एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 9 विलेयों, विलायकों और विलयनों का अद्भुत संसार
कक्षा 8 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 9 विलेयों, विलायकों और विलयनों का अद्भुत संसार एनसीईआरटी समाधान में हम “विलेय, विलायक और विलयन” की महत्वपूर्ण अवधारणाओं को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझते हैं। इस अध्याय में बताया गया है कि विभिन्न पदार्थ किस प्रकार घुलते हैं, घुलनशीलता किन-किन कारकों पर निर्भर करती है और तापमान का इस पर क्या प्रभाव पड़ता है। साथ ही, घनत्व, तैरना-डूबना तथा द्रव्यमान और आयतन मापन जैसे विषयों को दैनिक जीवन से जोड़कर समझाया गया है। यह अध्याय न केवल परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि विज्ञान के मूल सिद्धांतों को समझने के लिए भी आधार तैयार करता है।
एनसीईआरटी कक्षा 8 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 9 के प्रश्न उत्तर
1. बताइए कि नीचे दिए गए कथन सत्य हैं अथवा असत्य। असत्य कथन को सत्य बनाइए।
(क) ऑक्सीजन गैस ठंडे पानी की अपेक्षा गरम पानी में अधिक घुलनशील होती है।
(ख) रेत और पानी का मिश्रण एक विलयन है।
(ग) किसी वस्तु द्वारा घेरे गए स्थान को उसका द्रव्यमान कहते हैं।
(घ) असंतृप्त विलयन में संतृप्त विलयन की अपेक्षा अधिक विलेय घुला हुआ होता है।
(ङ) वायुमंडल में उपस्थित विभिन्न गैसें भी एक समरूपी मिश्रण है।
उत्तर:
(क) असत्य
ऑक्सीजन गैस गरम पानी की अपेक्षा ठंडे पानी में अधिक घुलनशील होती है। गैसों की विलेयता तापमान बढ़ने के साथ घटती है।
(ख) असत्य
रेत और पानी का मिश्रण एक विलयन नहीं है। यह एक विषमरूप मिश्रण है क्योंकि रेत पानी में समान रूप से नहीं घुलती और दोनों घटक अलग-अलग दिखाई देते हैं।
(ग) असत्य
किसी वस्तु द्वारा घेरे गए स्थान को उसका आयतन कहते हैं। किसी वस्तु में उपस्थित पदार्थ की मात्रा को उसका द्रव्यमान कहते हैं।
(घ) असत्य
संतृप्त विलयन में असंतृप्त विलयन की अपेक्षा अधिक विलेय घुला हुआ होता है। संतृप्त विलयन वह होता है जिसमें किसी निश्चित तापमान पर विलेय की अधिकतम मात्रा घुली हो।
(ङ) सत्य
वायु में नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड आदि गैसें समान रूप से वितरित होती हैं इसलिए वायु एक समरूपी मिश्रण है।
2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए —
(क) किसी ठोस का आयतन विस्थापन विधि द्वारा मापा जा सकता है जहाँ ठोस को जल में _________ जाता है और जल स्तर की _________ मापी जाती है।
(ख) किसी विशिष्ट तापमान पर _________ में घुली _________ की अधिकतम मात्रा उस तापमान पर उसकी विलेयता कहलाती है।
(ग) प्राय: तापमान में वृद्धि से घनत्व _________ है।
(घ) वह विलयन जिसमें ग्लूकोस जल में पूर्णतः घुल गया हो तथा दिए गए तापमान पर और अधिक ग्लूकोस नहीं घुल सकता, ग्लूकोस का __________ विलयन कहलाता है।
उत्तर:
(क) डुबाया / वृद्धि
(ख) विलायक / विलेय
(ग) घटता
(घ) संतृप्त
3. आप जल से भरे गिलास में तेल डालते हैं। तेल ऊपर तैरने लगता है। इससे आपको क्या ज्ञात होता है?
