एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 4 विद्युत – चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव
कक्षा 8 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 4 विद्युत – चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव एनसीईआरटी समाधान सत्र 2026-27 के लिए यहाँ दिया गया है। इसमें विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव, विद्युत-चुंबक, तापीय प्रभाव और बैटरियों से विद्युत उत्पादन की अवधारणाएँ समझाई गई हैं। यह अध्याय प्रयोगों, गतिविधियों और दैनिक जीवन के उदाहरणों के माध्यम से विद्युत और चुंबकत्व के संबंध को स्पष्ट करता है।
इस पाठ के अंत में दिए गए प्रश्नों के उत्तर नीचे दिए गए हैं जो इस अध्याय को समझने के लिए मददगार सभी होंगे:
कक्षा 8 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 4 के प्रश्न उत्तर
1. रिक्त स्थान भरिए —
(i) वोल्टीय सेल में प्रयुक्त होने वाला विलयन ______________ कहलाता है।
(ii) एक धारावाही कुंडली ______________ की भाँति व्यवहार करती है।
उत्तर:
(i) वोल्टीय सेल में प्रयुक्त होने वाला विलयन विद्युत-अपघट्य कहलाता है।
(ii) एक धारावाही कुंडली चुंबक की भाँति व्यवहार करती है।
2. सही विकल्प चुनिए —
(i) शुष्क सेल, वोल्टीय सेल की तुलना में कम सुवाह्य है। (सत्य/असत्य)
(ii) कुंडली तभी विद्युत-चुंबक बनती है जब कुंडली से विद्युत धारा प्रवाहित होती है। (सत्य/असत्य)
(iii) एक सेल के उपयोग से बना विद्युत-चुंबक दो सेलों की बैटरी के उपयोग से बने उसी विद्युत-चुंबक की अपेक्षा लोहे के अधिक कागज-क्लिपों को आकर्षित करता है। (सत्य/असत्य)
उत्तर:
(i) असत्य। शुष्क सेल, वोल्टीय सेल की तुलना में अधिक सुवाह्य (portable) होता है क्योंकि इसमें द्रव नहीं होता बल्कि गाढ़ी नम लेई होती है जिससे यह आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है।
(ii) सत्य। जब कुंडली से विद्युत धारा प्रवाहित होती है तभी वह चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है और विद्युत-चुंबक की भाँति व्यवहार करती है। धारा रोकते ही चुंबकीय प्रभाव समाप्त हो जाता है।
(iii) असत्य। दो सेलों की बैटरी अधिक विद्युत धारा प्रदान करती है जिससे प्रबल चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। इसलिए दो सेलों की बैटरी से बना विद्युत-चुंबक एक सेल से बने विद्युत-चुंबक की अपेक्षा अधिक क्लिपों को आकर्षित करता है।
3. किसी निक्रोम के तार में अल्प समय के लिए विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है।
(i) तार गरम हो जाता है।
(ii) तार के नीचे रखे चुंबकीय दिक्सूचक की सुई विक्षेपित हो जाती है।
सही विकल्प का चयन कीजिए —
(क) केवल विकल्प (i) सही है।
(ख) केवल विकल्प (ii) सही है।
(ग) विकल्प (i) और (ii) दोनों सही हैं।
(घ) विकल्प (i) और (ii) दोनों सही नहीं हैं।
उत्तर:
सही उत्तर (ग) है — विकल्प (i) और (ii) दोनों सही हैं।
जब निक्रोम के तार में विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो दो प्रभाव एक साथ होते हैं। पहला — निक्रोम का प्रतिरोध अधिक होने के कारण विद्युत ऊर्जा का कुछ भाग तापीय ऊर्जा में बदल जाता है जिससे तार गरम हो जाता है — यह विद्युत धारा का तापीय प्रभाव है। दूसरा — धारावाही तार के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है जो नीचे रखी दिक्सूचक सुई को विक्षेपित करता है — यह विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव है।
