एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 गणित प्रकाश भाग 1 अध्याय 4 चतुर्भुज
चतुर्भुज कक्षा 8: गणित प्रकाश भाग 1 अध्याय 4 के प्रश्न उत्तर, निगमन और वेन आरेख के साथ (हिंदी माध्यम) सभी प्रश्नों के हल सत्र 2026-27 के अनुसार संशोधित रूप में यहाँ दिए गए हैं। कक्षा 8 गणित प्रकाश अध्याय 4 के एनसीईआरटी समाधान इस अध्याय के हर गुण को केवल मापकर मानने के बजाय निगमन से सिद्ध करते हैं।
एनसीईआरटी कक्षा 8 गणित प्रकाश भाग 1 अध्याय 4 समाधान
अध्याय एक बढ़ई की समस्या से खुलता है: लकड़ी की दो पट्टियाँ कैसे रखें कि उनके सिरों से गुज़रता धागा आयत बनाए? उत्तर है, पट्टियाँ बराबर हों और एक-दूसरे को समद्विभाजित करें; यूरोप के बढ़ई और मोजांबिक के किसान यही विधि अपनाते हैं। फिर सर्वांगसमता के नियमों से आयत, वर्ग, समांतर चतुर्भुज, समचतुर्भुज, समलंब चतुर्भुज और पतंग के गुण निकलते हैं, कोणों का योग 360° सिद्ध होता है, और वेन आरेख दिखाता है कि हर वर्ग एक आयत भी है।
कक्षा 8 गणित प्रकाश भाग 1 के पेज 94 पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
पेज 94 – आइए, पता लगाएँ
1. नीचे दिए गए आयतों के अन्य सभी आंतरिक कोणों को ज्ञात कीजिए।

उत्तर:
(i) माना आयत ABCD के विकर्ण AC और BD, O पर मिलते हैं। आयत के चारों शीर्ष कोण 90° हैं। इसके विकर्ण समान होते हैं और एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं। इसलिए OA = OB = OC = OD।
दिया है, ∠OAB = 30°।
△AOB में OA = OB, इसलिए ∠ABO = ∠OAB = 30°।
अतः ∠AOB = 180° − 30° − 30° = 120°।
शीर्षाभिमुख कोण समान होते हैं, इसलिए ∠COD = 120°।
रैखिक युग्म के कोणों का योग 180° होता है। इसलिए ∠AOD = ∠BOC = 180° − 120° = 60°।
अब △COD में OC = OD, इसलिए
∠OCD = ∠CDO = (180° − 120°)/2 = 30°।
हर शीर्ष पर बचा हुआ कोण = 90° − 30° = 60°।
अतः सभी विभाजित शीर्ष कोण हैं—
∠OAB = ∠ABO = ∠OCD = ∠CDO = 30°।
∠DAO = ∠OBC = ∠BCO = ∠ODA = 60°।
केंद्र के कोण हैं—
∠AOB = ∠COD = 120° और ∠AOD = ∠BOC = 60°।
(ii) माना आयत PQRS के विकर्ण PR और QS, O पर मिलते हैं। इसके चारों शीर्ष कोण 90° हैं और OP = OQ = OR = OS।
दिया है, ∠QOR = 110°।
शीर्षाभिमुख कोणों से ∠POS = 110°।
रैखिक युग्म से ∠QOP = ∠ROS = 180° − 110° = 70°।
△QOR में OQ = OR, इसलिए
∠OQR = ∠QRO = (180° − 110°)/2 = 35°।
इसी प्रकार △POS में ∠OPS = ∠OSP = 35°।
हर शीर्ष पर बचा हुआ कोण = 90° − 35° = 55°।
अतः सभी विभाजित शीर्ष कोण हैं—
∠OQR = ∠QRO = ∠OPS = ∠OSP = 35°।
∠PQO = ∠ORS = ∠RSO = ∠OPQ = 55°।
केंद्र के कोण हैं—
∠QOR = ∠POS = 110° और ∠QOP = ∠ROS = 70°।
2. एक ऐसा चतुर्भुज बनाइए जिसके प्रत्येक विकर्ण की लंबाई 8 सेंटीमीटर हो एवं वे एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हों और निम्नलिखित कोण बनाते हों।
(i) 30°
(ii) 40°
(iii) 90°
(iv) 140°
उत्तर:
चारों रचनाओं में समान विधि अपनाते हैं। केवल विकर्णों के बीच का कोण बदलता है।
(क) AC = 8 सेंटीमीटर का रेखाखंड खींचते हैं। इसका मध्यबिंदु O लेते हैं। अतः AO = OC = 4 सेंटीमीटर।
(ख) O पर OC के साथ दिए गए कोण की किरण OB खींचते हैं और उसे O के दूसरी ओर बढ़ाते हैं।
(ग) इस रेखा पर O के दोनों ओर OB = OD = 4 सेंटीमीटर काटते हैं। इसलिए BD = 8 सेंटीमीटर और O, BD का भी मध्यबिंदु है।
(घ) A, B, C और D को क्रम से मिलाते हैं। इस प्रकार आवश्यक चतुर्भुज ABCD प्राप्त होता है।
(i) में ∠BOC = 30° लेते हैं।
(ii) में ∠BOC = 40° लेते हैं।
(iii) में ∠BOC = 90° लेते हैं।
(iv) में ∠BOC = 140° लेते हैं।
सभी स्थितियों में AC = BD = 8 सेंटीमीटर और AO = OC = BO = OD = 4 सेंटीमीटर हैं। इसलिए सभी चतुर्भुज आयत हैं। तीसरी स्थिति में विकर्ण परस्पर लंबवत भी हैं, इसलिए यह आयत एक वर्ग है।

