एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 3 संवादहीन

एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 3 संवादहीन समाधान – प्रश्न उत्तर, कठिन शब्दों के अर्थ, व्याकरण तथा सारांश – सत्र 2026-27 के लिए विद्यार्थी यहाँ से निशुल्क प्राप्त कर सकते हैं। कक्षा 9 हिंदी की पाठ्यपुस्तक गंगा का तीसरा अध्याय ‘संवादहीन’ हिंदी साहित्य के सुप्रसिद्ध कथाकार शेखर जोशी द्वारा रचित एक अत्यंत मार्मिक और संवेदनशील कहानी है। यह कहानी एक ग्रामीण वृद्ध स्त्री – ताई के अकेलेपन और उसके तोते मिट्टू के साथ उसके अनोखे भावनात्मक संबंध को बड़ी सूक्ष्मता से चित्रित करती है। मिट्टू ताई के लिए केवल एक तोता नहीं बल्कि संवाद का माध्यम और ममता का केंद्र है। यह कहानी समकालीन जीवन की विसंगतियों – पलायन, अकेलापन और आदर्श एवं यथार्थ के द्वंद्व – को भी अभिव्यक्त करती है।
यहाँ, तिवारी अकादमी, पर सत्र 2026-27 के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 3 की संपूर्ण सामग्री – लेखक परिचय, पाठ का सारांश, मुख्य पात्र, कठिन शब्दार्थ, साहित्यिक विशेषताएँ, व्याकरण और परीक्षोपयोगी प्रश्न – सरल एवं स्पष्ट हिंदी में प्रस्तुत किए गए हैं।

एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 3 समाधान

पेज 52 – रचना से संवाद

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?

1. कहानी में ताई और मिट्टू का संबंध किस भाव को दर्शाता है?

(क) परोपकार और त्याग
(ख) ममता और स्नेह
(ग) करुणा और क्रोध
(घ) जिज्ञासा और सहायता
उत्तर:
(ख) ममता और स्नेह
कहानी में ताई और मिट्ठू का संबंध माँ-बेटे जैसा गहरा भावनात्मक जुड़ाव दिखाता है। ताई का पूरा स्नेह मिट्ठू पर केंद्रित हो जाता है-

  • ताई खुद भूखी रह सकती हैं, लेकिन मिट्ठू के लिए समय पर दाल-भात और रोटी बनाती हैं।
  • मिट्ठू को वे “बेटा” कहकर आशीर्वाद देती हैं—यह सीधा मातृत्व भाव दर्शाता है।
  • जब ताई कहीं बाहर जाती हैं, तो मिट्ठू की चिंता उन्हें बार-बार पीछे खींचती है।
  • मिट्ठू भी ताई को जवाब देकर, उन्हें दिलासा देकर उनके अकेलेपन को दूर करता है।

इन सभी घटनाओं से साफ है कि यह संबंध केवल साथ रहने का नहीं, बल्कि गहरी ममता और स्नेह का है।

2. जगन मास्टर द्वारा मिट्टू को पिंजरे से बाहर निकालना किस भावना या मूल्य का संकेत देता है?

(क) अनुशासन और परंपरा
(ख) उदासीनता और असावधानी
(ग) आत्मगौरव और विद्रोह
(घ) करुणा और नैतिकता
उत्तर:
(घ) करुणा और नैतिकता
जगन मास्टर एक स्वतंत्र विचारों वाले और सिद्धांतप्रिय व्यक्ति हैं। जब वे मिट्ठू को पिंजरे में बंद देखते हैं, तो उन्हें उसकी स्थिति पर दया (करुणा) आती है।

  • उन्हें लगता है कि एक जीव को बंद रखना गलत है – यह उनकी नैतिक सोच को दर्शाता है।
  • वे मिट्ठू को थोड़ी देर के लिए ही सही, खुली हवा में आज़ादी देना चाहते हैं।
  • यह काम वे “प्रायश्चित” की भावना से करते हैं, यानी उन्हें लगता है कि पिंजरे में रखना नैतिक रूप से ठीक नहीं है।

इसलिए उनका यह व्यवहार करुणा (दया) और नैतिकता (सही-गलत की समझ) का स्पष्ट संकेत देता है।

3. मिट्टू का उड़ जाना किस विचार को प्रस्तुत करता है?