(क) तेल जल से अधिक सघन होता है।
(ख) जल तेल से अधिक सघन होता है।
(ग) तेल और जल का घनत्व समान होता है।
(घ) तेल जल में घुल जाता है।
उत्तर:
(ख) जल तेल से अधिक सघन होता है।
4. किसी पत्थर की मूर्ति का वजन 225 g है और इसका आयतन 90 cm³ है। इसके घनत्व का परिकलन कीजिए और पूर्वानुमान लगाइए कि यह मूर्ति जल में तैरेगी अथवा डूबेगी।
उत्तर:
घनत्व की गणना :
घनत्व = द्रव्यमान / आयतन
घनत्व = 225 g / 90 cm³
घनत्व = 2.5 g/cm³
पूर्वानुमान : जल का घनत्व लगभग 1 g/cm³ होता है। मूर्ति का घनत्व 2.5 g/cm³ है जो जल के घनत्व से बहुत अधिक है। इसलिए यह मूर्ति जल में डूब जाएगी।
5. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त है? अन्य कथन उपयुक्त क्यों नहीं हैं?
(क) एक संतृप्त विलयन किसी निश्चित तापमान पर और अधिक विलेय घोल सकता है।
(ख) किसी दिए गए तापमान पर एक असंतृप्त विलयन में विलेय की अधिकतम संभव मात्रा घुल गई है।
(ग) एक निश्चित तापमान पर संतृप्त विलयन में और अधिक विलेय नहीं घुल सकता है।
(घ) एक संतृप्त विलयन केवल उच्च तापमान पर बनता है।
उत्तर:
(ग) एक निश्चित तापमान पर संतृप्त विलयन में और अधिक विलेय नहीं घुल सकता है। यह सही और सर्वाधिक उपयुक्त कथन है।
बाकी कथन गलत क्यों हैं, इसका कारण यहाँ दिया गया है:
(क) यह गलत है क्योंकि संतृप्त विलयन में पहले से अधिकतम मात्रा में विलेय घुला होता है। उसी तापमान पर और अधिक विलेय नहीं घुल सकता।
(ख) यह गलत है क्योंकि असंतृप्त विलयन में विलेय की अधिकतम मात्रा नहीं घुली होती। उसमें और अधिक विलेय घोला जा सकता है।
(घ) यह गलत है क्योंकि संतृप्त विलयन किसी भी तापमान पर बनाया जा सकता है। तापमान केवल विलेयता को प्रभावित करता है।
6. आपके पास 2 लीटर आयतन की एक बोतल है। आप इसमें 500 mL जल भरते हैं। बोतल में और कितना जल भरा जा सकता है?
उत्तर:
बोतल की कुल क्षमता = 2 लीटर = 2000 mL
पहले से भरा जल = 500 mL
और भरा जा सकने वाला जल = 2000 – 500 = 1500 mL
बोतल में और 1500 mL जल भरा जा सकता है।
7. किसी वस्तु का द्रव्यमान 400 g और आयतन 40 cm³ है। इसका घनत्व क्या है?
उत्तर:
घनत्व = द्रव्यमान / आयतन
घनत्व = 400 g / 40 cm³
घनत्व = 10 g/cm³
चूँकि इस वस्तु का घनत्व 10 g/cm³ है जो जल के घनत्व (1 g/cm³) से बहुत अधिक है इसलिए यह वस्तु जल में डूब जाएगी।
8. चित्र 9.25 (क) और 9.25 (ख) का विश्लेषण कीजिए। बिना छिला हुआ संतरा जल में क्यों तैरता है एवं छिला हुआ संतरा जल में क्यों डूब जाता है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
बिना छिले संतरे का तैरना : संतरे का छिलका छिद्रयुक्त होता है जिसमें बहुत सी वायु भरी होती है। इस वायु के कारण पूरे संतरे (छिलके सहित) का औसत घनत्व जल के घनत्व (1 g/cm³) से कम हो जाता है। इसलिए बिना छिला संतरा जल पर तैरता है।
छिले हुए संतरे का डूबना : छिलका हटाने पर वायु से भरी छिद्रयुक्त परत निकल जाती है। अब केवल संतरे का गूदा बचता है जिसका घनत्व जल के घनत्व से अधिक होता है। इसलिए छिला हुआ संतरा जल में डूब जाता है।
9. किसी वस्तु ‘क’ का द्रव्यमान 200 g और आयतन 40 cm³ है। वस्तु ‘ख’ का द्रव्यमान 240 g और आयतन 60 cm³ है। किस वस्तु का घनत्व अधिक है?
