एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 गणित प्रकाश भाग 2 अध्याय 4 कुछ ज्यामितीय संरचनाओं की खोज
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 गणित प्रकाश भाग 2 अध्याय 4 कुछ ज्यामितीय संरचनाओं की खोज – पाठ के सभी प्रशों के हल सत्र 2026-27 के लिए यहाँ से निशुल्क प्राप्त करें। कक्षा 8 गणित प्रकाश भाग 2 अध्याय 4 के समाधान में गणना कम और चित्र अधिक हैं, इसलिए हर चित्र के नीचे एक-दो पंक्तियों में उसका कारण भी लिखा गया है।
एनसीईआरटी कक्षा 8 गणित प्रकाश भाग 2 अध्याय 4 समाधान
कक्षा 8 गणित प्रकाश अध्याय 4 की पहली संरचना खंडक (फ्रैक्टल) है; ऐसे स्व-समरूप आकार फर्न की पत्ती से लेकर खजुराहो के कंदरिया महादेव मंदिर तक दिखते हैं। सिएरपिंस्की चटाई, सिएरपिंस्की त्रिभुज और कोच हिमकण के हर चरण में छिद्र, त्रिभुज और भुजाएँ गिनकर प्रतिरूप ढूँढना होता है। दूसरी संरचना ठोसों का दृश्यांकन है: घन के 11 जाल, घनाभ पर चींटी से लड्डू तक का सबसे छोटा मार्ग, अग्र, ऊर्ध्व व पार्श्व दृश्य और समदूरीक जाल पर चित्र बनाना।
कक्षा 8 गणित प्रकाश भाग 2 के पेज 72 पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
पेज 72 – आइए, पता लगाएँ
1. सिएरपिंस्की त्रिभुज तक ले जाने वाले आकृति अनुक्रम के प्रारंभिक कुछ चरणों (कम-से-कम चरण 2 तक) को चित्रित कीजिए।
उत्तर:
- चरण 0 में एक समबाहु त्रिभुज बनाएँगे।
- चरण 1 में उसकी भुजाओं के मध्य बिंदुओं को मिलाकर चार बराबर समबाहु त्रिभुज बनाएँगे और बीच वाला त्रिभुज हटा देंगे।
- चरण 2 में बचे हुए प्रत्येक त्रिभुज पर यही प्रक्रिया दोहराएँगे।
चित्र में 0, 1 और 2 चरणों को दर्शाते हैं। खाली त्रिभुजीय भाग हटाए गए हैं।

2. सिएरपिंस्की त्रिभुज तक जाने वाले आकृति अनुक्रम के प्रत्येक चरण में शेष छिद्रों तथा त्रिभुजों की संख्या ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
माना nवें चरण में बचे छोटे त्रिभुजों की संख्या Rₙ और कुल छिद्रों की संख्या Hₙ है।
प्रत्येक बचे हुए त्रिभुज से अगले चरण में 3 छोटे त्रिभुज बचते हैं।
इसलिए R₀ = 1 और Rₙ₊₁ = 3Rₙ।
अतः nवें चरण में बचे त्रिभुजों की संख्या Rₙ = 3ⁿ है।
प्रत्येक बचे हुए त्रिभुज में अगले चरण पर 1 नया छिद्र बनता है। पुराने छिद्र भी बने रहते हैं।
इसलिए H₀ = 0 और Hₙ₊₁ = Hₙ + Rₙ।
n ≥ 1 के लिए,
Hₙ = 1 + 3 + 3² + … + 3ⁿ⁻¹
3Hₙ = 3 + 3² + … + 3ⁿ।
दूसरी पंक्ति में से पहली पंक्ति घटाने पर,
2Hₙ = 3ⁿ − 1
इसलिए Hₙ = (3ⁿ − 1)/2।
यह सूत्र n = 0 पर भी 0 छिद्र देता है।
कुछ चरणों की संख्याएँ नीचे हैं। तालिका में n चरण, Rₙ बचे त्रिभुज और Hₙ कुल छिद्र दर्शाते हैं।