3. माना O केंद्र का कोई वृत्त है। जहाँ पर रेखाखंड PL और AM वृत्त के दो व्यास हैं, यह परस्पर लंबवत हैं। बताइए कि APML किस प्रकार की आकृति है? कारण और/अथवा प्रयोग द्वारा इसे ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
APML एक वर्ग है।
PL और AM एक ही वृत्त के व्यास हैं। इसलिए PL = AM।
OA, OP, OM और OL वृत्त की त्रिज्याएँ हैं, इसलिए OA = OP = OM = OL।
अर्थात् O, दोनों व्यासों का मध्यबिंदु है। इसलिए PL और AM एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
ये दोनों व्यास परस्पर लंबवत भी हैं। अतः चतुर्भुज APML के विकर्ण समान हैं और एक-दूसरे को समकोण पर समद्विभाजित करते हैं। इसलिए APML एक वर्ग है।

4. हमने देखा कि कागज को मोड़कर 90° का कोण कैसे बनाया जाता है। हम मान लेते हैं कि हमारे पास कागज नहीं है परंतु समान लंबाई की दो छड़ियाँ और एक धागा है। इनसे हम 90° का कोण किस प्रकार बनाएँगे?
उत्तर:
मैं समान लंबाई की छड़ियों को आयत के विकर्णों की तरह रखूँगा।
पहले धागे पर छड़ी की लंबाई लेकर धागे को आधा मोड़ूँगा। इसकी सहायता से दोनों छड़ियों के मध्यबिंदु चिह्नित करूँगा।
छड़ियों को उनके मध्यबिंदुओं पर एक-दूसरे के ऊपर रखकर धागे से बाँधूँगा। उन्हें इस प्रकार रखूँगा कि वे एक ही सीधी रेखा में न हों।
इसके बाद धागे को चारों अंतबिंदुओं A, B, C और D से क्रम से गुजारकर कस दूँगा।
छड़ियाँ AC और BD समान हैं और एक-दूसरे को समद्विभाजित करती हैं। इसलिए धागे से बना चतुर्भुज ABCD एक आयत होगा। इसके प्रत्येक कोने पर 90° का कोण मिलेगा।

5. हमने देखा कि आयत का एक गुण यह भी है कि उसकी सम्मुख भुजाएँ समांतर होती हैं। क्या इसे आयत की परिभाषा के रूप में प्रयुक्त किया जा सकता है? दूसरे शब्दों में प्रत्येक चतुर्भुज जिसकी सम्मुख भुजाएँ समांतर और समान हों तो क्या वह एक आयत होगा?
उत्तर:
नहीं, केवल इस गुण से आयत को परिभाषित नहीं किया जा सकता।
सम्मुख भुजाएँ समांतर और समान होने पर चतुर्भुज एक समांतर चतुर्भुज होता है। उसके सभी कोणों का 90° होना आवश्यक नहीं है।
उदाहरण के लिए, ऐसा समांतर चतुर्भुज ABCD लेते हैं जिसमें ∠A = ∠C = 60° और ∠B = ∠D = 120° हों। इसमें AB ∥ CD, AD ∥ BC, AB = CD और AD = BC हैं। फिर भी यह आयत नहीं है, क्योंकि इसके कोण 90° के नहीं हैं।
अतः प्रत्येक ऐसा चतुर्भुज आयत नहीं होगा। आयत के प्रत्येक कोण का 90° होना आवश्यक है।