4. स्तंभ ‘क’ में दिए गए एकांशों का मिलान स्तंभ ‘ख’ में दिए गए एकांशों से कीजिए।
| स्तंभ ‘क’ | स्तंभ ‘ख’ |
|---|---|
| (i) वोल्टीय सेल | (क) विद्युत तापक हेतु सर्वाधिक उपयुक्त |
| (ii) विद्युत इस्तरी | (ख) विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव पर कार्य करती है |
| (iii) निक्रोम तार | (ग) विद्युत धारा के तापीय प्रभाव पर कार्य करती है |
| (iv) विद्युत-चुंबक | (घ) रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा विद्युत उत्पन्न करती है |
उत्तर:
| स्तंभ ‘क’ | स्तंभ ‘ख’ |
|---|---|
| (i) वोल्टीय सेल | (घ) रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा विद्युत उत्पन्न करती है |
| (ii) विद्युत इस्तरी | (ग) विद्युत धारा के तापीय प्रभाव पर कार्य करती है |
| (iii) निक्रोम तार | (क) विद्युत तापक हेतु सर्वाधिक उपयुक्त |
| (iv) विद्युत-चुंबक | (ख) विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव पर कार्य करती है |
5. सामान्यतः विद्युत-तापन युक्तियों में निक्रोम तार का उपयोग किया जाता है क्योंकि यह
(i) विद्युत का सुचालक है।
(ii) किसी निश्चित परिमाण की विद्युत धारा के लिए अधिक ऊष्मा उत्पन्न करता है।
(iii) ताँबे की अपेक्षा सस्ता है।
(iv) विद्युत का कुचालक है।
उत्तर:
(ii) किसी निश्चित परिमाण की विद्युत धारा के लिए अधिक ऊष्मा उत्पन्न करता है।
6. विद्युत-तापन युक्तियों (जैसे — विद्युत कक्ष-तापक अथवा विद्युत हीटर) को प्रायः पारंपरिक तापन विधियों (जैसे — लकड़ी अथवा चारकोल जलाना) की तुलना में अधिक सुविधाजनक माना जाता है। समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए इस कथन के समर्थन हेतु कारण बताइए।
उत्तर:
विद्युत-तापन युक्तियाँ पारंपरिक तापन विधियों से कई कारणों से बेहतर हैं —
- पर्यावरणीय लाभ: लकड़ी और चारकोल जलाने से धुआँ, कार्बन डाइऑक्साइड और हानिकारक गैसें उत्पन्न होती हैं जो वायु प्रदूषण बढ़ाती हैं। विद्युत तापन युक्तियाँ उपयोग के स्थान पर कोई प्रत्यक्ष प्रदूषण नहीं फैलातीं।
- स्वास्थ्य लाभ: लकड़ी या चारकोल के धुएँ से श्वसन संबंधी रोग होते हैं, विशेषकर घर के भीतर। विद्युत तापन से ऐसा कोई खतरा नहीं।
- सुविधा और सुरक्षा: विद्युत युक्तियों में स्वचालित तापमान नियंत्रण होता है। इन्हें आसानी से चालू-बंद किया जा सकता है। आग लगने का खतरा कम होता है।
- वनों की रक्षा: लकड़ी जलाने से वनों की कटाई होती है। विद्युत तापन से यह दबाव कम होता है जो पर्यावरण और समाज दोनों के लिए लाभदायक है।
- दक्षता: विद्युत तापन अधिक कुशल है — उत्पन्न अधिकांश ऊर्जा सीधे उपयोग में आती है, जबकि लकड़ी जलाने में बहुत ऊर्जा व्यर्थ होती है।
7. चित्र 4.4 (क) का अवलोकन कीजिए। यदि इसमें कुंडली के समीप रखे दिक्सूचक की सुई में विक्षेपण होता है तो —
(i) विद्युत धारा का पथ दर्शाने हेतु आरेख पर तीर का चिह्न लगाइए।
(ii) स्पष्ट कीजिए कि कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर दिक्सूचक सुई क्यों घूमती है?