अतः nवें चरण में 3ⁿ त्रिभुज बचते हैं और कुल (3ⁿ − 1)/2 छिद्र होते हैं।
3. सिएरपिंस्की खंडक तक ले जाने वाले प्रत्येक आकृति अनुक्रम के nवें चरण पर शेष क्षेत्र का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। आरंभिक वर्ग या त्रिभुज का क्षेत्रफल 1 वर्ग इकाई मान लीजिए।
उत्तर:
(i) सिएरपिंस्की चटाई:
हर वर्ग को 9 बराबर वर्गों में बाँटकर बीच वाला वर्ग हटाते हैं। इसलिए हर चरण में पिछले क्षेत्रफल का 8/9 भाग बचता है।
- चरण 0 में क्षेत्रफल = 1 वर्ग इकाई।
- चरण 1 में क्षेत्रफल = 8/9 वर्ग इकाई।
- चरण 2 में क्षेत्रफल = 8/9 × 8/9 = 64/81 वर्ग इकाई।
इसी प्रकार nवें चरण में शेष क्षेत्रफल = (8/9)ⁿ वर्ग इकाई।
(ii) सिएरपिंस्की त्रिभुज:
हर त्रिभुज को 4 बराबर त्रिभुजों में बाँटकर बीच वाला त्रिभुज हटाते हैं। इसलिए हर चरण में पिछले क्षेत्रफल का 3/4 भाग बचता है।
- चरण 0 में क्षेत्रफल = 1 वर्ग इकाई।
- चरण 1 में क्षेत्रफल = 3/4 वर्ग इकाई।
- चरण 2 में क्षेत्रफल = 3/4 × 3/4 = 9/16 वर्ग इकाई।
इसी प्रकार nवें चरण में शेष क्षेत्रफल = (3/4)ⁿ वर्ग इकाई।
कक्षा 8 गणित प्रकाश भाग 2 के पेज 73 पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
पेज 73 – आइए, पता लगाएँ
1. ऐसे आकार अनुक्रम के कुछ प्रारंभिक चरण (कम-से-कम चरण 2 तक) बनाइए जो कोच हिमकण तक ले जाते हैं।
उत्तर:
- चरण 0 में एक समबाहु त्रिभुज बनाएँगे।
- चरण 1 में प्रत्येक भुजा को तीन बराबर भागों में बाँटेंगे। बीच वाले भाग पर बाहर की ओर समबाहु त्रिभुज बनाएँगे और बीच वाला मूल रेखाखंड हटा देंगे।
- चरण 2 में नई सीमा के प्रत्येक रेखाखंड पर यही प्रक्रिया दोहराएँगे।
चित्र में 0, 1 और 2 चरणों को दर्शाते हैं।

2. कोच हिमकण तक ले जाने वाले आकार अनुक्रम के nवें चरण में भुजाओं की संख्या ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
- चरण 0 में 3 भुजाएँ हैं। प्रत्येक अगले चरण में एक भुजा के स्थान पर 4 छोटी भुजाएँ बनती हैं।
- चरण 1 में भुजाओं की संख्या = 3 × 4 = 12।
- चरण 2 में भुजाओं की संख्या = 3 × 4 × 4 = 48।
इसी प्रकार, हर चरण में भुजाओं की संख्या 4 गुना होती है।
अतः nवें चरण में भुजाओं की संख्या = 3 × 4ⁿ।
3. अनुक्रम के nवें चरण की आकृति का परिमाप ज्ञात कीजिए। प्रारंभिक समबाहु त्रिभुज की भुजा की लंबाई 1 इकाई मान लीजिए।
उत्तर:
प्रत्येक चरण में भुजा की लंबाई पिछले चरण की भुजा की 1/3 हो जाती है।
इसलिए nवें चरण में प्रत्येक छोटी भुजा की लंबाई = 1/3ⁿ इकाई।
nवें चरण में भुजाओं की संख्या = 3 × 4ⁿ।
परिमाप = भुजाओं की संख्या × प्रत्येक भुजा की लंबाई
= 3 × 4ⁿ × 1/3ⁿ
= 3 × (4/3)ⁿ इकाई।
जाँच:
- चरण 0 का परिमाप = 3 इकाई।
- चरण 1 का परिमाप = 12 × 1/3 = 4 इकाई।
- चरण 2 का परिमाप = 48 × 1/9 = 16/3 इकाई।
अतः nवें चरण की आकृति का परिमाप 3 × (4/3)ⁿ इकाई है।
कक्षा 8 गणित प्रकाश भाग 2 के पेज 80 पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
पेज 80 – आइए, पता लगाएँ
1. नीचे दिए गए जालों में से कौन-से एक घन के जाल हैं? प्रथमतः कल्पना से उत्तर देने का प्रयास कीजिए। इसके पश्चात आप कटआउट का उपयोग करके अभ्यास कर सकते हैं।

