एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान भाग 1 अध्याय 3 भारत की जलवायु
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 3 भाग 1 भारत की जलवायु – अभ्यास के प्रश्न उत्तर तथा अतिरिक्त प्रश्नों के हल विस्तार से यहाँ दिए गए हैं। एनसीईआरटी द्वारा सत्र 2026-27 के लिए जारी की गई नई कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान भाग-1 की पाठ्यपुस्तक “समाज का अध्ययन: भारत और उसके आगे” का तीसरा अध्याय “भारत की जलवायु” पर आधारित है। इस अध्याय में मौसम, ऋतुओं और जलवायु के बीच अंतर, भारत में पाई जाने वाली जलवायु के प्रकार (हिमालय की अल्पाइन जलवायु से लेकर थार की शुष्क जलवायु और तटीय क्षेत्रों की उष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु तक), जलवायु निर्धारित करने वाले कारक — अक्षांश, ऊँचाई, समुद्र से निकटता, पवन और स्थलाकृति — तथा दक्षिण-पश्चिम व उत्तर-पूर्व मानसून के बनने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया है। इसके साथ ही जलवायु का समाज, संस्कृति और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, चक्रवात-बाढ़-भूस्खलन-दावानल जैसी जलवायु संबंधी आपदाएँ और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषय भी इस अध्याय का हिस्सा हैं।
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एनसीईआरटी कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान भाग 1 अध्याय 3 समाधान
कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान पाठ 3 प्रश्न उत्तर
पेज 45- महत्वपूर्ण प्रश्न
1. भारतीय जलवायु को कौन-कौन से तत्व विविध बनाते हैं?
उत्तर:
भारत की जलवायु को विविधता प्रदान करने वाले मुख्य तत्व (कारक) निम्नलिखित हैं:
- अक्षांश: भारत का विस्तार उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय दोनों क्षेत्रों में है, जिससे यहाँ गर्म और ठंडी दोनों तरह की जलवायु मिलती है।
- ऊँचाई: हिमालय जैसे ऊँचे पर्वत ठंडे रहते हैं, जबकि मैदानी इलाके गर्म होते हैं।
- समुद्र से दूरी: समुद्र के पास के स्थानों (जैसे मुंबई) का मौसम समशीतोष्ण होता है, जबकि समुद्र से दूर के स्थानों (जैसे दिल्ली) में मौसम विषम (बहुत गर्म या बहुत ठंडा) होता है।
- पवन: हवाओं की दिशा बारिश और तापमान को प्रभावित करती है।
- स्थलाकृति: पहाड़, पठार और मैदान भी स्थानीय जलवायु को बदलते हैं।
2. मानसून क्या है? यह कैसे बनता है?
उत्तर:
- मानसून क्या है: ‘मानसून’ शब्द अरबी शब्द ‘मौसिम’ से बना है, जिसका अर्थ है मौसम। यह विशेष रूप से उन हवाओं को कहते हैं जो ऋतु (मौसम) के अनुसार अपनी दिशा बदल लेती हैं और अपने साथ बारिश लाती हैं।
- यह कैसे बनता है: गर्मी में, जमीन समुद्र की तुलना में जल्दी गर्म हो जाती है, जिससे जमीन पर ‘निम्न वायुदाब’ बन जाता है।
समुद्र ठंडा रहता है और वहाँ ‘उच्च वायुदाब’ होता है।
हवा हमेशा उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलती है, इसलिए समुद्र से नमी वाली हवाएँ जमीन की ओर चलती हैं और बारिश करती हैं। इसे ही मानसून कहते हैं।
3. जलवायु का समाज, संस्कृति और आर्थिक स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
जलवायु हमारे जीवन के हर पहलू को प्रभावित करती है:
- समाज और संस्कृति: हमारे वस्त्र, भोजन और त्यौहार जलवायु के अनुसार होते हैं। जैसे- पोंगल, बैसाखी और ओणम जैसे त्यौहार फसलों और ऋतुओं से जुड़े हैं।
- आर्थिक स्थिति: भारत की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि (खेती) पर निर्भर है, और कृषि ‘मानसून’ (वर्षा) पर निर्भर है। अच्छी बारिश से फसल अच्छी होती है और देश समृद्ध होता है। मानसून के खराब होने पर सूखा पड़ सकता है और महंगाई बढ़ सकती है।
4. जलवायु की समझ हमें प्राकृतिक आपदा के लिए तैयार रहने में किस प्रकार सहायता करती है?
उत्तर:
जलवायु और मौसम की सही समझ हमें आने वाली मुसीबतों से बचा सकती है:
- पूर्वानुमान: यदि हमें पहले से पता हो कि चक्रवात (तूफान) या भारी बारिश आने वाली है, तो सरकार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचा सकती है।
- तैयारी: किसान सूखे या बाढ़ की आशंका को देखते हुए अपनी फसलों की योजना बना सकते हैं।
- संसाधन: प्रशासन भोजन और दवाइयों का इंतजाम समय पर कर सकता है।
5. जलवायु परिवर्तन क्या है? इसके परिणाम क्या-क्या होते हैं?
