंकि उन्हें पता है कि यह गलत बात है और राजा इसे पसंद नहीं करेंगे।
तीसरी और सबसे ज़रूरी बात यह है कि अशोक ने सिर्फ नियम बनाकर नहीं छोड़ा, बल्कि हर साल कई बार अपने खास अधिकारियों (प्रतिवेदकों) को भेजा ताकि वे जाँच सकें कि उनके आदेशों का पालन हो रहा है या नहीं। यह बात बहुत समझदारी वाली है, क्योंकि साम्राज्य बहुत बड़ा था और राजा खुद हर जगह नहीं जा सकते थे। इस तरह की जाँच-व्यवस्था से दूर-दूर के इलाकों के अधिकारी भी डरते होंगे कि अगर वे गलत काम करेंगे तो पकड़े जाएँगे।
इसलिए मेरे विचार से इन उपायों से लोग खुश रहते होंगे, अधिकारी ईमानदारी से काम करते होंगे, और पूरा साम्राज्य एक साथ, शांति से और अच्छे तरीके से चलता होगा।

पेज 109 – आइए पता लगाएँ

एक इतिहासकार के रूप में अगले पृष्ठ पर प्रस्तुत कलाकृतियों को ध्यान से देखें। मौर्य युग के लोगों और जीवन के बारे में आप इनसे क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?

उत्तर:

  • फैशन और सौंदर्य-बोध: नृत्य करती हुई बालिका और अन्य मूर्तियों के विस्तृत केश-विन्यास, सिर के वस्त्र और आभूषणों को देखकर पता चलता है कि उस समय के लोग, विशेषकर महिलाएँ, सजने-संवरने की शौकीन थीं। वे सुंदर गहने पहनती थीं और अपने बालों को अलग-अलग तरीके से सजाती थीं।
  • धार्मिक विश्वास: मातृ देवियों, यक्षियों और सप्तमातृकाओं की मूर्तियाँ यह बताती हैं कि उस समय आम लोग लोक-देवताओं और देवियों की पूजा करते थे। यह दर्शाता है कि बड़े धर्मों (जैसे बौद्ध धर्म) के साथ-साथ लोक-विश्वास भी समाज में गहरे जड़े हुए थे।
  • कला और शिल्प: पकी हुई मिट्टी (टेराकोटा) का उपयोग और मूर्तियों में बारीक विवरण (जैसे घोड़े की लगाम) यह दिखाते हैं कि उस समय के शिल्पकार बहुत कुशल थे। टेराकोटा कला आम जनता के बीच बहुत लोकप्रिय थी।
  • तकनीक और पशु: घोड़े के सिर की मूर्ति पर दिखाई गई लगाम की विस्तृत संरचना यह दर्शाती है कि लोग जानवरों (विशेषकर घोड़ों) का उपयोग यातायात या युद्ध के लिए करते थे और उन्हें नियंत्रित करने की तकनीक (जीन और लगाम) से परिचित थे।
  • मनोरंजन: नृत्य करती हुई मूर्ति से संकेत मिलता है कि संगीत और नृत्य लोगों के सामाजिक जीवन और मनोरंजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।

पेज 112 – आइए पता लगाएँ

नीचे दर्शाए गए सिक्कों के अलग-अलग चिह्नों पर ध्यान दीजिए। इन चिह्नों का अर्थ क्या हो सकता है, क्या आप अनुमान लगा सकते हैं?

पेज 112 - आइए पता लगाएँ

उत्तर:
चित्र में दिखाए गए सिक्के ‘आहत सिक्के’ हैं, जो मौर्य काल में प्रचलित थे। इन पर बने चिह्नों (प्रतीकों) के निम्नलिखित अर्थ हो सकते हैं:

  • तीन मेहराब वाली पहाड़ी और अर्धचंद्र: यह सबसे महत्वपूर्ण चिह्न है। इसे मौर्य राजवंश का शाही प्रतीक माना जाता है। यह साम्राज्य की स्थिरता और ऊँचाई को दर्शाता है।
  • सूर्य: यह राजा की शक्ति, ऊर्जा और संप्रभुता का प्रतीक है। इसका अर्थ यह हो सकता है कि राजा का प्रभाव सूर्य की तरह चारों ओर फैला हुआ है।
  • षडअर चक्र: यह एक चक्र जैसा चिह्न है जिसमें छह भुजाएं हैं। यह संभवतः राज्य की सत्ता या प्रशासन का प्रतीक था।
  • प्रकृति के चिह्न: सिक्कों पर पेड़ (बाड़ के भीतर वृक्ष) और पशुओं के चित्र भी मिलते हैं। यह पर्यावरण के प्रति सम्मान या बौद्ध धर्म (जैसे बोधि वृक्ष) के प्रभाव को दर्शा सकते हैं।