कक्षा 8 गणित प्रकाश भाग 1 के पेज 102 पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
पेज 102 – आइए, पता लगाएँ
1. निम्नलिखित चतुर्भुजों के शेष कोणों का माप ज्ञात कीजिए।

उत्तर:
(i) चतुर्भुज PEAR में सम्मुख भुजाएँ समांतर हैं। इसलिए यह एक समांतर चतुर्भुज है।
समांतर चतुर्भुज में सम्मुख कोण समान होते हैं और आसन्न कोणों का योग 180° होता है।
∠A = ∠P = 40°
∠E = 180° − 40° = 140°
∠R = ∠E = 140°
अतः शेष कोण ∠A = 40°, ∠E = 140° और ∠R = 140° हैं।
(ii) चतुर्भुज PQRS भी एक समांतर चतुर्भुज है।
∠R = ∠P = 110°
∠Q = 180° − 110° = 70°
∠S = ∠Q = 70°
अतः शेष कोण ∠R = 110°, ∠Q = 70° और ∠S = 70° हैं।
(iii) चतुर्भुज XWVU की सभी भुजाएँ समान हैं। इसलिए यह एक समचतुर्भुज है। समचतुर्भुज का विकर्ण उसके कोणों को समद्विभाजित करता है।
∠UVX = 30°
इसलिए ∠XVW = 30° और ∠V = 30° + 30° = 60°।
सम्मुख कोण समान होने से ∠X = 60°।
विकर्ण XV, ∠X को भी समद्विभाजित करता है।
इसलिए ∠WXV = ∠VXU = 60° ÷ 2 = 30°।
∠W = 180° − 60° = 120°
∠U = ∠W = 120°
अतः पूरे कोण ∠X = ∠V = 60° और ∠W = ∠U = 120° हैं। विकर्ण द्वारा बने चारों छोटे कोण 30° के हैं।
(iv) चतुर्भुज OIEA की सभी भुजाएँ समान हैं। इसलिए यह भी एक समचतुर्भुज है।
विकर्ण OE, ∠O और ∠E को समद्विभाजित करता है।
∠AEO = 20°
इसलिए ∠OEI = 20° और ∠E = 20° + 20° = 40°।
∠O = ∠E = 40°
∠IOE = ∠EOA = 40° ÷ 2 = 20°
∠I = 180° − 40° = 140°
∠A = ∠I = 140°
अतः पूरे कोण ∠O = ∠E = 40° और ∠I = ∠A = 140° हैं। विकर्ण द्वारा बने चारों छोटे कोण 20° के हैं।
2. विकर्ण के गुणों को आधार बनाते हुए एक समांतर चतुर्भुज की रचना कीजिए जिसके विकर्ण की लंबाई 7 सेंटीमीटर तथा 5 सेंटीमीटर हो। इसके साथ ही ये विकर्ण 140° के कोण पर प्रतिच्छेद भी करते हों।
उत्तर:
समांतर चतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
रचना के चरण—
- (i) AC = 7 सेंटीमीटर का रेखाखंड खींचते हैं।
- (ii) AC का मध्य बिंदु O लेते हैं। तब AO = OC = 3.5 सेंटीमीटर होगा।
- (iii) O से एक किरण OB इस प्रकार खींचते हैं कि ∠AOB = 140° हो।
- (iv) इस किरण पर OB = 2.5 सेंटीमीटर काटते हैं। इसी रेखा पर O की दूसरी ओर OD = 2.5 सेंटीमीटर काटते हैं।
- (v) AB, BC, CD और DA को जोड़ते हैं।

इसमें AC = 7 सेंटीमीटर, BD = 2.5 + 2.5 = 5 सेंटीमीटर और ∠AOB = 140° है। दोनों विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं। अतः ABCD अभीष्ट समांतर चतुर्भुज है।
3. विकर्ण के गुणों का प्रयोग करके एक समचतुर्भुज की रचना कीजिए जिसके विकर्णों की लंबाई 4 सेंटीमीटर और 5 सेंटीमीटर हो।
उत्तर:
समचतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं और समकोण पर प्रतिच्छेद करते हैं।
रचना के चरण—
- (i) AC = 4 सेंटीमीटर का रेखाखंड खींचते हैं।
- (ii) इसका मध्य बिंदु O लेते हैं। तब AO = OC = 2 सेंटीमीटर होगा।
- (iii) O से AC पर एक लंब रेखा खींचते हैं।
- (iv) इस लंब रेखा पर O के दोनों ओर OB = OD = 2.5 सेंटीमीटर काटते हैं।
- (v) AB, BC, CD और DA को जोड़ते हैं।