उत्तर:
जलवायु परिवर्तन: जब किसी जगह के तापमान और मौसम के पैटर्न में लंबे समय (दशकों) के लिए बदलाव आ जाता है, तो उसे जलवायु परिवर्तन कहते हैं। आजकल यह मानवीय गतिविधियों (प्रदूषण) के कारण तेजी से हो रहा है।
परिणाम:
वैश्विक तापन: पृथ्वी का औसत तापमान बढ़ रहा है।
पिघलते ग्लेशियर: गर्मी के कारण पहाड़ों की बर्फ पिघल रही है, जिससे समुद्र का जलस्तर बढ़ सकता है।
आपदाएँ: बाढ़, सूखा और तूफानों की संख्या और तीव्रता बढ़ रही है।
पेज 47 – आइए पता लगाएँ
आपकी प्रिय ऋतुएँ कौन-सी हैं? अपने कारणों सहित इस पर एक संक्षिप्त निबंध लिखिए।
उत्तर:
मेरी प्रिय ऋतु: वसंत
भारत की छह ऋतुओं में ‘वसंत ऋतु’ मेरी सबसे प्रिय है। इसे ‘ऋतुओं का राजा’ (ऋतुराज) भी कहा जाता है। यह ऋतु कड़ाके की सर्दी के जाने और भीषण गर्मी के आने के बीच (फरवरी-मार्च) का समय होती है।
पसंद के कारण:
- सुहावना मौसम: इस समय मौसम न तो बहुत ठंडा होता है और न ही बहुत गर्म। हवा में एक ताजगी और हल्कापन होता है।
- प्राकृतिक सुंदरता: वसंत में प्रकृति अपने सबसे सुंदर रूप में होती है। पेड़ों पर नए हरे पत्ते आते हैं और बगीचों में गेंदा, गुलाब और सरसों के पीले फूल खिल उठते हैं। चारों तरफ हरियाली और रंग-बिरंगे फूल मन को मोह लेते हैं।
- त्योहार और खुशियाँ: इस ऋतु में ‘होली’ और ‘वसंत पंचमी’ जैसे उमंग और रंगों के त्योहार मनाए जाते हैं।
- पक्षियों की चहचहाहट: आम के पेड़ों पर बौर (फूल) आने लगते हैं और कोयल की मीठी ‘कूक’ सुनाई देने लगती है।
आपके क्षेत्र में ऋतुओं से जुड़ी विशेष घटनाओं का पता लगाने के लिए तीन या चार विद्यार्थियों के समूह में चर्चा कीजिए। इनसे संबंधित गीत, उत्सवों से संबंधित भोजन, विभिन्न ऋतुओं से संबंधित प्रचलित प्रथाएँ आदि को लिखिए और कक्षा के साथ साझा कीजिए।
उत्तर:
भारत के विभिन्न क्षेत्रों में ऋतुओं के अनुसार खान-पान और उत्सव बदलते हैं। उत्तर भारत के संदर्भ में एक उदाहरण सूची नीचे दी गई है:
- शीत ऋतु: मकर संक्रांति, लोहड़ी।
विशेष भोजन: तिल-गुड़ के लड्डू, गजक, मूंगफली, मक्के की रोटी और सरसों का साग।
प्रथा: अलाव जलाना और उसके चारों ओर नाचना, लोकगीत गाना - वसंत ऋतु: होली, बैसाखी, वसंत पंचमी।
विशेष भोजन: गुझिया, ठंडाई, पीले चावल।
प्रथा: एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाना, फाग गाना - वर्षा ऋतु: तीज, रक्षाबंधन।
विशेष भोजन: घेवर, मालपुआ, पकौड़े।
प्रथा: पेड़ों पर झूले डालना, सावन के गीत गाना, मेहंदी लगाना
क्या आप जानते हैं कि आपके क्षेत्र में कौन-से वृक्ष शीत ऋतु के आगमन से पूर्व अपना रंग बदलते हैं? क्या ऐसे वृक्ष हैं, जो इस समय अपने पत्ते गिरा देते हैं? आपके विचार में ऐसा क्यों होता है? इन वृक्षों के स्थानीय नामों का पता लगाइए और उनके विषय में लिखिए।
उत्तर:
वृक्षों के नाम:
पहाड़ी क्षेत्रों (जैसे कश्मीर, हिमाचल) में ‘चिनार’का पेड़ इसका सबसे अच्छा उदाहरण है, जिसके पत्ते सर्दियों से पहले गहरे लाल हो जाते हैं। मैदानी इलाकों में शहतूत, पोपलर और अमलतास के पत्ते पीले पड़कर गिरने लगते हैं।
कारण:
- धूप की कमी: सर्दियों में दिन छोटे होते हैं और धूप कम मिलती है। इससे पेड़ों में भोजन बनाने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। पत्तियों का हरा रंग खत्म होने लगता है, जिससे पत्तियों में मौजूद अन्य रंग (पीला, नारंगी या लाल) दिखाई देने लगते हैं।
- पानी की बचत: सर्दियों में हवा और मिट्टी में नमी कम हो जाती है। पत्तों के छेदों से पानी भाप बनकर उड़ता है। पेड़ अपने अंदर का पानी बचाने के लिए और ऊर्जा संरक्षित करने के लिए अपने पत्ते गिरा देते हैं। यह पेड़ों के लिए एक तरह से ‘सर्दी की नींद’ जैसा होता है।
पेज 51 – आइए पता लगाएँ
“उधगमंडलम (ऊटी) एवं कोयंबटूर लगभग समान अक्षांशों पर स्थित हैं। ऊटी में गर्मी का तापमान 10–25 डिग्री सेल्सियस जबकि कोयंबटूर में 25–38 डिग्री सेल्सियस होता है। इन दो स्थानों पर तापमान में यह अंतर क्यों है? इस बारे में आप क्या सोचते हैं?”