पेज 114 – प्रश्न और कार्यकलाप

1. साम्राज्य की विशेषताएँ क्या हैं और यह राज्य से किस प्रकार भिन्न है? इसकी व्याख्या कीजिए।

उत्तर:
साम्राज्य की विशेषताएँ:

  • विशाल क्षेत्र: साम्राज्य एक बहुत बड़ा भू-भाग होता है जो कई छोटे राज्यों और क्षेत्रों से मिलकर बना होता है।
  • केंद्रीय सत्ता: इसका शासन एक ‘सम्राट’ चलाता है जो सर्वोच्च शक्ति रखता है।
  • संसाधन और सेना: साम्राज्य को चलाने के लिए विशाल सेना और बहुत अधिक संसाधनों की आवश्यकता होती है।
  • विविधता: इसमें अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों के लोग रहते हैं।

राज्य से भिन्नता:

  • आकार: साम्राज्य, राज्य की तुलना में बहुत बड़ा होता है।
  • शक्ति: राजा केवल अपने राज्य का प्रमुख होता है, जबकि सम्राट ‘राजाओं का राजा’ होता है और कई राजा उसके अधीन होते हैं।
  • प्रशासन: साम्राज्य का प्रशासन अधिक जटिल होता है और कर संग्रह की व्यवस्था बड़े स्तर पर होती है।

2. राज्यों से साम्राज्यों में परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण कारक क्या हैं?

उत्तर:
एक सामान्य राज्य के साम्राज्य बनने में निम्नलिखित कारक महत्वपूर्ण थे:

  • महत्वाकांक्षा: राजा ‘संपूर्ण विश्व पर शासन’ करने और अपनी प्रसिद्धि के लिए राज्य विस्तार करना चाहते थे।
  • संसाधन और धन: अधिक क्षेत्र जीतने से राजा को वहाँ के संसाधनों (जैसे- खनिज, वन) और धन पर अधिकार मिल जाता था, जिससे उनकी शक्ति बढ़ती थी।
  • सैन्य शक्ति: एक विशाल और शक्तिशाली सेना के दम पर राजा दूसरे राज्यों को जीतकर अपने अधीन कर लेते थे।
  • योग्य नेतृत्व: चंद्रगुप्त मौर्य जैसे साहसी राजा और चाणक्य जैसे बुद्धिमान मंत्री ने राज्यों को संगठित कर साम्राज्य बनाने में मदद की।

3. एलेक्जेंडर को विश्व इतिहास में एक महान शासक माना जाता है, आपके विचार से ऐसा क्यों है?

उत्तर:
एलेक्जेंडर (सिकंदर) को महान शासक मानने के कई कारण हैं:

  • विशाल साम्राज्य: बहुत कम उम्र में उसने तीन महाद्वीपों में फैले एक विशाल साम्राज्य का निर्माण किया था।
  • अपराजेय योद्धा: उसने शक्तिशाली फारसी साम्राज्य को हराया और अपने जीवन में कोई युद्ध नहीं हारा।
  • सांस्कृतिक प्रभाव: उसके अभियानों के कारण ग्रीक (यूनानी) संस्कृति पूरी दुनिया में फैली और भारतीय संस्कृति के साथ उसका संपर्क हुआ।
  • सम्मान: वह बहादुर शत्रुओं (जैसे राजा पोरस) का भी सम्मान करता था।

4. प्रारंभिक भारतीय इतिहास में मौर्य वंश को महत्वपूर्ण माना जाता है। कारण बताएँ।

उत्तर:
मौर्य वंश का भारतीय इतिहास में विशेष महत्व है क्योंकि:

  • पहला अखिल भारतीय साम्राज्य: मौर्यों ने पहली बार भारतीय उपमहाद्वीप के बहुत बड़े हिस्से को एक शासन के सूत्र में बांधा।
  • सुदृढ़ प्रशासन: उन्होंने एक बहुत ही व्यवस्थित शासन प्रणाली, कर व्यवस्था और सेना का गठन किया।
  • व्यापार और समृद्धि: उनके समय में सड़कों और व्यापारिक मार्गों का विकास हुआ, जिससे भारत आर्थिक रूप से समृद्ध हुआ।
  • कला और अशोक का धम्म: सांची के स्तूप और अशोक के स्तंभ भारतीय कला के बेजोड़ नमूने हैं। साथ ही, अशोक द्वारा फैलाया गया शांति और अहिंसा का संदेश आज भी प्रासंगिक है।

5. कौटिल्य के कुछ प्रमुख विचार क्या थे? इनमें से कौन-से विचार आप आज भी आस-पास देख सकते हैं?