उत्तर:
जाल (ii), (iii), (iv) और (vi) से घन बन सकता है।
इन्हें साझा किनारों पर मोड़ने से छह अलग-अलग फलक मिलते हैं। कोई फलक दूसरे फलक के ऊपर नहीं आता।
जाल (i) और (v) से घन नहीं बन सकता। इन्हें मोड़ने पर दो वर्ग एक ही फलक के स्थान पर आ जाते हैं और एक फलक खुला रह जाता है।
अतः सही जाल (ii), (iii), (iv) और (vi) हैं।
2. एक घन में कुल 11 संभावित जाल की संरचनाएँ हैं। इस गणना में यदि एक जाल दूसरे जाल को घुमाकर या उलटकर प्राप्त किया जा सकता है तो उसे एक ही जाल माना जाता है। उदाहरण के लिए- नीचे दिए गए सभी जाल समान माने जाते हैं –

एक घन के सभी 11 जाल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
घन के 11 अलग-अलग जाल नीचे बनाए हैं। हर जाल में 6 बराबर वर्ग हैं। चित्र में (i) से (xi) तक इन्हीं जालों की पहचान है।

हर जाल को वर्गों के साझा किनारों पर मोड़ने से घन के छह फलक बनते हैं। इन जालों में से किसी एक को घुमाने या उलटने से कोई दूसरा जाल प्राप्त नहीं होता।
3. एक घनाभ का जाल बनाइए जिसकी भुजाओं की माप हैं-
(i) 5 cm, 3 cm और 1 cm
(ii) 6 cm, 3 cm और 2 cm
उत्तर:
(i) 5 cm, 3 cm और 1 cm भुजाओं वाला घनाभ:
इसके 6 फलक होंगे:
- 5 cm × 3 cm के 2 आयत,
- 5 cm × 1 cm के 2 आयत और
- 3 cm × 1 cm के 2 आयत।
चार पार्श्व फलकों की एक पट्टी बनाएँगे। इनमें चौड़ाइयाँ क्रमशः 5 cm, 3 cm, 5 cm और 3 cm तथा ऊँचाई 1 cm होगी। पहले 5 cm × 1 cm आयत के ऊपर और नीचे एक-एक 5 cm × 3 cm आयत जोड़ेंगे।

इन आयतों को साझा किनारों पर मोड़ने से आवश्यक घनाभ बनेगा।
(ii) 6 cm, 3 cm और 2 cm भुजाओं वाला घनाभ:
इसके 6 फलक होंगे:
- 6 cm × 3 cm के 2 आयत,
- 6 cm × 2 cm के 2 आयत और
- 3 cm × 2 cm के 2 आयत।
चार पार्श्व फलकों की एक पट्टी बनाएँगे। इनमें चौड़ाइयाँ क्रमशः 6 cm, 3 cm, 6 cm और 3 cm तथा ऊँचाई 2 cm होगी। पहले 6 cm × 2 cm आयत के ऊपर और नीचे एक-एक 6 cm × 3 cm आयत जोड़ेंगे।

इन आयतों को साझा किनारों पर मोड़ने से आवश्यक घनाभ बनेगा।
कक्षा 8 गणित प्रकाश भाग 2 के पेज 92 पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
पेज 92 – आइए, पता लगाएँ
1. चित्र 4.6 में दी गई विभिन्न रेखाओं के अग्र दृश्य, ऊर्ध्व दृश्य और पार्श्व दृश्य का अवलोकन कीजिए। क्या इनकी लंबाइयों के मध्य कोई संबंध है?