उत्तर:
वस्तु ‘क’ का घनत्व : घनत्व = 200 g / 40 cm³ = 5 g/cm³
वस्तु ‘ख’ का घनत्व : घनत्व = 240 g / 60 cm³ = 4 g/cm³
निष्कर्ष : वस्तु ‘क’ का घनत्व (5 g/cm³) वस्तु ‘ख’ के घनत्व (4 g/cm³) से अधिक है। अतः वस्तु ‘क’ अधिक सघन है।
10. रीमा के पास प्रतिरूपण मृदा (मॉडलिंग क्ले) का एक टुकड़ा है जिसका वजन 120 g है। वह पहले इसे एक ठोस घन के रूप में ढालती है जिसका आयतन 60 cm³ है। इसके पश्चात वह इसे एक पतले पत्रक के रूप में समतल करती है। अनुमान लगाइए कि इसके घनत्व पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
घन का घनत्व : घनत्व = 120 g / 60 cm³ = 2 g/cm³
पतले पत्रक का घनत्व : जब मृदा को पतले पत्रक के रूप में समतल किया जाता है तो उसका द्रव्यमान नहीं बदलता (120 g ही रहता है) और आयतन भी नहीं बदलता (केवल आकार बदलता है)।
इसलिए घनत्व = द्रव्यमान/आयतन का मान वही रहेगा।
निष्कर्ष : घनत्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। घनत्व 2 g/cm³ ही रहेगा क्योंकि घनत्व आकार पर नहीं बल्कि द्रव्यमान और आयतन पर निर्भर करता है।
11. लोहे के एक ब्लॉक का द्रव्यमान 600 g और घनत्व 7.9 g/cm³ है। इसका आयतन क्या होगा?
उत्तर:
घनत्व = द्रव्यमान / आयतन
7.9 g/cm³ = 600 g / आयतन
आयतन = 600 g / 7.9 g/cm³
आयतन = लगभग 75.95 cm³ ≈ 76 cm³
12. चित्र 9.26 में परखनली को गरम जल (~70°C) से भरे बीकर में रखने पर काँच की नली में जल के स्तर में वृद्धि हो जाती है। यह घनत्व को किस प्रकार प्रभावित करता है?
उत्तर:
जब परखनली को गरम जल से भरे बीकर में रखा जाता है तो परखनली में उपस्थित जल गरम हो जाता है। गरम होने पर जल के कण एक-दूसरे से दूर जाने लगते हैं जिससे जल का आयतन बढ़ जाता है। इसीलिए काँच की नली में जल का स्तर ऊपर उठ जाता है।
जल का द्रव्यमान वही रहता है लेकिन आयतन बढ़ जाता है। चूँकि घनत्व = द्रव्यमान/आयतन होता है और आयतन बढ़ने पर घनत्व का मान घट जाता है।
कक्षा 8 विज्ञान अध्याय 9 में क्या पढ़ना है?