उत्तर:
मुख्य कारण: इस तापमान के अंतर का मुख्य कारण ‘समुद्र तल से ऊँचाई’ है।
स्पष्टीकरण:
- ऊँचाई का प्रभाव: भले ही ऊटी और कोयंबटूर एक ही अक्षांश पर हैं (यानी भूमध्य रेखा से समान दूरी पर), लेकिन उनकी ऊँचाई में बहुत बड़ा अंतर है।
ऊटी: यह नीलगिरी की पहाड़ियों में स्थित एक हिल स्टेशन है, जो समुद्र तल से काफी अधिक ऊँचाई (लगभग 2,240 मीटर) पर है।
कोयंबटूर: यह एक मैदानी इलाका है, जो समुद्र तल से कम ऊँचाई (लगभग 411 मीटर) पर स्थित है। - वैज्ञानिक कारण: विज्ञान का नियम है कि जैसे-जैसे हम पृथ्वी की सतह से ऊपर (ऊँचाई की ओर) जाते हैं, हवा का घनत्व कम होता जाता है और तापमान घटता जाता है। सामान्यतः, हर 165 मीटर की ऊँचाई पर तापमान लगभग 1 डिग्री सेल्सियस कम हो जाता है।
चूँकि ऊटी पहाड़ों पर बहुत ऊँचाई पर बसा है, इसलिए वहां की हवा ठंडी रहती है। वहीं, कोयंबटूर नीचे मैदान में होने के कारण गर्म रहता है।
पेज 56 – आइए पता लगाएँ
भारत में मानसूनी वर्षा का पूर्वानुमान सदैव से ही जीवन का एक महत्वपूर्ण पक्ष रहा है। हमारे पूर्वजों ने अपने आस-पास की प्रकृति के संकेतों को ध्यान से देखा और अपने अनुभवों से स्थानीय पारंपरिक ज्ञान विकसित किया। यह पारंपरिक ज्ञान एक महत्वपूर्ण विरासत है, जिसे हमें संरक्षित करना चाहिए। उदाहरण के लिए, कोंकण तट पर मछुआरे मानसून के आगमन की भविष्यवाणी करते हैं, जब जल के नीचे रहने वाली मछलियाँ सतह पर दिखाई देने लगती हैं। दक्षिण भारत के कुछ भागों में यह माना जाता है कि मानसून गोल्डन शॉवर ट्री या अमलतास (कैसिया फिस्टुला) के खिलने के 50 दिनों के भीतर आ जाता है। कुछ समुदायों का यह भी मानना है कि जब कौए अपने घोंसले पेड़ की चोटी पर बनाते हैं तो यह कम वर्षा का संकेत देता है, जबकि अगर घोंसले नीचे हैं तो भारी वर्षा होने की संभावना होती है।
अपने क्षेत्र में वर्षा, कोहरे, हिम या सहिमवृष्टि के बारे में ऐसे स्थानीय ज्ञान की एक सूची बनाइए।
उत्तर:
भारत के विभिन्न हिस्सों में लोग आज भी पशु-पक्षियों और प्रकृति के संकेतों को देखकर मौसम का अनुमान लगाते हैं। यहाँ ऐसे ही कुछ प्रचलित स्थानीय ज्ञान की सूची दी गई है:
- चींटियों का व्यवहार: अगर चींटियाँ अपने अंडे मुँह में दबाकर कतार में सुरक्षित या ऊँचे स्थानों की ओर जाती हुई दिखाई दें, तो यह भारी बारिश होने का संकेत माना जाता है।
- मोर का नाचना: ग्रामीण क्षेत्रों में यह माना जाता है कि जब मोर अपने पंख फैलाकर नाचने लगते हैं और जोर-जोर से आवाज निकालते हैं, तो बारिश होने वाली होती है।
- मेंढकों की टरटराहट: यदि मेंढक अचानक से एक साथ जोर-जोर से टरटराने लगें, तो इसे मानसून या वर्षा के आगमन का पक्का संकेत माना जाता है।
- पशुओं का व्यवहार: अगर गाय, भैंस या बकरियाँ चरते समय अचानक बेचैन हो जाएँ, आसमान की ओर देखें या जल्दी घर की ओर भागने लगें, तो यह आंधी-तूफान आने का संकेत हो सकता है।
- कीड़े-मकोड़े: अगर बारिश के मौसम में बहुत सारे जुगनू या पंख वाले कीड़े (दीमक) रात में रोशनी के पास दिखाई दें, तो माना जाता है कि बारिश जारी रहेगी।
- चंद्रमा का घेरा: यदि रात में चंद्रमा के चारों ओर एक गोल घेरा दिखाई दे, तो यह अगले दिन वर्षा या खराब मौसम का संकेत होता है।
अपने दादाजी-दादीजी या पड़़ोस के वद्धृजनों से संपर्क कीजिए। उनसे उनके बचपन और युवावस्था में मनाए जाने वाले पारंपरिक त्योहारों और नृत्ययों के बारे में पूछिए, जो उन्हें याद हैं, विशेषकर जो कृषि और वर्षा से संबंधित थे। वे किन रीति -रिवाजों में भाग लेते थे? फिर अपने साथियों के साथ एक सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन कीजिए। आप अपने वयोवद्धृधों द्वारा साझा किए गए कुछ नृत्यों, गीतों और गति विधियों को वहाँ प्रदर्शित कर सकते हैं— चाहे वह फसल की रस्म हो या वर्षा के देवताओं की प्रार्थना के बारे में एक सरल कहानी या कोई नृत्य हो। अपने सहपाठियों के लिए इन परंपराओं को जीवंत करने का प्रयास कीजिए।
उत्तर:
मैंने अपने दादा-दादी और पड़ोस के बुजुर्गों से बात की। उन्होंने बताया कि पहले लोग फसल और वर्षा से जुड़े त्योहार जैसे बैसाखी, ओणम और पोंगल मनाते थे। वे खेतों में पूजा करते, गीत गाते और नृत्य करते थे। हमने विद्यालय में एक सांस्कृतिक उत्सव आयोजित किया, जिसमें इन परंपराओं को गीत, नृत्य और छोटी कहानियों के माध्यम से प्रस्तुत किया। इससे हमें अपनी संस्कृति को समझने का अवसर मिला।
पेज 59 – आइए विचार करें
बादल क्या हैं? आप कह सकते हैं कि ये आकाश में सफेद गुच्छे हैं। लेकिन ये किससे बने हैं? इसका उत्तर सरल है— जल। लेकिन ये केवल जल नहीं हैं। बादल जल की बूँदों और हिम के टुकड़े या दोनों का मिश्रण होते हैं, जो वायुमंडल में लटके रहते हैं।
उत्तर:
बादल आकाश में दिखाई देने वाले सफेद या धूसर गुच्छे होते हैं। ये केवल जल नहीं, बल्कि बहुत छोटी-छोटी जल की बूँदों और बर्फ (हिम) के सूक्ष्म कणों से बने होते हैं। ये कण वायुमंडल में हवा के सहारे तैरते रहते हैं। जब जलवाष्प ठंडी होकर संघनित होती है, तब बादल बनते हैं। बादल वर्षा, ओले या हिम के रूप में जल को पृथ्वी पर वापस लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पेज 60 – आइए पता लगाएँ
क्या आपने कभी बाढ़ देखी है अथवा इसके विषय में पढ़ा है? भारत के भौतिक मानचित्र को देखिए। समूह में चर्चा कीजिए कि बताए गए राज्यों में बाढ़ क्यों आती है?
