एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 5 आखिरी चट्टान तक

एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा समाधान अध्याय 5 आखिरी चट्टान तक – प्रश्न उत्तर, सारांश, लेखक परिचय, शब्द-अर्थ तथा अतिरिक्त प्रश्नों के उत्तर सत्र 2026-27 के लिए यहाँ से प्राप्त किए जा सकते हैं। आखिरी चट्टान तक कक्षा 9 की हिंदी पाठ्यपुस्तक गंगा का पाँचवाँ पाठ है। यह हिंदी के प्रसिद्ध नाटककार और लेखक मोहन राकेश द्वारा लिखित एक रोचक यात्रा-वृत्तांत है जिसमें कन्याकुमारी की यात्रा के अनुभवों को बड़ी सजीवता और भावपूर्णता के साथ प्रस्तुत किया गया है। कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 5 केवल भौगोलिक वर्णन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रकृति के भव्य दृश्य, लेखक की आत्मानुभूति, स्थानीय जनजीवन की झलक और समुद्र तट पर जीवन का रोमांच एक साथ समाहित हैं।
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एनसीईआरटी कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 5 समाधान

कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 5 के अभ्यास के प्रश्न उत्तर

पेज 90 – रचना से संवाद

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?

1. लेखक ने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य कहाँ से देखा?

(क) विवेकानंद चट्टान से
(ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से
(ग) पच्छिमी क्षितिज से
(घ) सैंड हिल से
उत्तर:
(ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से
स्पष्टीकरण:
लेखक पहले ‘सैंड हिल’ पर पहुँचता है, लेकिन वहाँ से उसे पूरा दृश्य स्पष्ट नहीं दिखाई देता क्योंकि एक ऊँचा टीला बीच में आ रहा था। इसलिए वह आगे बढ़ते हुए कई टीलों को पार करता है और अंततः एक ऐसे ऊँचे टीले पर पहुँचता है जहाँ से उसे पश्चिमी क्षितिज का पूरा खुला विस्तार दिखाई देता है। यही टीला अरब सागर की दिशा में था। वहीं बैठकर उसने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य देखा, जब सूर्य धीरे-धीरे समुद्र में डूबता हुआ दिखाई देता है। इसलिए विकल्प (ख) सबसे उपयुक्त है।

2. “मैं कुछ देर भूला रहा कि मैं मैं ही हूँ।” यह कथन लेखक की किस मन:स्थिति को दर्शाता है?

(क) मौन हो जाना
(ख) विस्मित हो जाना
(ग) भ्रमित हो जाना
(घ) आशंकित होना
उत्तर:
(ख) विस्मित हो जाना
स्पष्टीकरण:
लेखक जब समुद्र, लहरों और अनंत क्षितिज के अद्भुत दृश्य को देखता है, तो वह उसकी विशालता और सुंदरता में पूरी तरह डूब जाता है। उस समय वह अपने अस्तित्व तक को भूल जाता है और स्वयं को उस दृश्य का एक हिस्सा महसूस करता है। यह स्थिति किसी डर या भ्रम की नहीं, बल्कि आश्चर्य और अद्भुत अनुभूति की है। इसलिए यह कथन लेखक के अत्यधिक विस्मित (आश्चर्यचकित) होने की मन:स्थिति को दर्शाता है।

3. “मैंने, सिर्फ मैंने उस चोटी को पहली बार सर किया हो।” इस कथन में कौन-सा भाव व्यक्त होता है?

(क) करुणा
(ख) विनम्रता
(ग) आत्मीयता
(घ) संतुष्टि
उत्तर:
(घ) संतुष्टि
स्पष्टीकरण:
लेखक कई कठिन टीलों को पार करके अंततः उस ऊँचे टीले पर पहुँचता है, जहाँ से उसे सूर्यास्त का सुंदर दृश्य दिखाई देता है। वहाँ पहुँचकर उसे अपने प्रयास की सफलता का अनुभव होता है और वह गर्व व खुशी महसूस करता है। “मैंने, सिर्फ मैंने उस चोटी को पहली बार सर किया हो” कथन में उसी उपलब्धि और तृप्ति की भावना झलकती है। इसलिए यह संतुष्टि (सफलता से मिलने वाली खुशी) का भाव व्यक्त करता है।

4. “शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति” वाक्य में वर्णन है —

(क) बलखाती लहरों का
(ख) सागर की व्यापकता का
(ग) सूर्यास्त के दृश्य का
(घ) पश्चिमी क्षितिज का
उत्तर:
(ख) सागर की व्यापकता का
स्पष्टीकरण:
यह वाक्य उस समय आया है जब लेखक चारों ओर फैले समुद्र को देख रहा है। उसे हर दिशा में जल ही जल दिखाई देता है और सागर की असीम विशालता तथा उसकी शक्ति का अनुभव होता है। “शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति” में समुद्र की अनंत व्यापकता और उसकी ताकत का वर्णन किया गया है। इसलिए यह सागर की व्यापकता को दर्शाता है।

5. लेखक की कन्याकुमारी की यात्रा का वर्णन पढ़कर कहा जा सकता है कि —

(क) यह कन्याकुमारी के मौसम को प्रमुखता से वर्णित करता है।
(ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।
(ग) यह केवल यात्रा के रोमांच पर केंद्रित है।
(घ) इसमें कन्याकुमारी का काल्पनिक वर्णन मिलता है।
उत्तर:
(ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।
स्पष्टीकरण:
लेखक ने अपनी यात्रा का वर्णन केवल स्थान या मौसम तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसने हर दृश्य—समुद्र, लहरें, चट्टानें, सूर्योदय और सूर्यास्त—को अपनी भावनाओं और अनुभूतियों के साथ प्रस्तुत किया है। वह कहीं विस्मित होता है, कहीं डरता है, कहीं संतुष्टि महसूस करता है। इससे पाठ बहुत जीवंत और वास्तविक लगता है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि यह यात्रा-वर्णन लेखक की गहरी अनुभूतियों से जुड़ा हुआ है, न कि केवल जानकारी या रोमांच तक सीमित।

पेज 91 के प्रश्न उत्तर

मेरी समझ मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए —

1. यात्रियों का समूह सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए सैंड हिल की ओर बढ़ता जा रहा था लेकिन लेखक सैंड हिल पर पहुँचकर कुछ देर रुकने के बाद दूसरे टीले की ओर बढ़ने लगा। उसके ऐसा करने के पीछे मूल कारण क्या था?

