एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 6 किशोरावस्था – वृद्धि एवं परिवर्तन की अवस्था
किशोरावस्था मनुष्य के जीवन की वह महत्वपूर्ण अवस्था है जो सामान्यतः 10 वर्ष की आयु से आरंभ होकर 19 वर्ष तक बनी रहती है। कक्षा 7 विज्ञान जिज्ञासा के अध्याय 6 किशोरावस्था – वृद्धि एवं परिवर्तन की अवस्था, में बताया गया है कि इस दौरान शरीर में अनेक शारीरिक परिवर्तन होते हैं — जैसे लंबाई और भार में वृद्धि, आवाज में बदलाव, मुँहासे निकलना और शरीर के विभिन्न भागों में बालों का आना। इसके साथ ही लड़कियों में आर्तव चक्र (मासिक धर्म) का आरंभ होना एक प्रमुख आंतरिक परिवर्तन है। ये सभी परिवर्तन शरीर में हार्मोन नामक रसायनों के कारण होते हैं। किशोरावस्था केवल शारीरिक बदलावों तक सीमित नहीं है — इसमें संवेगात्मक उतार-चढ़ाव, व्यवहार में परिवर्तन और सामाजिक जिम्मेदारियों की समझ भी शामिल है। इस अवस्था को सुखद और स्वस्थ बनाने के लिए संतुलित आहार, व्यक्तिगत स्वच्छता, नियमित शारीरिक गतिविधियाँ और हानिकारक पदार्थों से दूरी अत्यंत आवश्यक है।
एनसीईआरटी कक्षा 7 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 6 के प्रश्न उत्तर
1. 11 वर्षीय लड़के रमेश के चेहरे पर कुछ लाल दाने (मुँहासे) निकले। उसकी माँ ने उसे बताया कि इसका कारण उसके शरीर में होने वाले जैविक परिवर्तन हैं।
(i) उसके चेहरे पर इन मुँहासों के होने के संभावित कारण क्या हो सकते हैं?
(ii) इन मुँहासों से कुछ राहत पाने के लिए वह क्या कर सकता है?
उत्तर:
(i) रमेश किशोरावस्था में प्रवेश कर रहा है। इस अवस्था में शरीर में हार्मोन का उत्पादन बढ़ जाता है। इन हार्मोनों के कारण त्वचा से तैलीय स्राव यानी तेल का निकलना बढ़ जाता है। यह तेल त्वचा के छिद्रों को बंद कर देता है जिससे वहाँ संक्रमण हो जाता है और लाल मुँहासे निकल आते हैं। इस त्वचा-संबंधी स्थिति को ऐक्नी कहते हैं।
(ii) रमेश मुँहासों से राहत पाने के लिए ये काम कर सकता है — अपना चेहरा दिन में दो-तीन बार साफ पानी और हल्के साबुन से धोए ताकि त्वचा के तेल को कम किया जा सके। मुँहासों को अपने हाथों से कभी न दबाए या फोड़े क्योंकि इससे संक्रमण और फैल सकता है। स्वस्थ और पौष्टिक आहार खाए और खूब पानी पिए। यदि मुँहासे बहुत ज्यादा हों तो डॉक्टर से सलाह ले। यह परिवर्तन किशोरावस्था का एक सामान्य हिस्सा है इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है।
2. निम्नलिखित में से कौन-सा खाद्य समूह किशोरों के लिए अपेक्षाकृत अधिक उपयुक्त विकल्प होगा और क्यों?