(iii) यदि आप बैटरी के सिरों को उल्टा कर देते हैं तो पूर्वानुमान लगाइए कि विक्षेप पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
(i) विद्युत धारा बैटरी के धनात्मक (+) सिरे से निकलकर कुंडली के एक सिरे से प्रवेश करती है, कुंडली के फेरों से होते हुए दूसरे सिरे से बाहर निकलती है और फिर बैटरी के ऋणात्मक (-) सिरे पर वापस पहुँचती है। आरेख में तीर का चिह्न बैटरी के + सिरे से कुंडली की ओर और कुंडली से वापस बैटरी के – सिरे की ओर लगाया जाएगा।
(ii) जब कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव के कारण कुंडली के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। कुंडली एक विद्युत-चुंबक की भाँति व्यवहार करने लगती है जिसके दो ध्रुव (उत्तर और दक्षिण) होते हैं। दिक्सूचक सुई स्वयं एक छोटा चुंबक होती है। जब इसे कुंडली के समीप रखा जाता है तो कुंडली के चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव से सुई विक्षेपित हो जाती है क्योंकि चुंबकों के विपरीत ध्रुव एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
(iii) यदि बैटरी के सिरे उल्टे कर दिए जाएँ तो कुंडली में विद्युत धारा की दिशा विपरीत हो जाएगी। इससे कुंडली के उत्तर और दक्षिण ध्रुव आपस में बदल जाएँगे। परिणामस्वरूप दिक्सूचक सुई का विक्षेपण पहले की विपरीत दिशा में होगा। यदि पहले सुई बाईं ओर विक्षेपित हुई थी तो अब दाईं ओर विक्षेपित होगी।
8. मान लीजिए कि अध्याय के आरंभ में उल्लिखित कहानी में सुमना अपने उत्थापक विद्युत-चुंबक प्रदर्श के स्विच को ऑफ करना भूल जाती है। कुछ समय पश्चात लोहे की कील लोहे से बनी कागज-क्लिपों को नहीं उठा पाती है परंतु लोहे की कील के चारों ओर लपेटा गया तार अभी भी गरम है। उत्थापक विद्युत-चुंबक ने क्लिपों को उठाना क्यों बंद कर दिया? संभावित कारण बताइए।
उत्तर:
सेल/बैटरी का निष्क्रिय हो जाना: लंबे समय तक लगातार धारा प्रवाहित होते रहने के कारण सेल या बैटरी के भीतर की रासायनिक अभिक्रिया में उपयोग होने वाले आवश्यक रसायन समाप्त हो गए होंगे। इससे बैटरी निष्क्रिय हो गई और विद्युत धारा का प्रवाह बंद हो गया। जब कुंडली में धारा का प्रवाह बंद हो जाता है तो चुंबकीय क्षेत्र समाप्त हो जाता है और विद्युत-चुंबक अपना चुंबकीय प्रभाव खो देता है, इसलिए क्लिपें नहीं उठती। तार का अभी भी गरम रहना यह दर्शाता है कि तापीय प्रभाव के कारण तार में ऊष्मा जमा हो गई थी जो धीरे-धीरे ठंडी हो रही है। यह तापीय प्रभाव तब तक बना रह सकता है जब तक तार ठंडा नहीं हो जाता।
9. चित्र 4.12 (क) और (ख) में से किस चित्र में स्विच बंद (ऑन) होने पर एल.ई.डी. दीप्त होगी?
उत्तर:
चित्र (क) में नींबू का रस विद्युत-अपघट्य का कार्य करता है। नींबू के रस में अम्ल होता है जो आयनों में विभाजित होकर विद्युत का चालन कर सकता है। लोहे की कील और ताँबे की पत्ती भिन्न-भिन्न धातुओं के इलेक्ट्रोड हैं। इन इलेक्ट्रोडों और विद्युत-अपघट्य के बीच रासायनिक अभिक्रिया से विद्युत धारा उत्पन्न होती है, जिससे एल.ई.डी. दीप्त होती है।
चित्र (ख) में शुद्ध जल है। शुद्ध जल विद्युत का कुचालक होता है क्योंकि इसमें आयन नहीं होते। इसलिए इसमें विद्युत धारा प्रवाहित नहीं होगी और एल.ई.डी. दीप्त नहीं होगी।
10. नेहा ठीक वैसी ही कुंडली लेती है जैसी क्रियाकलाप 4.4 में ली गई थी किंतु वह इसके भीतर से लोहे की कील को बाहर निकाल देती है जिससे केवल तार से बनी कुंडली ही रह जाती है। क्या कुंडली अभी भी दिक्सूचक सुई को विक्षेपित करेगी? यदि हाँ, तो क्या विक्षेपण पहले की तुलना में अधिक होगा अथवा कम?