उत्तर:
लेखक सैंड हिल पर पहुँचकर कुछ देर रुका, लेकिन उसे वहाँ से सूर्यास्त का पूरा और स्पष्ट दृश्य दिखाई नहीं दे रहा था। सैंड हिल के सामने एक और ऊँचा टीला था, जो अरब सागर की ओर के विस्तार को ढक रहा था। लेखक चाहता था कि वह सूर्यास्त को पूरे विस्तार के साथ, बिना किसी बाधा के देख सके। उसके मन में प्रकृति के इस अद्भुत दृश्य को पूर्ण रूप से अनुभव करने की तीव्र इच्छा थी। इसलिए वह संतुष्ट नहीं हुआ और आगे बढ़ने का निर्णय लिया। उसने कई टीलों को पार किया, भले ही उसकी टाँगें थक रही थीं, लेकिन उसका मन नहीं थका। अंततः वह एक ऐसे ऊँचे टीले पर पहुँचा, जहाँ से उसे पूरा दृश्य साफ दिखाई दिया। इस प्रकार, पूर्ण और सुंदर अनुभव की चाह ही उसके आगे बढ़ने का मुख्य कारण थी।

2. लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों के विषय में क्या-क्या बताया?

उत्तर:
लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों के जीवन के बारे में महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। वह बताता है कि वहाँ लगभग आठ हजार की आबादी में चार-पाँच सौ शिक्षित नवयुवक बेरोजगार हैं, जिनमें लगभग सौ ग्रेजुएट भी शामिल हैं। ये युवक नौकरी की तलाश में लगातार अर्जियाँ देते रहते हैं और आपस में चर्चा व बहस करते हैं। जीविका चलाने के लिए वे छोटे-मोटे काम करते हैं, जैसे फोटो-एलबम बेचना या सीपियों से बनी वस्तुएँ बेचना। लेखक ने यह भी बताया कि वे समुद्र से मिलने वाली चीज़ों, जैसे सीपियों का गूदा, खाकर अपना गुजारा करते हैं। इसके साथ ही वे दार्शनिक विषयों पर चर्चा करते हैं। इससे पता चलता है कि उनके जीवन में संघर्ष के साथ-साथ विचारशीलता भी है।

3. “अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर मैं टीले पर बैठ गया” इस पंक्ति में ‘प्रयत्न की सार्थकता’ से क्या अभिप्राय है?

उत्तर:
इस पंक्ति में ‘प्रयत्न की सार्थकता’ से अभिप्राय लेखक के उस लगातार किए गए प्रयास की सफलता से है, जिसके माध्यम से वह सही स्थान तक पहुँचना चाहता था। लेखक सैंड हिल से संतुष्ट नहीं हुआ और बेहतर दृश्य की खोज में एक के बाद एक कई टीलों को पार करता गया। रास्ता कठिन था, टाँगें थक रही थीं, फिर भी उसने हार नहीं मानी। अंततः वह एक ऐसे ऊँचे टीले पर पहुँच गया, जहाँ से उसे सूर्यास्त का पूरा और सुंदर दृश्य स्पष्ट दिखाई दिया। जब उसे अपने उद्देश्य की पूर्ति हो गई, तो उसे अपने प्रयास सफल और सार्थक लगे। इसी संतोष और उपलब्धि की भावना के कारण वह वहाँ बैठ गया, जैसे उसने कोई बड़ी उपलब्धि प्राप्त कर ली हो।

4. यात्रा-वृतांत में आए उन दृश्यों के विषय में लिखिए जिनका अनुभव लेखक के लिए बिल्कुल नया था।

उत्तर:
लेखक की कन्याकुमारी यात्रा में कई ऐसे दृश्य थे जो उसके लिए बिल्कुल नए और अद्भुत थे। सबसे पहले, तीन समुद्रों—अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी—का संगम और वहाँ की प्रचंड लहरों का दृश्य उसके लिए अनोखा अनुभव था। समुद्र की असीम व्यापकता और लहरों की शक्ति ने उसे गहराई से प्रभावित किया। सूर्यास्त का बदलता रंग—सोने से लाल, फिर बैंगनी और अंत में काला—भी उसने पहली बार इतनी स्पष्टता से देखा। इसके अलावा, समुद्र तट की रेत में दिखाई देने वाले अनेक अनोखे और मिश्रित रंग उसके लिए बिल्कुल नए थे, जिन्हें उसने पहले कभी नहीं देखा था। ‘विवेकानंद चट्टान’ तक नाव से पहुँचना और वहाँ का अनुभव भी उसके लिए एक नया और रोमांचक अनुभव था।

5. यात्रा-वृतांत से ऐसे दो अंश चुनकर लिखिए जिससे लेखक की मानसिक दृढ़ता और हार न मानने की प्रवृत्ति का पता चलता है।

