एनसीईआरटी समाधान कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 12 त्वम् आपणं गच्छ
एनसीईआरटी कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 12 त्वम् आपणं गच्छ, के समाधान, प्रश्न-उत्तर और हिंदी अनुवाद छात्र-छात्राएँ सत्र 2026-27 के लिए तिवारी अकादमी से निशुल्क प्राप्त कर सकते हैं। कक्षा 6 संस्कृत पाठ्यपुस्तक दीपकम् का द्वादश: पाठ ‘त्वम् आपणं गच्छ’ एक जीवंत और व्यावहारिक संवाद-पाठ है जो बच्चों को दैनिक जीवन की संस्कृत में अभिव्यक्ति सिखाता है।
इस पाठ में राकेश अपनी माँ (अम्बा) के निर्देश पर बाज़ार जाता है और आपणिक (दुकानदार) से मुद्गः (मूँग), शर्करा (चीनी), गुडः (गुड़), द्विदलम् (दाल) और सर्षपः (सरसों) खरीदता है। वह ₹500 देकर ₹10 वापस लेता है। यह पाठ रोजमर्रा की खरीदारी, संख्याओं के उपयोग और विनम्र व्यवहार को संस्कृत में प्रस्तुत करता है। व्याकरण की दृष्टि से यह पाठ लोट्लकार — अर्थात् आज्ञा और प्रार्थना बोधक क्रियापद — का विस्तृत परिचय देता है।
‘काले वर्षतु पर्जन्यः’, ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’, ‘इमा आपः शिवाः सन्तु’ और ‘निन्दन्तु नीतिनिपुणाः’ जैसे प्रसिद्ध श्लोकों के माध्यम से लोट्लकार के प्रयोग को और स्पष्ट किया गया है। ‘कुरु उपकारं, कुरु उद्धारम्’ गीत के साथ यह पाठ नैतिक मूल्यों की भी शिक्षा देता है। सत्र 2026-27 की एनसीईआरटी परीक्षा में यह पाठ लोट्लकार के रूप भरने, आज्ञावाचक वाक्य बनाने और श्लोकों के क्रियापद पहचानने की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
एनसीईआरटी कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 12 के प्रश्न-उत्तर
वयम् अभ्यासं कुर्म:
1. पूर्वपृष्ठस्य कोष्ठके दत्तानि रूपाणि दृष्ट्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु –

उत्तर:

2. निम्नलिखितेषु सुभाषितेषु लोट्-लकारस्य क्रियापदानि चित्वा लिखन्तु –

उत्तर:

3. उदाहरणानुगुणं लोट्-लकारस्य रूपाणि लिखन्तु –

उत्तर:

4. दाहरणानुगुणं बहुवचनस्य रूपाणि लिखन्तु –

उत्तर:

5. विद्यालयस्य वार्षिकोत्सवे के-के किं-किं कुर्वन्ति इति सूचनारूपेण वाक्यानि पुनः लिखन्तु –

उत्तर:

6. पट्टिकातः उचितैः क्रियारूपैः अनुच्छेदस्य रिक्तस्थानानि पूरयन्तु –

उत्तर:

7. मार्गे सूचनादीपाः फलकानि च भवन्ति। तेषां चित्राणि दृष्ट्वा पट्टिकापदैः वाक्यानि रिक्तस्थानेषु लिखन्तु –

उत्तर:

8. उदाहरणानुसार क्रियापदस्य लोट्-लकाररूपै: वाक्यानि पूरयन्तु –

उत्तर:

9. चिह्नानि ( ? ! । , ) भावानुसारं वाक्ये योजयन्तु —

उत्तर:
(क) पुत्र ! किं करोषि ? (पुत्र के बाद विस्मयबोधक और प्रश्न के अंत में प्रश्नवाचक)
(ख) क: श्लोकं वदति ? (प्रश्नवाचक वाक्य)
(ग) भवान् तत्र तिष्ठतु । (आदेश/पूर्ण विराम)
(घ) आचार्य: कदा आगच्छति ? (प्रश्नवाचक वाक्य)
(ङ) अहो ! रमणीय: पर्वत: । (अहो के बाद विस्मयबोधक और अंत में पूर्ण विराम)
कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् पाठ 12 – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कक्षा 6 संस्कृत पाठ 12 ‘त्वम् आपणं गच्छ’ में बच्चों को क्या सिखाया जाता है?
इस पाठ के तीन मुख्य उद्देश्य हैं। पहला — बच्चों को संस्कृत में बाज़ार-संवाद, वस्तुओं के नाम और संख्याओं का व्यावहारिक ज्ञान देना। दूसरा — लोट्लकार के माध्यम से आज्ञा और प्रार्थना की अभिव्यक्ति सिखाना। तीसरा — ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ जैसे श्लोकों द्वारा नैतिक एवं सामाजिक मूल्यों का संस्कार देना।
संस्कृत में बाज़ार-संवाद पर यह पाठ क्यों महत्त्वपूर्ण है?
यह पाठ संस्कृत को एक जीवित एवं व्यावहारिक भाषा के रूप में प्रस्तुत करता है। राकेश और दुकानदार का संवाद यह दर्शाता है कि संस्कृत केवल धार्मिक ग्रंथों की भाषा नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में भी प्रयोग की जा सकती है। बच्चे इससे मूल्य गणना, विनम्र निवेदन और सामाजिक व्यवहार — तीनों एक साथ सीखते हैं।
इस पाठ में माँ और पुत्र के संवाद से बच्चों को क्या जीवन-मूल्य मिलते हैं?
इस संवाद में माँ राकेश को स्वास्थ्य की चिंता करते हुए चॉकलेट की अधिकता से मना करती है और सड़क पार करते समय सावधानी बरतने की सीख देती है। इससे बच्चों को तीन जीवन-मूल्य मिलते हैं — माता के निर्देशों का पालन करना, स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना और यातायात-नियमों का सम्मान करना।
पाठ 12 में लोट्लकार का उपयोग आज्ञा के लिए होता है या प्रार्थना के लिए – दोनों में क्या अंतर है?
इस पाठ में लोट्लकार दोनों अर्थों में प्रयुक्त हुआ है। जब माँ कहती है ‘त्वम् आपणं गच्छ’ (तुम बाज़ार जाओ) — यह आज्ञा है। जब ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ (सभी सुखी हों) कहा जाता है — यह प्रार्थना है। आज्ञा में बड़े छोटे को, शिक्षक विद्यार्थी को निर्देश देते हैं, जबकि प्रार्थना में ईश्वर या समाज से कल्याण की कामना की जाती है।
कक्षा 6 संस्कृत पाठ 12 में लोट्लकार के निषेधात्मक वाक्य कैसे बनते हैं और उनके उदाहरण क्या हैं?
लोट्लकार में निषेध के लिए ‘मा’ का प्रयोग होता है — जैसे ‘मा वद मिथ्या’ (झूठ मत बोलो), ‘मा पिब मादकवस्तु’ (नशीली वस्तु मत पियो)। यह ‘मा’ अव्यय-पद है। हिंदी के ‘मत’ के समान ‘मा’ संस्कृत में निषेधार्थ में लोट्लकार के साथ लगता है। ‘कुरु उपकारं’ गीत में इसके अनेक सुंदर उदाहरण मिलते हैं।
इस पाठ में लोट्लकार और पिछले पाठ के लट्लकार में मुख्य भेद क्या है?