उत्तर:
कौटिल्य के प्रमुख विचार:

  • प्रजा कल्याण: “प्रजा की खुशी में ही राजा की खुशी है।” राजा को हमेशा लोगों की भलाई के लिए काम करना चाहिए।
  • शक्ति का स्रोत: राजा की शक्ति गाँवों और आम जनता से आती है, इसलिए उनका ध्यान रखना सबसे जरूरी है।
  • भ्रष्टाचार मुक्त शासन: प्रशासन में भ्रष्टाचार नहीं होना चाहिए और नियम तोड़ने वालों को दंड मिलना चाहिए।
  • सप्तांग सिद्धांत: राज्य के सात अंग होते हैं जो मिलजुल कर काम करते हैं।

आज भी दिखने वाले विचार:

  • आज भी सरकारें लोक-कल्याण (सड़कें, पुल, अस्पताल बनवाना) के कार्य करती हैं।
  • कानून व्यवस्था और प्रशासन आज भी किसी देश को चलाने के लिए सबसे जरूरी हैं।
  • भ्रष्टाचार रोकने के लिए आज भी कड़े कानून बनाए जाते हैं।

6. अशोक और उसके साम्राज्य के बारे में असाधारण बातें क्या थीं? उनमें से कौन-सी बातें आज भी भारत को प्रभावित करती रही हैं और क्यों? अपने विचार लगभग 250 शब्दों में लिखिए।

देवताओं के प्रिय राजा पियदसी कहते हैं- मेरे धम्माधिकारी सार्वजनिक लाभ के लिए अनेक विषयों में व्यक्त हैं। वे सभी संप्रदाओं के सदस्यों, तपस्वियों और गृहस्थों दोनों के बीच व्यस्त हैं। मैंने कुछ को बौद्ध संघ, ब्राह्मणों और आजीवकों ……….. जैनियों …………. और विभिन्न संप्रदायों के लिय नियुक्त किया है। अधिकारियों की अनेक श्रेणियाँ हैं और उनके कई प्रकार के कर्तव्य है। मेरे धम्माधिकारी इन और अन्य संप्रदायों के विषयों में व्यस्त हैं।
उत्तर:
अशोक और उसके साम्राज्य में कई ऐसी असाधारण बातें थीं जो उस समय के लिए बहुत अनोखी थीं।

  • सबसे पहली बात, अशोक ने कलिंग युद्ध के भीषण विनाश को देखकर हिंसा छोड़ दी और अहिंसा तथा शांति का मार्ग अपनाया। यह किसी भी शक्तिशाली राजा के लिए बहुत बड़ी बात थी, क्योंकि उस समय ज़्यादातर राजा युद्ध जीतकर अपना साम्राज्य बढ़ाना चाहते थे।
  • दूसरी असाधारण बात यह थी कि अशोक ने अपने धम्माधिकारी नियुक्त किए, जो बौद्ध संघ, ब्राह्मणों, आजीवकों, जैनियों और अन्य सभी संप्रदायों के लिए काम करते थे। इससे पता चलता है कि अशोक सभी धर्मों और विचारधाराओं का सम्मान करते थे और किसी एक धर्म को दूसरे से बड़ा नहीं मानते थे। यह उस समय के लिए बहुत सहिष्णुता (टॉलरेंस) वाली बात थी।
  • तीसरी बात, अशोक ने अपने शिलालेखों के जरिए आम जनता तक अपने विचार पहुँचाए, कुएँ खुदवाए, पेड़ लगवाए, अस्पताल बनवाए और जानवरों की भी देखभाल की।
  • इनमें से कई बातें आज भी भारत को प्रभावित करती हैं। जैसे हमारे राष्ट्रीय प्रतीक में सारनाथ स्तंभ के चार शेर हैं, और राष्ट्रीय ध्वज में धर्मचक्र बना है। “सत्यमेव जयते” भी अशोक के समय से जुड़ा है।
  • सबसे ज़्यादा जो बात आज भी काम आती है, वह है सब धर्मों का सम्मान करना। आज भारत एक धर्मनिरपेक्ष (सेक्युलर) देश है, जहाँ हर धर्म को बराबर सम्मान मिलता है – यह सोच अशोक के समय से ही चली आ रही है। इसलिए मुझे लगता है कि अशोक की सहिष्णुता और शांति की नीति आज भी हमारे देश की पहचान का हिस्सा है।

