एनसीईआरटी समाधान कक्षा 10 गणित प्रश्नावली 6.5

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 10 गणित अध्याय 6 प्रश्नावली 6.5 त्रिभुज के हल हिंदी में सीबीएसई और राजकीय बोर्ड के लिए सत्र 2022-2023 के अनुसार यहाँ से प्राप्त किए जा सकते हैं। 10वीं गणित के अभ्यास 6.5 के हल यहाँ हिंदी और अंग्रेजी मीडियम में दिए गए हैं। ये सभी समाधान पीडीएफ और विडियो के रूप में निशुल्क प्राप्त किए जा सकते हैं।

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 10 गणित अध्याय 6 प्रश्नावली 6.5

पाइथागोरस प्रमेय

त्रिभुजों की समरूपता की अवधारणा का प्रयोग करके सिद्ध करेंगे। इसे सिद्ध करने के लिए हम एक समकोण त्रिभुज के कर्ण पर सम्मुख शीर्ष से डाले गए लंब के दोनों ओर बने समरूप त्रिभुजों से संबंधित एक परिणाम का प्रयोग करेंगे।

अब, आइए एक समकोण त्रिभुज ।ठब् लें जिसका कोण ठ समकोण है। मान लीजिए ठक् कर्ण ।ब् पर लंब है
त्रिभुज ADB और त्रिभुज ABC में
∠A = ∠A
और ∠ADB = ∠ABC
अतः ∆ADB ~ ∆ABC (1)
इसी प्रकार ∆BDC ~ ∆ABC (2)
अतः, (1) और (2) के अनुसार, लम्ब BD के दोनों ओर के त्रिभुज संपूर्ण त्रिभुज ABC के समरूप हैं।
साथ ही क्योंकि ∆ ADB ~ ∆ABC है
और ∆BDC ~ ∆ABC है
इसलिए ∆ADB ~ ∆BDC

प्रमेय 6.7

यदि किसी समकोण त्रिभुज के समकोण वाले शीर्ष से कर्ण पर लंब डाला जाए तो इस लंब के दोनों ओर बने त्रिभुज संपूर्ण त्रिभुज के समरूप होते हैं तथा परस्पर भी समरूप होते हैं।

पाइथागोरस प्रमेय को सिद्ध करने के लिए उपरोक्त प्रमेय का प्रयोग करें।

प्रमेय 6.8: एक समकोण त्रिभुज में कर्ण का वर्ग शेष दो भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर होता है।

उपपत्ति
हमें एक समकोण त्रिभुज ABC दिया है जिसका ∠B समकोण है।
हमें सिद्ध करना है कि AC² = AB² + BC²
BD ⊥ AC
अब ∆ADB ~ ∆ABC (प्रमेय 6.7)
अतः AD/AB = AB/AC (भुजाएं समानुपाती हैं)
या AD × AC = AB² (1)
अब ∆BDC ~ ∆ABC (प्रमेय 6.7)
अतः CD/BC = BC/AC (भुजाएं समानुपाती हैं)
या CD × AC = BC² (2)
एक और दो को जोड़ने पर
(AD × AC) + (CD × AC) = AB² + BC²
AC (AD + CD) = AB² + BC²
AC² = AB² + BC² (क्योंकि AD + CD = AC)

उपरोक्त प्रमेय को पहले एक प्राचीन भारतीय गणितज्ञ बौधायन (लगभग 800 ई०पू०) ने निम्नलिखित रूप में दिया थाः
एक आयत का विकर्ण स्वयं से उतना ही क्षेत्रफल निर्मित करता है, जितना उसकी दोनों भुजाओं (अर्थात् लंबाई और चौड़ाई) से मिल कर बनता है। इसका अर्थ हैः
किसी आयत के विकर्ण से बने वर्ग का क्षेत्रफल इसकी दोनों आसन्न भुजाओं पर बने वर्गों के योग के बराबर होता है।
इसी कारण, इस प्रमेय को कभी-कभी बौधायन प्रमेय भी कहा जाता है।

स्मरणीय तथ्य

यदि एक त्रिभुज में, किसी एक भुजा का वर्ग अन्य दो भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर हो, तो पहली भुजा का सम्मुख कोण समकोण होता है।

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