इसमें AC = 4 सेंटीमीटर और BD = 5 सेंटीमीटर है। दोनों विकर्ण एक-दूसरे को लंबवत् समद्विभाजित करते हैं। अतः ABCD अभीष्ट समचतुर्भुज है।
कक्षा 8 गणित प्रकाश भाग 1 के पेज 107 पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
पेज 107 – आइए, पता लगाएँ
1. 4 सेंटीमीटर भुजा वाले दो समबाहु त्रिभुजों को जोड़कर प्राप्त चतुर्भुज के सभी कोणों और सभी भुजाओं को ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
BD = 4 सेंटीमीटर की उभयनिष्ठ भुजा के दोनों ओर समबाहु त्रिभुज ABD और CBD जोड़ते हैं। इससे चतुर्भुज ABCD बनता है।

दोनों त्रिभुजों की सभी भुजाएँ 4 सेंटीमीटर हैं। इसलिए चतुर्भुज की चारों भुजाएँ भी समान हैं।
AB = BC = CD = DA = 4 सेंटीमीटर
अतः यह चतुर्भुज एक समचतुर्भुज है।
समबाहु त्रिभुज का प्रत्येक कोण 60° होता है।
इसलिए ∠A = ∠C = 60°।
B और D पर दोनों त्रिभुजों के कोण जुड़ते हैं।
∠B = 60° + 60° = 120°
∠D = 60° + 60° = 120°
अतः सभी भुजाएँ 4 सेंटीमीटर हैं और कोण ∠A = ∠C = 60°, ∠B = ∠D = 120° हैं।
2. एक पतंग की रचना कीजिए जिसके विकर्णों की लंबाई 6 सेंटीमीटर और 8 सेंटीमीटर हो।
उत्तर:
पतंग का एक विकर्ण दूसरे विकर्ण को लंबवत् समद्विभाजित करता है।
रचना के चरण—
- (i) BD = 8 सेंटीमीटर का रेखाखंड खींचते हैं।
- (ii) BD पर O ऐसा लेते हैं कि BO = 2 सेंटीमीटर और OD = 6 सेंटीमीटर हो।
- (iii) O से BD पर लंब रेखा खींचते हैं।
- (iv) इस लंब रेखा पर O के दोनों ओर OA = OC = 3 सेंटीमीटर काटते हैं। इससे AC = 6 सेंटीमीटर होगा।
- (v) AB, BC, CD और DA को जोड़ते हैं।

त्रिभुज AOB और COB में OA = OC, OB उभयनिष्ठ है और O पर बने दोनों कोण समकोण हैं। इसलिए SAS नियम से ये त्रिभुज सर्वांगसम हैं और AB = BC है।
इसी प्रकार त्रिभुज AOD और COD सर्वांगसम हैं, इसलिए AD = CD है।
अतः ABCD अभीष्ट पतंग है, जिसके विकर्ण AC = 6 सेंटीमीटर और BD = 8 सेंटीमीटर हैं।
3. निम्नलिखित समलंब चतुर्भुज के शेष कोणों का मान ज्ञात कीजिए –

उत्तर:
दोनों चित्रों में शीर्षों को A, B, C और D नाम देते हैं, जैसा नीचे दर्शाया गया है। दोनों में AB ∥ DC है।