उत्तर:
हाँ, हमने अक्सर समाचारों और अखबारों में बाढ़ के विनाशकारी दृश्यों को देखा और पढ़ा है। भारत के भौतिक मानचित्र का अध्ययन करने पर, इन राज्यों में बाढ़ आने के मुख्य कारण निम्नलिखित समझ में आते हैं:
- नदियों का उफान (असम, बिहार, उत्तर प्रदेश):
ये राज्य गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी विशाल नदियों और उनकी सहायक नदियों के क्षेत्र में आते हैं।
मानसून के दौरान हिमालय में भारी वर्षा होती है, जिससे इन नदियों में पानी की मात्रा बहुत बढ़ जाती है। चूँकि यहाँ की जमीन समतल (मैदानी) है, इसलिए नदियों का पानी किनारों को तोड़कर दूर-दूर तक फैल जाता है। - भारी मानसूनी वर्षा (केरल):
केरल में पश्चिमी घाट की उपस्थिति के कारण मानसून के दौरान अत्यधिक भारी वर्षा होती है। यहाँ की नदियाँ छोटी और तेज ढलान वाली हैं, जो भारी बारिश में तुरंत भर जाती हैं और आस-पास के इलाकों को डुबो देती हैं। - चक्रवात और तटीय स्थिति (आंध्र प्रदेश):
आंध्र प्रदेश समुद्र तट पर स्थित है। यहाँ अक्सर बंगाल की खाड़ी से उठने वाले चक्रवात आते हैं। चक्रवातों के कारण बहुत तेज बारिश होती है और समुद्र का पानी भी जमीन के अंदर घुस आता है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है। - जल निकासी की समस्या:
भारी बारिश के कारण सतह पर इतना पानी जमा हो जाता है कि भूमि उसे सोख नहीं पाती और जल निकासी ठीक न होने के कारण बाढ़ आ जाती है।
पेज 62 – आइए पता लगाएँ

चित्र 3.15 को देखिए। आपदा के प्रकार को पहचानिए और लोगों, पेड़-पौधों, जानवरों और आर्थिक जीवन पर पड़ने वाले इसके प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आपदा की पहचान और प्रभाव:
चित्र 3.15 में मुख्य रूप से चार प्रकार की आपदाएँ दिखाई गई हैं:
चक्रवात, बाढ़, भूस्खलन और जंगल की आग (दावानल)। चूँकि यह प्रश्न ‘जंगल की आग’ वाले खंड के बाद है, यहाँ उसके प्रभावों पर विशेष चर्चा की गई है:
- आपदा का प्रकार: जंगल की आग या दावानल।
- लोगों पर प्रभाव: आग से निकलने वाले धुएं से सांस लेने में दिक्कत होती है। आस-पास के गाँवों के लोगों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ता है।
- पेड़-पौधों पर प्रभाव: हजारों पेड़ जलकर राख हो जाते हैं, जिससे जंगल नष्ट हो जाते हैं।
- जानवरों पर प्रभाव: जंगली जानवरों के घर (आवास) छिन जाते हैं और कई जानवर आग में जलकर मर जाते हैं।
- आर्थिक प्रभाव: लकड़ी, जड़ी-बूटियों और वन उपज का भारी नुकसान होता है।
चार या पाँच के समूहों में ऊपर वर्णित प्रत्येक आपदा में प्राकृतिक और मानवीय कारणों की पहचान कीजिए। अपने निष्कर्षों की तुलना कीजिए।
उत्तर:
प्राकृतिक और मानवीय कारण:
| आपदा | प्राकृतिक कारण | मानवीय कारण |
|---|---|---|
| जंगल की आग | आकाशीय बिजली गिरना, अत्यधिक गर्मी या सूखा, पत्थरों या बांस का घर्षण। | जलती हुई बीड़ी/सिगरेट फेंकना, कैंपफायर को बिना बुझाए छोड़ना, लापरवाही। |
| बाढ़ | भारी वर्षा, बादल फटना। | नदियों के किनारे अवैध निर्माण, वनों की कटाई, खराब जल निकासी। |
| भूस्खलन | भूकंप, भारी बारिश। | पहाड़ों को काटकर सड़क बनाना, पेड़ों की कटाई। |
इन्हीं समूहों में उन उपायों पर भी चर्चा कीजिए जो उपर्युक्त आपदाओं से बचने में सहायता कर सकते हैं।
उत्तर:
बचने के उपाय:
- वृक्षारोपण: अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए क्योंकि पेड़ों की जड़ें मिट्टी को जकड़ कर रखती हैं, जिससे भूस्खलन और बाढ़ का खतरा कम होता है।
- जागरूकता: जंगलों में आग न जलाने और कूड़ा न फेंकने के प्रति लोगों को जागरूक करना चाहिए।
- सही निर्माण: नदियों के बहाव क्षेत्र में घर नहीं बनाने चाहिए और पहाड़ी इलाकों में निर्माण कार्य सावधानी से करना चाहिए।
- चेतावनी प्रणाली: मौसम विभाग द्वारा दी गई चक्रवात या भारी बारिश की चेतावनियों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए।
पेज 65 – प्रश्न और क्रियाकलाप
1. जलवायु के कारकों का उनके प्रभावों के साथ निम्नलिखित सूची में मिलान कीजिए –

उत्तर:

2. नीचे दिए गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए –
(क) मौसम और जलवायु में क्या अंतर है?
उत्तर:
- मौसम: यह वायुमंडल की अल्पकालिक स्थिति है जो दिन-प्रतिदिन या घंटे-दर-घंटे बदल सकती है। जैसे— आज धूप है, कल बारिश हो सकती है।
- जलवायु: यह किसी विशाल क्षेत्र के मौसम का दीर्घकालिक औसत है, जो लगभग 30 वर्षों या उससे अधिक समय तक बना रहता है। यह जल्दी नहीं बदलता।
(ख) समुद्र के निकट स्थित स्थानों का तापमान समुद्र से दूर स्थित स्थानों की तुलना में कम क्यों होता है?
उत्तर:
- ऐसा ‘समुद्र के समकारी प्रभाव’ के कारण होता है।
- पानी, जमीन की तुलना में देर से गर्म और देर से ठंडा होता है।
- दिन के समय या गर्मियों में, समुद्र से ठंडी हवाएँ जमीन की ओर चलती हैं, जो तटीय क्षेत्रों के तापमान को बढ़ने नहीं देतीं और उन्हें ठंडा/सुहावना रखती हैं। जबकि समुद्र से दूर के स्थान (जैसे दिल्ली/नागपुर) जल्दी गर्म हो जाते हैं।
(ग) भारतीय जलवायु को प्रभावित करने में मानसूनी पवन की क्या भूमिका है?
उत्तर:
- भारतीय जलवायु को ‘मानसूनी जलवायु’ कहा जाता है।
- ये पवनें अपने साथ समुद्र से नमी (वाष्प) लेकर आती हैं, जिससे पूरे भारत में वर्षा होती है।
- यह वर्षा कृषि (खेती) के लिए अत्यंत आवश्यक है और भीषण गर्मी से राहत दिलाती है।
(घ) चेन्नई पूरे वर्ष गर्म क्यों रहता है, जबकि लेह ठंडा रहता है?