लट्लकार (पाठ 10) वर्तमान काल को दर्शाता है — जो अभी हो रहा है, जैसे ‘सः पठति’ (वह पढ़ता है)। लोट्लकार (पाठ 12) भाव-काल है — जो होना चाहिए अथवा होने की इच्छा है, जैसे ‘सः पठतु’ (वह पढ़े)। सरल पहचान: लट्लकार में ‘ति’ प्रत्यय आता है, लोट्लकार में ‘तु’ आता है।
‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ श्लोक इस पाठ में क्यों सम्मिलित किया गया है?
यह श्लोक लोट्लकार के प्रार्थनार्थ प्रयोग का सबसे उत्तम उदाहरण है। ‘भवन्तु’, ‘सन्तु’, ‘पश्यन्तु’ — ये सभी लोट्लकार के रूप हैं जो विश्वकल्याण की कामना व्यक्त करते हैं। साथ ही यह श्लोक बच्चों में यह भाव जगाता है कि केवल अपना नहीं, समस्त प्राणियों का सुख चाहना ही सच्ची प्रार्थना है।
‘काले वर्षतु पर्जन्यः’ श्लोक का पाठ 12 दीपकम कक्षा 6 संस्कृत से क्या सम्बन्ध है?
यह श्लोक पाठ में लोट्लकार के प्रयोग को विस्तार देता है। ‘वर्षतु’, ‘भवतु’, ‘सन्तु’ — इन क्रियापदों में लोट्लकार का प्रार्थनार्थ रूप दिखाई देता है। इस श्लोक की विषयवस्तु प्रकृति, कृषि और समाज-कल्याण से जुड़ी है, जो बच्चों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील भी बनाती है।
‘कुरु उपकारं, कुरु उद्धारम्’ गीत में लोट्लकार का क्या विशेष प्रयोग है?
वासुदेवद्विवेदी शास्त्री रचित इस गीत में लोट्लकार के आज्ञार्थ और निषेधार्थ — दोनों रूप एकसाथ मिलते हैं। ‘कुरु’ (करो), ‘पाहि’ (रक्षा करो), ‘पालय’ (पालन करो) — ये आज्ञार्थ हैं, जबकि ‘मा कुरु दर्पम्’ (अहंकार मत करो), ‘मा वद मिथ्या’ (झूठ मत बोलो) — ये निषेधार्थ हैं। इस प्रकार यह गीत व्याकरण और नैतिकता दोनों एकसाथ सिखाता है।
दीपकम कक्षा 6 संस्कृत पाठ 12 में यातायात-संकेतों को संस्कृत में क्यों समझाया गया है?
पाठ के अंत में यातायात-संकेतों को संस्कृत में प्रस्तुत करने का उद्देश्य यह दिखाना है कि संस्कृत आधुनिक जीवन की प्रत्येक स्थिति में उपयोगी है। ‘वामतः गच्छ’, ‘दक्षिणतः गच्छ’, ‘तिष्ठ प्रतीक्षस्व’ — ये वाक्य लोट्लकार के व्यावहारिक उदाहरण हैं और साथ ही बच्चों को यातायात-सुरक्षा की शिक्षा भी देते हैं।
‘त्वम् आपणं गच्छ’ पाठ 12 में संस्कृत संख्याओं का क्या महत्त्व है?
इस पाठ में चत्वारि शतानि षष्टिः (460), पञ्च शतानि (500), दश (10) जैसी संख्याओं का व्यावहारिक उपयोग दिखाया गया है। यह बच्चों को संस्कृत संख्याएँ केवल रटने के बजाय वास्तविक जीवन की परिस्थिति में प्रयोग करना सिखाता है, जिससे भाषा-ज्ञान अधिक स्थायी और उपयोगी बनता है।
कक्षा 6 दीपकम पाठ 12 से बच्चों में संस्कृत के प्रति रुचि कैसे उत्पन्न होती है?
पाठ 12 की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें संस्कृत को कठिन या पुरानी भाषा की तरह नहीं, बल्कि जीवंत और रोचक रूप में प्रस्तुत किया गया है। बाज़ार की खरीदारी, माँ-बेटे का आत्मीय संवाद, चॉकलेट लेने की जिद और वापसी की रकम — ये सभी परिचित परिस्थितियाँ बच्चों को संस्कृत से स्वाभाविक रूप से जोड़ती हैं।