इस अध्याय में सबसे पहले यह समझना है कि समरूप मिश्रण क्या होता है और उसे विलयन क्यों कहा जाता है। नमक या चीनी जब जल में पूरी तरह मिल जाते हैं, तो विलेय, विलायक और विलयन की मूल अवधारणा बनती है। वहीं रेत, चॉक पाउडर या बुरादा जल में समान रूप से नहीं मिलते, इसलिए वे विषमरूप मिश्रण के उदाहरण हैं। अध्याय की शुरुआत भी इन्हीं रोज़मर्रा के प्रश्नों से होती है—जैसे चीनी जल में क्यों घुलती है, तेल क्यों नहीं, और चाय में अधिक चीनी डालने पर वह घुलना क्यों बंद कर देती है।
इसके बाद आपको पढ़ना है कि एक निश्चित मात्रा का विलायक कितनी मात्रा में विलेय घोल सकता है। यही भाग आगे चलकर असंतृप्त विलयन, संतृप्त विलयन, सांद्रता, तनु विलयन और सांद्र विलयन जैसी महत्वपूर्ण संकल्पनाओं को समझाता है। पुस्तक में नमक और जल के उदाहरण से स्पष्ट किया गया है कि एक सीमा के बाद विलेय घुलना बंद कर देता है।
अध्याय का अगला महत्वपूर्ण भाग है तापमान का विलेयता पर प्रभाव। पुस्तक के प्रयोग में दिखाया गया है कि गर्म जल में अधिक बेकिंग सोडा घुलता है, अर्थात सामान्यतः तापमान बढ़ने पर ठोस पदार्थों की घुलनशीलता बढ़ती है। लेकिन गैसों के मामले में उल्टा होता है—जल का तापमान बढ़ने पर गैसों की विलेयता घटती है, इसलिए ठंडे जल में अधिक ऑक्सीजन घुली रहती है और जलीय जीवन के लिए सहायक होती है।
अध्याय का दूसरा बड़ा हिस्सा घनत्व पर आधारित है। इसमें बताया गया है कि किसी पदार्थ के इकाई आयतन में उपस्थित द्रव्यमान को घनत्व कहते हैं और इसका सूत्र है: घनत्व = द्रव्यमान/आयतन। इसी के आधार पर समझाया गया है कि कौन-सी वस्तु जल में तैरेगी और कौन-सी डूबेगी।
इस अध्याय को कैसे पढ़ें ताकि जल्दी समझ आए?
इस अध्याय को रटकर नहीं, बल्कि उदाहरणों से जोड़कर पढ़ना चाहिए।
- सबसे पहले घर के उदाहरण लें—चीनी वाला पानी, नमक वाला पानी, तेल और पानी, चॉक पाउडर और पानी। इससे आपको समरूप मिश्रण और विषमरूप मिश्रण तुरंत समझ आ जाएंगे। फिर “विलेय + विलायक = विलयन” वाला संबंध याद करें।
- दूसरे चरण में अध्याय के प्रयोगों पर ध्यान दें। नमक को जल में बार-बार डालने वाला प्रयोग आपको संतृप्त और असंतृप्त विलयन समझाता है। बेकिंग सोडा और गर्म जल वाला प्रयोग बताता है कि तापमान बदलने पर विलेयता भी बदलती है। ऐसे प्रयोगों को केवल पढ़ें नहीं, बल्कि मन में उनका दृश्य बनाइए। इससे उत्तर लिखते समय भाषा स्वतः बनती है।
- तीसरे चरण में घनत्व को सूत्र के साथ पढ़ें, लेकिन केवल सूत्र याद न करें। “भीड़ भरी बस = अधिक घनत्व” और “कम लोगों वाली बस = कम घनत्व” जैसे उदाहरण पुस्तक में दिए गए हैं। ऐसे उदाहरणों से यह विषय बहुत सरल हो जाता है।
- चौथे चरण में मापन वाले भाग को ध्यान से पढ़ें—द्रव्यमान कैसे मापते हैं, आयतन कैसे मापते हैं, मापक सिलिंडर कैसे पढ़ते हैं, नवचंद्रक क्या होता है और नियमित व अनियमित आकार की वस्तुओं का आयतन कैसे ज्ञात करते हैं। यही भाग परीक्षा में अक्सर प्रक्रिया-आधारित प्रश्न देता है।
जिज्ञासा अध्याय 9 के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु कौन-से हैं?
