एनसीईआरटी समाधान कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 10 बुद्धिः सर्वार्थसाधिका

एनसीईआरटी कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 10 बुद्धिः सर्वार्थसाधिका के समाधान, प्रश्न-उत्तर और हिंदी अनुवाद शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए यहाँ से निशुल्क प्राप्त किए जा सकते हैं। कक्षा 6 संस्कृत पाठ्यपुस्तक दीपकम् का दशम् पाठ ‘बुद्धिः सर्वार्थसाधिका’ एक प्रेरक पशु-कथा के माध्यम से यह संदेश देता है कि शरीर के बल से बढ़कर बुद्धि का बल होता है। पाठ का शीर्षक ही उसका सार है — बुद्धि ही सब कार्यों को सिद्ध करती है।

कहानी में एक घने वन के सरोवर के किनारे रहने वाले शशकों (खरगोशों) का झुंड हाथियों के आने-जाने से पीड़ित हो जाता है। अनेक खरगोश घायल और मृत हो जाते हैं। तब चतुर शशकराज अपनी बुद्धि से गजराज को यह विश्वास दिला देता है कि वह सरोवर चन्द्रदेव का वासस्थान है और जल में दिखने वाला प्रतिबिम्ब स्वयं चन्द्र है। गजराज भयभीत होकर वहाँ से चला जाता है और शशक सुखपूर्वक रहने लगते हैं।

व्याकरण की दृष्टि से यह पाठ लट्लकार (वर्तमान काल), क्रियापदों के मूल धातु, पुरुष (प्रथम, मध्यम, उत्तम) और वचन (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) की महत्त्वपूर्ण शिक्षा देता है। सत्र 2026-27 के एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के अनुसार यह पाठ कक्षा 6 की संस्कृत परीक्षा के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

एनसीईआरटी कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 10 के प्रश्न उत्तर

वयम् अभ्यासं कुर्म:

1. पाठस्य आधारेण अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 10 के प्रश्न 1 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 10 के प्रश्न 1 के उत्तर का चित्र

2. पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 10 के प्रश्न 2 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 10 के प्रश्न 2 के उत्तर का चित्र

3. पाठस्य आधारेण पिट्टकातः क्रियापदानि चित्वा वाक्यानि पूरयन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 10 के प्रश्न 3 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 10 के प्रश्न 3 के उत्तर का चित्र

4. उदाहरणानुसारं निम्नलिखितानां पदानां पुरुषं वचनं च लिखन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 10 के प्रश्न 4 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 10 के प्रश्न 4 के उत्तर का चित्र

5. उदाहरणानुसारं समुचितैः क्रियापदैः रिक्तस्थानानि पूरयन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 10 के प्रश्न 5 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 10 के प्रश्न 5 के उत्तर का चित्र

6. चित्रस्य आधारेण पञ्च वाक्यानि लिखन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 10 के प्रश्न 6 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 10 के प्रश्न 6 के उत्तर का चित्र

7. अधोलिखितानां पर्यायपदानां मेलनं कृत्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 10 के प्रश्न 7 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 10 के प्रश्न 7 के उत्तर का चित्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न – कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् पाठ 10

बुद्धिः सर्वार्थसाधिका का क्या अर्थ है?

बुद्धिः सर्वार्थसाधिका एक संस्कृत सूक्ति है जिसका अर्थ है — “बुद्धि ही सभी कार्यों को सिद्ध करने वाली है।” अर्थात् जीवन में शरीर बल से अधिक महत्त्वपूर्ण बुद्धि बल होता है। कठिन से कठिन परिस्थिति में भी बुद्धिमानी से काम लेने पर समस्या का हल निकाला जा सकता है।

कक्षा 6 संस्कृत पाठ 10 का मूल सन्देश क्या है?