(क) भोजन की खोज
(ख) प्रेम की आकांक्षा
(ग) स्वतंत्रता की चाह
(घ) पक्षियों में सम्मान की प्रवृत्ति
उत्तर:
(ग) स्वतंत्रता की चाह
मिट्ठू लंबे समय तक पिंजरे में बंद रहा, लेकिन जैसे ही उसे अवसर मिला, वह खुले रोशनदान से बाहर उड़ गया। यह घटना साफ बताती है कि-

  • हर जीव के अंदर स्वतंत्र रहने की प्राकृतिक इच्छा होती है।
  • पिंजरे की सुविधा (खाना, सुरक्षा) के बावजूद, मिट्ठू ने आज़ादी को चुना।
  • बाहर की दुनिया देखने की जिज्ञासा और उड़ने का आनंद, उसकी स्वतंत्रता की चाह को दर्शाता है।

इसलिए मिट्ठू का उड़ जाना आज़ादी के महत्व को प्रकट करता है।

4. ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण क्या था?

(क) सम्मान और प्रतिष्ठा में कमी आना
(ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव
(ग) आर्थिक विपन्नता और निर्धनता
(घ) मिट्टू के प्रति प्रेम और संवाद
उत्तर:
(ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव
कहानी में ताई के दुख का सबसे बड़ा कारण अकेलापन और अपनों से बिछड़ना है-

  • उनके बेटे-बहू शहर चले गए और बेटियाँ अपनी-अपनी गृहस्थी में व्यस्त हो गईं।
  • बड़ा घर सूना हो गया और ताई के जीवन में बात करने वाला कोई नहीं रहा।
  • ताई के लिए असली पीड़ा “सूने घर की भाँय-भाँय” है, यानी संवाद का अभाव।
  • मिट्ठू के आने के बाद उनका अकेलापन कम हो जाता है, जिससे स्पष्ट है कि उन्हें साथ और संवाद की कमी ही सबसे ज्यादा खल रही थी।

इसलिए ताई के दुख का मुख्य कारण परिवार से दूरी और संवाद का अभाव है।

5. कहानी में मानव-समाज में व्याप्त किस विसंगति को उजागर किया गया है?

(क) मजबूरी
(ख) कर्मपरायणता
(ग) अकेलापन
(घ) संवादधर्मिता
उत्तर:
(ग) अकेलापन
कहानी “संवादहीन” का मुख्य संदेश ही यह है कि आधुनिक जीवन में लोग अपने ही अपनों से दूर होते जा रहे हैं, जिससे गहरा अकेलापन पैदा होता है।

  • ताई का परिवार होते हुए भी वे पूरी तरह अकेली रह जाती हैं।
  • बड़ा घर, संपत्ति सब होने के बावजूद बात करने वाला कोई नहीं है।
  • मिट्ठू के आने से उनका अकेलापन कम होता है—यानी समस्या का मूल कारण अकेलापन ही था।

कहानी यह भी दिखाती है कि जब संवाद खत्म होता है, तो इंसान भीतर से अकेला हो जाता है। इसलिए यह कहानी समाज में बढ़ते अकेलेपन की समस्या को उजागर करती है।

पेज 53 के प्रश्न उत्तर

मेरी समझ मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-

1. “भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” ताई इस वाक्य में किस ‘नैया’ की बात कर रही हैं? वे यह बात क्यों कह रही हैं?

उत्तर:
“भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” – इस वाक्य में ताई अपनी जीवन-नैया (जीवन की कठिन यात्रा) की बात कर रही हैं।
ताई के जीवन की परिस्थितियाँ बहुत बदल चुकी हैं-

  • पहले उनका घर परिवार, धन-संपत्ति और रौनक से भरा हुआ था।
  • अब वे पूरी तरह अकेली रह गई हैं-बेटे-बहू शहर चले गए, बेटियाँ अपने घरों में व्यस्त हैं।
  • बड़ा घर सूना हो गया है और ताई के पास कोई सहारा या साथी नहीं बचा।
  • वृद्धावस्था में उन्हें अपने भविष्य और जीवन के बचे हुए समय की चिंता सताती है।

इसलिए “नैया पार लगना” यहाँ जीवन की कठिनाइयों को पार करने का प्रतीक है।
ताई यह वाक्य इसलिए कहती हैं क्योंकि वे अपने अकेलेपन, असहायता और भविष्य की चिंता से घिरी हुई हैं।
यह वाक्य ताई के दुःख, असुरक्षा और जीवन के प्रति चिंता को व्यक्त करता है।

2. “धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।” इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत किया गया है?