(क) — बर्गर, पिज्जा, केक, कोल्ड ड्रिंक जैसा जंक फूड
(ख) — दाल, चावल, रोटी, सब्जी, दही, फल जैसा संतुलित भोजन

उत्तर:
(ख) संतुलित भोजन वाला खाद्य समूह किशोरों के लिए अधिक उपयुक्त है।
किशोरावस्था वृद्धि और विकास का समय होता है। इस समय शरीर को प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, कैल्सियम, आयरन, विटामिन और अन्य पोषक तत्वों की बहुत अधिक जरूरत होती है। दाल, चावल, रोटी, सब्जी और दही जैसे खाद्य पदार्थों में ये सभी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं। इनसे हड्डियाँ मजबूत होती हैं, रक्त बनता है और शरीर का विकास अच्छी तरह होता है।
जंक फूड में तेल, नमक और शक्कर अधिक होती है लेकिन पोषक तत्व बहुत कम होते हैं। इसके अधिक सेवन से मोटापा और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं।
3. निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित शब्दों को सही रूप में लिखिए —
(i) किशोरवय लड़कियों में 28-30 दिनों के अन्तराल पर होने वाला रक्त-स्राव सिकर्ममाध है।
(ii) किशोरवय लड़कों की आवाज में रूखता बढ़े हुए त्रकवायं के कारण होती है।
(iii) द्वितीयक लैंगिक लक्षण वे प्राकृतिक संकेत हैं जो यह इंगित करते हैं कि शरीर वयस्कता की तैयारी कर रहा है और ये रंभवयौना को चिह्नित करते हैं।
(iv) हमें ल्ल्कोएहॉ और ग्सडु को ‘ना’ कहना चाहिए क्योंकि ये व्यसनकारी हैं।
उत्तर:
(i) मासिक धर्म (या आर्तव चक्र)
(ii) वाक्-यंत्र (यानी गले में स्थित वह संरचना जो बोलने में सहायता करती है)
(iii) यौवनारंभ
(iv) एल्कोहॉल और ड्रग्स
4. शालू ने अपनी सहपाठी से कहा “किशोरावस्था में मात्र शारीरिक परिवर्तन होते हैं जैसे लंबा होना या शरीर पर बालों का निकलना।” क्या वह सही है? आप किशोरावस्था के इस वर्णन में क्या परिवर्तन करेंगे?
उत्तर:
नहीं, शालू पूरी तरह सही नहीं है।
किशोरावस्था केवल शारीरिक परिवर्तनों की अवस्था नहीं है। इस अवस्था में तीन प्रकार के परिवर्तन होते हैं —
पहला शारीरिक परिवर्तन जिसमें लंबाई बढ़ना, बालों का निकलना, आवाज में परिवर्तन, मुँहासे निकलना और लड़कियों में मासिक धर्म का आरंभ होना शामिल हैं। दूसरा संवेगात्मक परिवर्तन जिसमें मनोदशा में बार-बार परिवर्तन, प्रबल संवेग, संवेदनशीलता में वृद्धि आदि होते हैं। तीसरा व्यवहारगत परिवर्तन जिसमें नई रुचियाँ विकसित होना, साथियों के प्रति आकर्षण, सामाजिक कार्यों में भागीदारी आदि शामिल हैं।
इसलिए किशोरावस्था का सही वर्णन यह होगा कि यह शारीरिक, संवेगात्मक और व्यवहारगत तीनों प्रकार के महत्वपूर्ण परिवर्तनों की अवस्था है।
5. कक्षा में चर्चा के समय कुछ विद्यार्थियों ने निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा की। आप किन प्रश्नों को पूछकर इन बिंदुओं के औचित्य को सिद्ध करेंगे।
(i) “किशोरवयों को व्यवहारगत परिवर्तनों के संबंध में चिंता करने की आवश्यकता नहीं होती।”
(ii) “यदि कोई हानिकारक पदार्थ का एक बार सेवन कर लेता है तो वह इच्छानुसार इसका सेवन करना कभी भी बंद कर सकता है।”
उत्तर:
(i) इस बिंदु का औचित्य सिद्ध करने के लिए ये प्रश्न पूछे जा सकते हैं — क्या किशोरावस्था में मनोदशा में बार-बार परिवर्तन होते हैं? क्या ये संवेग हमारे व्यवहार और निर्णयों को प्रभावित कर सकते हैं? यदि किशोर अपने व्यवहारगत परिवर्तनों को समझें तो क्या वे बेहतर निर्णय ले सकते हैं?