(i) पहले समलंब चतुर्भुज में ∠D = 135° और ∠C = 105° हैं।
समांतर भुजाओं के बीच एक ही ओर के अंतः कोणों का योग 180° होता है।
∠A + ∠D = 180°
∠A = 180° − 135° = 45°
∠B + ∠C = 180°
∠B = 180° − 105° = 75°
अतः शेष कोण ∠A = 45° और ∠B = 75° हैं।
(ii) दूसरे समलंब चतुर्भुज की असमांतर भुजाएँ समान हैं। इसलिए यह एक समद्विबाहु समलंब चतुर्भुज है।
इसके एक ही आधार पर बने कोण समान होते हैं।
∠A = 100°
इसलिए ∠B = 100°।
∠D = 180° − 100° = 80°
∠C = ∠D = 80°
अतः शेष कोण ∠B = 100°, ∠C = 80° और ∠D = 80° हैं।
4. एक वेन आरेख बनाइए जिसमें समांतर चतुर्भुज, पतंग, समलंब चतुर्भुज आयत और वर्गों के समूह को दर्शाया गया हो। तत्पश्चात निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(i) वह कौन-सा चतुर्भुज है जो पतंग और समांतर चतुर्भुज दोनों है?
(ii) क्या ऐसा कोई चतुर्भुज हो सकता है जो एक पतंग और एक आयत दोनों हों?
(iii) क्या प्रत्येक पतंग एक समचतुर्भुज है? यदि नहीं, तो इन दो प्रकार के चतुर्भुजों के मध्य का संबंध क्या है?
उत्तर:
समलंब चतुर्भुज में कम से कम एक जोड़ी सम्मुख भुजाएँ समांतर होती हैं। इसलिए हर समांतर चतुर्भुज एक समलंब चतुर्भुज भी है। सभी आयत समांतर चतुर्भुजों में आते हैं।
वेन आरेख में अक्षरों का अर्थ है—
Q: चतुर्भुज, T: समलंब चतुर्भुज, P: समांतर चतुर्भुज, K: पतंग, R: आयत, H: समचतुर्भुज और S: वर्ग।
P और K का साझा भाग H है। R और K का साझा भाग S है। इस प्रकार वर्ग, आयत और समचतुर्भुज दोनों में आता है।

(i) समचतुर्भुज, पतंग और समांतर चतुर्भुज दोनों है। इसकी सभी भुजाएँ समान होती हैं और सम्मुख भुजाएँ समांतर होती हैं।
(ii) हाँ, वर्ग एक पतंग और एक आयत दोनों है। इसकी सभी भुजाएँ समान होती हैं, इसलिए यह पतंग है। इसके सभी कोण 90° हैं, इसलिए यह आयत भी है।
(iii) नहीं, प्रत्येक पतंग समचतुर्भुज नहीं है। पतंग में आसन्न भुजाओं के दो जोड़े समान होते हैं, लेकिन चारों भुजाओं का समान होना जरूरी नहीं है। जैसे, किसी पतंग में भुजाओं के एक जोड़े की लंबाई 3 सेंटीमीटर और दूसरे जोड़े की लंबाई 5 सेंटीमीटर हो सकती है।
समचतुर्भुज की चारों भुजाएँ समान होती हैं। इसलिए हर समचतुर्भुज एक पतंग है, परंतु हर पतंग समचतुर्भुज नहीं है।
5. यदि PAIR और RODS दो आयत हों तो ∠IOD ज्ञात कीजिए।

उत्तर:
PAIR आयत है। इसलिए ∠RIO = 90°।
चित्र में ∠IRO = 30° है।
त्रिभुज RIO में,
∠ROI = 180° − 90° − 30°
= 60°।
RODS भी आयत है। इसलिए ∠ROD = 90°।
OI, कोण ROD के भीतर है। अतः
∠IOD = ∠ROD − ∠ROI
= 90° − 60°
= 30°।
अतः ∠IOD = 30°।
6. चाँदे (प्रोट्रेक्टर) का प्रयोग किए बिना 6 सेंटीमीटर विकर्ण वाले एक वर्ग की रचना कीजिए।
उत्तर:
रचना के चरण—
- (क) पटरी से AC = 6 सेंटीमीटर का रेखाखंड खींचा।
- (ख) A और C को केंद्र मानकर समान त्रिज्या के चाप AC के दोनों ओर खींचे। त्रिज्या AC के आधे से अधिक ली। चापों के प्रतिच्छेद बिंदुओं को P और Q नाम दिया।
- (ग) P और Q को मिलाया। PQ, AC का लंब समद्विभाजक है। यह AC को O पर काटता है।
- (घ) O को केंद्र और OA को त्रिज्या मानकर एक वृत्त खींचा। वृत्त, PQ को B और D पर काटता है।
- (ङ) AB, BC, CD और DA को मिलाया। ABCD अभीष्ट वर्ग है।