उत्तर:
- चेन्नई: यह भूमध्य रेखा के करीब है और समुद्र तट पर स्थित है। यहाँ सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं और समुद्र की नमी के कारण मौसम साल भर गर्म और उमस भरा रहता है.
- लेह: यह समुद्र से बहुत दूर और हिमालय में बहुत अधिक ऊँचाई पर स्थित है। ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान गिरता है और भूमध्य रेखा से दूर होने के कारण यहाँ सूर्य की गर्मी कम पहुँचती है, इसलिए यह बहुत ठंडा रहता है।
3. इस पुस्तक के अंत में दिए गए भारत के मानचित्र को देखिए। लेह, चेन्नई, दिल्ली, पणजी, इन शहरों की जलवायु को पहचानिए।
- क्या यह स्थान समुद्र के समीप हैं, पर्वत पर हैं या रेगिस्तान में हैं?
- ये कारक वहाँ की जलवायु को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
उत्तर:
| शहर – स्थिति | जलवायु | प्रभाव का कारण |
|---|---|---|
| लेह – पर्वत पर (अधिक ऊँचाई) | अत्यधिक ठंडी और शुष्क (शीत मरुस्थल) | ऊँचाई के कारण तापमान बहुत कम रहता है। |
| चेन्नई – समुद्र के समीप (तट पर) | गर्म और आर्द्र | समुद्र के पास होने से तापमान सम रहता है लेकिन उमस ज्यादा होती है। |
| दिल्ली – मैदानी भाग (समुद्र से दूर) | विषम (गर्मी में बहुत गर्म, सर्दी में बहुत ठंडी) | समुद्र से दूरी के कारण यहाँ ‘महाद्वीपीय जलवायु’ का प्रभाव है। |
| पणजी – समुद्र के समीप (गोवा) | समशीतोष्ण और आर्द्र | समुद्र की निकटता के कारण यहाँ मौसम सुहावना रहता है। |
4. भारत के मानचित्र पर गर्मी और सर्दी के मानसून चक्र को प्रदर्शित कीजिए।
- गर्मियों और सर्दियों में पवनें कहाँ चलती हैं, इसके प्रतीक लगाइए।
- मानसून के दौरान पवनों की दिशा दिखाइए।
उत्तर:
- गर्मी (दक्षिण-पश्चिम मानसून): पवनें समुद्र (अरब सागर और बंगाल की खाड़ी) से जमीन की ओर चलती हैं।
दिशा: दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर (तीर ऊपर की तरफ आएगा)। - सर्दी (उत्तर-पूर्वी मानसून): पवनें जमीन (हिमालय/उत्तर भारत) से समुद्र की ओर चलती हैं।
दिशा: उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर (तीर नीचे की तरफ आएगा)।
5. भारत में कृषि और मौसम से जुड़े त्योहारों (जैसे – बैसाखी, ओणम) को दिखाते हुए एक रंगीन पोस्टर बनाइए। इन त्योहारों की तस्वीरें या रेखाचित्र लगाइए।
उत्तर:
हम इन त्योहारों को शामिल कर सकते हैं:
- बैसाखी (पंजाब): फसल कटाई का त्योहार। ढोल बजाते और भंगड़ा करते किसानों का चित्र बनाएँ।
- ओणम (केरल): चावल की फसल का त्योहार। फूलों की रंगोली (पूकलम) और नौका दौड़ का चित्र बनाएँ।
- पोंगल (तमिलनाडु): सूर्य की पूजा और गन्ने/चावल की खीर का चित्र।
- बिहू (असम): पारंपरिक नृत्य करते हुए चित्र।

6. कल्पना कीजिए कि आप भारत में एक किसान हैं। बरसात के मौसम के लिए आप कैसे तैयारी करेंगे? इस बारे में डायरी में संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
दिनांक: 10 जून
स्थान: मेरा गाँव
प्रिय डायरी,
आज आकाश में काले बादल घिर आए हैं और ठंडी हवा चल रही है। मुझे लगता है कि ‘मानसून’ (वर्षा ऋतु) बस आने ही वाला है। एक किसान के तौर पर यह मेरे लिए साल का सबसे खुशी और व्यस्तता का समय है। मैंने अपनी तैयारी शुरू कर दी है:
- मैंने अपने हल और ट्रैक्टर की जाँच कर ली है ताकि खेत की जुताई समय पर हो सके।
- मैंने धान (चावल) और मक्का के अच्छे किस्म के बीज बाजार से खरीद लिए हैं।
- खेत की मेढ़ों को ठीक कर रहा हूँ ताकि बारिश का पानी खेत में रुका रहे।
- भगवान से प्रार्थना है कि इस बार बारिश अच्छी हो, ताकि मेरी फसल लहलहा उठे और घर में खुशहाली आए।
कल से मैं खेत में बुवाई का काम शुरू करूँगा।
– एक किसान
7. किसी प्राकृतिक आपदा (जैसे – चक्रवात, बाढ़, भूस्खलन या दावानल) की पहचान कीजिए और एक छोटा निबंध लिखिए, जिसमें इसके कारण और प्रभाव सम्मिलित हों। ऐसे सुझाव दीजिए जो व्यक्ति, समुदाय और सरकार को इस आपदा के प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
उत्तर:
निबंध: चक्रवात– एक विनाशकारी आपदा
परिचय:
चक्रवात एक भयंकर समुद्री तूफान होता है जिसमें बहुत तेज हवाएँ घूमती हुई चलती हैं और भारी बारिश होती है। भारत का पूर्वी तट (जैसे ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु) अक्सर चक्रवातों का सामना करता है।
कारण:
1. निम्न वायुदाब : जब समुद्र के ऊपर गर्मी के कारण हवा गर्म होकर ऊपर उठती है, तो वहाँ ‘निम्न वायुदाब’ का क्षेत्र बन जाता है।
2. तेज हवाएँ: आस-पास की ठंडी हवा इस खाली जगह को भरने के लिए तेजी से दौड़ती है, जिससे हवा गोल-गोल घूमने लगती है और चक्रवात का रूप ले लेती है।
प्रभाव:
1. जन-धन की हानि: तेज हवाओं से कच्चे घर, बिजली के खंभे और पेड़ उखड़ जाते हैं।
2. बाढ़: भारी बारिश और समुद्र की लहरों के जमीन पर आने से बाढ़ आ जाती है, जिससे फसलें नष्ट हो जाती हैं।
3. मिट्टी का कटाव: उपजाऊ मिट्टी बह जाती है (मृदा अपरदन)।
बचाव के सुझाव:
सरकार के लिए:
पूर्व चेतावनी: मौसम विभाग को समय रहते चक्रवात की जानकारी और चेतावनी जारी करनी चाहिए।
राहत कार्य: एन.डी.आर.एफ. जैसी बचाव टीमों को तैयार रखना चाहिए और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाना चाहिए।
समुदाय के लिए:
निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को ऊँचे स्थानों पर चले जाना चाहिए।
मिल-जुलकर भोजन और दवाइयों का इंतजाम करना चाहिए।
व्यक्ति के लिए:
अफवाहों पर ध्यान न दें, सिर्फ आधिकारिक समाचार सुनें।
अपने घर की खिड़कियाँ और दरवाजे मजबूत रखें।
बैटरी, टॉर्च, सूखा खाना और पानी पहले से जमा कर लें।
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 3 से परीक्षा के लिए अतिरिक्त प्रश्न उत्तर
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान पाठ 3 पर आधारित अतिलघुउत्तरीय प्रश्न उत्तर
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
1. जलवायु किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंजलवायु किसी विशाल क्षेत्र में लंबी अवधि (दशकों) तक पाई जाने वाली मौसम की अवस्थाओं का औसत प्रतिरूप है।
2. भारत की मुख्य चार ऋतुओं के नाम लिखिए।
उत्तर देखेंभारत की चार मुख्य ऋतुएँ हैं- शीत, ग्रीष्म, वर्षा (मानसून) और शरद ऋतु।
3. ‘लू’ क्या है?