उत्तर:यात्रा-वृतांत में कई ऐसे अंश हैं जो लेखक की मानसिक दृढ़ता और हार न मानने की प्रवृत्ति को दर्शाते हैं। पहला अंश वह है, जब लेखक सैंड हिल से संतुष्ट नहीं होता और बेहतर दृश्य पाने के लिए एक के बाद एक कई टीलों को पार करता जाता है—“टाँगें थक रही थीं पर मन थकने को तैयार नहीं था।” यह वाक्य उसकी अटूट इच्छाशक्ति को स्पष्ट करता है।
दूसरा अंश तब का है, जब समुद्र का पानी बढ़ने लगता है और खतरे की स्थिति बन जाती है, फिर भी लेखक घबराकर रुकता नहीं, बल्कि साहस जुटाकर आगे बढ़ता है—“मैं दौड़ने लगा… एक ऊँची लहर से बचकर इस तरह दौड़ा जैसे सचमुच वह मुझे अपनी लपेट में लेने आ रही हो।” ये अंश उसकी हिम्मत और दृढ़ निश्चय को उजागर करते हैं।

कक्षा 9 हिंदी गंगा पाठ 5 लेखक परिचय

लेखक परिचय – मोहन राकेश

जन्म: सन् 1925, अमृतसर, पंजाब
निधन: सन् 1972 (मात्र 48 वर्ष की अल्पायु में)
शिक्षा एवं कार्यक्षेत्र: हिंदी साहित्य के बहुमुखी रचनाकार। कहानी, उपन्यास, नाटक, डायरी लेखन, यात्रा-वृत्तांत आदि अनेक विधाओं में साहित्य सृजन किया। कुछ समय तक “सारिका” नामक हिंदी पत्रिका का संपादन भी किया।
प्रमुख रचनाएँ:
नाटक – आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस, आधे-अधूरे। उपन्यास – अँधेरे बंद कमरे, अंतराल, न आने वाला कल। कहानी-संग्रह – क्वार्टर तथा अन्य कहानियाँ, नए बादल, वारिस तथा अन्य कहानियाँ। अन्य – मोहन राकेश की डायरी (डायरी लेखन), आखिरी चट्टान तक (यात्रा-वृत्तांत)।
पुरस्कार: “आषाढ़ का एक दिन” नाटक के लिए “संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार” से सम्मानित।
साहित्यिक विशेषता: मोहन राकेश के लेखन में भावों की गहराई के साथ-साथ आधुनिक जीवन की जटिलताओं और मानवीय संवेदनाओं का सूक्ष्म अंकन मिलता है। उनकी भाषा सहज, प्रवाहपूर्ण और चित्रात्मक है।

कक्षा 9 हिंदी गंगा पाठ 5 का चरण-दर-चरण संक्षिप्त सारांश

पाठ का सारांश

  • कन्याकुमारी – आखिरी चट्टान:
    लेखक केप होटल के पास समुद्र के अंदर से उभरी स्याह चट्टानों में से एक पर खड़े होकर भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देखता है। पृष्ठभूमि में कन्याकुमारी के मंदिर की लाल-सफेद लकीरें चमक रही हैं। अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी – तीनों के संगम-स्थल पर वह चट्टान है जिस पर स्वामी विवेकानंद ने समाधि लगाई थी। लहरें आसपास की चट्टानों से टकराती हैं और चूरे बूँदों की जालियाँ बन जाती हैं। लेखक “शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति” महसूस करते हुए तीनों ओर के क्षितिज को आँखों में समेटता है। अपनी चेतना खोकर वह दृश्य का हिस्सा बन जाता है और जब होश आता है तो देखता है कि उसकी चट्टान पानी में घिर गई है। वह कूदकर किनारे पहुँचता है।
  • सूर्यास्त और टीलों की यात्रा:
    सूर्यास्त देखने के लिए लेखक “सैंड हिल” की ओर चलता है। वहाँ नवयुवतियाँ सुंदर रेशमी वस्त्र पहनकर बैठी हैं। लेखक पूरे विस्तार में सूर्यास्त देखने के लिए आगे बढ़ता रहता है – एक टीले के बाद दूसरा, दूसरे के बाद तीसरा। टाँगें थकती हैं पर मन थकने को तैयार नहीं। अंततः एक टीले पर पहुँचकर खुला विस्तार दिखाई देता है और लेखक संतुष्ट होकर बैठ जाता है “जैसे वह टीला संसार की सबसे ऊँची चोटी हो और सिर्फ मैंने उसे पहली बार सर किया हो।”
  • सूर्यास्त का मनोरम दृश्य:
    सूर्य पानी की सतह से छूता है तो पानी पर सोना-ही-सोना बह आता है। रंग तेजी से बदलते हैं – सोना, फिर लहू, फिर बैजनी और अंततः काला। नारियलों के झुरमुट स्याह पड़कर जैसे सिर धुन रहे हों। लेखक अचानक याद करता है कि लौटना भी है और रात का डर उसके मन में उतर आता है।
  • तट पर खतरा और रंगीन रेत:
    लेखक समुद्र तट से लौटने का रास्ता चुनता है। पानी बढ़ रहा है, तट सिकुड़ रहा है। एक लहर पाँव भिगोती है तो खतरे का एहसास होता है। वह दौड़ने लगता है, जूता हाथ में ले लेता है। एक चट्टान से टकराकर बाँह पर हल्की खरोंच आती है। चट्टान के ऊपर पहुँचने पर पाता है कि उस तरफ खुला फैलाव है और बहुत लोग टहल रहे हैं। मन से डर निकलते ही वह हल्का महसूस करता है। इससे पहले तट पर अनेक रंगों की रेत देखता है – सुरमई, खाकी, पीली, लाल और न जाने कितने अनाम रंग। हर रंग की थोड़ी-थोड़ी रेत साथ लेने का मन करता है पर कोई उपाय नहीं।
  • विवेकानंद चट्टान पर सूर्योदय:
    अगले दिन लेखक आठ लोगों के साथ – तीन स्थानीय नवयुवक और चार मल्लाह – रबड़ के तीन तनों से बनी छोटी नाव में विवेकानंद चट्टान पर जाता है। चट्टान पर पहुँचने पर डर टाँगों में उतर जाता है। एक ग्रेजुएट नवयुवक बताता है कि कन्याकुमारी की आठ हजार की आबादी में चार-पाँच सौ शिक्षित बेकार नवयुवक हैं जिनका मुख्य काम नौकरियों के लिए अर्जियाँ देना और बहस करना है। वह कहता है – “हम लोग सीपियों का गूदा खाते हैं और दार्शनिक सिद्धांतों पर बहस करते हैं। इस चट्टान से इतनी प्रेरणा तो हमें मिलती ही है।” सूर्योदय का दृश्य अद्भुत है – पानी और आकाश में तरह-तरह के रंग झिलमिलाते हैं। मंदिर में पूजा की घंटियाँ बजती हैं, भक्त अर्घ्य देते हैं, सरकारी मेहमान कॉफी पीते हैं और लेखक मन में बसों का टाइम-टेबल दोहराता है।