जाँच:
OA = OB = OC = OD, क्योंकि ये एक ही वृत्त की त्रिज्याएँ हैं।
AC = BD = 6 सेंटीमीटर। दोनों विकर्ण एक-दूसरे को समकोण पर समद्विभाजित करते हैं।
O पर बने चारों छोटे त्रिभुज सर्वांगसम समद्विबाहु समकोण त्रिभुज हैं। इसलिए ABCD की चारों भुजाएँ बराबर हैं और प्रत्येक कोण 45° + 45° = 90° है। अतः ABCD एक वर्ग है। इस रचना में चाँदे का प्रयोग नहीं किया।
7. CASE एक वर्ग है। बिंदु U, V, W और X वर्ग की भुजाओं के मध्य बिंदु हैं। UVWX किस प्रकार का चतुर्भुज है? इसे ज्यामितीय तर्क, रचना और मापन के उपयोग द्वारा ज्ञात कीजिए। एक वर्ग के अंतर्गत एक अन्य वर्ग की रचना करने की विधियाँ ज्ञात कीजिए। ध्यान रखिए कि आंतरिक वर्ग के शीर्ष बाहरी वर्ग की भुजाओं पर स्थित हों जैसा कि आकृति (b) में दर्शाया गया है।

उत्तर:
UVWX एक वर्ग है।
चूँकि CASE की चारों भुजाएँ बराबर हैं और U, V, W तथा X उनके मध्य बिंदु हैं, इसलिए—
CU = UA = AX = XS = SW = WE = EV = VC।
चारों कोनों पर बने त्रिभुज CUV, AUX, SXW और EWV में दो-दो भुजाएँ बराबर हैं तथा उनके बीच का कोण 90° है। अतः ये चारों त्रिभुज भुजा-कोण-भुजा नियम से सर्वांगसम हैं।
इसलिए UV = UX = XW = WV।
प्रत्येक छोटा त्रिभुज समद्विबाहु समकोण त्रिभुज है, इसलिए उसके शेष दोनों कोण 45° के हैं। U पर,
∠VUX = 180° − 45° − 45° = 90°।
इसी प्रकार V, W और X पर भी भीतरी कोण 90° हैं।
अतः UVWX की चारों भुजाएँ बराबर और चारों कोण समकोण हैं। इसलिए UVWX एक वर्ग है।
रचना और मापन:
मैंने 4 सेंटीमीटर भुजा वाला वर्ग CASE बनाया। उसकी भुजाओं के मध्य बिंदु U, V, W और X लेकर क्रम से मिलाए। मापने पर UVWX की चारों भुजाएँ लगभग 2.8 सेंटीमीटर और प्रत्येक कोण 90° मिला।
अंदर एक और वर्ग बनाने की विधियाँ:
पहली विधि: बाहरी वर्ग की चारों भुजाओं के मध्य बिंदुओं को क्रम से मिला दें। इससे ऊपर बनाया गया वर्ग UVWX मिलता है।
दूसरी विधि: उसी 4 सेंटीमीटर भुजा वाले वर्ग में U को CA पर, X को AS पर, W को SE पर और V को EC पर इस प्रकार लिया कि –
CU = AX = SW = EV = 1 सेंटीमीटर।
अब U, X, W और V को क्रम से मिलाया।