उत्तर देखेंगर्मियों में उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में चलने वाली तेज, गर्म और धूल भरी हवाओं को ‘लू’ कहते हैं।
4. ‘मानसून फेलियर’ का क्या अर्थ है?
उत्तर देखेंइसका अर्थ है मानसून के मौसम में सामान्य से कम वर्षा होना, जिससे सूखा और कृषि को नुकसान हो सकता है।
5. दावानल किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंयह एक अनियंत्रित आग है जो जंगलों या घास के मैदानों में शुष्क मौसम और तेज हवाओं के कारण तेजी से फैलती है।
6. हिमनदीय विस्फोट क्या है?
उत्तर देखेंजब हिमनदीय झील का पानी प्राकृतिक अवरोध तोड़कर अचानक बाहर बह निकलता है, तो उसे हिमनदीय विस्फोट कहते हैं।
7. मुंबई में नागपुर की तुलना में तापमान कम क्यों रहता है?
उत्तर देखेंमुंबई समुद्र के निकट है, इसलिए वहाँ समशीतोष्ण जलवायु पाई जाती है, जबकि नागपुर समुद्र से दूर है।
8. ‘सूक्ष्म जलवायु’ का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखें‘नगरीय ऊष्मा द्वीप’ या किसी घने जंगल के अंदर की जलवायु सूक्ष्म जलवायु का उदाहरण है।
9. पश्चिमी विक्षोभ भारत में कहाँ से आता है?
उत्तर देखेंपश्चिमी विक्षोभ पश्चिम दिशा से आता है और यह पश्चिमी एशिया तथा भूमध्यसागर के क्षेत्र से जुड़ा होता है।
10. भारत में शीतकालीन मानसून की दिशा क्या होती है?
उत्तर देखेंशीतकाल में मानसूनी हवाएँ स्थल से समुद्र की ओर बहती हैं (उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर)।
11. ग्लोबल वार्मिंग (वैश्विक तापन) का क्या प्रभाव है?
उत्तर देखेंइससे तापमान में वृद्धि होती है, ग्लेशियर पिघलते हैं और मौसम के प्रतिरूप में बदलाव आता है।
12. चक्रवात की भविष्यवाणी कौन करता है?
उत्तर देखेंभारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) चक्रवातों के आने और उनके प्रभाव की भविष्यवाणी करता है।
13. भारत के किस भाग में ‘अल्पाइन’ जलवायु पाई जाती है?
उत्तर देखेंहिमालय के ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में अल्पाइन जलवायु पाई जाती है।
14. भूस्खलन के दो प्रमुख कारण बताइए।
उत्तर देखेंभारी वर्षा और वनों की कटाई भूस्खलन के प्रमुख कारण हैं।
15. भारतीय कृषि के लिए कौन सा मानसून अधिक महत्वपूर्ण है?
उत्तर देखेंदक्षिण-पश्चिम मानसून (ग्रीष्मकालीन मानसून) भारतीय कृषि के लिए जीवन रेखा के समान है।
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान पाठ 3 पर आधारित लघुउत्तरीय प्रश्न उत्तर
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. मौसम और जलवायु में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखेंमौसम वायुमंडल की क्षणिक अवस्था है जो पल-पल बदल सकती है। जलवायु किसी बड़े भूभाग की 30-40 वर्षों की मौसमी दशाओं का औसत होती है जो जल्दी नहीं बदलती।
2. समुद्र से दूरी किसी स्थान की जलवायु को कैसे प्रभावित करती है?
उत्तर देखेंसमुद्र देर से गर्म और देर से ठंडा होता है, जिससे तटीय क्षेत्रों में तापमान संतुलित रहता है। समुद्र से दूर जाने पर यह समकारी प्रभाव खत्म हो जाता है, जिससे गर्मियाँ बहुत गर्म और सर्दियाँ बहुत ठंडी होती हैं।
3. ‘नगरीय ऊष्मा द्वीप’ क्या है?
उत्तर देखेंशहरों में कंक्रीट की इमारतें और सड़कें गर्मी को सोख लेती हैं और पेड़-पौधे कम होते हैं। इस कारण शहर अपने आस-पास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में काफी गर्म हो जाते हैं, जिसे ‘नगरीय ऊष्मा द्वीप’ कहते हैं।
4. हिमालय भारत के लिए एक जलवायु विभाजक का काम कैसे करता है?
उत्तर देखेंहिमालय मध्य एशिया से आने वाली कड़ाके की ठंडी हवाओं को भारत में घुसने से रोकता है, जिससे भारत में अधिक ठंड नहीं पड़ती। साथ ही, यह मानसूनी हवाओं को रोककर भारत में वर्षा करवाता है।
5. दक्षिण-पश्चिम मानसून कैसे बनता है?
