एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 गणित प्रश्नावली 9.1

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 गणित प्रश्नावली 9.1 परिमेय संख्याएँ अभ्यास के प्रश्न उत्तर हिंदी और अंग्रेजी में सवाल जवाब सत्र 2022-2023 के लिए यहाँ से निशुल्क प्राप्त किए जा सकते हैं। कक्षा 7 गणित अध्याय 9.1 में छात्र परिमेय संख्याओं की संक्रियाओं का अभ्यास करेंगे। प्रश्नों के हल यहाँ पीडीएफ तथा विडियो के माध्यम से दिए गए हैं।

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 गणित प्रश्नावली 9.1

परिमेय संख्याएँ

संख्या जो p/q के फॉर्म में हों, या संख्या जिन्हें p/q के रूप में व्यक्त किया जा सकता हो, जहाँ p तथा q पूर्णांक हों तथा q ≠ 0 हो, परिमेय संख्यां कहलाती हैं। परिमेय संख्या को अंग्रेजी में रेशनल नम्बर कहा जाता है। 2/3, –2/5, 3/4, –3/4 , आदि परिमेय संख्या के कुछ उदाहरण हैं।
परिमेय संख्याओं की आवश्यकता
हम समुद्र तल से ऊपर 750 m की ऊँचाई को ¾ km से व्यक्त कर सकते हैं। क्या हम समुद्र तल से नीचे 750 m की गहराई को km में व्यक्त कर सकते हैं? क्या हम समुद्र तल से नीचे ¾ km की गहराई को −3/4 से व्यक्त कर सकते हैं? हम देख सकते हैं कि −3/4 न तो एक पूर्णांक है और न ही एक भिन्न। ऐसी संख्याओं को सम्मिलित करने के लिए, हमें संख्या पद्धति को विस्तृत करने की आवश्यकता है।
अंश और हर
p/q में, पूर्णांक p अंश है तथा पूर्णांक q (≠ 0) हर है।
इस प्रकार, −3/7 में, – 3 अंश है और 7 हर है।

क्या पूर्णांक भी परिमेय संख्याएँ हैं?
किसी भी पूर्णांक को एक परिमेय संख्या माना जा सकता है। उदाहरणार्थ, पूर्णांक एक परिमेय संख्या है, क्योंकि आप इसे −5/1 के रूप में लिख सकते हैं। पूर्णांक 0 को भी 0/2, 0/7 इत्यादि के रूप में लिखा जा सकता है। अतः यह भी एक परिमेय संख्या है। इस प्रकार, परिमेय संख्याओं में पूर्णांक और भिन्न सम्मिलित होते हैं।

समतुल्य परिमेय संख्याएँ

एक परिमेय संख्या के अंश और हर को एक ही शून्येतर पूर्णांक से गुणा करने पर, हमें दी हुई परिमेय संख्या के समतुल्य (या तुल्य) एक अन्य परिमेय संख्या प्राप्त होती है। यह ठीक समतुल्य भिन्न प्राप्त करने जैसा ही है।
गुणा की तरह, एक ही शून्येतर पूर्णांक से अंश और हर को भाग देने पर भी समतुल्य परिमेय संख्याएँ प्राप्त होती हैं।
एक परिमेय संख्या को अलग-अलग अंशों और हरों का प्रयोग करते हुए लिखा जा सकता है।
उदाहरणार्थ, परिमेय संख्या − 2/3 पर विचार कीजिए।
− 2/3 = − 2/3 × 2/2 = – 4/6

धनात्मक परिमेय संख्याएँ
परिमेय संख्या 2/3 पर विचार कीजिए। इस संख्या के अंश और हर दोनों ही धनात्मक पूर्णांक हैं। ऐसी परिमेय संख्या को एक धनात्मक परिमेय संख्या कहते हैं। अतः, 3/8, 5/7, 2/9 इत्यादि धनात्मक परिमेय संख्याएँ हैं।

ऋणात्मक परिमेय संख्याएँ

– 3/5का अंश एक ऋणात्मक पूर्णांक है, जबकि इसका हर एक धनात्मक पूर्णांक है। ऐसी परिमेय संख्या को ऋणात्मक परिमेय संख्या कहते हैं। अतः – 5/7, – 3/8, – 9/5 इत्यादि ऋणात्मक परिमेय संख्याएँ हैं।
संख्या 0 न तो एक धनात्मक परिमेय संख्या है और न ही एक ऋणात्मक परिमेय संख्या।
मानक रूप में परिमेय संख्याएँ
एक परिमेय संख्या मानक रूप में व्यक्त की हुई कही जाती है, यदि उसका हर धनात्मक पूर्णांक हो तथा उसके अंश और हर में 1 के अतिरिक्त कोई सार्व गुणनखंड न हो।
उदहारण:
3/5, 5/8, -3/4 इत्यादि।

अभ्यास के लिए प्रश्नों के हल

– 45/30 को मानक रूप में व्यक्त कीजिए।
हल:
हमें प्राप्त है: – 45/30 = (- 45 ÷ 3) /(30 ÷ 3) = – 15/10
= (- 15 ÷ 5)/(10 ÷ 5) = – 3/2
हमें दो बार भाग देना पड़ा। पहली बार 3 से और फिर 5 से। इसे निम्नलिखित प्रकार से भी किया जा सकता था:
= (- 45 ÷ 15) /(30 ÷ 15) = – 3/2
इस उदाहरण में देखिए कि 15, संख्याओं 45 और 30 का म. स. है।
इस प्रकार, एक परिमेय संख्या को मानक रूप में व्यक्त करने के लिए, हम उसके अंश और हर को उनके म. स. से, ऋण चिह्न पर बिना कोई ध्यान दिए (यदि कोई हो), भाग देते हैं।

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