एनसीईआरटी समाधान कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 16 वृक्षाः सत्पुरुषाः इव
एनसीईआरटी कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 16 वृक्षाः सत्पुरुषाः इव, के समाधान, प्रश्न-उत्तर और हिंदी अनुवाद शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए यहाँ से निशुल्क प्राप्त किए जा सकते हैं। कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् का षोडश पाठः (पाठ 16) ‘वृक्षाः सत्पुरुषाः इव’ पर्यावरण संरक्षण और परोपकार की भावना पर आधारित एक अत्यंत प्रेरणादायक पाठ है। इस पाठ में वृक्षों की तुलना सत्पुरुषों (महान व्यक्तियों) से की गई है क्योंकि जिस प्रकार सज्जन व्यक्ति स्वयं कष्ट सहकर भी दूसरों का भला करते हैं, उसी प्रकार वृक्ष धूप में खड़े रहकर अन्य प्राणियों को छाया, फल, फूल, जल, काष्ठ और वल्कल प्रदान करते हैं।
इस पाठ में चार प्रमुख सुभाषितों के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि नदियाँ, वृक्ष, गायें और बादल सभी परोपकार के लिए ही अपना जीवन जीते हैं। सत्र 2026-27 के सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुसार इस पाठ में पदच्छेद, अन्वय, भावार्थ तथा विभिन्न व्याकरणिक अभ्यास सम्मिलित हैं जो छात्रों की संस्कृत भाषा की नींव को सुदृढ़ करते हैं।
एनसीईआरटी कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 16 के प्रश्न उत्तर
वयम् अभ्यासं कुर्म:
1. पाठे लिखितानि सुभाषितानि सस्वरं पठन्तु, अवगच्छन्तु, लिखन्तु स्मरन्तु च।
उत्तर:
यह अभ्यास प्रश्न कंठस्थ हेतु है, इसलिए लिखित उत्तर नहीं है।
2. पाठस्य आधारेण अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु।

उत्तर:

3. पाठस्य आधारेण अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखन्तु।
(क) नद्यः किं न पिबन्ति?
(ख) वृक्षाः अस्मभ्यं किं किं यच्छन्ति?
(ग) इदं शरीरं किमर्थम् अस्ति?
(घ) दशपुत्रसमः कः भवति?
(ङ) केषां विभूतयः परोपकाराय भवन्ति?
(च) अन्यस्य छायां के कुर्वन्ति?
उत्तर:
(क) नद्यः अम्भः स्वयमेव न पिबन्ति।
(ख) वृक्षाः शुद्धं वायुम्, फलानि, पुष्पाणि, छायां च यच्छन्ति।
(ग) इदं शरीरं परोपकारार्थम् अस्ति।
(घ) द्रुमः दशपुत्रसमः भवति।
(ङ) सतां विभूतयः परोपकाराय भवन्ति।
(च) वृक्षाः अन्यस्य छायां कुर्वन्ति।
4. पट्टिकातः उचितानि पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु।

उत्तर:

5. उदाहरणानुसारम् अधोलिखितेषु वाक्येषु स्थूलाक्षरपदानां विभक्तिं निर्दिशन्तु।

उत्तर:

6. अधोलिखितानां पदानां द्विवचने बहुवचने च रूपाणि लिखन्तु।

उत्तर:

7. अधोलिखितानां पदानां परस्परं समुचितं मेलनं कृत्वा ‘कः किं ददाति’ इति लिखन्तु।

उत्तर:

8. अधोलिखितानां क्रियापदानां लट्-लकारे प्रथमपुरुषस्य रूपाणि लिखन्तु।

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् पाठ 16 – अक्सर पूंछे जाने वाले प्रश्न
पाठ ‘वृक्षाः सत्पुरुषाः इव’ का मुख्य संदेश क्या है?
इस पाठ का मुख्य संदेश है कि वृक्ष सत्पुरुषों के समान परोपकारी होते हैं। वे स्वयं धूप में खड़े रहते हैं परंतु दूसरों को छाया देते हैं, फल स्वयं नहीं खाते बल्कि अन्य प्राणियों को देते हैं। इसी प्रकार नदियाँ, गायें और बादल भी परोपकार के लिए ही जीते हैं। पाठ हमें प्रेरित करता है कि हमारा जीवन भी दूसरों के उपकार के लिए होना चाहिए।
‘वृक्षाः सत्पुरुषाः इव’ पाठ में कौन-कौन से सुभाषित हैं?
इस पाठ में चार प्रमुख सुभाषित हैं —
- छायामन्यस्य कुर्वन्ति… (वृक्षों की परोपकारिता)
- दशकूपसमा वापी… (वृक्ष का महत्त्व दस पुत्रों के समान)
- अहो एषां वरं जन्म… (वृक्षों के जन्म की श्रेष्ठता)
- परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः… (वृक्ष, नदी, गाय और यह शरीर परोपकार के लिए हैं)।
‘दशकूपसमा वापी’ श्लोक का क्या अर्थ है?
इस श्लोक का अर्थ है — दस कुओं के बराबर एक बावड़ी होती है, दस बावड़ियों के बराबर एक तालाब होता है, दस तालाबों के बराबर एक पुत्र होता है, और दस पुत्रों के बराबर एक वृक्ष होता है। अर्थात् एक वृक्ष सर्वाधिक मूल्यवान और उपकारी होता है, इसलिए सभी को वृक्ष लगाने चाहिए।
‘परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः’ श्लोक में किन-किन का उल्लेख है?
इस श्लोक में चार परोपकारी तत्त्वों का उल्लेख है — वृक्ष परोपकार के लिए फल देते हैं, नदियाँ परोपकार के लिए बहती हैं, गायें परोपकार के लिए दूध देती हैं, और यह शरीर भी परोपकार के लिए ही है। यह श्लोक जीवन के उद्देश्य को परोपकार बताता है।
कक्षा 6 संस्कृत पाठ 16 में ‘महीरुहाः’ शब्द का क्या अर्थ है?
‘महीरुहाः’ शब्द का अर्थ है वृक्ष। ‘महीरुह’ = महि (पृथ्वी) + रुह (उगने वाला), अर्थात् पृथ्वी से उगने वाले — यानी वृक्ष। पाठ में कहा गया है कि वे वृक्ष धन्य हैं जिनके पास आने वाले याचक कभी निराश होकर नहीं लौटते।
कक्षा 6 दीपकम पाठ 16 में वृक्षों से कौन-कौन सी वस्तुएँ प्राप्त होती हैं?
पाठ के अनुसार वृक्षों से पुष्प (फूल), पत्र (पत्ते), फल, छाया, मूल (जड़ें), वल्कल (छाल) और दारु (लकड़ी) प्राप्त होते हैं। इसके अलावा वृक्ष शुद्ध वायु भी प्रदान करते हैं। अतः वृक्ष सर्वांगीण रूप से प्राणियों के उपकारक हैं।
कक्षा 6 संस्कृत पाठ 16 की पहेली (प्रहेलिका) का उत्तर क्या है?
पाठ के अंत में दी गई पहेली — “वृक्षाग्रवासी न च पक्षिराजः, त्रिनेत्रधारी न च शूलपाणिः, त्वग्वस्त्रधारी न च सिद्धयोगी, जलं च बिभ्रन्न घटो न मेघः” — का उत्तर नारियल का वृक्ष (नारिकेल वृक्ष) है। यह पेड़ पर रहता है (परंतु गरुड़ नहीं), तीन नेत्र (आँखें) हैं (परंतु शिव नहीं), छाल का आवरण है (परंतु योगी नहीं), और जल धारण करता है (परंतु घड़ा या बादल नहीं)।
एनसीईआरटी कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 16 किस पुस्तक से है और सत्र कौनसा है?
यह पाठ एनसीईआरटी की कक्षा 6 संस्कृत पुस्तक दीपकम् का षोडश पाठः (पाठ 16) है। यह सत्र 2026-27 के लिए पुनर्मुद्रित (रीप्रिंट 2026-27) संस्करण में उपलब्ध है। पाठ का शीर्षक है — वृक्षाः सत्पुरुषाः इव।