सबसे पहले ये परिभाषाएँ पक्की होनी चाहिए:
- विलेय — जो घुलता है
- विलायक — जिसमें घुलता है
- विलयन — विलेय और विलायक से बना समरूप मिश्रण
इसके बाद ये बिंदु बहुत महत्वपूर्ण हैं:
- समरूप मिश्रण और विषमरूप मिश्रण में अंतर
- संतृप्त विलयन और असंतृप्त विलयन
- सांद्रता, तनु विलयन और सांद्र विलयन
- घुलनशीलता/विलेयता की परिभाषा
- तापमान बढ़ने पर ठोसों की विलेयता सामान्यतः बढ़ती है
- तापमान बढ़ने पर गैसों की विलेयता सामान्यतः घटती है
घनत्व वाले भाग से ये बिंदु अवश्य तैयार करें:
- घनत्व = द्रव्यमान / आयतन
- घनत्व का संबंध तैरने और डूबने से
- घनत्व आकार पर नहीं, बल्कि पदार्थ के गुण पर निर्भर करता है
- तापमान और दाब घनत्व को प्रभावित कर सकते हैं, विशेषकर गैसों में दाब का प्रभाव अधिक होता है।
मापन वाले भाग से ये बिंदु भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
- डिजिटल तुला से द्रव्यमान मापन
- मापक सिलिंडर से आयतन मापन
- नवचंद्रक पढ़ने का सही तरीका
- नियमित आकार का आयतन = l × w × h
- अनियमित आकार का आयतन = विस्थापित जल का आयतन
परीक्षा की दृष्टि से किन बातों पर विशेष फोकस करें?
परीक्षा में इस अध्याय से अधिकतर प्रश्न परिभाषा, अंतर, कारण और प्रयोग-आधारित आते हैं। इसलिए सबसे पहले छोटे-छोटे उत्तरों की तैयारी करें, जैसे—
- विलयन क्या है?
- विलेय और विलायक में अंतर लिखिए।
- संतृप्त विलयन क्या है?
- ठंडे जल में जलीय जीवों के लिए अधिक ऑक्सीजन क्यों उपलब्ध रहती है?
- कुछ वस्तुएँ जल में तैरती और कुछ डूबती क्यों हैं?
लंबे उत्तरों के लिए इन विषयों पर विशेष तैयारी करें:
- तापमान का विलेयता पर प्रभाव
- गैसों की विलेयता
- घनत्व की परिभाषा, सूत्र और उपयोग
- द्रव्यमान तथा आयतन मापन की विधि
- अनियमित आकार की वस्तु का आयतन मापक सिलिंडर द्वारा ज्ञात करना
कक्षा 8 जिज्ञासा अध्याय 9 को याद रखने की सबसे अच्छी ट्रिक क्या है?
इस अध्याय को 3 हिस्सों में बाँटकर याद करें:
पहला भाग: घुलना
- विलेय
- विलायक
- विलयन
- समरूप/विषमरूप मिश्रण
- संतृप्त/असंतृप्त विलयन
दूसरा भाग: तापमान और विलेयता
- ठोसों की विलेयता सामान्यतः तापमान बढ़ने पर बढ़ती है
- गैसों की विलेयता तापमान बढ़ने पर घटती है
तीसरा भाग: घनत्व और मापन
- घनत्व = द्रव्यमान/आयतन
- तैरना/डूबना
- द्रव्यमान मापन
- आयतन मापन
- नियमित और अनियमित ठोस का आयतन
घुलना → घुलनशीलता → गैसें → घनत्व → मापन
यदि आप इसी क्रम में अध्याय दोहराएँगे, तो पूरा पाठ व्यवस्थित रूप से याद रहेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
कक्षा 8 विज्ञान अध्याय 9 को सबसे आसान तरीके से कैसे समझें?