7. अशोक के उपरोक्त शिलालेख को पढ़ने के उपरांत, क्या आपको लगता है कि वे अन्य धार्मिक विश्वासों और विचारधाराओं के प्रति सहिष्णु थे? अपने विचार कक्षा में साझा कीजिए।

उत्तर:
हाँ, इस शिलालेख को पढ़ने के बाद यह पूरी तरह स्पष्ट है कि अशोक अन्य सभी धार्मिक विश्वासों और विचारधाराओं के प्रति अत्यंत सहिष्णु थे। इसके कारण निम्नलिखित हैं:

  • सभी संप्रदायों का उल्लेख: शिलालेख में अशोक ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनके अधिकारी (धम्माधिकारी) केवल बौद्धों के लिए नहीं, बल्कि ब्राह्मणों, आजीवकों, जैनियों और अन्य सभी संप्रदायों के लिए काम करते हैं।
  • निष्पक्षता: उन्होंने किसी एक धर्म को दूसरे से श्रेष्ठ नहीं बताया, बल्कि अपने अधिकारियों को सभी के बीच जाकर सेवा करने का आदेश दिया।
  • सर्वधर्म समभाव: वे चाहते थे कि उनके राज्य में सभी विचारधाराओं के लोग शांति और सम्मान के साथ रहें।

8. ब्राह्मी लिपि एक लेखन प्रणाली थी जिसका प्राचीन भारत में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता था। इस लिपि के बारे में अधिक जानने का प्रयास कीजिए। जहाँ भी आवश्यक हो, अपने शिक्षक से सहायता लीजिए। एक लघु कार्य परियोजना बनाएँ और इस दौरान आपने ब्राह्मी लिपि के बारे में जो कुछ भी सीखा, उसे संलग्न कीजिए।

उत्तर:
लघु परियोजना: ब्राह्मी लिपि
परिचय: ब्राह्मी प्राचीन भारत की सबसे महत्वपूर्ण और पुरानी लिपियों में से एक है। सम्राट अशोक के अधिकांश शिलालेख इसी लिपि में लिखे गए हैं।
जननी लिपि: इसे भारतीय उपमहाद्वीप की अधिकांश आधुनिक लिपियों की ‘जननी’ माना जाता है। आज की देवनागरी (हिंदी), बंगाली, तमिल, तेलुगु आदि लिपियाँ ब्राह्मी से ही विकसित हुई हैं।
लेखन शैली: यह लिपि बाएँ से दाएँ लिखी जाती थी।
खोज: इसे सबसे पहले 1837 ई. में एक अंग्रेज विद्वान जेम्स प्रिंसेप ने पढ़ा था।
उदाहरण: हिंदी का अक्षर ‘क’ ब्राह्मी में एक ‘प्लस’ (+) के निशान जैसा दिखता था।

9. मान लीजिए कि आपको तीसरी शताब्दी सा.सं.पू. में कौशांबी से कावेरीपट्टनम की यात्रा करनी है। आप यह यात्रा कैसे करेंगे? इस यात्रा के दौरान आप कहाँ-कहाँ ठहरेंगे और आपको इसमें कितना समय लगेगा?

उत्तर:
यात्रा का मार्ग: कौशांबी (उत्तर प्रदेश) से कावेरीपट्टनम (तमिलनाडु) जाने के लिए मैं उस समय के प्रमुख व्यापारिक मार्ग ‘दक्षिणापथ’ का उपयोग करूँगा।
परिवहन के साधन: जमीनी रास्ते के लिए बैलगाड़ी या घोड़े का प्रयोग करूँगा और बड़ी नदियों (जैसे नर्मदा, गोदावरी) को पार करने के लिए नाव का सहारा लूँगा।
ठहरने के स्थान (पड़ाव): रास्ते में मैं उस समय के महत्वपूर्ण नगरों में विश्राम करूँगा, जैसे:

  1. विदिशा (मध्य भारत)
  2. उज्जयिनी (अवंति)
  3. प्रतिष्ठान (दक्कन)
  4. अमरावती (आंध्र प्रदेश)
  5. कांचीपुरम (तमिलनाडु)

समय: चूँकि यह दूरी बहुत अधिक है (लगभग 2000 किमी) और साधन धीमे हैं, इसलिए इस यात्रा में मुझे 3 से 4 महीने या उससे अधिक समय लग सकता है।

कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 5 से परीक्षा के लिए अतिरिक्त प्रश्न उत्तर

कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान पाठ 5 पर आधारित अतिलघुउत्तरीय प्रश्न उत्तर

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. साम्राज्य किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंसाम्राज्य अनेक छोटे राज्यों या क्षेत्रों से मिलकर बना एक विशाल भूभाग होता है, जिस पर एक सम्राट शासन करता है।

2. मगध की प्रारंभिक और बाद की राजधानी का नाम लिखिए।
उत्तर देखेंमगध की प्रारंभिक राजधानी राजगृह (राजगीर) थी और बाद में पाटलिपुत्र (पटना) को राजधानी बनाया गया।

3. चाणक्य कौन थे?
उत्तर देखेंचाणक्य (कौटिल्य) तक्षशिला के आचार्य और चंद्रगुप्त मौर्य के गुरु थे, जिन्होंने मौर्य साम्राज्य की स्थापना में सहायता की।

4. इंडिका पुस्तक से हमें किस वंश की जानकारी मिलती है?
उत्तर देखेंइंडिका पुस्तक से हमें मौर्य वंश के प्रशासन, समाज और राजधानी पाटलिपुत्र के बारे में जानकारी मिलती है।

5. अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद क्या निर्णय लिया?
उत्तर देखेंकलिंग युद्ध में भारी रक्तपात देखकर अशोक ने भविष्य में कभी युद्ध न करने और धम्म (धर्म) का पालन करने का निर्णय लिया।

6. धम्म महामात्र का क्या कार्य था?
उत्तर देखेंधम्म महामात्र नामक अधिकारियों का कार्य विभिन्न स्थानों पर जाकर लोगों को धर्म और नैतिकता की शिक्षा देना था।

7. सिकंदर और पोरस के बीच युद्ध किस नदी के किनारे हुआ था?
उत्तर देखेंसिकंदर और पोरस के बीच युद्ध झेलम नदी (हाइडेस्पीज) के किनारे हुआ था, जिसमें पोरस ने वीरता से मुकाबला किया।

8. सोहगौरा ताम्रपत्र कहाँ से प्राप्त हुआ है?
उत्तर देखेंसोहगौरा ताम्रपत्र अभिलेख उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के सोहगौरा नामक स्थान से प्राप्त हुआ है।

9. अष्टाध्यायी का विषय क्या है?
उत्तर देखेंअष्टाध्यायी संस्कृत व्याकरण का एक प्राचीन ग्रंथ है जिसकी रचना विद्वान पाणिनि ने की थी।

10. अशोक के शिलालेख किस भाषा में लिखे गए थे?
उत्तर देखेंअशोक के अधिकांश शिलालेख प्राकृत भाषा में लिखे गए थे, जो उस समय जनसामान्य की भाषा थी।

11. सांची का स्तूप किसने बनवाया था?
उत्तर देखेंसांची का महान स्तूप मूल रूप से मौर्य सम्राट अशोक द्वारा बनवाया गया था।

12. मौर्य काल में कर क्यों महत्वपूर्ण था?
उत्तर देखेंविशाल सेना रखने, अधिकारियों को वेतन देने और लोक कल्याणकारी कार्यों के लिए राजा को कर की आवश्यकता होती थी।

13. जिम्नोसोफिस्ट किसे कहा जाता था?
उत्तर देखेंग्रीक लोग भारतीय नग्न साधुओं या दार्शनिकों को जिम्नोसोफिस्ट कहते थे, जिनसे सिकंदर ने संवाद किया था।

14. मौर्य साम्राज्य के पतन का एक कारण बताइए।
उत्तर देखेंअशोक के बाद के शासक कमजोर थे और वे विशाल साम्राज्य को एकजुट रखने में असमर्थ रहे, जिससे साम्राज्य का पतन हुआ।