उत्तर:
हाँ, इनकी लंबाइयों में संबंध है।
इन तीनों रेखाओं के अग्र दृश्यों की लंबाई समान है। पहली रेखा का अग्र दृश्य और ऊर्ध्व दृश्य बराबर लंबाई के हैं। उसका पार्श्व दृश्य केवल एक बिंदु है, जिसकी लंबाई 0 है।
दूसरी और तीसरी रेखा में पार्श्व दृश्य की लंबाई बढ़ने के साथ ऊर्ध्व दृश्य की लंबाई भी बढ़ती है। इन रेखाओं की ऊँचाई नहीं बदलती, इसलिए ऊर्ध्व दृश्य में पूरी रेखा की लंबाई दिखाई देती है।
इन रेखाओं के लिए अग्र और पार्श्व दृश्य की लंबाइयाँ एक समकोण त्रिभुज की दो छोटी भुजाएँ तथा ऊर्ध्व दृश्य की लंबाई उसका कर्ण बनती हैं। इसलिए,
(ऊर्ध्व दृश्य की लंबाई)² = (अग्र दृश्य की लंबाई)² + (पार्श्व दृश्य की लंबाई)²।
यह संबंध यहाँ दिखाई गई क्षैतिज रेखाओं के लिए है।
2. नीचे दिए गए प्रत्येक ठोस वस्तु के अभिविन्यास को ऊर्ध्वाधर, क्षैतिज और पार्श्वीय तल के सापेक्ष निश्चित करते हुए इनके अग्र दृश्य, ऊर्ध्व दृश्य तथा पार्श्व दृश्य— घन, घनाभ, समांतर षटफलक, शंकु, बेलन, प्रिज्म तथा पिरामिड को ज्ञात कीजिए। आवश्यकतानुसार संकेतों के लिए अगला प्रश्न देखिए।
उत्तर:
मैंने ठोसों को नीचे बताई गई स्थितियों में रखा है। चित्र में F का अर्थ अग्र दृश्य, T का अर्थ ऊर्ध्व दृश्य और S का अर्थ पार्श्व दृश्य है। पंक्तियों के अंक नीचे दिए गए ठोसों से मिलते हैं।
- घन: एक फलक क्षैतिज तल पर और सामने का फलक अग्र तल के समान्तर रखा है। तीनों दृश्य वर्ग हैं।
- घनाभ: इसका आधार क्षैतिज तल पर और सामने का फलक अग्र तल के समान्तर है। तीनों दृश्य आयत हैं। इनके माप घनाभ की लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई के अनुसार अलग हैं।
- समांतर षटफलक: इसका समांतर चतुर्भुजाकार आधार क्षैतिज तल पर है और खड़ी कोरें ऊर्ध्वाधर हैं। आधार की एक जोड़ी भुजाएँ अग्र तल के समान्तर हैं। इस स्थिति में अग्र और पार्श्व दृश्य आयत तथा ऊर्ध्व दृश्य समांतर चतुर्भुज है।
- शंकु: वृत्ताकार आधार क्षैतिज तल पर और शीर्ष ऊपर रखा है। अग्र और पार्श्व दृश्य त्रिभुज हैं। ऊर्ध्व दृश्य वृत्त है, जिसके केंद्र पर शीर्ष का प्रक्षेप है।
- बेलन: वृत्ताकार आधार क्षैतिज तल पर रखा है। अग्र और पार्श्व दृश्य आयत तथा ऊर्ध्व दृश्य वृत्त है।
- प्रिज्म: मैंने त्रिभुजाकार प्रिज्म लिया है। उसका एक आयताकार फलक क्षैतिज तल पर और त्रिभुजाकार फलक अग्र तल के समान्तर रखा है। अग्र दृश्य त्रिभुज तथा ऊर्ध्व और पार्श्व दृश्य आयत हैं। ऊर्ध्व दृश्य के बीच की रेखा ऊपरी कोर दिखाती है।
- पिरामिड: मैंने वर्गाकार आधार वाला पिरामिड लिया है। उसका आधार क्षैतिज तल पर है और आधार की भुजाएँ अग्र तथा पार्श्व तलों के समान्तर हैं। अग्र और पार्श्व दृश्य त्रिभुज हैं। ऊर्ध्व दृश्य वर्ग है, जिसमें शीर्ष का प्रक्षेप केंद्र पर है और केंद्र से चारों कोनों तक कोरें दिखती हैं।

ठोस को घुमाने या झुकाने पर उसके दृश्य बदल सकते हैं।
3. नीचे दी गई प्रत्येक वस्तुओं का उसके प्रक्षेपण से मिलान कीजिए।

उत्तर:
वस्तुओं और तीनों दृश्य-स्तंभों की पंक्तियों को ऊपर से नीचे गिनते हैं। प्रत्येक वस्तु का मिलान इस प्रकार है:
- जग का अग्र, ऊर्ध्व और पार्श्व दृश्य तीनों स्तंभों की 8वीं पंक्ति में है।
- कीप के तीनों दृश्य 6वीं पंक्ति में हैं।
- हथौड़े के तीनों दृश्य 7वीं पंक्ति में हैं।
- कार के तीनों दृश्य पहली पंक्ति में हैं।
- फिसलपट्टी के तीनों दृश्य तीसरी पंक्ति में हैं।
- कुर्सी के तीनों दृश्य चौथी पंक्ति में हैं।
- छत के पंखे के तीनों दृश्य 5वीं पंक्ति में हैं।
- ढक्कन वाले पात्र के तीनों दृश्य दूसरी पंक्ति में हैं।
अतः ऊपर से नीचे मिलान का क्रम 8, 6, 7, 1, 3, 4, 5, 2 है।