उत्तर देखेंगर्मियों में भारतीय भूभाग बहुत गर्म हो जाता है जिससे निम्न वायुदाब बनता है। समुद्र ठंडा होने के कारण वहाँ उच्च वायुदाब होता है। हवाएँ समुद्र से नमी लेकर ज़मीन की ओर चलती हैं और वर्षा करती हैं।
6. चक्रवात तटीय क्षेत्रों को कैसे नुकसान पहुँचाते हैं?
उत्तर देखेंचक्रवात के साथ तेज हवाएँ और भारी वर्षा आती है। इससे समुद्र में ऊंची लहरें उठती हैं जो तटीय इलाकों को डुबो देती हैं, कच्चे घरों को तोड़ देती हैं, बिजली के खंभे उखाड़ देती हैं और जान-माल की भारी हानि करती हैं।
7. जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए हम क्या उपाय कर सकते हैं?
उत्तर देखेंहम जीवाश्म ईंधन का उपयोग कम करके, अधिक पेड़ लगाकर, नवीकरणीय ऊर्जा अपनाकर और प्रदूषण कम करके जलवायु परिवर्तन को रोकने में मदद कर सकते हैं।
8. भारतीय संस्कृति पर जलवायु का क्या प्रभाव है?
उत्तर देखेंभारत का भोजन, वस्त्र और त्योहार जलवायु पर आधारित हैं। जैसे, पोंगल और बैसाखी फसल कटाई के त्योहार हैं। केरल में सूती और कश्मीर में ऊनी कपड़े पहने जाते हैं। तटीय लोग चावल और मछली खाते हैं, जबकि उत्तर भारतीय रोटी। फसलों और त्योहारों में भी यही विविधता झलकती है।
9. भूस्खलन की घटनाओं में मानवीय गतिविधियों की क्या भूमिका है?
उत्तर देखेंमनुष्य वनों की अंधाधुंध कटाई करता है और पहाड़ों पर अनियोजित निर्माण करता है। इससे मिट्टी की पकड़ कमजोर हो जाती है और बारिश होने पर पहाड़ ढह जाते हैं, जिससे भूस्खलन होता है।
10. भारत की जलवायु को ‘मानसूनी जलवायु’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर देखेंभारत की जलवायु पर मानसूनी पवनों का सबसे अधिक प्रभाव है। यहाँ वर्ष की अधिकांश वर्षा इन्हीं पवनों से होती है और कृषि से लेकर अर्थव्यवस्था तक सब कुछ मानसून के आने-जाने पर निर्भर करता है।
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान पाठ 3 पर आधारित दीर्घउत्तरीय प्रश्न उत्तर
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. किसी स्थान की जलवायु को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखेंजलवायु को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं:
1. अक्षांश: भूमध्य रेखा से दूरी; ध्रुवों की ओर जाने पर ठंड बढ़ती है।
2. ऊँचाई: समुद्र तल से ऊँचाई बढ़ने पर तापमान घटता है।
3. समुद्र से दूरी: समुद्र के पास जलवायु सम रहती है, दूर जाने पर विषम हो जाती है।
4. पवनें: गर्म या ठंडी हवाएँ उस स्थान के तापमान को बदल देती हैं।
5. स्थलाकृति: पहाड़ हवाओं को रोककर वर्षा करा सकते हैं या वृष्टि छाया क्षेत्र बना सकते हैं।
2. भारत में मानसून की प्रक्रिया और इसके महत्व को समझाइए।
उत्तर देखेंमानसून तापमान और वायुदाब के अंतर के कारण आता है। गर्मियों में जमीन गर्म होने से निम्न वायुदाब बनता है और हवाएँ समुद्र से नमी लेकर आती हैं, जिससे वर्षा होती है (दक्षिण-पश्चिम मानसून)। सर्दियों में हवाएँ ज़मीन से समुद्र की ओर लौटती हैं (उत्तर-पूर्व मानसून)।
महत्व: मानसून भारत की जीवन रेखा है; नदियाँ भरती हैं, भूजल स्तर बढ़ता है और कृषि इसी पर निर्भर है।
3. जलवायु परिवर्तन के क्या परिणाम हो रहे हैं और यह भारत के लिए क्यों चिंताजनक है?
उत्तर देखेंजलवायु परिवर्तन के कारण ग्लोबल वार्मिंग हो रही है। परिणामस्वरूप ग्लेशियर पिघल रहे हैं, समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है और चरम मौसमी घटनाएँ बढ़ रही हैं (सूखा, बाढ़, चक्रवात)। भारत के लिए चिंताजनक इसलिए है क्योंकि कृषि मानसून पर निर्भर है, हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने से नदियों में अस्थायी बाढ़ और बाद में पानी की कमी हो सकती है तथा तटीय क्षेत्रों के डूबने का खतरा बढ़ता है।
4. प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़ और चक्रवात से बचाव के लिए क्या तैयारी आवश्यक है?
उत्तर देखेंआपदाओं से बचने के लिए पूर्व तैयारी आवश्यक है:
1. मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान रखना।
2. निचले इलाकों से सुरक्षित ऊँचे स्थानों पर जाना।
3. चक्रवात और भूकंप-रोधी निर्माण।
4. जल निकासी की उचित व्यवस्था।
5. तटीय संरक्षण के लिए मैंग्रोव और वृक्षारोपण।
6. आपदा-प्रशिक्षण और बचाव अभ्यास।
5. “भारत की विविधतापूर्ण जलवायु यहाँ के जनजीवन को विविध बनाती है।” इस कथन की व्याख्या करें।
उत्तर देखेंभारत में जलवायु की विविधता होने के कारण भोजन, वस्त्र और त्योहार भौगोलिक क्षेत्रों के अनुसार बदलते हैं। उत्तर में ऊनी कपड़े और ठंडी जलवायु, दक्षिण में सूती कपड़े और उष्णकटिबंधीय मौसम, तटीय क्षेत्रों में समुद्री आहार और भारी वर्षा वाले क्षेत्र जैसे मौसिनराम; इन सबने संस्कृति, कृषि और जीवन शैली को विविध और समृद्ध बनाया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान भाग 1 का अध्याय 3 “भारत की जलवायु” आसान है?
