एनसीईआरटी समाधान कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 15 माधवस्य प्रियम् अङ्गम्

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 15 माधवस्य प्रियम् अङ्गम् के प्रश्न उत्तर और हिंदी अनुवाद – सत्र 2026-27 के अनुसार यहाँ दिए गए हैं। कक्षा 6 की संस्कृत पाठ्यपुस्तक दीपकम् का पञ्चदश पाठ (पाठ 15) — ‘माधवस्य प्रियम् अङ्गम्’ — एक अत्यंत रोचक और शिक्षाप्रद कहानी है। इस पाठ में माधव नामक एक बालक स्वप्न में अपने शरीर के अंगों को आपस में बहस करते हुए देखता है। हाथ, पैर, आँख, कान और मुँह — सभी अंग एक-दूसरे से श्रेष्ठता का दावा करते हैं।

अंत में माधव सभी को समझाता है कि शरीर के प्रत्येक अंग का अपना महत्त्व है और सभी मिलकर ही जीवन को सुचारु बनाते हैं। यह पाठ एनसीईआरटी के सत्र 2026-27 के पाठ्यक्रम पर आधारित है और बच्चों को शरीर के अंगों के संस्कृत नाम, उनके कार्य तथा परस्पर सहयोग का महत्त्व सिखाता है।

एनसीईआरटी कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 15 के प्रश्न उत्तर

वयम् अभ्यासं कुर्म:

1. चित्रं दृष्ट्वा अङ्गस्य नाम लिखन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 15 के प्रश्न 1 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 15 के प्रश्न 1 के उत्तर का चित्र

2. कोष्ठकात् समुचितं क्रियापदं चित्वा अङ्गस्य कार्यं लिखन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 15 के प्रश्न 2 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 15 के प्रश्न 2 के उत्तर का चित्र

3. कोष्ठकात् समुचितां संख्यां चित्वा रिक्तस्थानं पूरयन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 15 के प्रश्न 3 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 15 के प्रश्न 3 के उत्तर का चित्र

4. कोष्ठकात् समुचितं क्रियापदं चित्वा उदाहरणानुसारं शरीराङ्गस्य नाम लिखन्तु-

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 15 के प्रश्न 4 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 15 के प्रश्न 4 के उत्तर का चित्र

5. पट्टिकातः शब्दान् चित्वा यथायोग्यं गणेषु लिखन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 15 के प्रश्न 5 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 15 के प्रश्न 5 के उत्तर का चित्र

6. कोष्ठकात् समुचितं पदं चित्वा वाक्यानि रचयन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 15 के प्रश्न 6 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 15 के प्रश्न 6 के उत्तर का चित्र

7. पट्टिकातः समुचितं शरीराङ्गं चित्वा ‘भगिनी कुत्र किं धरति’ इति वाक्यानि लिखन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 15 के प्रश्न 7 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 15 के प्रश्न 7 के उत्तर का चित्र

8. वाक्यं शुद्धम् अशुद्धं वा इति सूचयन्तु –

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 15 के प्रश्न 8 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 15 के प्रश्न 8 के उत्तर का चित्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न – कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् पाठ 15

‘माधवस्य प्रियम् अङ्गम्’ पाठ किस कक्षा और किस पुस्तक में है?

यह पाठ कक्षा 6 की संस्कृत पाठ्यपुस्तक दीपकम् का पञ्चदश (15वाँ) पाठ है, जो एनसीईआरटी के सत्र 2026-27 के पाठ्यक्रम में सम्मिलित है।

कक्षा 6 संस्कृत के पाठ 15 की मुख्य कहानी क्या है?

माधव नामक एक बालक स्वप्न में देखता है कि उसके शरीर के अंग — हाथ, पैर, आँख, कान और मुँह — आपस में बहस कर रहे हैं कि उनमें से कौन सबसे श्रेष्ठ है। अंत में माधव सभी को यह बोध कराता है कि शरीर के सभी अंग मिलकर काम करते हैं, इसलिए सभी समान रूप से महत्त्वपूर्ण और प्रिय हैं।

हाथ (हस्त) ने अपनी श्रेष्ठता का क्या तर्क दिया?

हाथ ने कहा कि माधव उसकी सहायता से लिखता है, गृहकार्य करता है और वस्तुएँ लाता है, इसलिए वही सबसे श्रेष्ठ है।

कान (कर्ण) ने अपनी उपयोगिता कैसे बताई?

कान ने कहा कि जब माधव रास्ते पर चलता है तो पीछे से आने वाले वाहनों की आवाज़ सुनकर ही वह सावधान होता है। इसके बिना दुर्घटना हो सकती है। इसी प्रकार शिक्षक के उपदेश और संगीत सुनकर वह ज्ञान और आनंद प्राप्त करता है।

माधव ने सभी अंगों को क्या उत्तर दिया?

माधव ने कहा — “मम शरीरस्य सर्वाणि अङ्गानि मम कृते उपकारकाणि सन्ति।” अर्थात् मेरे शरीर के सभी अंग मेरे लिए उपकारी हैं। मैं आँखों से देखता हूँ, कानों से सुनता हूँ, मुँह से बोलता और खाता हूँ, पेट से पाचन-शक्ति प्राप्त करता हूँ और पैरों से चलता हूँ। इसलिए सभी अंग श्रेष्ठ हैं और सभी मुझे प्रिय हैं।

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम अध्याय 15 से बच्चों को क्या नैतिक शिक्षा मिलती है?

इस पाठ से यह शिक्षा मिलती है कि समाज या परिवार में जैसे सभी लोग मिलकर काम करते हैं, वैसे ही शरीर के सभी अंग एक-दूसरे के सहयोग से काम करते हैं। किसी एक को श्रेष्ठ या किसी को निकृष्ट नहीं समझना चाहिए — सहयोग और समन्वय ही जीवन का आधार है।

दीपकम के पाठ 15 में कक्षा 6 के छात्रों को कौन-कौन से प्रमुख संस्कृत शब्द सीखने को मिलते हैं?

इस पाठ में शरीर के अंगों के संस्कृत नाम जैसे — नयनम् (आँख), कर्णः (कान), हस्तः (हाथ), पादः (पैर), मुखम् (मुँह), नासिका (नाक), उदरम् (पेट), जिह्वा (जीभ), ललाटम् (माथा), कपोलः (गाल) आदि सिखाए जाते हैं। साथ ही स्वप्नः, श्रेष्ठः, उपकारकाणि, विचारयति जैसे उपयोगी शब्द भी सीखने को मिलते हैं।

कक्षा 6 संस्कृत पाठ 15 के अंत में मधुराष्टकम् क्यों दिया गया है?

पाठ के अंत में श्रीवल्लभाचार्य रचित मधुराष्टकम् दिया गया है जिसमें भगवान के शरीर के प्रत्येक अंग को “मधुरम्” (मधुर/सुंदर) कहा गया है। यह पाठ की मूल भावना से जुड़ा है — शरीर के हर अंग का अपना सौंदर्य और महत्त्व होता है। यह छात्रों में संस्कृत के प्रति रुचि और भक्ति-भावना भी जागृत करता है।