एनसीईआरटी समाधान कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 3 एषः कः? एषा का? एतत् किम्?

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 3 एषः कः? एषा का? एतत् किम्? विद्यार्थी यहाँ से सत्र 2026-27 के लिए निशुल्क प्राप्त कर सकते हैं। एनसीईआरटी कक्षा 6 संस्कृत पाठ्यपुस्तक दीपकम् का तीसरा पाठ – एषः कः? एषा का? एतत् किम्? – संस्कृत व्याकरण की सबसे बुनियादी और परीक्षा की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण अवधारणाओं का पाठ है। इस पाठ में तीन लिङ्गों — पुंलिङ्गम् (पुल्लिंग), स्त्रीलिङ्गम् (स्त्रीलिंग) और नपुंसकलिङ्गम् (नपुंसकलिंग) — तथा तीन वचनों — एकवचनम् (एक के लिए), द्विवचनम् (दो के लिए) और बहुवचनम् (दो से अधिक के लिए) – का विस्तारपूर्वक परिचय दिया गया है। पाठ में क्रियापदों के तीनों वचनों में रूप सिखाए गए हैं — जैसे पठति, पठतः, पठन्ति।

इसके साथ ही सर्वनाम-प्रयोग में सः, तौ, ते — एषः, एतौ, एते तथा सा, ते, ताः — एषा, एते, एताः और तत्, ते, तानि जैसे सर्वनामों का लिङ्ग और वचन के अनुसार सही प्रयोग सिखाया गया है। योग्यताविस्तरः भाग में अकारान्त, आकारान्त और ईकारान्त शब्दों की पहचान तथा उनका लिङ्ग-निर्धारण भी समझाया गया है। पाठ में कुल नौ अभ्यास हैं जिनमें रिक्त स्थान, चित्र देखकर उत्तर, मिलान, वाक्य-निर्माण जैसी विविध गतिविधियाँ हैं। सत्र 2026-27 के एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के अनुसार इस पाठ के सभी प्रश्नों के हल यहाँ हिंदी में उपलब्ध हैं।

एनसीईआरटी कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 3 के प्रश्न उत्तर

वयम् अभ्यासं कुर्म:

1. उदाहरणं दृष्ट्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 3 के प्रश्न 1 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 3 के प्रश्न 1 के उत्तर का चित्र

2. उदाहरणानुसारं पिट्टकातः पदानि चित्वा रिक्तस्थानेषु संयोजयन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 3 के प्रश्न 2 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 3 के प्रश्न 2 के उत्तर का चित्र

3. चित्राणि दृष्ट्वा संस्कृतपदानि लिखन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 3 के प्रश्न 3 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 3 के प्रश्न 3 के उत्तर का चित्र

4. उदाहरणानुसारं पिट्टकातः पदानि चित्वा रिक्तस्थानेषु लिखन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 3 के प्रश्न 4 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 3 के प्रश्न 4 के उत्तर का चित्र

5. पिट्टकायां कानिचन पदानि सन्ति, तानि पदानि उचिते घटे पूरयन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 3 के प्रश्न 5 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 3 के प्रश्न 5 के उत्तर का चित्र

6. उदाहरणानुसारं पिट्टकातः उपयुक्तपदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 3 के प्रश्न 6 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 3 के प्रश्न 6 के उत्तर का चित्र

7. निम्नलिखितानि वाक्यानि अधिकृत्य उदाहरणानुसारं प्रश्ननिर्माणं कुर्वन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 3 के प्रश्न 7 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 3 के प्रश्न 7 के उत्तर का चित्र

8. परस्परं सम्बद्धानि पदानि संयोजयन्तु, रिक्तस्थानेषु पूरयन्तु च –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 3 के प्रश्न 8 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 3 के प्रश्न 8 के उत्तर का चित्र

9. उदाहरणानुसारं कोष्ठकेभ्यः उचितानि पदानि चित्वा वाक्यानि रचयन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 3 के प्रश्न 9 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 3 के प्रश्न 9 के उत्तर का चित्र

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् पाठ 3 – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संस्कृत में लिङ्ग कितने होते हैं और दीपकम् पाठ 3 में इन्हें कैसे पहचानें?

संस्कृत में तीन लिङ्ग होते हैं। पुंलिङ्ग पुरुष जाति के लिए होता है जैसे बालकः, वृक्षः, गजः। स्त्रीलिङ्ग स्त्री जाति के लिए होता है जैसे बालिका, वैद्या, अजा। नपुंसकलिङ्ग उन वस्तुओं के लिए होता है जो न पुरुष हैं न स्त्री, जैसे पत्रम्, चक्रम्, पुस्तकम्। इस पाठ में तीनों लिङ्गों को चित्रों के माध्यम से बहुत सरल तरीके से समझाया गया है।

एकवचन, द्विवचन और बहुवचन में क्या अंतर है – यह बच्चों को कैसे याद करवाएँ?

एकवचन का प्रयोग केवल एक के लिए होता है जैसे बालकः। द्विवचन ठीक दो के लिए होता है जैसे बालकौ। बहुवचन दो से अधिक के लिए होता है जैसे बालकाः। संस्कृत की यह विशेषता हिंदी और अंग्रेजी से अलग है क्योंकि उनमें केवल एकवचन और बहुवचन होते हैं। बच्चों को चित्र दिखाकर — एक बालक, दो बालक, तीन या अधिक बालक — यह अंतर आसानी से समझाया जा सकता है।

दीपकम कक्षा 6 संस्कृत पाठ 3 में सः, एषः, तौ, एतौ जैसे सर्वनाम इतने अधिक क्यों हैं और इन्हें कैसे याद रखें?

