एनसीईआरटी समाधान कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 14 आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थः महान् रिपुः
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 14 आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थः महान् रिपुः, के प्रश्न-उत्तर और हिंदी अनुवाद सत्र 2026-27 के लिए यहाँ दिए गए हैं। कक्षा 6 संस्कृत पाठ्यपुस्तक “दीपकम्” का चतुर्दश पाठः (पाठ 14) — एक अत्यंत प्रेरणादायक कथा पर आधारित है जो छात्रों को परिश्रम का महत्त्व सिखाती है। इस पाठ में एक हृष्ट-पुष्ट युवक की कहानी है जो भिक्षाटन करता है, परंतु एक बुद्धिमान धनिक के माध्यम से उसे यह अनुभव होता है कि उसके शरीर के अंग ही उसकी सबसे बड़ी सम्पत्ति हैं।
पाठ का मूल संदेश यह है कि आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है और परिश्रम ही उसका सच्चा मित्र। इस पाठ के साथ-साथ द्वितीया विभक्ति के एकवचन, द्विवचन और बहुवचन रूपों का भी विस्तृत अभ्यास कराया गया है। सत्र 2026-27 के एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के अनुसार यह पाठ परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
एनसीईआरटी कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् अध्याय 14 के प्रश्न उत्तर
वयम् अभ्यासं कुर्म:
1. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तराणि यच्छन्तु –

उत्तर:

2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि ‘आम्’ अथवा ‘न’ इति पदेन लिखन्तु –

उत्तर:

3. अधोलिखितेषु वाक्येषु द्वितीयाविभक्तेः शब्दानां द्विवचने परिवर्तनं कृत्वा वाक्यानि लिखन्तु –

उत्तर:

4. चित्रं दृष्ट्वा द्वितीयाविभक्तेः वाक्यानि रचयन्तु –

उत्तर:

5. कोष्ठके विद्यमानानां शब्दानां द्वितीयाविभक्तेः एकवचनरूपेण सह वाक्यानि लिखन्तु –

उत्तर:

6. द्वितीयाविभक्तेः एकवचनशब्दानां बहुवचने परिवर्तनं कृत्वा वाक्यानि रचयन्तु –

उत्तर:

7. अधः प्रदत्तं चित्रं दृष्ट्वा द्वितीयाविभक्तेः प्रयोगं कृत्वा दश वाक्यानि रचयन्तु –

उत्तर:

कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् पाठ 14 – अक्सर पूंछे जाने वाले प्रश्न
कक्षा 6 संस्कृत दीपकम् पाठ 14 किस विषय पर आधारित है?
यह पाठ परिश्रम और आलस्य पर आधारित एक प्रेरणादायक कथा है। इसमें बताया गया है कि आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है और परिश्रम ही सच्चा मित्र है।
कक्षा 6 दीपकम पाठ 14 का नैतिक संदेश क्या है?
इस पाठ का नैतिक संदेश है — हमें कभी भी आलसी नहीं होना चाहिए। ईश्वर ने हमें स्वस्थ शरीर और सामर्थ्य दिया है, इसलिए परिश्रम करके सम्मानपूर्वक जीवन जीना चाहिए।
कक्षा 6 संस्कृत पाठ 14 में कौन-सा व्याकरण विषय पढ़ाया गया है?
इस पाठ में द्वितीया विभक्ति (कर्म कारक) पढ़ाई गई है – एकवचन, द्विवचन और बहुवचन के साथ, सभी लिंगों और सर्वनामों में।
क्या कक्षा 6 संस्कृत पाठ 14 एनसीईआरटी 2026-27 के पाठ्यक्रम में है?
हाँ, यह पाठ एनसीईआरटी कक्षा 6 संस्कृत पाठ्यपुस्तक “दीपकम्” का भाग है और सत्र 2026-27 के लिए पूर्णतः लागू है।
“आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः” का सरल हिंदी अर्थ क्या है?
आलस्य मनुष्य के शरीर में बसा सबसे बड़ा दुश्मन है और परिश्रम जैसा कोई दोस्त नहीं — जो मेहनत करता है वह कभी दुःखी नहीं होता।
पाठ 14 कक्षा 6 संस्कृत परीक्षा की दृष्टि से कितना महत्त्वपूर्ण है?
यह पाठ परीक्षा के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसमें गद्यांश आधारित प्रश्न, श्लोक का अर्थ और द्वितीया विभक्ति के व्याकरण प्रश्न — तीनों परीक्षा में पूछे जाते हैं।
क्या कक्षा 6 संस्कृत पाठ 14 की पीडीएफ या सारांश ऑनलाइन मिलता है?
एनसीईआरटी की आधिकारिक वेबसाइट ncert.nic.in पर इस पाठ की पीडीएफ निःशुल्क उपलब्ध है। इसके अलावा कई शैक्षिक वेबसाइटों पर हिंदी अनुवाद और सारांश भी मिलता है।
कक्षा 6 संस्कृत पाठ 14 को पढ़ने से छात्रों को क्या लाभ होगा?
इस पाठ से छात्रों को संस्कृत गद्य-पठन, श्लोक कंठस्थीकरण, द्वितीया विभक्ति का व्यावहारिक ज्ञान और जीवन में परिश्रम का महत्त्व — ये सभी एक साथ सीखने को मिलते हैं।