चारों कोनों पर बने समकोण त्रिभुजों की छोटी भुजा 1 सेंटीमीटर और दूसरी भुजा 3 सेंटीमीटर है। इसलिए ये सर्वांगसम हैं और इनके कर्ण, अर्थात भीतरी चतुर्भुज की चारों भुजाएँ, बराबर हैं।
इन त्रिभुजों के दो छोटे कोणों का योग 90° है। भीतरी चतुर्भुज के प्रत्येक शीर्ष पर ऐसे दो कोणों के बीच बचा कोण 180° − 90° = 90° होगा। इसलिए यह भी एक वर्ग है।
1 सेंटीमीटर के स्थान पर चारों भुजाओं पर कोई दूसरी समान दूरी लेकर भी इसी प्रकार अलग-अलग झुकाव वाले वर्ग बना सकते हैं। चुने गए बिंदु भुजाओं के सिरों के बीच होने चाहिए।
8. यदि एक चतुर्भुज की चारों भुजाएँ समान हों और एक कोण 90° का हो तो क्या यह एक वर्ग होगा? ज्यामितीय तर्क, रचना और मापन के उपयोग द्वारा उत्तर ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
हाँ, यह एक वर्ग होगा।
मान लिया कि ABCD की चारों भुजाएँ समान हैं और ∠A = 90° है। चारों भुजाएँ समान होने के कारण ABCD एक समचतुर्भुज है।
समचतुर्भुज में सम्मुख कोण बराबर होते हैं और आसन्न कोणों का योग 180° होता है। इसलिए—
∠C = ∠A = 90°,
∠B = 180° − 90° = 90°,
∠D = 180° − 90° = 90°।
इस प्रकार इसकी चारों भुजाएँ समान और चारों कोण 90° हैं। अतः ABCD एक वर्ग है।
रचना और जाँच:
मैंने A पर दो लंबवत रेखाएँ खींचकर उन पर AB = AD = 4 सेंटीमीटर लिया। B और D को केंद्र मानकर 4 सेंटीमीटर त्रिज्या के चाप खींचे। A के अलावा चापों के दूसरे प्रतिच्छेद को C नाम दिया और BC तथा CD मिलाए।
मापने पर चारों भुजाएँ 4 सेंटीमीटर और चारों कोण 90° मिले। इस प्रकार रचना से भी यही परिणाम मिला।
9. वह चतुर्भुज किस प्रकार का है जिसमें सम्मुख भुजाएँ समान हों? अपने उत्तर का सत्यापन कीजिए। संकेत – एक विकर्ण बनाइए और सर्वांगसम त्रिभुजों की जाँच कीजिए।
उत्तर:
यह एक समांतर चतुर्भुज है।
मान लिया कि ABCD में AB = CD और BC = AD है। विकर्ण AC खींचा।

त्रिभुज ABC और CDA में,
AB = CD,
BC = DA,
AC = CA, क्योंकि यह उभयनिष्ठ भुजा है।
अतः △ABC ≅ △CDA, भुजा-भुजा-भुजा नियम से।
इसलिए ∠BAC = ∠DCA और ∠BCA = ∠DAC।
ये एकांतर अंतःकोण हैं। इसलिए AB ∥ CD और BC ∥ AD।
दोनों जोड़ी सम्मुख भुजाएँ समांतर हैं। अतः ABCD एक समांतर चतुर्भुज है।
10. क्या आकृति में दिए गए चतुर्भुज के सभी कोणों का योगफल 360° होगा? ज्यामितीय तर्क के साथ ही इस आकृति की रचना करके और मापन के उपयोग द्वारा अपना उत्तर ज्ञात कीजिए।

उत्तर:
हाँ, इस चतुर्भुज के सभी अंतःकोणों का योग भी 360° होगा। D पर अंदर वाला कोण 180° से बड़ा है। वहाँ छोटे बाहरी कोण को लेने के स्थान पर बड़े अंदर वाले कोण को लेना है।
B और D को मिलाने पर चतुर्भुज दो त्रिभुजों ABD और BCD में बँट जाता है। इनके कोणों का योग—
180° + 180° = 360° है।
B पर बने दोनों छोटे कोण मिलकर चतुर्भुज का ∠B बनाते हैं। D पर बने दोनों त्रिभुजों के कोण मिलकर उसका बड़ा अंतःकोण बनाते हैं। इसलिए चतुर्भुज के चारों अंतःकोणों का योग 360° है।
रचना और मापन:
इसी प्रकार की आकृति बनाने के लिए मैंने 6 सेंटीमीटर भुजा वाला समबाहु त्रिभुज ABC बनाया। A और C के कोणों के समद्विभाजक खींचे और उनका प्रतिच्छेद D लिया। AB, BC, CD और DA से अभीष्ट प्रकार का चतुर्भुज बना।