कक्षा 8 गणित प्रकाश भाग 2 के पेज 95 पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
पेज 95 – आइए, पता लगाएँ
1. निम्नलिखित समान आकार के घनों के प्रत्येक संयोजन के लिए ऊर्ध्व, अग्र और पार्श्व दृश्य चित्रित कीजिए।

उत्तर:
आकृतियों को ऊपर से नीचे, प्रत्येक पंक्ति में बाएँ से दाएँ (i) से (vi) तक लेते हैं। तीरों द्वारा बताई गई दिशाओं से देखने पर उनके दृश्य नीचे बनाए गए हैं।
चित्रों में T = ऊर्ध्व दृश्य, F = अग्र दृश्य और S = पार्श्व दृश्य है।

(i) ऊपर से L जैसी आकृति मिलती है। सामने और पार्श्व से 2 घन लंबे तथा 1 घन ऊँचे आयत मिलते हैं।
(ii) ऊपर से L जैसी आकृति मिलती है। सामने और पार्श्व से एक ओर 1 घन तथा दूसरी ओर 2 घन ऊँची सीढ़ीनुमा आकृति मिलती है।
(iii) ऊपर से लंबी भुजा वाला L मिलता है। सामने से 3 घन लंबा और 1 घन ऊँचा आयत मिलता है। पार्श्व से 2 घन लंबा और 1 घन ऊँचा आयत मिलता है।
(iv) ऊपर से 3 × 3 का वर्ग मिलता है। सामने से बाएँ से दाएँ ऊँचाइयाँ 3, 3 और 2 घन हैं। पार्श्व से आगे से पीछे ऊँचाइयाँ 1, 1 और 3 घन हैं।
(v) ऊपर से 2 घन लंबा और 1 घन चौड़ा आयत मिलता है। सामने से बाईं ओर 3 घनों का खड़ा स्तंभ और उसके बीच में दाईं ओर जुड़ा एक घन दिखाई देता है। पार्श्व से 1 घन चौड़ा और 3 घन ऊँचा आयत मिलता है।
(vi) ऊपर से 3 × 3 के वर्ग में आगे-दाईं ओर एक खाना खाली मिलता है। सामने से बाएँ से दाएँ ऊँचाइयाँ 3, 2 और 3 घन हैं। पार्श्व से आगे से पीछे ऊँचाइयाँ 1, 1 और 3 घन हैं।
2. आठ एक समान घनों की कल्पना कीजिए जो अक्षर ‘C’ बनाने के लिए फलकों द्वारा आपस में जुड़े हुए हैं।
(i) यह सामने से ‘C’ जैसा प्रतीत होता है। यह पार्श्व से कैसा दर्शाई देता है? ऊर्ध्व से यह कैसा दिखाई देता है?
(ii) ऐसी आकृति बनाने के लिए और अधिक घन जोड़िए जो सामने से ‘C’ तथा ऊपर से ‘A’ जैसा प्रतीत होता हो।
(iii) अब, क्या आप और अधिक घन जोड़ सकते हैं जिससे कि यह अग्र भाग से ‘C’ ऊर्ध्व भाग से, ‘A’ और पार्श्व से ‘F’ जैसा दिखे?
(iv) क्या आप घनों के एकल संयोजन से इस प्रकार बनने वाले अन्य भिन्न अक्षरों की कल्पना कर सकते हैं?


उत्तर:
यहाँ चित्रों में F = अग्र दृश्य, T = ऊर्ध्व दृश्य और S = पार्श्व दृश्य है। पार्श्व दृश्य बाईं ओर से लिया है।
(i) आठ घनों वाला C एक घन मोटा है। इसका बायाँ स्तंभ 4 घन ऊँचा तथा ऊपर और नीचे की पंक्तियाँ 3 घन लंबी हैं।
पार्श्व से 1 घन चौड़ा और 4 घन ऊँचा आयत दिखाई देता है।
ऊपर से 3 घन लंबा और 1 घन चौड़ा आयत दिखाई देता है।