यह बिंदु सही नहीं है। व्यवहारगत परिवर्तनों को समझना बहुत जरूरी है क्योंकि ये परिवर्तन हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं। इन्हें समझने से हम अच्छे विकल्प चुन सकते हैं और परिस्थितियों का सामना सोच-समझकर कर सकते हैं।
(ii) इस बिंदु का परीक्षण करने के लिए ये प्रश्न पूछे जा सकते हैं — क्या सभी नशीले पदार्थ व्यसनकारी होते हैं? व्यसन का क्या अर्थ है? क्या जो आज नशे के आदी हैं उन्होंने भी पहली बार यही सोचा होगा कि वे कभी भी छोड़ सकते हैं?
यह बिंदु बिल्कुल गलत है। नशीले पदार्थ व्यसनकारी होते हैं इसका मतलब है कि एक बार इनका सेवन करने पर बार-बार इनकी तीव्र इच्छा होती है। इसे मादक पदार्थों की लत कहते हैं। इन पदार्थों को छोड़ना बहुत कठिन हो जाता है और इसके लिए चिकित्सकीय सहायता की जरूरत पड़ती है।
6. किशोर कभी-कभी मनोदशा में निरंतर परिवर्तनों का अनुभव करते हैं। किसी दिन वे स्वयं को अत्यधिक ऊर्जावान और प्रसन्न अनुभव करते हैं जबकि किसी अन्य दिन वे अत्यंत उदासीनता का अनुभव करते हैं। अन्य कौन-से व्यवहारगत परिवर्तन इस आयु से संबंधित हैं?
उत्तर:
मनोदशा में परिवर्तन के अलावा किशोरावस्था में ये व्यवहारगत परिवर्तन भी होते हैं —
किशोर अपने साथियों के प्रति आकर्षित होने लगते हैं और उनके व्यवहार का अनुसरण करने लगते हैं। वे नए क्षेत्रों जैसे संगीत, नृत्य, खेल, कला आदि में गहरी रुचि विकसित करते हैं। वे समाज में वंचित लोगों की सहायता करने जैसे सामाजिक कार्यों में भागीदारी करना चाहते हैं। कभी-कभी वे अपने माता-पिता और परिवार से अधिक अपने साथियों को महत्व देने लगते हैं। वे अधिक स्वतंत्र होना चाहते हैं और अपने निर्णय स्वयं लेना चाहते हैं। वे रचनात्मक गतिविधियों में सम्मिलित होना पसंद करते हैं। इनमें से अधिकांश परिवर्तन पूर्णतः सामान्य हैं और हार्मोन के कारण होते हैं।
7. शौचालय का प्रयोग करते समय मोहिनी ने ध्यान दिया कि प्रयोग किए गए सेनीटरी पैड कूड़ेदान के आस-पास बिखरे पड़े हैं। वह असहज हो गयी और उसने इस विषय में अपनी सहेलिया को बताया उन्होंने मानसिक धर्म संबंधी स्वच्छता और स्वच्छता संबंधी अन्य अच्छी आदतों पर चर्चा की। आप अपने साथियों को मासिक धर्म संबंधी स्वच्छता और स्वच्छता संबंधी आदतों के विषय में क्या सुझाव देंगे?
उत्तर:
मासिक धर्म संबंधी स्वच्छता के लिए ये सुझाव दिए जा सकते हैं —
सेनीटरी पैड को उपयोग के बाद सीधे कूड़ेदान के आस-पास नहीं फेंकना चाहिए। इसे पहले अखबार या कागज में अच्छी तरह लपेटकर ढक्कनदार कूड़ेदान में ही डालना चाहिए। मासिक धर्म के दौरान शरीर की सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए और नियमित रूप से स्नान करना चाहिए। सेनीटरी पैड हर 4 से 6 घंटे में बदलना चाहिए। पर्यावरण के अनुकूल जैवनिम्नीकरणीय सेनीटरी पैड का उपयोग करना चाहिए।
इसके अलावा मासिक धर्म एक पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसके बारे में किसी प्रकार की शर्म या संकोच नहीं होना चाहिए। इसके बारे में खुलकर बात करनी चाहिए और जागरूकता फैलानी चाहिए।
8. मैरी और मनोज सहपाठी और अच्छे मित्र थे। 11 वर्ष की होने पर मैरी की गर्दन में सामने की ओर एक छोटा सा उभार विकसित हुआ। वह चिकित्सक के पास गई। उन्होंने उसे औषधि दी और आयोडीनयुक्त नमक खाने को कहा। 12 वर्ष का होने पर उसी प्रकार का उभार मनोज की गर्दन के पास विकसित हुआ। तथापि चिकित्सक ने उसे बताया कि यह उसके बड़े होने का एक लक्षण है। आपके अनुसार मैरी और मनोज को अलग-अलग परामर्श देने का संभावित कारण क्या है?