उत्तर:
हाँ, कुंडली अभी भी दिक्सूचक सुई को विक्षेपित करेगी क्योंकि चुंबकीय प्रभाव कुंडली में प्रवाहित विद्युत धारा के कारण होता है, लोहे की कील के कारण नहीं। जब कुंडली से धारा प्रवाहित होती है तो उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है जो दिक्सूचक सुई को विक्षेपित करेगा।
परंतु विक्षेपण पहले की तुलना में कम होगा। इसका कारण यह है कि लोहे की कील एक लौह क्रोड का कार्य करती है जो कुंडली के चुंबकीय प्रभाव को कई गुना बढ़ा देती है। लौह क्रोड की उपस्थिति में चुंबकीय क्षेत्र प्रबल होता है। बिना लोहे की कील के कुंडली का चुंबकीय प्रभाव अपेक्षाकृत कमजोर होगा, इसलिए दिक्सूचक सुई का विक्षेपण कम होगा।
11. चित्र 4.13 में दर्शाए अनुसार हमारे पास लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम एवं निक्रोम की बनी एक जैसी आकृति और आकार की चार कुंडलियाँ हैं।
जब कुंडलियों से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो कुंडलियों के समीप रखी दिक्सूचक सुइयाँ विक्षेप दर्शाएँगी —
(i) केवल परिपथ (क) में
(ii) केवल परिपथ (क) और (ख) में
(iii) केवल परिपथ (क), (ख) और (ग) में
(iv) सभी चारों परिपथों में
उत्तर:
(iv) सभी चारों परिपथों में है।
कारण: विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव तब उत्पन्न होता है जब किसी भी चालक से विद्युत धारा प्रवाहित होती है। लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम और निक्रोम — ये चारों पदार्थ विद्युत के सुचालक हैं। इन सभी पदार्थों की कुंडलियों से धारा प्रवाहित होने पर इनके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होगा जो दिक्सूचक सुई को विक्षेपित करेगा।
कक्षा 8 जिज्ञासा अध्याय 4 में क्या पढ़ना है? (What to Study)
इस अध्याय में मुख्य रूप से विद्युत धारा के प्रभाव और उनके उपयोग को समझाया गया है। विद्यार्थी को निम्न मुख्य विषयों का अध्ययन करना चाहिए:
- विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव – जब तार में धारा प्रवाहित होती है तो उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र बनता है।
- विद्युत-चुंबक (Electromagnet) – धारा से बनी अस्थायी चुंबक और उसका कार्य।
- विद्युत धारा का तापीय प्रभाव – तार में धारा प्रवाहित होने पर वह गरम क्यों हो जाता है।
- दैनिक जीवन में उपयोग – हीटर, इस्त्री, इलेक्ट्रिक केतली, हेयर ड्रायर आदि उपकरण।
- सेल और बैटरी से विद्युत उत्पादन – वोल्टायी सेल, शुष्क सेल और पुनः आवेशनीय बैटरियाँ।
अध्याय को कैसे पढ़ें? (How to Study This Chapter)
इस अध्याय को पढ़ते समय केवल रटने के बजाय प्रयोग और अवलोकन आधारित अध्ययन करना चाहिए।
अध्ययन की सही रणनीति:
- पहले परिचय और गतिविधियों (Activities) को ध्यान से पढ़ें।
- प्रत्येक प्रयोग में दिए गए उपकरण और प्रक्रिया को समझें।
- प्रयोग के अवलोकन (Observation) और निष्कर्ष (Conclusion) पर ध्यान दें।
- चित्रों और आरेखों से अवधारणा को समझें।
- अंत में दिए गए सारांश और अभ्यास प्रश्न हल करें।