उत्तर:
“धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।” — इस वाक्य में ताई के घर-परिवार, संपत्ति और पूरे कारबार के दूसरों के हाथों में चले जाने की घटना की ओर संकेत किया गया है।

  • पहले ताई का घर बहुत समृद्ध और भरा-पूरा था—परिवार, नौकर-चाकर, खेती-बाड़ी, सब कुछ था।
  • लेकिन समय के साथ-
    • बेटे-बहू शहर चले गए,
    • बेटियाँ अपनी-अपनी गृहस्थी में व्यस्त हो गईं,
    • घर संभालने वाला कोई नहीं बचा।
  • परिणामस्वरूप, खेती-बाड़ी और अन्य काम दूसरों के हवाले हो गए।

इस तरह ताई का अपना सब कुछ धीरे-धीरे उनसे दूर होकर “पराया” हो गया।

3. “ताई की सारी ममता मिट्टू पर बरस पड़ी।” क्यों?

उत्तर:
ताई की सारी ममता मिट्ठू पर इसलिए बरस पड़ी क्योंकि उनके जीवन में अपनापन और स्नेह पाने-देने वाला कोई नहीं बचा था। पहले उनका परिवार बड़ा था—बेटे, बहुएँ, बेटियाँ, सब साथ रहते थे, जिससे उनकी ममता स्वाभाविक रूप से बँटी रहती थी। लेकिन समय के साथ सभी अपने-अपने जीवन में व्यस्त होकर उनसे दूर हो गए और ताई अकेली रह गईं। इस अकेलेपन ने उनके भीतर की ममता को जैसे दबा दिया था। ऐसे में जब मिट्ठू उनके जीवन में आया, तो उन्हें एक ऐसा साथी मिल गया, जिस पर वे अपना स्नेह लुटा सकें। मिट्ठू उनकी बातों का जवाब देता था, उनसे जुड़ाव बनाता था, इसलिए ताई ने उसे बेटे की तरह अपनाकर अपनी सारी ममता उसी पर उँडेल दी।

4. “अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं।” इस वाक्य द्वारा ताई के व्यक्तित्व में आए परिवर्तनों के विषय में क्या-क्या पता चलता है?

उत्तर:
इस वाक्य से ताई के व्यक्तित्व में आए महत्वपूर्ण परिवर्तन स्पष्ट होते हैं। पहले ताई अपने लिए चूल्हा जलाने में भी आलस्य करती थीं और जीवन के प्रति कुछ उदासीन-सी हो गई थीं। लेकिन मिट्ठू के आने के बाद उनमें जिम्मेदारी, सक्रियता और लगाव बढ़ गया। अब वे उसके भोजन का विशेष ध्यान रखने लगीं, इसलिए उन्हें आसपास के खेतों और पेड़ों की जानकारी रहने लगी कि कहाँ से क्या मिल सकता है। इससे यह भी पता चलता है कि ताई अब सजग, कर्मठ और संवेदनशील हो गई हैं। मिट्ठू के प्रति प्रेम ने उनके जीवन में फिर से उत्साह और उद्देश्य भर दिया, जिससे उनका निष्क्रिय और अकेला जीवन बदलकर सक्रिय और अर्थपूर्ण हो गया।

5. “जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे।” जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था? कहानी में से उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
“जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे” से पता चलता है कि उनका व्यक्तित्व स्वतंत्र विचारों वाला, सिद्धांतवादी और संवेदनशील था। वे ऐसे व्यक्ति थे जो दूसरों की स्वतंत्रता का सम्मान करते थे और किसी को कष्ट नहीं देना चाहते थे। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि जब उन्होंने मिट्ठू को पिंजरे में बंद देखा, तो उन्हें उसकी स्थिति पर दया आई। उन्होंने इसे अनैतिक मानते हुए पिंजरे का दरवाजा खोल दिया, ताकि मिट्ठू खुली हवा में सांस ले सके। वे बार-बार उसे बाहर आने का अवसर देते थे, जिससे उनकी करुणा और नैतिकता झलकती है। साथ ही, वे अपनी पत्नी के निर्णय से असहमत होते हुए भी झगड़ा नहीं करते, जिससे उनका शांत और सहनशील स्वभाव भी स्पष्ट होता है।

6. कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है – ताई, जगन मास्टर, मिट्ठू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ सबसे अधिक ताई के लिए सार्थक प्रतीत होता है। ताई का पूरा जीवन इसी संवादहीनता की पीड़ा को दर्शाता है। पहले उनका घर परिवार से भरा हुआ था, लेकिन समय के साथ बेटे-बहू शहर चले गए और बेटियाँ अपने घरों में व्यस्त हो गईं, जिससे ताई पूरी तरह अकेली और बातचीत से वंचित रह गईं। उनका बड़ा घर सूना हो गया और वे भीतर से टूटने लगीं। मिट्ठू के आने पर उन्हें एक साथी मिला, जिससे उनका अकेलापन कुछ कम हुआ, लेकिन अंत में उसके उड़ जाने से वे फिर उसी संवादहीन स्थिति में लौट आती हैं। इसलिए ताई के जीवन में संवाद की कमी ही मुख्य समस्या है, जिससे शीर्षक सबसे अधिक उन्हीं पर लागू होता है।

7. “अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।” ताई के बड़े से घर को सूना खंडहर क्यों कहा गया होगा?

उत्तर:
ताई के बड़े घर को सूना खंडहर इसलिए कहा गया है क्योंकि वहाँ अब जीवन, रौनक और पारिवारिक गतिविधियाँ समाप्त हो चुकी थीं। पहले वही घर लोगों, रिश्तों, त्योहारों और खुशियों से भरा रहता था, लेकिन समय के साथ सब बिखर गया। बेटे-बहू शहर चले गए, बेटियाँ अपने घरों में व्यस्त हो गईं और नौकर-चाकर भी चले गए। परिणामस्वरूप इतना बड़ा घर होते हुए भी वहाँ कोई रहने वाला या बातचीत करने वाला नहीं बचा। दीवारें तो खड़ी हैं, पर उनमें पहले जैसी जीवंतता नहीं रही। इसीलिए वह घर बाहर से बड़ा और मजबूत होते हुए भी अंदर से उजड़ा हुआ, निर्जीव और वीरान लगने लगा, जिसे ‘सूना खंडहर’ कहा गया है।

पेज 53 – मेरे प्रश्न

नीचे कुछ उत्तर और उनके दो-दो प्रश्न दिए गए हैं। पहचानिए कि इनमें से कौन-सा प्रश्न उस उत्तर के लिए उपयुक्त है?

1. उत्तर : ताई के अकेलेपन को मिट्टू ने सहारा दिया।
प्रश्न क : ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?
प्रश्न ख : ताई को मिट्टू किसने भेंट में दिया था?
उत्तर:
क : ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?

2. उत्तर : ताई के लौटने से पहले मिट्टू उड़ गया था।
प्रश्न क : ताई के लौटने के बाद मिट्टू कहाँ चला गया था?
प्रश्न ख : ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?
उत्तर:
ख : ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?

3. उत्तर : गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा।
प्रश्न क : गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?
प्रश्न ख : गाँववाले मिट्टू के उड़ने से खुश क्यों थे?
उत्तर:
क : गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?

4. उत्तर : कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ जीवन के मौन का प्रतीक है।
प्रश्न क : कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ क्यों उपयुक्त नहीं है?
प्रश्न ख : शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है?
उत्तर:
ख : शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है?

पेज 54 के प्रश्न उत्तर

मेरे अनुभव मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने अनुभवों के आधार पर दीजिए-

1. “कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए भी न्यौते-बुलावे में जातीं, तो दस बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं…” ताई की तरह जब आप अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी वस्तु या व्यक्ति की चिंता आपको भीतर से कैसे परेशान करती है?

उत्तर:
जब हम अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी प्रिय व्यक्ति या वस्तु की चिंता मन में बार-बार उठती रहती है। जैसे ताई को मिट्ठू की चिंता रहती थी, उसी तरह मुझे भी अपने घरवालों या किसी खास चीज़ की याद सताती है। मन में सवाल आते रहते हैं — सब ठीक होगा या नहीं, किसी को मेरी जरूरत तो नहीं होगी या मेरी चीज़ सुरक्षित है या नहीं। यह चिंता कभी-कभी ध्यान भटका देती है और हम पूरी तरह किसी काम में मन नहीं लगा पाते।

ऐसी स्थिति में बार-बार फोन करने या जल्दी वापस लौटने की इच्छा होती है। इससे पता चलता है कि हमारा जुड़ाव कितना गहरा है और हम अपने लोगों या चीज़ों के प्रति कितने जिम्मेदार और भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं।

2. “आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है।” क्या आप मानते हैं कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं? अपने किसी अनुभव का वर्णन करते हुए लिखिए।