उत्तर:
मैरी और मनोज को अलग-अलग परामर्श इसलिए दिया गया क्योंकि दोनों के उभार के कारण अलग-अलग थे।
मैरी के गर्दन में जो उभार था वह संभवतः आयोडीन की कमी के कारण थायरॉइड ग्रंथि का बढ़ना था जिसे घेंघा रोग कहते हैं। आयोडीन की कमी से यह ग्रंथि बड़ी हो जाती है। इसीलिए चिकित्सक ने उसे दवाई दी और आयोडीनयुक्त नमक खाने की सलाह दी ताकि शरीर में आयोडीन की कमी पूरी हो सके।
मनोज के गर्दन में उभार उसके किशोरावस्था में होने वाले परिवर्तन के कारण था। लड़कों में किशोरावस्था के दौरान वाक्-यंत्र (voice box) की वृद्धि होती है जिसे कंठमणि या एडम्स एप्पल कहते हैं। यह एक सामान्य परिवर्तन है इसीलिए चिकित्सक ने कहा कि यह बड़े होने का एक स्वाभाविक लक्षण है।
9. किशोरावस्था के दौरान लड़कों और लड़कियों में कुछ शारीरिक परिवर्तन होते हैं। जिनमे से कुछ निम्नलिखित है –
(i) आवाज में परिवर्तन
(ii) स्तनों का विकास
(iii) मूँछों में वृद्धि
(iv) चेहरे पर बालों की वृद्धि
(v) चेहरे पर मुँहासे
(vi) जघन क्षेत्र में बालों की वृद्धि
(vii) बगल में बालों की वृद्धि
इन परिवर्तनों को तालिका में वर्गीकृत कीजिए —

उत्तर:

केवल लड़कों में देखे गए:
- मूँछों में वृद्धि
- चेहरे पर बालों की वृद्धि
केवल लड़कियों में देखे गए:
- स्तनों का विकास
लड़कों और लड़कियों दोनों में देखे गए:
- आवाज में परिवर्तन
- चेहरे पर मुँहासे
- जघन क्षेत्र में बालों की वृद्धि
- बगल में बालों की वृद्धि
10. किशोरों के लिए एक स्वस्थ जीवनशैली जीने के सुझावों का उल्लेख करते हुए एक पोस्टर बनाइए।
उत्तर:
पोस्टर का शीर्षक — “स्वस्थ किशोर, सुनहरा कल”
पोस्टर में निम्नलिखित सुझाव शामिल किए जा सकते हैं —
खानपान के लिए — दाल, चावल, रोटी, सब्जी, फल और दूध जैसा संतुलित आहार लें। जंक फूड और कोल्ड ड्रिंक से दूर रहें। खूब पानी पिएँ।
स्वच्छता के लिए — रोज स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। चेहरे को दिन में दो-तीन बार धोएँ।
शारीरिक स्वास्थ्य के लिए — रोज व्यायाम करें या खेलें। पर्याप्त नींद लें।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए — संगीत, नृत्य, कला जैसी रुचिकर गतिविधियों में भाग लें। अपने माता-पिता और शिक्षकों से खुलकर बात करें।
बुरी आदतों से बचाव के लिए — तंबाकू, एल्कोहॉल और ड्रग्स को हमेशा ‘ना’ कहें। सोशल मीडिया का सोच-समझकर उपयोग करें।