इस अध्याय को दैनिक जीवन के उदाहरणों (जैसे नमक-पानी, तेल-पानी) और सरल प्रयोगों के माध्यम से समझना सबसे आसान तरीका है। इसे तीन भागों, विलयन, घुलनशीलता और घनत्व, में बाँटकर पढ़ने से समझ और याद दोनों बेहतर होती है।
इस अध्याय को पढ़ते समय सबसे पहले क्या समझना चाहिए?
सबसे पहले “विलयन” की मूल अवधारणा समझनी चाहिए—
- विलेय
- विलायक
- विलयन का संबंध।
यदि यह आधार स्पष्ट हो जाए, तो आगे के विषय जैसे घुलनशीलता, संतृप्त विलयन और घनत्व आसानी से समझ में आते हैं।
आठवीं कक्षा में विज्ञान जिज्ञासा के पाठ 9 को आसान तरीके से कैसे पढ़ें?
इस अध्याय को तीन भागों में बाँटकर पढ़ें:
- विलयन और घुलनशीलता
- तापमान का प्रभाव
- घनत्व और मापन
इस क्रम में पढ़ने से विषय व्यवस्थित रूप से समझ में आता है।
परीक्षा के लिए जिज्ञासा अध्याय 9 में सबसे महत्वपूर्ण क्या है?
परिभाषाएँ (विलेय, विलायक), संतृप्त और असंतृप्त विलयन, घनत्व का सूत्र तथा तैरना-डूबना से जुड़े कारणात्मक प्रश्न सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।
क्या इस अध्याय को रटना सही है या समझना?
यह अध्याय पूरी तरह अवधारणात्मक (concept-based) है, इसलिए इसे रटने की बजाय उदाहरणों और प्रयोगों के माध्यम से समझना चाहिए।
कक्षा 8 विज्ञान जिज्ञासा के अध्याय 9 से किस प्रकार के प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं?
- कुछ पदार्थ पानी में क्यों नहीं घुलते?
- गर्म पानी में अधिक पदार्थ क्यों घुलते हैं?
- ठंडे पानी में गैसें अधिक क्यों घुलती हैं?
- कौन-सी वस्तु तैरेगी और क्यों?
कक्षा में जिज्ञासा पाठ 9 को कैसे रोचक बनाया जा सकता है?
- छोटे-छोटे प्रयोग करवाकर
- दैनिक जीवन के उदाहरण जोड़कर
- चित्र और आरेख का उपयोग करके
इस अध्याय को अन्य विषयों से कैसे जोड़ा जा सकता है?
इसमें गणित (मापन), भौतिकी (घनत्व) और रसायन विज्ञान (घुलनशीलता) का समन्वय है, जिससे समग्र (holistic) शिक्षण संभव होता है।
आठवीं के बच्चों को यह जिज्ञासा अध्याय 9 कठिन क्यों लगता है?
क्योंकि बच्चे इसे रटने की कोशिश करते हैं, जबकि यह अध्याय समझ और प्रयोगों पर आधारित है।
कक्षा 8 के विद्यार्थी के लिए घर पर जिज्ञासा पाठ 9 को कैसे आसान बनाया जा सकता है?
- पानी में चीनी या नमक घोलकर दिखाएँ
- तेल और पानी का अंतर समझाएँ
- बच्चे से तैरने-डूबने का अनुमान लगाने को कहें
क्या एनसीईआरटी जिज्ञासा के अध्याय 9 में प्रयोग करना जरूरी है?
हाँ, यह अध्याय प्रयोगों के माध्यम से ही अच्छी तरह समझ में आता है। देखने और करने से बच्चे जल्दी सीखते हैं।
क्या कक्षा 8 जिज्ञासा का अध्याय 9 आगे की पढ़ाई में उपयोगी है?
हाँ, यह अध्याय आगे चलकर भौतिकी और रसायन विज्ञान के जटिल विषयों की नींव तैयार करता है।