मापने पर ∠A = 30°, ∠B = 60° और ∠C = 30° मिले। D पर छोटा कोण 120° मिला। इसलिए D का अंदर वाला बड़ा कोण:
360° − 120° = 240° है।
चारों अंतःकोणों का योग = 30° + 60° + 30° + 240° = 360°।
अतः रचना और मापन से भी परिणाम सही मिला।
11. बताइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं अथवा असत्य। अपने उत्तर को सत्यापित कीजिए।
(i) एक चतुर्भुज जिसके विकर्ण समान लंबाई के हों और एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हों वह निश्चित ही एक वर्ग होगा।
(ii) एक चतुर्भुज जिसके तीन कोण समकोण हैं निश्चित ही एक आयत है।
(iii) एक चतुर्भुज जिसके विकर्ण परस्पर समद्विभाजित करते हैं निश्चित ही एक समांतर चतुर्भुज है।
(iv) एक चतुर्भुज जिसके विकर्ण एक-दूसरे पर लंबवत हों निश्चित ही एक समचतुर्भुज है।
(v) एक चतुर्भुज जिसमें सम्मुख कोण समान हैं निश्चित ही एक समांतर चतुर्भुज है।
(vi) एक चतुर्भुज एक आयत होगा यदि इसका प्रत्येक कोण समान हैं।
(vii) समद्विबाहु समलंब चतुर्भुज, समांतर चतुर्भुज होते हैं।
उत्तर:
(i) असत्य।
आयत के विकर्ण भी बराबर होते हैं और एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं। परंतु उसकी चारों भुजाएँ बराबर होना आवश्यक नहीं है। जैसे, 6 सेंटीमीटर और 4 सेंटीमीटर भुजाओं वाला आयत वर्ग नहीं है।
(ii) सत्य।
चतुर्भुज के कोणों का योग 360° है। इसलिए चौथा कोण—
360° − (90° + 90° + 90°) = 90° होगा।
चारों कोण समकोण हैं, इसलिए यह आयत है।
(iii) सत्य।
मान लिया कि विकर्ण AC और BD, O पर एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं। तब OA = OC और OB = OD है। O पर शीर्षाभिमुख कोण भी बराबर हैं।
इसलिए △AOB ≅ △COD और △AOD ≅ △COB, भुजा-कोण-भुजा नियम से।
इनसे दोनों जोड़ी सम्मुख भुजाएँ बराबर मिलती हैं। अतः चतुर्भुज एक समांतर चतुर्भुज है।
(iv) असत्य।
एक पतंग के विकर्ण भी परस्पर लंबवत होते हैं, लेकिन उसकी चारों भुजाएँ बराबर होना आवश्यक नहीं है। इसलिए प्रत्येक ऐसा चतुर्भुज समचतुर्भुज नहीं होगा।
(v) सत्य।
मान लिया कि ∠A = ∠C और ∠B = ∠D है। तब—
∠A + ∠B + ∠C + ∠D = 360°,
2(∠A + ∠B) = 360°,
∠A + ∠B = 180°।
इसी प्रकार ∠A + ∠D = 180° होगा। एक ही ओर के अंतःकोण संपूरक हैं, इसलिए दोनों जोड़ी सम्मुख भुजाएँ समांतर हैं। अतः यह समांतर चतुर्भुज है।
(vi) सत्य।
चारों कोण बराबर हैं और उनका योग 360° है। इसलिए प्रत्येक कोण—
360° ÷ 4 = 90° होगा।
अतः चतुर्भुज एक आयत है।
(vii) असत्य।
समद्विबाहु समलंब चतुर्भुज की असमांतर भुजाएँ बराबर होती हैं। इससे दोनों जोड़ी सम्मुख भुजाएँ समांतर नहीं हो जातीं।
जैसे, 6 सेंटीमीटर और 4 सेंटीमीटर लंबे समांतर आधारों तथा बराबर असमांतर भुजाओं वाला समलंब चतुर्भुज समांतर चतुर्भुज नहीं है। समांतर चतुर्भुज में दोनों जोड़ी सम्मुख भुजाएँ समांतर और बराबर होती हैं।
विकर्ण बताते हैं चतुर्भुज का प्रकार
इस अध्याय के अधिकतर उत्तर विकर्णों से जुड़े तीन सवालों में छिपे हैं: क्या वे बराबर हैं, क्या एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं, और क्या 90° पर मिलते हैं? केवल समद्विभाजन हो तो समांतर चतुर्भुज, साथ में लंबाई भी बराबर हो तो आयत, समद्विभाजन के साथ 90° हो तो समचतुर्भुज, और तीनों बातें हों तो वर्ग। सत्य-असत्य वाले कथन परखने के लिए ऐसी आकृति ढूँढिए जो शर्त माने पर निष्कर्ष न माने; पतंग के विकर्ण भी लंबवत होते हैं, इसलिए ‘लंबवत विकर्णों वाला चतुर्भुज निश्चित ही समचतुर्भुज है’ असत्य है। इन आकृतियों के क्षेत्रफल भाग 2 के अध्याय ‘क्षेत्रफल’ में हैं, अगला अध्याय ‘संख्याओं का खेल’ है और शेष अध्याय भी कक्षा 8 गणित के एनसीईआरटी समाधान पर देखे जा सकते हैं।