उत्तर:
हाँ, मैं मानता हूँ कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं। वे भी खुशी, दुख, डर और लगाव महसूस करते हैं। मेरे अनुभव में, हमारे घर के पास एक कुत्ता रहता था। जब भी मैं स्कूल से लौटता, वह मुझे देखकर पूँछ हिलाने लगता और मेरे पास आकर बैठ जाता। अगर मैं उसे कुछ दिन न दिखूँ, तो वह उदास-सा दिखता और मुझे देखते ही ज्यादा उत्साहित हो जाता था।

एक बार वह बीमार हो गया, तो वह चुपचाप एक कोने में बैठा रहा और खाना भी कम खाने लगा। इससे साफ लगा कि उसे भी दर्द और परेशानी का एहसास होता है। इस अनुभव से मुझे विश्वास हो गया कि पशु-पक्षियों में भी भावनाएँ और संवेदनाएँ होती हैं।

3. “गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्टू की ही सूरत-शकल का एक दूसरा तोता ले आया जाए ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके…” ताई को भ्रम में रखना उचित था या नहीं? तर्क सहित अपने विचार लिखिए।

उत्तर:
मेरे विचार से ताई को भ्रम में रखना पूरी तरह उचित नहीं था, लेकिन उस समय की परिस्थिति को देखकर यह निर्णय कुछ हद तक समझ में आता है। गनपत और अन्य लोग जानते थे कि ताई मिट्ठू से बहुत अधिक जुड़ी हुई हैं और उसके उड़ जाने का सच उन्हें गहरा आघात पहुँचा सकता है। इसलिए उन्होंने उन्हें दुख से बचाने के लिए ऐसा उपाय सोचा।

परंतु किसी को लंबे समय तक भ्रम में रखना सही नहीं माना जा सकता, क्योंकि सत्य छिपाने से विश्वास टूट सकता है। बेहतर होता कि ताई को धीरे-धीरे सच बताया जाता और उन्हें मानसिक रूप से संभाला जाता। इसलिए यह निर्णय संवेदनात्मक रूप से सही, लेकिन नैतिक रूप से पूरी तरह उचित नहीं कहा जा सकता है।

4. “ताई सोच रही थीं कि उन्हें देखते ही मिट्टू ‘राम राम सीताराम’ की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा।” क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने सोचा कुछ और, हुआ कुछ और? उस अनुभव को लिखिए।

उत्तर:
हाँ, मेरे साथ भी कई बार ऐसा हुआ है कि मैंने कुछ सोचा और हुआ कुछ और। एक बार मैंने स्कूल की परीक्षा के लिए बहुत अच्छी तैयारी की थी और मुझे पूरा विश्वास था कि मेरे बहुत अच्छे अंक आएँगे। मैंने पहले से ही सोच लिया था कि मैं कक्षा में सबसे आगे रहूँगा।

लेकिन जब परिणाम आया, तो मेरे अंक मेरी उम्मीद से कम थे। उस समय मुझे बहुत निराशा हुई, क्योंकि जो मैंने सोचा था, वैसा नहीं हुआ। बाद में मुझे समझ आया कि केवल उम्मीद करना ही काफी नहीं, बल्कि और मेहनत और सही तैयारी की जरूरत होती है।

इस अनुभव से मैंने सीखा कि जीवन में हमेशा वैसा नहीं होता जैसा हम सोचते हैं, इसलिए हमें हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।

5. “मिट्टू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की।” क्या प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में अपने आस-पास से उदाहरण भी दीजिए।

उत्तर:
हाँ, प्राणी सचमुच पिंजरे या सीमित वातावरण में रहने के आदी हो सकते हैं। जब किसी जीव को लंबे समय तक एक ही जगह पर रखा जाता है, तो वह उसी को अपना सुरक्षित संसार मानने लगता है और बाहर जाने से डरता है।

मेरे आसपास एक पालतू पक्षी था, जो कई वर्षों तक पिंजरे में रहा। एक बार उसका पिंजरा खुला रह गया, फिर भी वह बाहर नहीं निकला, बल्कि अंदर ही बैठा रहा। उसे खुली उड़ान की आदत नहीं रही थी।

इसी तरह कुछ पालतू जानवर भी घर के बाहर जाने से घबराते हैं। इससे पता चलता है कि आदत और वातावरण किसी भी प्राणी के व्यवहार को बदल सकते हैं, और वे सीमित जीवन को भी अपना सकते हैं।