15. सारनाथ स्तंभ के शीर्ष पर कौन से जानवर अंकित हैं?
उत्तर देखेंसारनाथ स्तंभ के शीर्ष चक्र के नीचे हाथी, घोड़ा, बैल और सिंह की आकृतियां उकेरी गई हैं।

कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान पाठ 5 पर आधारित लघुउत्तरीय प्रश्न उत्तर

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. राज्य और साम्राज्य में क्या अंतर है?
उत्तर देखेंराज्य एक छोटा क्षेत्र होता है जिस पर राजा शासन करता है। साम्राज्य बहुत विशाल होता है जिसमें कई राज्य शामिल होते हैं। साम्राज्य को संभालने के लिए राजा की तुलना में सम्राट को अधिक संसाधनों, बड़ी सेना और अधिकारियों की आवश्यकता होती है।

2. मगध के शक्तिशाली महाजनपद बनने के क्या कारण थे?
उत्तर देखेंमगध के पास गंगा और सोन जैसी नदियाँ थीं जो यातायात और जल के लिए उपयोगी थीं। वहाँ के जंगलों में हाथी उपलब्ध थे जो सेना के लिए महत्वपूर्ण थे। साथ ही, वहाँ लोहे की खदानें थीं जिनसे मजबूत औजार और हथियार बनाए जा सकते थे।

3. कौटिल्य के सप्तांग सिद्धांत को संक्षेप में समझाइए।
उत्तर देखेंकौटिल्य ने राज्य को सात अंगों वाला माना है: 1. राजा (स्वामी), 2. अमात्य (मंत्री), 3. जनपद (क्षेत्र व जनसंख्या), 4. दुर्ग (किला), 5. कोष (खजाना), 6. दंड (सेना/कानून) और 7. मित्र। ये सभी मिलकर राज्य को मजबूत बनाते हैं।

4. अशोक का धम्म (धर्म) क्या था?
उत्तर देखेंअशोक का धम्म किसी विशेष देवता की पूजा नहीं थी। यह नैतिक नियमों का एक समूह था जिसमें बड़ों का सम्मान, छोटों के प्रति दया, सत्य बोलना, अहिंसा और सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता शामिल थी।

5. मौर्य प्रशासन में नगरों की व्यवस्था कैसी थी?
उत्तर देखेंमेगस्थनीज के अनुसार, नगरों का प्रशासन समितियों द्वारा चलाया जाता था। साफ-सफाई, विदेशियों की देखभाल, जन्म-मृत्यु का पंजीकरण, व्यापार और माप-तोल की निगरानी के लिए अलग-अलग विभाग होते थे।

6. सिकंदर के आक्रमण का भारत पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर देखेंयद्यपि सिकंदर का शासन भारत में स्थायी नहीं रहा, लेकिन इसने भारत और यूनान (ग्रीस) के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक संपर्क के रास्ते खोल दिए। इससे भारतीय कला और मुद्रा निर्माण पर यूनानी प्रभाव पड़ा।

7. मौर्य काल में गुप्तचरों (जासूसों) की क्या भूमिका थी?
उत्तर देखेंविशाल साम्राज्य में अधिकारियों और जनता की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए राजा गुप्तचरों का उपयोग करते थे। वे राजा को साम्राज्य के विभिन्न हिस्सों की पल-पल की खबरें देते थे ताकि विद्रोह को रोका जा सके।

8. सोहगौरा ताम्रपत्र का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
उत्तर देखेंयह भारत के सबसे प्राचीन प्रशासनिक अभिलेखों में से एक है। इससे पता चलता है कि मौर्य काल में अकाल या सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए राज्य द्वारा अनाज भंडारण और राहत कार्य किए जाते थे।

9. अशोक को एक महान संचारक क्यों कहा जाता है?
उत्तर देखेंअशोक पहले शासक थे जिन्होंने अपने संदेशों को पत्थरों और स्तंभों पर खुदवाकर सीधे जनता तक पहुँचाया। उन्होंने अपने शिलालेखों को पूरे साम्राज्य में मुख्य मार्गों पर लगवाया ताकि लोग उन्हें आसानी से पढ़ और समझ सकें।

10. नंद वंश के पतन के क्या कारण थे?
उत्तर देखेंनंद वंश का शासक घनानंद बहुत धनी था लेकिन अपनी प्रजा का शोषण करता था, जिससे वह अलोकप्रिय हो गया। चाणक्य के अपमान ने उनके संकल्प को दृढ़ किया और चंद्रगुप्त मौर्य ने इस असंतोष का लाभ उठाकर नंद वंश को समाप्त कर दिया।

कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान पाठ 5 पर आधारित दीर्घउत्तरीय प्रश्न उत्तर

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा मौर्य साम्राज्य की स्थापना की कहानी का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखेंचंद्रगुप्त मौर्य एक साधारण परिवार से थे। उनकी मुलाकात तक्षशिला के आचार्य चाणक्य (कौटिल्य) से हुई, जो नंद राजा घनानंद से अपमानित होकर बदला लेना चाहते थे। चाणक्य ने चंद्रगुप्त को युद्ध और राजनीति की शिक्षा दी। चंद्रगुप्त ने अपनी सेना तैयार की और पहले उत्तर-पश्चिम भारत से यूनानी शासकों को खदेड़ा। इसके बाद उन्होंने मगध पर आक्रमण किया और अत्याचारी राजा घनानंद को हराकर 321 ईसा पूर्व में मौर्य साम्राज्य की स्थापना की। यह भारत का पहला विशाल साम्राज्य था।

2. अशोक के कलिंग युद्ध और उसके परिणामों पर एक लेख लिखिए।
उत्तर देखेंअपने राज्याभिषेक के आठ साल बाद अशोक ने कलिंग (वर्तमान ओडिशा) पर आक्रमण किया। इस युद्ध में भीषण रक्तपात हुआ; लगभग एक लाख लोग मारे गए और डेढ़ लाख बंदी बनाए गए। युद्ध के मैदान में हुए विनाश और दुख को देखकर अशोक का हृदय परिवर्तित हो गया। उन्होंने सदा के लिए युद्ध त्याग दिया और बुद्ध के उपदेशों को अपनाया। उन्होंने ‘भेरीघोष’ (युद्ध की नगाड़ा) की जगह ‘धम्मघोष’ (धर्म की घोषणा) की नीति अपनाई और अपनी प्रजा की भलाई में जीवन लगा दिया।

3. कौटिल्य के अनुसार एक राजा के क्या कर्तव्य होने चाहिए?
उत्तर देखेंकौटिल्य के अनुसार, “प्रजा के सुख में ही राजा का सुख है और प्रजा की भलाई में ही उसकी भलाई है।” राजा को स्वेच्छाचारी नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे मंत्रियों और बड़ों की सलाह लेनी चाहिए। राजा का कर्तव्य है कि वह राज्य की सुरक्षा करे, कानून व्यवस्था बनाए रखे, और अकाल या संकट के समय प्रजा की मदद करे। उसे हमेशा सक्रिय रहना चाहिए और प्रशासन पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। कौटिल्य का मानना था कि एक शक्तिशाली राजा को लोक कल्याणकारी भी होना चाहिए।

4. मौर्य कालीन कला और वास्तुकला की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर देखेंमौर्य काल कला और वास्तुकला के विकास का स्वर्णिम युग था। इस समय पत्थरों को काटकर विशाल स्तंभ बनाए गए जिन पर चमकदार पॉलिश की जाती थी, जैसे सारनाथ का स्तंभ। सांची का स्तूप इस काल की वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। चट्टानों को काटकर गुफाएँ बनाई गईं जो भिक्षुओं के रहने के काम आती थीं। यक्ष-यक्षिणी की मूर्तियाँ और मिट्टी के खिलौने भी इस काल की कलात्मकता को दर्शाते हैं। अशोक के शिलालेखों की नक्काशी भी उच्च कोटि की थी।

5. साम्राज्यों के पतन के सामान्य कारण क्या होते हैं? मौर्य साम्राज्य के संदर्भ में समझाइए।
उत्तर देखेंसाम्राज्यों के पतन के कई कारण होते हैं। जब एक शक्तिशाली राजा के बाद कमजोर उत्तराधिकारी आते हैं, तो वे विशाल साम्राज्य को संभाल नहीं पाते। मौर्य साम्राज्य में भी अशोक के बाद के शासक कमजोर थे। साम्राज्य इतना विशाल था कि दूरदराज के क्षेत्रों पर नियंत्रण रखना कठिन हो गया। प्रांतीय गवर्नर अक्सर विद्रोह कर स्वतंत्र हो जाते थे। सेना और प्रशासन पर भारी खर्च के कारण आर्थिक संकट भी पतन का कारण बनता है। कभी-कभी विदेशी आक्रमण भी साम्राज्य को नष्ट कर देते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान भाग 1 का अध्याय 5 “साम्राज्यों का उदय” आसान है?