(ii) हाँ, ऐसा संयोजन बना सकते हैं। C की ऊपर और नीचे की पंक्तियों में एक-एक घन जोड़कर उन्हें 4 घन लंबा करते हैं। अब ऊपर की परत को सामने की ओर बढ़ाते हैं।
इस ऊपरी परत में पीछे से आगे की ओर चार पंक्तियाँ बनाते हैं:
पहली पंक्ति में चार घन रखते हैं।
दूसरी पंक्ति में केवल दोनों सिरों पर एक-एक घन रखते हैं।
तीसरी पंक्ति में चार घन रखते हैं।
चौथी पंक्ति में केवल दोनों सिरों पर एक-एक घन रखते हैं।
नीचे की चार घनों वाली पंक्ति और बाईं ओर का खड़ा स्तंभ बने रहते हैं। इस संयोजन में कुल 18 घन हैं। यह सामने से C और ऊपर से A जैसा दिखाई देता है।

(iii) हाँ। पिछले संयोजन के बाएँ-पिछले स्तंभ में नीचे से दूसरे घन के सामने उसी ऊँचाई पर तीन और घन जोड़ते हैं। इससे पार्श्व दृश्य में F की बीच वाली पंक्ति बन जाती है।
अब सामने से C, ऊपर से A और बाईं ओर से F दिखाई देता है। कुल घन = 18 + 3 = 21।

अक्षरों के आकार के बारे में: A का चित्र 4 खाने चौड़ा और 4 खाने लंबा है। इसलिए इस रचना में C और F की क्षैतिज पंक्तियों को 3 खानों से बढ़ाकर 4 खानों का किया है। उनके अक्षररूप बने रहते हैं। तीनों अक्षरों के मूल चित्रों के खानों की संख्या बिल्कुल वैसी ही रखने पर उनके प्रक्षेपों की चौड़ाइयाँ आपस में मेल नहीं खाएँगी।
(iv) हाँ। एक घन मोटा T बना सकते हैं। इसकी सबसे ऊपर की पंक्ति में 3 घन और बीच के घन के नीचे 3 घन जोड़ते हैं।
यह सामने से T, ऊपर से आड़ा I और पार्श्व से खड़ा I जैसा दिखाई देता है।

3. कौन-सी ठोस वस्तु दिए हुए ऊर्ध्व दृश्य, अग्र दृश्य और पार्श्व दृश्य के संगत है?

उत्तर:
विकल्प (ii) की ठोस वस्तु तीनों दृश्यों के संगत है।
ऊपर से देखने पर इसका आगे-दायाँ खाना खाली है। सामने से बाईं ओर ऊँचाई 3 घन और दाईं ओर ऊँचाई 2 घन है। पार्श्व से आगे के दोनों स्थानों की ऊँचाई 1 घन और पीछे की ऊँचाई 3 घन है। ये तीनों दृश्य दिए गए दृश्यों से मेल खाते हैं।
4. समान आकार के घनों का उपयोग कर एक ठोस बनाइए जो नीचे दिए गए प्रक्षेपण देता है।

उत्तर:
तीन-तीन दृश्यों के प्रत्येक समूह के लिए एक ठोस बनाते हैं। नीचे उनकी रचना और तीनों दृश्य दिखाए गए हैं। T = ऊर्ध्व दृश्य, F = अग्र दृश्य और S = पार्श्व दृश्य है। टूटी हुई रेखाएँ छिपे हुए किनारे दिखाती हैं।
पहला समूह: (i), (ii) और (iii)
सबसे नीचे 3 × 3 के खानों में घन रखते हैं। आगे की पंक्ति में बीच का खाना खाली रखते हैं। बीच वाली पंक्ति के तीनों खानों में घन रखते हैं। पीछे की पंक्ति में बायाँ खाना खाली रखकर बीच और दाएँ खाने में घन रखते हैं।
अब पीछे रखे इन दोनों घनों पर एक-एक और घन रखते हैं। इस प्रकार एक 9 घनों वाला ठोस बनता है।

दूसरा समूह: (iv), (v) और (vi)
नीचे दो घन चौड़ी और तीन घन लंबी जगह में आगे-दायाँ खाना खाली रखते हैं। बाकी पाँच खानों में एक-एक घन रखते हैं।
पीछे की पंक्ति के दोनों घनों पर एक-एक और घन रखते हैं। इस प्रकार 7 घनों वाला ठोस मिलता है।

तीसरा समूह: (vii), (viii) और (ix)
दूसरे समूह वाले ठोस के पीछे-दाएँ स्तंभ पर एक और घन रखते हैं। अब पीछे-बायाँ स्तंभ 2 घन ऊँचा और पीछे-दायाँ स्तंभ 3 घन ऊँचा है। इस ठोस में कुल 8 घन हैं।