यात्रा-वृत्तांत विधा की विशेषताएँ

गंगा पुस्तक कक्षा 9 हिंदी के पाँचवें अध्याय में यात्रा-वृत्तांत के सभी प्रमुख तत्व उपस्थित हैं। एनसीईआरटी ने स्वयं इन्हें छह बिंदुओं में समझाया है-

  • दृश्य-वर्णन: समुद्र, चट्टानें, लहरों का चित्रण, रंग, आकाश और रेत का जीवंत चित्रण। “बलखाती लहरें रास्ते की नुकीली चट्टानों से कटती हुई आती थीं जिससे उनके ऊपर चूरे बूँदों की जालियाँ बन जाती थीं।”
  • आत्मानुभूति व भावनाएँ: विस्मय, रोमांच, भय, आत्म-संवेदना, अपने अस्तित्व का बोध और प्रकृति से संवाद। “मैं कुछ देर भूला रहा कि मैं मैं हूँ, एक जीवित व्यक्ति, दूर से आया यात्री।”
  • सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य: विवेकानंद चट्टान, स्थानीय लोग और नवयुवक, बेकारी की समस्या, मंदिर और धार्मिक परंपराएँ (अर्घ्य)।
  • जीवन-दर्शन: “शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति”, आत्म-चेतना और क्षणभंगुरता की उदासी।
  • शैलीगत विशेषताएँ: सजीव, प्रवाहपूर्ण भाषा, दृश्यात्मकता, रूपक, उपमा, प्रतीक और रंगों का भावात्मक प्रयोग।
  • रोमांच व संघर्ष: लहरों से संघर्ष, अँधेरे में भटकने का भय और सुरक्षित लौटने की चिंता।

कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 5 – कठिन शब्दों के अर्थ

कठिन शब्द और उनके अर्थ

शब्दअर्थ
स्याह/सियाहकाला, श्याम
समाधिस्थसमाधि में स्थित, मनोयोग से डूबा हुआ
क्षितिजवह स्थान जहाँ धरती और आकाश मिलते दिखें, दृष्टि-सीमा
झुरमुटपास-पास उगे पेड़ या झाड़ों का समूह
बीहड़ऊबड़-खाबड़, विकट
सीपी/सीपशंख-घोंघे की जाति का जलचर प्राणी
दार्शनिकदर्शनशास्त्र का जानकार, तत्त्ववेत्ता
अर्घ्यपूजा में देने योग्य वस्तु
कडल-काकपक्षियों की एक प्रजाति
सुरमईहल्का नीला, सुरमे के रंग का
सिर धुननाशोक या पश्चाताप में सिर पीटना
मल्लाहनाव चलाने वाला

कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 5 मुहावरे, उनका अर्थ तथा वाक्य-प्रयोग

व्याकरण – क्रिया-विशेषण

कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 5 का व्याकरण खंड “क्रिया-विशेषण” पर केंद्रित है। यह परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
क्रिया-विशेषण क्या होता है?
जिस प्रकार संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द “विशेषण” कहलाते हैं, उसी प्रकार क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द “क्रिया-विशेषण” कहलाते हैं।
गंगा पुस्तक कक्षा 9 हिंदी पाठ 5 से उदाहरण – “तट की चौड़ाई धीरे-धीरे कम होती जा रही थी।” यहाँ “धीरे-धीरे” क्रिया-विशेषण है जो “कम होने” की क्रिया की विशेषता बता रहा है।

कक्षा 9 गंगा पाठ 5 में आए क्रिया-विशेषण और उनका वाक्य में प्रयोग

वाक्यक्रिया-विशेषणजिस क्रिया की विशेषता बताई
मैं जल्दी-जल्दी चलने लगाजल्दी-जल्दीचलने लगा
धीरे-धीरे वह पूरा डूब गयाधीरे-धीरेडूब गया
मैं देर तक चट्टान को देखता रहादेर तकदेखता रहा
टोलियाँ उस दिशा में जा रही थींउस दिशा मेंजा रही थीं
लहरें कटती हुई आती थींकटती हुईआती थीं

क्रिया-विशेषण के प्रकार

  • कालवाचक क्रिया-विशेषण – जो क्रिया के समय का बोध कराए। जैसे – देर तक, अभी, तब, फिर, कभी।
  • स्थानवाचक क्रिया-विशेषण – जो क्रिया के स्थान का बोध कराए। जैसे – उस दिशा में, वहाँ, यहाँ, ऊपर, नीचे।
  • रीतिवाचक क्रिया-विशेषण – जो क्रिया के ढंग का बोध कराए। जैसे – धीरे-धीरे, जल्दी-जल्दी, तेजी से।
  • परिमाणवाचक क्रिया-विशेषण – जो क्रिया की मात्रा का बोध कराए। जैसे – बहुत, थोड़ा, अधिक, कम।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

