एनसीईआरटी समाधान कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 शूराः वयं धीराः वयम्

एनसीईआरटी कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 शूराः वयं धीराः वयम् समाधान, सत्र 2026-27 के अनुसार संशोधित रूप में यहाँ से प्राप्त किए जा सकते हैं। कक्षा 6 संस्कृत पाठ्यपुस्तक दीपकम् का सातवाँ पाठ “शूराः वयं धीराः वयम्” दीपकम् का पहला काव्य-पाठ है और इसका भाव राष्ट्रप्रेम तथा आत्मगौरव से ओतप्रोत है। यह गीत महाराष्ट्र के सुप्रसिद्ध आधुनिक कवि श्रीधर भास्कर वर्णेकर द्वारा रचित है जिन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। गीत में पाँच पद हैं जिनमें भारतीयों के गुण बताए गए हैं — शूराः (वीर), धीराः (धैर्यशाली), वीराः (पराक्रमी), गुणशालिनः (गुणवान्), बलशालिनः (बलवान्), दृढमानसाः (दृढ़ मनवाले), गतलालसाः (लोभरहित), जनसेवकाः (जनसेवी), गतभीतयः (निर्भय), धृतनीतयः (नीतिमान्)।

पाठ में गीत के साथ उसका हिंदी भावार्थ भी दिया गया है। व्याकरण की दृष्टि से यह पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें प्रातिपदिकम् (नामपद का मूलरूप) की अवधारणा पहली बार समझाई गई है। साथ ही तद्, एतद्, अस्मद् और युष्मद् की प्रथमा-विभक्ति तालिका तथा अनेक शब्दों के एकवचन, द्विवचन और बहुवचन रूप दिए गए हैं। अभ्यास में वचन-परिवर्तन, स्तम्भ-मिलान, धातुओं से क्रियापद-निर्माण और कोष्ठक से उचित पद चुनने जैसे आठ अभ्यास हैं। योग्यताविस्तरः में शंकराचार्य, शिवाजी महाराज, स्वामी विवेकानन्द, राणी लक्ष्मीबाई, सुभाषचन्द्र बोस और ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे महापुरुषों का परिचय संस्कृत में दिया गया है। सत्र 2026-27 के एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के अनुसार इस पाठ के सभी अभ्यास-प्रश्नों के हल यहाँ हिंदी में उपलब्ध हैं।

एनसीईआरटी कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न उत्तर

वयम् अभ्यासं कुर्म:

1. एतत् सम्पूर्णं गीतं सस्वरं गायन्तु, लिखन्तु, कण्ठस्थं कुर्वन्तु।

उत्तर:
राघव माधव सीते ललिते, विमानयानं रचयाम। नीले गगने विपुले विमले, वायुविहारं करवाम॥

2. पाठस्य आधारेण प्रश्नानाम उत्तराणी एकपदेन  लिखन्तु –

(क) शूराः के?
(ख) वयं कीदृशमानसाः स्मः?
(ग) वयं कीदृशचिन्तकाः स्मः?
(घ) वयं कुत्र अतिनिश्चलाः स्मः?
(ङ) वयं विजयार्थिनः कुत्र यामः?
उत्तर:
(क) भारतीयाः
(ख) दृढमानसाः
(ग) शुभचिन्तकाः
(घ) विजये
(ङ) समराङ्गणम्

3. उदाहरणानुसारम् अधोलिखितानां पदानां वचनपरिवर्तनं कुर्वन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न 3 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न 3 के उत्तर का चित्र

4. स्तम्भौ मेलयन्तु उत्तरं च लिखन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न 4 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न 4 के उत्तर का चित्र

5. उदाहरणानुसारम् अधोलिखितानां पदानां वचनपरिवर्तनं कुर्वन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न 5 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न 5 के उत्तर का चित्र

6. उदाहरणं दृष्ट्वा अधोलिखितानि पदानि परस्परं संयोज्य वाक्यानि रचयन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न 6 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न 6 के उत्तर का चित्र

7. कोष्ठकात् उचितं पदं स्वीक्रित्य रिक्तस्थाने लिखन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न 7 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न 7 के उत्तर का चित्र

8. उदाहरणमनुसृत्य उचितेन पदेन रिक्तस्थानं पूरयन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न 8 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 7 के प्रश्न 8 के उत्तर का चित्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न – कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् पाठ 7

क्या दीपकम् पाठ 7 का गीत परीक्षा में कण्ठस्थ करना ज़रूरी है?

हाँ, अभ्यास में ही स्पष्ट कहा गया है कि इस गीत को सस्वर गाएँ, लिखें और कण्ठस्थ करें। परीक्षा में गीत की पंक्तियाँ पूर्ण करने, भावार्थ लिखने और शब्दार्थ से प्रश्न पूछे जाते हैं। गीत को लय के साथ बार-बार गाने से यह जल्दी याद हो जाता है।

प्रातिपदिकम् क्या होता है और इसे पाठ 7 में पहली बार क्यों समझाया गया है?

किसी भी नामपद का मूलरूप प्रातिपदिकम् कहलाता है। जैसे “रामः” का प्रातिपदिक “राम” है। पाठ 7 के अवधेयांश में यह इसलिए समझाया गया है क्योंकि अब छात्र शब्दरूपों की तालिका सीखने के लिए तैयार हैं। यह अवधारणा आगे के सभी पाठों में और उच्च कक्षाओं की संस्कृत में बहुत काम आती है।

वचन-परिवर्तन के अभ्यास इस पाठ में इतने अधिक क्यों हैं?

यह पाठ व्याकरण की दृष्टि से संक्रमण का पाठ है। पिछले पाठों में सर्वनाम और क्रियापद सीखे, इस पाठ में नामपदों के एकवचन-द्विवचन-बहुवचन रूप विस्तार से दिए गए हैं। अभ्यास 3 और 5 दोनों वचन-परिवर्तन पर हैं क्योंकि यह कौशल परीक्षा में सबसे अधिक अंक दिलाता है।

क्या इस पाठ के गीत का भावार्थ परीक्षा में आता है और उसे कैसे लिखें?

हाँ, भावार्थ से संबंधित प्रश्न परीक्षा में आते हैं। पाठ में दिए गए हिंदी भावार्थ को पूरा रटने की ज़रूरत नहीं है — मुख्य बात यह है कि गीत की केंद्रीय भावना समझ आए कि भारतीय वीर, धैर्यशाली, निर्भय, लोभरहित और जनसेवक हैं तथा वे विजय के लिए सदा तत्पर रहते हैं।

परियोजना कार्य में महापुरुष का जीवनवृत्त संस्कृत में लिखना है – यह कैसे करें?

परियोजना में स्वामी विवेकानन्द, शिवाजी महाराज या राणाप्रताप में से किसी एक का लघु जीवनवृत्त संस्कृत में लिखना है। इसके लिए पाठ में सीखे सरल वाक्य-ढाँचे का उपयोग करें जैसे “तस्य जन्म …………. अभवत्। सः ……….. आसीत्।” बहुत कठिन संस्कृत लिखने की आवश्यकता नहीं — सरल, सही और स्पष्ट वाक्य पर्याप्त हैं।