इस पाठ में दो प्रकार के सर्वनाम हैं। पहले हैं दूर की वस्तु या व्यक्ति के लिए — सः (वह एक पुरुष), तौ (वे दो पुरुष), ते (वे अनेक पुरुष), सा, ते, ताः, तत्, ते, तानि। दूसरे हैं पास की वस्तु या व्यक्ति के लिए — एषः, एतौ, एते, एषा, एते, एताः, एतत्, एते, एतानि। याद करने का सरल तरीका यह है कि जो सर्वनाम ‘ए’ से शुरू होता है वह पास के लिए और जो ‘स/त’ से शुरू होता है वह दूर के लिए होता है।

क्या परीक्षा में सर्वनाम तालिका सीधे पूछी जाती है?

हाँ, सीबीएसई परीक्षा में सर्वनाम तालिका से संबंधित प्रश्न अक्सर आते हैं। पाठ के अंत में “उच्चैः पठन्तु स्मरन्तु अवगच्छन्तु च” शीर्षक से जो तालिका दी गई है उसमें तीनों लिङ्गों और तीनों वचनों के सभी सर्वनाम एक साथ हैं। इस पूरी तालिका को याद करना परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है।

क्रियापदों में पठति, पठतः, पठन्ति का अंतर क्या है और इन्हें कब प्रयोग करें?

पठति का प्रयोग तब होता है जब एक व्यक्ति पढ़ रहा हो — सः पठति (वह पढ़ता है)। पठतः का प्रयोग तब होता है जब ठीक दो व्यक्ति पढ़ रहे हों — तौ पठतः (वे दोनों पढ़ते हैं)। पठन्ति का प्रयोग तब होता है जब दो से अधिक व्यक्ति पढ़ रहे हों — ते पठन्ति (वे सब पढ़ते हैं)। इसी नियम से पिबति-पिबतः-पिबन्ति, खादति-खादतः-खादन्ति, गच्छति-गच्छतः-गच्छन्ति और क्रीडति-क्रीडतः-क्रीडन्ति बनते हैं।

अकारान्त, आकारान्त और ईकारान्त शब्द क्या होते हैं और इनसे लिङ्ग कैसे पहचानें?

जिस शब्द के अंत में ‘अ’ हो वह अकारान्त शब्द होता है जैसे बालकः, फलम्, गृहम् — ये पुंलिङ्ग या नपुंसकलिङ्ग होते हैं। जिसके अंत में ‘आ’ हो वह आकारान्त शब्द होता है जैसे बालिका, लता, रमा — ये प्रायः स्त्रीलिङ्ग होते हैं। जिसके अंत में ‘ई’ हो वह ईकारान्त शब्द होता है जैसे नदी, लेखनी, घटी — ये भी प्रायः स्त्रीलिङ्ग होते हैं। यह नियम शब्द का लिङ्ग तुरंत पहचानने में बहुत सहायक है।

इस पाठ के नौ अभ्यासों में सबसे कठिन कौन सा है और उसे कैसे हल करें?

अभ्यास 8 और 9 अपेक्षाकृत कठिन हैं। अभ्यास 8 में कर्ता और क्रिया का सही मिलान करना होता है जैसे नर्तकी — नृत्यति, लेखकः — लिखति। अभ्यास 9 में दिए गए विकल्पों में से सही कर्ता चुनकर वाक्य बनाने होते हैं। इन्हें हल करने के लिए पहले यह तय करें कि कर्ता किस लिङ्ग का है, फिर उसके अनुसार सर्वनाम लगाएँ और सही क्रियापद चुनें।

कक्षा 6 संस्कृत पाठ 3 में चन्द्रयानम् का उदाहरण क्यों दिया गया है?

दीपकम् पाठ्यपुस्तक एनईपी 2020 के अनुसार बनाई गई है जो बच्चों को आधुनिक और प्रासंगिक संदर्भों से जोड़ती है। नपुंसकलिङ्गम् एकवचनम् का उदाहरण देते हुए चन्द्रयानम् — भारत के गौरवशाली अंतरिक्ष मिशन — को शामिल किया गया है। इससे बच्चे न केवल संस्कृत सीखते हैं बल्कि राष्ट्रीय गर्व से भी जुड़ते हैं। इसी तरह सङ्गणकम् (कम्प्यूटर) और दूरदर्शनम् (टेलीविज़न) जैसे आधुनिक शब्द भी इस पाठ में शामिल हैं।

परियोजना कार्य में 15 गृहवस्तुओं के नाम लिङ्ग के अनुसार लिखने हैं — इसे कैसे करें?

पाठ के अंत में परियोजना कार्य में घर की 15 वस्तुओं के संस्कृत नाम लिङ्ग के अनुसार लिखने हैं। इसके लिए पाठ में दी गई विस्तृत शब्द-सूची बहुत उपयोगी है। उस सूची में अकारान्त पुंलिङ्ग — जैसे आसन्दः (कुर्सी), दर्पणः (दर्पण), दीपः (दीपक), अकारान्त नपुंसकलिङ्ग — जैसे फलम्, वातायनम् (खिड़की), द्वारम् (दरवाज़ा), आकारान्त स्त्रीलिङ्ग — जैसे पेटिका (पेटी), शाटिका (साड़ी) और ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग — जैसे नदी, लेखनी (कलम) के अनेक शब्द पहले से दिए गए हैं जिनमें से चुनकर परियोजना पूरी की जा सकती है।