अति लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर

  1. “आखिरी चट्टान तक” यात्रा-वृत्तांत के लेखक कौन हैं?
    उत्तर:
    “आखिरी चट्टान तक” के लेखक मोहन राकेश हैं जो हिंदी के प्रसिद्ध नाटककार और बहुमुखी रचनाकार थे।
  2. कन्याकुमारी किन तीन सागरों के संगम पर स्थित है?
    उत्तर:
    कन्याकुमारी अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी – इन तीनों के संगम-स्थल पर स्थित है।
  3. विवेकानंद चट्टान का क्या महत्व है?
    उत्तर:
    इस चट्टान पर कभी स्वामी विवेकानंद ने समाधि लगाई थी। यह भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान है और बंगाल की खाड़ी की भौगोलिक सीमा यहीं समाप्त होती है।
  4. “शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति” – लेखक ने यह कब महसूस किया?
    उत्तर:
    जब लेखक तीनों ओर क्षितिज तक पानी-ही-पानी देख रहा था और हिंद महासागर की विशालता में खो गया था, तब उसने यह महसूस किया।
  5. “सैंड हिल” का क्या अर्थ है और यह कहाँ थी?
    उत्तर:
    “सैंड हिल” का अर्थ है बालू का टीला। यह कन्याकुमारी के पश्चिमी तट-रेखा के एक मोड़ पर पीली रेत का ऊँचा टीला था।
  6. कन्याकुमारी के ग्रेजुएट नवयुवक ने अपनी क्या समस्या बताई?
    उत्तर:
    उसने बताया कि कन्याकुमारी की आठ हजार की आबादी में चार-पाँच सौ शिक्षित नवयुवक बेकार हैं जिनका काम नौकरियों के लिए अर्जियाँ देना और बहस करना है।
  7. विवेकानंद चट्टान पर जाने के लिए किस नाव का उपयोग हुआ?
    उत्तर:
    रबड़ के पेड़ के तीन तनों को साथ-साथ जोड़कर बनाई गई एक छोटी मछुआ नाव में लेखक चट्टान पर गया।
  8. सूर्यास्त के समय रंगों का क्या क्रम था?
    उत्तर:
    पानी पर सोना बहा, फिर लहू-सा लाल हुआ, फिर बैजनी और अंत में काला पड़ गया।
  9. लेखक ने रेत को क्यों हाथों और पाँवों से मसला?
    उत्तर:
    तट पर अनेक अनाम रंगों की रेत थी जो लेखक ने पहले कभी नहीं देखी थी। उसका मन था कि हर रंग की थोड़ी रेत अपने पास रखे, इसलिए उसने छूकर अनुभव किया।
  10. “मैं कुछ देर भूला रहा कि मैं मैं हूँ” – इसका क्या आशय है?
    उत्तर:
    इसका आशय है कि समुद्र की विशालता और प्रकृति की भव्यता में खो जाने पर लेखक अपने व्यक्तित्व का बोध ही भूल गया और दृश्य का एक अंग बन गया।
  11. लेखक ने तट से वापसी का रास्ता क्यों चुना?
    उत्तर:
    रेत के टीलों के बीच अँधेरे में भटकने का डर था। तट का रास्ता निश्चित रूप से केप होटल तक ले जाने वाला था इसलिए लेखक ने तट से वापसी का निर्णय किया।
  12. विवेकानंद चट्टान पर पहुँचने पर लेखक का डर कहाँ उतर गया?
    उत्तर:
    चट्टान पर पहुँचकर डर लेखक की टाँगों में उतर गया और वहाँ बैठे हुए भी वे हल्के-हल्के काँप रही थीं।
  13. कन्याकुमारी के मंदिर में क्या हो रहा था?
    उत्तर:
    कन्याकुमारी के मंदिर में पूजा की घंटियाँ बज रही थीं और भक्तों की एक मंडली अंदर जाने से पहले मंदिर की दीवार के पास रुककर उसे प्रणाम कर रही थी।
  14. “कडल-काक” क्या होते हैं?
    उत्तर:
    कडल-काक पक्षियों की एक प्रजाति है जो समुद्री तट पर पाई जाती है। ये विवेकानंद चट्टान के आसपास तैर रहे थे।
  15. मोहन राकेश को कौन-सा पुरस्कार मिला था?
    उत्तर:
    मोहन राकेश को “आषाढ़ का एक दिन” नाटक के लिए “संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार” से सम्मानित किया गया था।

लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर

  1. “शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति” – इस पंक्ति का क्या भाव है?
    उत्तर:
    कन्याकुमारी में तीनों ओर क्षितिज तक पानी देखकर लेखक ने समुद्र की असीम शक्ति और विशालता को एक साथ अनुभव किया। शक्ति और विस्तार एक-दूसरे को परिभाषित करते हैं – यही इस पंक्ति का भाव है। प्रकृति की इस महाशक्ति के सामने मनुष्य स्वयं को अत्यंत छोटा अनुभव करता है।
  2. लेखक ने टीले पर बैठकर जो संतुष्टि महसूस की उसका वर्णन कीजिए।
    उत्तर:
    कई टीलों को पार करने के बाद जब अंततः खुला पश्चिमी विस्तार सामने आया, तो लेखक ने ऐसे बैठकर संतुष्टि महसूस की जैसे वह टीला संसार की सबसे ऊँची चोटी हो और सिर्फ उसी ने उसे पहली बार सर किया हो। यह अपने प्रयत्न की सार्थकता का आनंद था जो किसी भी लक्ष्य को पाने पर मिलता है।
  3. कन्याकुमारी के तट की रेत को लेखक ने अनोखा क्यों बताया?
    उत्तर:
    कन्याकुमारी के तट पर सुरमई, खाकी, पीली और लाल के अलावा अनगिनत अनाम रंगों की रेत थी। हर एक इंच पर रंग अलग-अलग था और हर रंग में कई रंगों की झलक थी। लेखक ने पहले कभी कहीं ऐसे रंग नहीं देखे थे, इसलिए उसका मन था कि हर रंग की थोड़ी रेत साथ ले जाए।
  4. कन्याकुमारी के नवयुवकों की समस्या से हमें क्या सीखने को मिलता है?
    उत्तर:
    कन्याकुमारी में शिक्षित होने के बाद भी नवयुवक बेकार हैं और उनका काम केवल अर्जियाँ देना और बहस करना है। यह बेकारी की राष्ट्रीय समस्या की ओर संकेत है। ग्रेजुएट नवयुवक की यह टिप्पणी – “हम सीपियों का गूदा खाते हैं और दार्शनिक बहस करते हैं” – विडंबना को उजागर करती है।
  5. लेखक का रात को तट से वापसी का प्रसंग क्या सिखाता है?
    उत्तर:
    जब पानी बढ़ने लगा और तट सिकुड़ने लगा तब लेखक ने सूझबूझ से तुरंत निर्णय लिया। डर को दिखावटी उदासीनता से दबाए रखा। एक चट्टान से टकराने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी। यह प्रसंग सिखाता है कि संकट में घबराने की बजाय त्वरित और सही निर्णय लेना चाहिए।
  6. “आखिरी चट्टान तक” यात्रा-वृत्तांत में सामाजिक यथार्थ का चित्रण कहाँ मिलता है?
    उत्तर:
    कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 5 में सामाजिक यथार्थ का चित्रण मुख्यतः विवेकानंद चट्टान पर ग्रेजुएट नवयुवक के साथ बातचीत में आता है। बेकारी की समस्या, शिक्षित युवाओं का छोटे-मोटे काम करना और सरकारी मेहमानों तथा स्थानीय लोगों के बीच की खाई – ये सब एक साथ चित्रित हैं।
  7. लेखक की मानसिक दृढ़ता का परिचय किन दो प्रसंगों में मिलता है?
    उत्तर:
    पहला प्रसंग – टीलों को पार करना। टाँगें थक रही थीं पर मन थकने को तैयार नहीं था और एक के बाद एक टीले पार करता गया। दूसरा प्रसंग – नाव में विवेकानंद चट्टान पर जाते समय डर को “दिखावटी उदासीनता” से ढक रखा। दोनों ही प्रसंगों में दृढ़ता और साहस स्पष्ट दिखती है।
  8. “अपने पैरों के निशानों को देखा, लगा जैसे रेत पहली बार उन निशानों से टूटी हो” – इस पंक्ति का भाव क्या है?
    उत्तर:
    गंगा पुस्तक कक्षा 9 हिंदी पाठ 5 की यह पंक्ति लेखक की संवेदनशीलता और क्षणभंगुरता के बोध को व्यक्त करती है। सुनहली किरणों में रेत पर बने पाँवों के निशान देखकर एहसास हुआ कि वे निशान अनोखे और पहले की तरह हैं, लेकिन शीघ्र ही मिट जाएँगे। इससे हल्की उदासी और सिहरन पैदा हुई।
  9. “रंगहीन बिंदु, मैं” – इस वाक्यांश से लेखक ने क्या कहना चाहा?
    उत्तर:
    सैंड हिल पर रंगीन रेशमी वस्त्रों में सजी नवयुवतियाँ एक रंगीन कैनवस की तरह थीं। उनके बीच लेखक स्वयं को “रंगहीन बिंदु” कहता है। यह एक साहित्यिक और विनोदी आत्म-मूल्यांकन है जो दिखाता है कि उस रंगीन परिवेश में लेखक की उपस्थिति अलग और सादी थी।
  10. “आखिरी चट्टान तक” की भाषा-शैली की दो प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
    उत्तर:
    पहली विशेषता है चित्रात्मकता – “बलखाती लहरें चट्टानों से कटती हुई आती थीं जिससे चूरे बूँदों की जालियाँ बन जाती थीं” जैसे वाक्य पाठक के सामने जीवंत दृश्य उपस्थित करते हैं। दूसरी विशेषता है रंगों का भावात्मक प्रयोग – सोना, लहू, बैजनी, काला – सूर्यास्त के रंगों के माध्यम से भावनाओं का सूक्ष्म चित्रण किया गया है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर

  1. कक्षा 9 हिंदी गंगा के पाँचवें अध्याय “आखिरी चट्टान तक” के आधार पर यात्रा-वृत्तांत विधा की प्रमुख विशेषताओं की व्याख्या कीजिए।
    उत्तर:
    गंगा पुस्तक कक्षा 9 हिंदी पाठ 5 यात्रा-वृत्तांत विधा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। मोहन राकेश ने केवल स्थान का वर्णन नहीं किया बल्कि छह तत्वों को एक साथ समेटा है। पहला – दृश्य-वर्णन, जिसमें समुद्र, चट्टानें, लहरें और रेत का जीवंत चित्रण है। दूसरा – आत्मानुभूति, जिसमें विस्मय, रोमांच, भय और क्षणभंगुरता का बोध है। तीसरा – सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य, जिसमें विवेकानंद चट्टान, मंदिर और स्थानीय जनजीवन है। चौथा – जीवन-दर्शन, जैसे “शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति”। पाँचवाँ – शैलीगत विशेषताएँ, जैसे रूपक, उपमा और रंगों का भावात्मक प्रयोग। छठा – रोमांच व संघर्ष, जैसे लहरों से बचकर तट पर लौटने का प्रसंग। इन सभी तत्वों के समन्वय से यह यात्रा-वृत्तांत पाठक को ऐसा अनुभव कराता है कि वह स्वयं लेखक के साथ यात्रा कर रहा हो।
  2. “आखिरी चट्टान तक” में प्रकृति का वर्णन और लेखक की आत्मानुभूति किस प्रकार एक-दूसरे से जुड़े हैं? कक्षा 9 गंगा अध्याय 5 के आधार पर विस्तार से लिखिए।
    उत्तर:
    कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 5 में प्रकृति और आत्मानुभूति का अद्भुत समन्वय है। जब लेखक समुद्र की विशालता देखता है तो अपना अस्तित्व भूल जाता है और “बड़ी-बड़ी चट्टानों के बीच एक छोटी-सी चट्टान” बन जाता है। सूर्यास्त के बदलते रंग – सोना, लहू, बैजनी, काला – उसके मन में कई भावनाएँ जगाते हैं। रेत पर अपने पाँवों के निशान देखकर हल्की उदासी घिरती है जो क्षणभंगुरता का बोध है। रंगीन रेत को हाथों से मसलने की इच्छा और उसे पास न रख पाने की पीड़ा प्रकृति के साथ गहरे लगाव को दर्शाती है। इस पाठ में प्रकृति केवल दृश्य नहीं, बल्कि लेखक का दर्पण है जिसमें वह अपनी अनुभूतियों को देखता है।
  3. कन्याकुमारी के स्थानीय जीवन का चित्रण “आखिरी चट्टान तक” में किस प्रकार हुआ है? गंगा पुस्तक कक्षा 9 हिंदी पाठ 5 के आधार पर लिखिए।
    उत्तर:
    कक्षा 9 हिंदी गंगा के पाँचवें अध्याय में कन्याकुमारी के स्थानीय जीवन के कई पहलू सामने आते हैं। सैंड हिल पर नवयुवतियाँ सुंदर रेशमी वस्त्र पहनकर सूर्यास्त देख रही हैं। गवर्नमेंट गेस्ट हाउस के बैरे सरकारी मेहमानों को कॉफी पिला रहे हैं। दो स्थानीय नवयुवतियाँ शंख-मालाएँ बेचती हैं। मंदिर में भक्त अर्घ्य देते हैं। मछुआरे नाव चलाते हैं। सबसे महत्वपूर्ण है ग्रेजुएट नवयुवक का चित्रण जो फोटो-एल्बम बेचकर जीविका चलाता है और बेकारी की पीड़ा बयान करता है। यह सब दिखाता है कि एक ही स्थान पर पर्यटकों की सुविधा, धार्मिक जीवन और आर्थिक संघर्ष एक साथ चलते हैं।
  4. “आखिरी चट्टान तक” के लेखक मोहन राकेश की भाषा-शैली की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कक्षा 9 गंगा पाठ 5 के उदाहरणों सहित कीजिए।
    उत्तर:
    गंगा पुस्तक कक्षा 9 हिंदी के पाँचवें अध्याय में मोहन राकेश की भाषा-शैली अत्यंत प्रभावशाली है। पहली विशेषता है चित्रात्मकता – “बलखाती लहरें चट्टानों से कटती हुई आती थीं जिससे चूरे बूँदों की जालियाँ बन जाती थीं” – यह वाक्य आँखों के सामने दृश्य खींच देता है। दूसरी विशेषता है रंगों का भावात्मक प्रयोग – सूर्यास्त में सोना, लहू, बैजनी और काला – ये रंग भावों की अभिव्यक्ति करते हैं। तीसरी विशेषता है उपमाएँ – “जैसे वह टीला संसार की सबसे ऊँची चोटी हो”, “झुरमुट जैसे सिर धुन रहे थे और हाथ-पैर पटक रहे थे।” चौथी विशेषता है क्रिया-विशेषणों का सटीक प्रयोग – “धीरे-धीरे”, “जल्दी-जल्दी”, “देर तक” – जो दृश्य को गतिशील बनाते हैं। पाँचवीं विशेषता है दार्शनिक अभिव्यक्ति – “शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति” जैसे वाक्य गहरे जीवन-दर्शन को छोटे से वाक्य में समेटते हैं।
  5. कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 5 के आधार पर बताइए कि एक अच्छे यात्री के क्या गुण होने चाहिए?
    उत्तर:
    गंगा पुस्तक कक्षा 9 हिंदी पाठ 5 “आखिरी चट्टान तक” में मोहन राकेश के यात्री व्यक्तित्व से कई महत्वपूर्ण गुण उभरते हैं। पहला – जिज्ञासा और खोज की प्रवृत्ति। लेखक सूर्यास्त का पूरा दृश्य देखने के लिए एक के बाद एक टीले पार करता है, टाँगें थकती हैं पर रुकता नहीं। दूसरा – संवेदनशीलता। रंगीन रेत, पाँवों के निशान, बदलते रंग – सब कुछ मन में गहराई से उतरता है। तीसरा – साहस और दृढ़ता। नाव में डर को छिपाकर बैठना और तट पर खतरे में त्वरित निर्णय लेना। चौथा – सामाजिक दृष्टि। केवल दृश्य ही नहीं, स्थानीय लोगों की समस्याओं को भी देखना और समझना। पाँचवाँ – आत्म-चिंतन। यात्रा के दौरान केवल बाहर नहीं, भीतर भी देखना। यही गुण किसी यात्री को सैलानी से लेखक बनाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

“आखिरी चट्टान तक” किस विधा का पाठ है और यह कक्षा 9 हिंदी गंगा के किस अध्याय में है?

“आखिरी चट्टान तक” कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 5 है और यह यात्रा-वृत्तांत विधा में लिखा गया है। यात्रा-वृत्तांत गद्य की वह विधा है जिसमें लेखक अपनी यात्रा के अनुभवों, दृश्यों, लोगों और भावनाओं को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करता है। गंगा पुस्तक कक्षा 9 हिंदी में यह पहला और एकमात्र यात्रा-वृत्तांत है।

कक्षा 9 गंगा पाठ 5 में क्रिया-विशेषण कैसे पहचानें और परीक्षा में इसे कैसे लिखें?