ये ठोस दिए गए प्रक्षेपों के अनुसार बनाए गए हैं। एक ही प्रकार के प्रक्षेप कभी-कभी अलग-अलग ठोसों से भी मिल सकते हैं, इसलिए इन्हें बनाने का कोई और सही तरीका भी हो सकता है।
5. एकसमान घनों के इस ढेर में घनों की संख्या ज्ञात कीजिए।

उत्तर:
घनों को नीचे से ऊपर परतों में गिनते हैं। इसमें पीछे छिपे हुए घनों को भी गिनना है।
सबसे नीचे की परत में घन = 4 + 3 + 2 + 1 = 10
उसके ऊपर की परत में घन = 3 + 2 + 1 = 6
तीसरी परत में घन = 2 + 1 = 3
सबसे ऊपर की परत में घन = 1
चित्र में I, II, III और IV क्रमशः नीचे से ऊपर की चार परतें हैं।

कुल घन = 10 + 6 + 3 + 1 = 20
अतः इस ढेर में 20 घन हैं।
6. एक घन के प्रक्षेपण से विभिन्न अभिविन्यासों के अंतर्गत कौन-कौन से अलग-अलग आकार बन सकते हैं?
उत्तर:
घन को अलग-अलग दिशाओं में रखने पर उसके प्रक्षेप का बाहरी आकार वर्ग, आयत या षट्भुज हो सकता है।
- किसी एक फलक को बिल्कुल सामने रखकर देखने पर वर्ग बनता है।
- दो फलकों के बीच वाले ऊर्ध्वाधर किनारे की ओर से देखने पर आयत बन सकता है।
- ऐसी दिशा से देखने पर जहाँ तीन फलक दिखाई देते हों, षट्भुज बनता है। एक विशेष दिशा में यह सम षट्भुज भी होता है।
नीचे I में वर्ग, II में आयत और III में सम षट्भुज दिखाया गया है।

कक्षा 8 गणित प्रकाश भाग 2 के पेज 100 पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
पेज 100 – आइए, पता लगाएँ
1. चित्र 4.8 में दर्शाए गए 5 प्रकारों के अतिरिक्त क्या चार घनों को उनके फलकों के अनुदिश चिपकाने के कुछ अन्य प्रकार भी हैं? क्या आप इन कल्पनाओं के साथ-ही इनका चित्रांकन भी कर सकते हैं?

उत्तर:
हाँ, चार घनों को इस प्रकार भी जोड़ा जा सकता है कि वे एक ही तल की व्यवस्था में न रहें। मैंने तीन अन्य व्यवस्थाएँ बनाई हैं।
(1) तीन घनों को नीचे L के आकार में रखेंगे। जिस घन से दोनों भुजाएँ निकलती हैं, उसके ऊपर चौथा घन रखेंगे। इस प्रकार उस घन के तीन परस्पर लंबवत फलकों से एक-एक घन जुड़ जाएगा।
(2) तीन घनों को नीचे L के आकार में रखेंगे। इस बार L के एक सिरे वाले घन के ऊपर चौथा घन रखेंगे।
(3) नीचे L की दूसरी ओर मुड़ी हुई व्यवस्था बनाएँगे और उसके सिरे पर चौथा घन रखेंगे। यह दूसरी व्यवस्था का दर्पण-प्रतिबिंब जैसा रूप है। इसे केवल घुमाकर दूसरी व्यवस्था पर पूरी तरह नहीं बैठाया जा सकता।

प्रत्येक व्यवस्था में चार घन हैं और वे पूरे फलकों से जुड़े हैं।
2. नीचे दी गई आकृतियों को समदूरीक ग्रिड पर बनाइए।

[संकेत— यह ध्यान रखने योग्य है कि ऊँचाई के अनुदिश चित्रित किया जाने वाला किनारा नीचे से ऊपर की ओर जाता है अथवा ऊपर से नीचे की ओर जाता है। इसी के अनुसार ग्रिड पर या तो ऊँचाई अक्ष की दिशा में या उसके विपरीत दिशा में रेखाखंड बनाइए।]
उत्तर:
समदूरीक ग्रिड में ऊँचाई की कोरें खड़ी रेखाओं पर और बाकी दो दिशाओं की कोरें ग्रिड की तिरछी रेखाओं पर बनाएँगे। एक ही दिशा की सभी कोरें समान्तर रखेंगे।
पहली आकृति L जैसी, दूसरी बीच से उठी हुई और तीसरी तीन सीढ़ियों जैसी है। इनके समदूरीक चित्र इस प्रकार हैं:

3. इस गेंद के मार्ग में क्या कुछ विशेष है? समदूरीक पृष्ठ पर इसकी पुनः रचना कीजिए।

[संकेत— इस चित्र के उस भाग पर ध्यान दीजिए जो भौतिक रूप से बनाने योग्य है और उसके तीन प्राथमिक अक्षों की पहचान कीजिए।]
उत्तर:
इस मार्ग में गेंद तीरों की दिशा में चलते हुए सीढ़ियाँ चढ़कर फिर उसी स्थान पर लौटती दिखाई देती है। बीच में उतनी ऊँचाई से नीचे आने का कोई भाग नहीं दिखता। वास्तविक मार्ग में ऐसा नहीं हो सकता।
मार्ग के छोटे-छोटे भाग अलग-अलग देखने पर सही लगते हैं, लेकिन उन्हें पूरे चक्कर में जोड़ने पर ऊँचाइयाँ मेल नहीं खातीं। यह एक असंभव मार्ग का चित्र है।
समदूरीक ग्रिड पर पहले इसकी तीन दिशाएँ पहचानेंगे। फिर दिख रही कोरों, सीढ़ियों और तीरों को उन्हीं दिशाओं में बनाकर इस चित्र का समतल प्रतिरूप बनाएँगे।

यह चित्र कागज पर बनाया जा सकता है, लेकिन इसी रूप का पूरा वास्तविक मार्ग नहीं बनाया जा सकता।
4. दिए गए त्रिभुज का अवलोकन कीजिए।

(i) क्या वास्तविक घनों से इस प्रतिरूप की रचना करना संभव होगा? बताइए इस असंभव त्रिभुज के अग्र, ऊर्ध्व और पार्श्व रूप कैसे हैं?
(ii) समदूरीक पेपर पर इसकी पुनः रचना कीजिए।
(iii) बताइए यहाँ भ्रम की स्थिति क्यों बनती है?
उत्तर:
(i) नहीं, वास्तविक घनों को इसी प्रकार जोड़कर यह पूरा प्रतिरूप नहीं बनाया जा सकता।
चित्र में तीनों पट्टियाँ अलग-अलग देखने पर घनों की पंक्तियों जैसी लगती हैं। हर कोने पर दो पट्टियाँ समकोण पर जुड़ी हुई प्रतीत होती हैं। लेकिन तीनों जोड़ एक साथ सही नहीं हो सकते। इसलिए इसके अग्र, ऊर्ध्व और पार्श्व रूपों को एक ही वास्तविक ठोस के संगत दृश्य नहीं माना जा सकता। चित्र से ऐसे तीन भौतिक रूप से संभव दृश्य बनाना संभव नहीं है।
(ii) समदूरीक ग्रिड पर तीन दिशाओं में कोरें बनाकर इस असंभव त्रिभुज का समतल चित्र इस प्रकार बनाया जा सकता है:

(iii) चित्र में रेखाओं और छायांकन से हर छोटा भाग सही घन जैसा दिखाई देता है। हमारी आँखें इन भागों को एक लगातार जुड़ा हुआ ठोस मान लेती हैं। परंतु पूरे चित्र में आगे-पीछे और ऊपर-नीचे के संबंध आपस में मेल नहीं खाते। इसी कारण भ्रम होता है।
खंडकों का प्रतिरूप और ठोसों के दृश्य पहचानने की आसान विधि
खंडक वाले प्रश्नों में हर चरण की एक तालिका बनाइए। सिएरपिंस्की चटाई में बचे वर्ग हर चरण पर 8 गुना होते हैं, सिएरपिंस्की त्रिभुज में बचे त्रिभुज 3 गुना, और कोच हिमकण में भुजाएँ 4 गुना जबकि परिमाप 4/3 गुना बढ़ता है; इन्हीं गुणकों से किसी भी चरण का उत्तर मिलता है। जाल को कागज़ से काटकर मोड़ें, और ध्यान दें कि पुस्तक ‘किनारे’ और ‘कोरें’ को एक ही अर्थ में लिखती है। दृश्य जाँचने का नियम है कि समांतर रेखाओं का प्रक्षेप भी समांतर रहता है।
चींटी के मार्ग की लंबाई अध्याय 2 के ‘बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय’ से निकलती है। आगे अध्याय 5 ‘बिंदुओं तथा रेखाओं द्वारा बनी कहानियाँ’ पढ़ें; गणित प्रकाश की पूरी अध्याय-सूची कक्षा 8 गणित के एनसीईआरटी समाधान पर है।