पाठ का मूल सन्देश है कि शारीरिक शक्ति से बुद्धि की शक्ति अधिक महत्त्वपूर्ण होती है। शशकराज ने बिना किसी लड़ाई के केवल अपनी चतुराई से विशाल गजराज को भगा दिया। यह कहानी पंचतंत्र की नीति-कथाओं की परम्परा में है — सही समय पर सही बुद्धि का उपयोग ही सफलता की कुंजी है।

कक्षा 6 संस्कृत पाठ 10 में लट्लकार क्या है और यह परीक्षा में कैसे आता है?

लट्लकार संस्कृत व्याकरण में वर्तमान काल को कहते हैं। इसमें तीन पुरुष होते हैं — प्रथम (वह/वे), मध्यम (तुम) और उत्तम (मैं/हम) — और तीन वचन होते हैं — एकवचन, द्विवचन और बहुवचन। परीक्षा में धातु रूप भरना, क्रियापद का पुरुष-वचन पहचानना और रिक्त स्थान पूरा करना इसी से पूछा जाता है।

‘बुद्धिः सर्वार्थसाधिका’ की कहानी किस प्राचीन ग्रंथ पर आधारित है?

यह कहानी पंचतंत्र की प्रसिद्ध कथाओं पर आधारित है, जिसमें ‘चन्द्र और खरगोश’ की कहानी मित्रभेद या अन्य तंत्रों में मिलती है। पंचतंत्र के अतिरिक्त यह कथा हितोपदेश में भी पाई जाती है। इन नीति-कथाओं का उद्देश्य बच्चों को व्यावहारिक बुद्धि एवं जीवन-कौशल सिखाना है।

एनसीईआरटी कक्षा 6 संस्कृत पाठ 10 में कौन-कौन से धातु रूप पढ़ाए जाते हैं?

इस पाठ में गम् (जाना), कथ् (कहना), स्था (ठहरना), कृ (करना), जीव् (जीना) और चल् (चलना) धातुओं के एकवचन, द्विवचन और बहुवचन रूप लट्लकार में सिखाए जाते हैं। इनके साथ निवसन्ति (नि+वस्), प्रकाशयन्ति (प्र+काश्) और नमति (नम्) धातुओं की भी जानकारी दी गई है।

शशकराज ने गजराज को कैसे भगाया – पाठ का सारांश क्या है?

एक वन के सरोवर के किनारे खरगोश रहते थे। हाथियों के झुंड के आने से वे घायल हो जाते थे। शशकराज रात को गजराज के पास गया और कहा कि यह सरोवर चन्द्रदेव का वासस्थान है। उसने गजराज को सरोवर में चन्द्र का प्रतिबिम्ब दिखाया। गजराज डरकर चन्द्र को नमस्कार करके वहाँ से सदा के लिए चला गया।

संस्कृत में ‘शशाङ्कः’ शब्द का अर्थ क्या है और यह चन्द्रमा का नाम क्यों है?

‘शशाङ्कः’ संस्कृत में चन्द्रमा का पर्यायवाची है। इसका शाब्दिक अर्थ है — “शशक (खरगोश) जिसके अंक (गोद/चिह्न) में है।” प्राचीन भारतीय मान्यता के अनुसार चन्द्रमा पर खरगोश का चिह्न दिखता है, इसीलिए चन्द्र को शशाङ्क कहते हैं। इस पाठ में शशकराज ने इसी नाम का चतुराई से उपयोग किया।

कक्षा 6 संस्कृत परीक्षा 2026-27 में पाठ 10 से कौन-से प्रश्न सबसे अधिक पूछे जाते हैं?

परीक्षा में इस पाठ से मुख्यतः ये प्रश्न आते हैं —

  1. लट्लकार में धातु रूप भरना (गम्, स्था, कथ् आदि),
  2. क्रियापद का पुरुष एवं वचन लिखना,
  3. पर्यायवाची शब्दों का मिलान (गजः–हस्ती, सरोवरः–जलाशयः),
  4. पाठ पर आधारित एकपदेन एवं पूर्णवाक्येन उत्तर, और
  5. ‘बुद्धिः सर्वार्थसाधिका’ सूक्ति का अर्थ।