गंगा पुस्तक कक्षा 9 हिंदी के पाँचवें अध्याय में क्रिया-विशेषण वह शब्द होता है जो क्रिया की विशेषता बताए। परीक्षा में तीन स्तंभ बनाकर लिखें – वाक्य, क्रिया-विशेषण और जिस क्रिया की विशेषता बताई जा रही है। जैसे “मैं जल्दी-जल्दी चलने लगा” में “जल्दी-जल्दी” क्रिया-विशेषण है जो “चलने लगा” क्रिया की रीति बताता है। “धीरे-धीरे”, “देर तक”, “उस दिशा में” – ये सब कक्षा 9 गंगा अध्याय 5 के प्रमुख क्रिया-विशेषण हैं।

कक्षा 9 गंगा पाठ 5 को जल्दी याद करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?

कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 5 को याद करने के लिए पाठ को तीन भागों में बाँटें – पहला भाग आखिरी चट्टान का दृश्य, दूसरा भाग सूर्यास्त और टीलों की यात्रा तथा तट पर खतरा, और तीसरा भाग विवेकानंद चट्टान पर सूर्योदय। हर भाग के दो-तीन मुख्य वाक्य याद करें। “शक्ति का विस्तार”, “हाथों के सभी तोते” की तरह गंगा पुस्तक के इस पाठ से “धीरे-धीरे” और क्रिया-विशेषण के उदाहरण याद रखें।

कक्षा 9 हिंदी गंगा पाठ 5 को कक्षा में रोचक ढंग से कैसे पढ़ाएँ?

कक्षा 9 गंगा अध्याय 5 को पढ़ाने का सबसे प्रभावशाली तरीका है कि पहले कन्याकुमारी का नक्शा और तस्वीरें दिखाएँ। फिर पाठ को तीन दृश्यों में बाँटकर पढ़ाएँ। “टाँगें थक रही थीं पर मन थकने को तैयार नहीं था” – इस वाक्य पर चर्चा करें कि बच्चों के जीवन में कब ऐसा हुआ। रंगों पर आधारित सूर्यास्त का वर्णन बच्चों को खुद लिखने को दें। गंगा पुस्तक कक्षा 9 हिंदी के इस अध्याय में एनसीईआरटी की “प्रकृति की ओर” गतिविधि बच्चों को सूर्योदय-सूर्यास्त देखकर लिखने का अवसर देती है जो बहुत प्रभावशाली है।

एनईपी 2020 की दृष्टि से कक्षा 9 गंगा पाठ 5 की क्या प्रासंगिकता है?

एनईपी 2020 में अनुभव-आधारित शिक्षा, यात्रा और खोज को महत्व दिया गया है। कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 5 इस दृष्टि से पूर्णतः प्रासंगिक है। “प्रकृति की ओर” खंड बच्चों को बाहर जाकर प्रकृति का अनुभव करने को प्रेरित करता है। “मेरे देश की धरती” खंड भौगोलिक जागरूकता बढ़ाता है। “हस्तशिल्प कौशल” और “मिलकर चलें” खंड एनईपी की समग्र विकास की अवधारणा को प्रतिबिंबित करते हैं। “भाषा संगम” में “नाव” शब्द अनेक भाषाओं में देना बहुभाषिक शिक्षा की नीति का पालन है।

क्या कन्याकुमारी की यात्रा बच्चों को कक्षा 9 गंगा पाठ 5 को बेहतर समझने में मदद करेगी?

हाँ, यदि संभव हो तो कन्याकुमारी की यात्रा अवश्य करें क्योंकि गंगा पुस्तक कक्षा 9 हिंदी के इस अध्याय का पूरा आनंद उस स्थान को देखकर ही आ सकता है। यदि यात्रा संभव न हो तो यूट्यूब पर कन्याकुमारी के सूर्योदय और सूर्यास्त के वीडियो दिखाएँ, विवेकानंद चट्टान स्मारक की जानकारी इंटरनेट से प्राप्त करें। इससे बच्चे “शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति” जैसे भावों को बेहतर समझ सकेंगे।

कक्षा 9 गंगा पाठ 5 से परीक्षा में कौन-से प्रश्न सबसे अधिक पूछे जाते हैं?

कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 5 से परीक्षा में प्रायः पूछे जाने वाले विषय हैं – “शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति” का भाव, लेखक ने सूर्यास्त का दृश्य कहाँ से देखा, टीले पार करने का प्रसंग और उसका संदेश, कन्याकुमारी के नवयुवकों की समस्या, क्रिया-विशेषण की पहचान, यात्रा-वृत्तांत विधा की विशेषताएँ और लेखक की मानसिक दृढ़ता के उदाहरण।

कक्षा 9 गंगा पाठ 5 का मूल्यांकन किन बिंदुओं पर होना चाहिए?

कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 5 का मूल्यांकन इन प्रमुख बिंदुओं पर किया जाना चाहिए – यात्रा-वृत्तांत विधा के तत्वों की समझ, लेखक के दृश्य-वर्णन और आत्मानुभूति के बीच संबंध स्पष्ट करना, क्रिया-विशेषण की सही पहचान और प्रयोग, पाठ के दार्शनिक वाक्यों का भाव समझाना, कन्याकुमारी के सामाजिक यथार्थ की समझ और बच्चे की अपनी किसी यात्रा का वृत्तांत लिखने की क्षमता। गंगा पुस्तक कक्षा 9 हिंदी पाठ 5 की गतिविधियों जैसे ब्रॉशर बनाना, मानचित्र अंकन और यात्रा-संस्मरण लेखन पर भी अंक दिए जाने चाहिए।