हाँ, यह अध्याय अपेक्षाकृत आसान है, बशर्ते इसकी अवधारणाओं को क्रमबद्ध ढंग से समझा जाए। इस अध्याय में मौसम बनाम जलवायु, जलवायु के कारक और मानसून जैसे विषय एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, इसलिए यदि विद्यार्थी पहले मौसम व ऋतु के अंतर को समझ ले, तो आगे के भाग (जलवायु के कारक, मानसून, आपदाएँ) स्वाभाविक रूप से समझ में आ जाते हैं। इसमें कठिन गणनाएँ नहीं हैं, बल्कि अधिकांश भाग वर्णनात्मक और उदाहरण-आधारित (जैसे मुंबई-नागपुर या ऊटी-कोयंबटूर की तुलना) है, जिससे इसे रोचक तरीके से पढ़ा और याद रखा जा सकता है। हालाँकि जलवायु परिवर्तन और मानसून की प्रक्रिया वाले हिस्सों को ध्यानपूर्वक और बार-बार दोहराने की आवश्यकता होती है।
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान भाग 1 के अध्याय 3 में अच्छे अंक कैसे प्राप्त करें?
अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए सबसे पहले मौसम और जलवायु के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें, क्योंकि यह अध्याय की नींव है। इसके बाद जलवायु के पाँच प्रमुख कारकों (अक्षांश, ऊँचाई, समुद्र से निकटता, पवन, स्थलाकृति) को उनके उदाहरणों सहित याद करें, जैसे मुंबई-नागपुर के तापमान अंतर का उदाहरण। मानसून के दोनों प्रतिरूपों (दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पूर्व) को चित्र 3.9 के आधार पर दिशा सहित समझें। साथ ही चक्रवात, बाढ़, भूस्खलन, दावानल के कारण-प्रभाव और अध्याय के अंत में दिए गए 7 प्रश्न व क्रियाकलाप, विशेषकर मिलान (मैचिंग) वाले प्रश्न, बार-बार अभ्यास करें। मानचित्र-आधारित प्रश्नों के लिए भारत के भौतिक मानचित्र से परिचित होना भी अनिवार्य है।
क्या कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान भाग 1 के अध्याय 3 को एक दिन में तैयार किया जा सकता है?
यदि विद्यार्थी ने कक्षा में यह अध्याय पहले पढ़ रखा है और केवल दोहराना (रिवीजन) है, तो एक दिन में इसे तैयार करना संभव है, क्योंकि यह अध्याय अपेक्षाकृत संक्षिप्त और तर्कसंगत ढंग से व्यवस्थित है। ऐसे में पहले अध्याय के अंत में दिए गए “आगे बढ़ने से पहले” वाले सार-बिंदुओं को पढ़ें, फिर जलवायु के कारकों, मानसून प्रक्रिया और आपदाओं के मुख्य बिंदुओं को दोहराएँ। लेकिन यदि विषय पहली बार पढ़ा जा रहा है, तो एक दिन में पूरी तरह समझना पर्याप्त नहीं होगा, क्योंकि मानसून की क्रियाविधि और जलवायु परिवर्तन जैसी अवधारणाओं को ठीक से समझने के लिए चित्रों के साथ धीरे-धीरे अध्ययन करना बेहतर रहता है, ताकि रटने के बजाय वास्तविक समझ विकसित हो सके।
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान भाग 1 के अध्याय 3 का कौन-सा भाग परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण है?
परीक्षा की दृष्टि से “जलवायु निर्धारित करने वाले कारक” (अक्षांश, ऊँचाई, समुद्र से निकटता, पवन, स्थलाकृति) और “मानसून” वाले भाग सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि इनसे मिलान, कारण बताने वाले और चित्र-आधारित प्रश्न सबसे अधिक पूछे जाते हैं। इसके अलावा “जलवायु और आपदाएँ” (चक्रवात, बाढ़, भूस्खलन, दावानल) तथा “जलवायु परिवर्तन” वाला भाग भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह समसामयिक विषयों (करंट अफेयर्स) से भी जुड़ा है। पाठ्यपुस्तक के अंत में दिए गए 7 प्रश्न और क्रियाकलाप – विशेषकर प्रश्न 1 (कारकों का मिलान), प्रश्न 3 (शहरों की जलवायु पहचानना) और प्रश्न 4 (मानसून चक्र मानचित्र पर दिखाना) – परीक्षा के अभ्यास के लिए सबसे उपयोगी हैं।
क्या इस अध्याय को समझने के लिए कक्षा 6 की विज्ञान पुस्तक का ज्ञान आवश्यक है?
हाँ, इस अध्याय में कई जगह कक्षा 6 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक ‘जिज्ञासा’ के “पुनरावलोकन करें” बॉक्स के माध्यम से संदर्भ दिया गया है, जैसे अक्षांश की अवधारणा, जल-चक्र (वाटर साइकिल) और भूमि-जल के गर्म व ठंडा होने की प्रक्रिया। इसलिए यदि विद्यार्थी को ये बुनियादी वैज्ञानिक अवधारणाएँ याद हों, तो जलवायु के कारकों और मानसून की क्रियाविधि को समझना अधिक आसान हो जाता है। शिक्षकों को सुझाव दिया जाता है कि वे इन “पुनरावलोकन करें” बॉक्स को कक्षा में ज़रूर दोहराएँ, ताकि विद्यार्थी विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के बीच के अंतर-संबंध को बेहतर ढंग से समझ सकें।
इस अध्याय में जलवायु परिवर्तन के बारे में क्या बताया गया है और यह परीक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
इस अध्याय में बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन का अर्थ जलवायु में दीर्घकालिक परिवर्तन है, जो 19वीं शताब्दी के बाद मुख्यतः जीवाश्म ईंधन के जलने, वनों की कटाई और औद्योगिक उत्सर्जन जैसी मानवीय गतिविधियों के कारण तेज़ हुआ है। इससे हरितगृह प्रभाव (ग्रीन हाउस इफेक्ट) बढ़ता है, जिससे वैश्विक तापन (ग्लोबल वार्मिंग) होता है। यह विषय परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे कारण-प्रभाव आधारित तथा ‘न्यूनीकरण’ और ‘लचीलापन’ जैसे नए शब्दों की परिभाषा संबंधी प्रश्न पूछे जा सकते हैं। साथ ही यह विषय पर्यावरण-जागरूकता से भी जुड़ा है, इसलिए विद्यार्थियों को इससे संबंधित उपायों (वृक्षारोपण, नवीकरणीय ऊर्जा, सतत जीवन-शैली) को भी याद रखना चाहिए।