यह अध्याय अपेक्षाकृत रोचक और पढ़ने में आसान है, क्योंकि इसकी शुरुआत भविषा और ध्रुव नामक काल्पनिक बच्चों की पाटलिपुत्र यात्रा की एक कहानी से होती है, जो पूरे अध्याय को एक कथा-प्रवाह में बाँधे रखती है। हालाँकि इसमें मगध, नंद वंश, सिकंदर का अभियान, चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक जैसी कई ऐतिहासिक घटनाएँ और नाम एक साथ आते हैं, इसलिए इन्हें कालक्रम (टाइमलाइन, चित्र 5.30) के अनुसार क्रमबद्ध ढंग से याद रखना ज़रूरी है। यदि विद्यार्थी घटनाओं को क्रम में समझे – महाजनपद से नंद वंश, फिर मौर्य साम्राज्य, फिर अशोक — तो यह अध्याय काफी सरल और मनोरंजक बन जाता है।

कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान भाग 1 के अध्याय 5 में अच्छे अंक कैसे प्राप्त करें?

अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए सबसे पहले साम्राज्य और राज्य के बीच के अंतर तथा साम्राज्य की विशेषताओं (चित्र में दिए गए छह बिंदु) को स्पष्ट रूप से समझें। इसके बाद मगध के उदय, नंद वंश, सिकंदर के अभियान (334-323 सा.सं.पू.) और चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा मौर्य साम्राज्य की स्थापना का कालक्रम याद करें। कौटिल्य के सप्तांग सिद्धांत (स्वामी, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दंड, मित्र) को उसके सातों अंगों सहित याद करना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे आरेख-आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। साथ ही अशोक के कलिंग युद्ध, धम्म नीति और शिलालेखों (ब्राह्मी लिपि, प्राकृत भाषा) पर आधारित प्रश्नों का अभ्यास करें। अध्याय के अंत में दिए गए 9 प्रश्नों में से प्रश्न 6 (250 शब्दों का निबंध) और प्रश्न 9 (यात्रा-आधारित प्रश्न) दीर्घ-उत्तरीय अभ्यास के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं।

क्या कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान भाग 1 के अध्याय 5 को एक दिन में तैयार किया जा सकता है?

यदि यह अध्याय पहले से पढ़ा हुआ है, तो एक दिन में रिवीजन के रूप में तैयार करना संभव है, विशेषकर यदि विद्यार्थी चित्र 5.30 की समय-रेखा (टाइमलाइन) और “आगे बढ़ने से पहले” वाले सार-बिंदुओं को ध्यान से दोहराए। लेकिन चूँकि इस अध्याय में मगध, नंद वंश, सिकंदर, चंद्रगुप्त मौर्य, कौटिल्य और अशोक जैसी कई अलग-अलग ऐतिहासिक कड़ियाँ हैं, इसलिए पहली बार पढ़ने पर एक दिन में पूरी गहराई से समझना कठिन होगा। बेहतर होगा कि मानचित्र (चित्र 5.9, 5.12, 5.13, 5.17) के साथ दो-तीन दिन पहले से तैयारी शुरू की जाए, ताकि स्थान और घटनाओं का संबंध ठीक से समझ में आ सके।

कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान भाग 1 के अध्याय 5 का कौन-सा भाग परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण है?

परीक्षा की दृष्टि से “साम्राज्य की विशेषताएँ”, “मगध का उदय”, “चंद्रगुप्त मौर्य का उदय” और “कौटिल्य की राज्य संबंधी अवधारणा (सप्तांग सिद्धांत)” वाले भाग सबसे महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनसे परिभाषा-आधारित, आरेख-आधारित और व्याख्यात्मक प्रश्न सबसे अधिक पूछे जाते हैं। इसके अलावा “शांति का चयन करने वाला राजा” (अशोक) वाला भाग भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे कलिंग युद्ध, धम्म नीति, शिलालेख और राष्ट्रीय प्रतीक (सारनाथ स्तंभ) से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं। पाठ्यपुस्तक के अंत में दिए गए प्रश्न 1, 2, 5 और 6 विशेष रूप से बोर्ड परीक्षा शैली के दीर्घ-उत्तरीय प्रश्नों के अभ्यास के लिए उपयोगी हैं।