एनसीईआरटी समाधान कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 4 अहं च त्वं च
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 4 अहं च त्वं च, विद्यार्थी सत्र 2026-27 के लिए, हिंदी अनुवाद सहित, यहाँ से मुफ्त प्राप्त कर सकते हैं। कक्षा 6 संस्कृत पाठ्यपुस्तक दीपकम् का चौथा पाठ, अहं च त्वं च, संस्कृत में बातचीत करने की बुनियादी क्षमता विकसित करता है। यह पाठ संस्कृत व्याकरण के उस भाग को समझाता है जो दैनिक जीवन में सबसे अधिक काम आता है — यानी अहम् (मैं), आवां (हम दोनों), वयम् (हम लोग) और त्वम् (तुम), युवां (तुम दोनों), यूयम् (तुम लोग) का सही प्रयोग। पाठ में इन सर्वनामों के साथ अस्मि, स्वः, स्मः तथा असि, स्थः, स्थ जैसे क्रियापदों का प्रयोग करके विभिन्न व्यवसायों — जैसे शिक्षकः, चिकित्सकः, सैनिकः, पत्रकारः, तन्त्रज्ञः, नर्तकी, गायिका – का परिचय दिया गया है। पाठ में तीन पुरुषों — प्रथमपुरुष, मध्यमपुरुष और उत्तमपुरुष — की पूरी तालिका दी गई है जो परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके अलावा ‘म्’ और अनुस्वार का लेखन नियम, गीतम् “अहं पठामि” तथा अस्मद् और युष्मद् शब्दरूपों का परियोजना कार्य भी इस पाठ में शामिल है। सत्र 2026-27 के एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के अनुसार इस पाठ के सभी अभ्यास-प्रश्नों के हल यहाँ हिंदी में उपलब्ध हैं।
एनसीईआरटी कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 4 के प्रश्न उत्तर
वयम् अभ्यासं कुर्म:
1. उच्चैः पठन्तु अवगच्छन्तु च
त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव। त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देवदेव॥
त्वम् एव माता, त्वम् एव पिता, त्वम् एव बन्धुः, त्वम् एव सखा, त्वम् एव विद्या, त्वम् एव द्रविणम्, देवदेव! त्वम् एव मम सर्वम्।
श्लोक का भावार्थ (हिंदी में):
हे देवदेव!
आप ही मेरे माता हैं, आप ही पिता हैं।
आप ही बंधु हैं, आप ही मित्र हैं।
आप ही विद्या हैं, आप ही धन हैं।
आप ही मेरे लिए सब कुछ हैं।
2. उदाहरणानुगुणम् अधोलिखितेषु वाक्येषु पिट्टिकातः उचितैः पदैः रिक्तस्थानानि पूरयन्तु –

उत्तर:

3. चित्रं दृष्ट्वा उदाहरणस्य अनुगुणं वाक्यानि लिखन्तु –

उत्तर:

4. उदाहरणानुसारं वाक्यानि परस्परं योजयन्तु –

उत्तर:

5. उदाहरणानुसारम् उत्तराणां प्रश्ननिर्माणं कुर्वन्तु –

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् पाठ 4 – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अहं च त्वं च पाठ में मुख्य रूप से क्या सीखाया गया है और यह पिछले पाठों से कैसे अलग है?
पिछले तीन पाठों में एषः-एषा-एतत् और सः-सा-तत् जैसे तृतीय पुरुष के सर्वनाम सीखे थे। इस पाठ में पहली बार उत्तमपुरुष (अहम्, आवां, वयम्) और मध्यमपुरुष (त्वम्, युवां, यूयम्) सिखाए गए हैं। यानी अब छात्र मैं कौन हूँ और तुम कौन हो — इन दोनों की संस्कृत में बातचीत कर सकते हैं।
अहम्, आवां और वयम् में क्या अंतर है – इन्हें गलती के बिना कैसे याद करें?
अहम् का अर्थ है केवल मैं (एकवचन), आवां का अर्थ है हम दोनों (द्विवचन – ठीक दो व्यक्ति) और वयम् का अर्थ है हम लोग (बहुवचन — दो से अधिक)। याद रखने का सरल तरीका यह है — अहम् के साथ अस्मि, आवां के साथ स्वः और वयम् के साथ स्मः लगता है। इन तीनों जोड़ियों को एक साथ याद करें।
त्वम्, युवां और यूयम् परीक्षा में किस रूप में पूछे जाते हैं?
परीक्षा में रिक्त स्थान भरने के प्रश्नों में यह पूछा जाता है कि किस सर्वनाम के साथ कौन सा क्रियापद लगेगा। त्वम् के साथ असि, युवां के साथ स्थः और यूयम् के साथ स्थ लगता है। इस पाठ के अभ्यास 2 में यही पूछा गया है जहाँ पट्टिका से सही सर्वनाम चुनकर रिक्त स्थान भरना होता है।
तीनों पुरुष – प्रथमपुरुष, मध्यमपुरुष और उत्तमपुरुष – क्या होते हैं और इन्हें कैसे पहचानें?
उत्तमपुरुष वह होता है जो बोल रहा हो — अहम्, आवां, वयम् (मैं, हम दोनों, हम लोग)। मध्यमपुरुष वह होता है जिससे बात हो रही हो — त्वम्, युवां, यूयम् (तुम, तुम दोनों, तुम लोग)। प्रथमपुरुष वह होता है जिसके बारे में बात हो रही हो — भवान्/भवती, सः/सा। इस पाठ में तीनों पुरुषों की पूरी तालिका अस्ति और गच्छ् दोनों क्रियाओं के साथ दी गई है।
‘म्’ और अनुस्वार के लेखन का नियम क्या है और यह परीक्षा में कहाँ काम आता है?
इस पाठ में एक महत्वपूर्ण लेखन नियम बताया गया है — जब पद के अंत में ‘म्’ हो और उसके बाद कोई व्यञ्जन-वर्ण आए तो ‘म्’ की जगह अनुस्वार (ं) लिखा जाता है। जैसे — पुस्तकम् नास्ति में पुस्तकं नास्ति लिखते हैं। यह नियम निबंध, अनुवाद और वाक्य-लेखन में गलतियाँ रोकता है।
इस पाठ में कौन-कौन से व्यवसाय आए हैं और इनके स्त्रीलिङ्ग रूप क्या हैं – परीक्षा में कैसे पूछे जाते हैं?
पाठ में पुंलिङ्ग और स्त्रीलिङ्ग दोनों रूपों में व्यवसाय दिए गए हैं। शिक्षकः — शिक्षिका, चिकित्सकः — चिकित्सिका, सैनिकः — सैनिकी, गायकः — गायिका, पाचकः — पाचिका, नर्तकः — नर्तकी, तन्त्रज्ञः — तन्त्रज्ञा, आरक्षकः — आरक्षिका, पत्रकारः — पत्रकारा। परीक्षा में इनके सही लिङ्ग रूप और उनके साथ सही सर्वनाम तथा क्रियापद लगाने के प्रश्न आते हैं।
पाठ में गीतम् “अहं पठामि” क्यों दिया गया है और इसे कैसे याद करें?
गीतम् में अहम् के साथ उत्तमपुरुष एकवचन की क्रियाएँ — पठामि, वदामि, लिखामि, स्मरामि, भजामि, नमामि — एक साथ आई हैं। यह गीत इन क्रियाओं को याद करने का सबसे सरल तरीका है। परीक्षा में उत्तमपुरुष की क्रियाओं से संबंधित प्रश्नों के लिए यह गीत बहुत उपयोगी है। गीत को बार-बार जोर से गाकर याद करना चाहिए।
परियोजना कार्य में अस्मद् और युष्मद् के शब्दरूप लिखने हैं – यह क्या होते हैं और इन्हें कैसे तैयार करें?
अस्मद् शब्द से अहम्, आवां, वयम् जैसे रूप बनते हैं और युष्मद् शब्द से त्वम्, युवां, यूयम् जैसे रूप बनते हैं। परियोजना में सात विभक्तियों — प्रथमा से सप्तमी तक — के तीनों वचनों में इनके रूप लिखने होते हैं। यह उच्च कक्षाओं की बड़ी परीक्षाओं में भी काम आता है इसलिए इसे ध्यान से स्फोरकपत्र पर लिखकर बार-बार अभ्यास करना चाहिए।
क्या इस पाठ के अभ्यास कठिन हैं और इन्हें हल करने का सही क्रम क्या है?
इस पाठ के पाँच अभ्यास हैं जिनमें से अभ्यास 3 और 4 अपेक्षाकृत लंबे हैं क्योंकि उनमें चित्र देखकर तीनों वचनों में वाक्य बनाने होते हैं। सबसे पहले पाठ की तालिका — उत्तमपुरुष और मध्यमपुरुष के क्रियापदों के साथ सर्वनाम — अच्छी तरह याद करें। फिर अभ्यास 2 और 5 करें। उसके बाद अभ्यास 3 और 4 करें जो सबसे अधिक अंक का आधार बनते हैं। अभ्यास 1 का श्लोक — “त्वमेव माता च पिता त्वमेव” — को उच्च स्वर में पढ़कर अर्थ समझें।