अध्याय के मुख्य वैज्ञानिक सिद्धांत (Key Scientific Concepts)
इस अध्याय में तीन प्रमुख वैज्ञानिक सिद्धांत बताए गए हैं:
1. विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव
- जब किसी चालक (तार) में धारा प्रवाहित होती है तो उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र बनता है।
- इसी सिद्धांत के आधार पर विद्युत-चुंबक बनाया जाता है।
- यह सिद्धांत सबसे पहले हैंस क्रिश्चियन ओर्स्टेड ने खोजा था।
2. विद्युत धारा का तापीय प्रभाव
- धारा प्रवाहित होने पर तार गरम हो जाता है क्योंकि चालक में प्रतिरोध (Resistance) होता है।
- विद्युत ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा ऊर्जा में बदल जाता है।
3. बैटरियों से विद्युत उत्पादन
सेल या बैटरी में रासायनिक अभिक्रिया से विद्युत धारा उत्पन्न होती है।
उदाहरण:
- वोल्टायी सेल
- शुष्क सेल
- पुनः आवेशनीय बैटरियाँ
किन बिंदुओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए? (Important Points to Focus)
परीक्षा और अवधारणा दोनों के लिए निम्न बिंदु महत्वपूर्ण हैं:
- विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव क्या है।
- विद्युत-चुंबक की संरचना और कार्य।
- विद्युत-चुंबक की शक्ति किन कारकों पर निर्भर करती है:
- धारा की मात्रा
- कुंडली के फेरों की संख्या
- लोहे के कोर का उपयोग
- तापीय प्रभाव का कारण और उपयोग।
- सेल और बैटरी का कार्य सिद्धांत।
- शुष्क सेल और पुनः आवेशनीय बैटरी में अंतर।
परीक्षा की तैयारी कैसे करें? (Exam Preparation Strategy)
इस अध्याय की तैयारी के लिए निम्न तरीकों का पालन करें:
तैयारी चरण-दर-चरण (Step-wise preparation)
- सभी चित्र और प्रयोग अच्छी तरह समझें।
- महत्वपूर्ण शब्दों की परिभाषाएँ याद रखें:
- चुंबकीय क्षेत्र
- विद्युत-चुंबक
- तापीय प्रभाव
- दैनिक जीवन के उदाहरण याद रखें:
- क्रेन में विद्युत-चुंबक
- इलेक्ट्रिक हीटर
- मोबाइल और लैपटॉप की बैटरी
- अध्याय के अंत में दिए गए MCQ, रिक्त स्थान और सत्य-असत्य प्रश्न हल करें।
- स्वयं छोटे प्रयोगों की कल्पना करके समझने का प्रयास करें।
कक्षा 8 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 4 – FAQs
कक्षा 8 विज्ञान अध्याय 4 में मुख्य रूप से क्या पढ़ाया गया है?
इस अध्याय में विद्युत धारा के तीन प्रमुख प्रभावों के बारे में पढ़ाया गया है—
- विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव
- विद्युत धारा का तापीय प्रभाव
- सेल और बैटरी से विद्युत धारा का उत्पादन
इन अवधारणाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाया जाता है कि विद्युत ऊर्जा का उपयोग किस प्रकार विभिन्न उपकरणों में किया जाता है।
कक्षा 8 विज्ञान जिज्ञासा अध्याय 4 का दैनिक जीवन से क्या संबंध है?
इस अध्याय की अवधारणाएँ कई दैनिक उपकरणों में उपयोग होती हैं, जैसे:
- इलेक्ट्रिक हीटर
- इस्त्री
- हेयर ड्रायर
- इलेक्ट्रिक केतली
- क्रेन में प्रयुक्त विद्युत-चुंबक
इन उदाहरणों से बच्चों को विज्ञान का व्यावहारिक उपयोग समझने में मदद मिलती है।
बच्चे कक्षा 8th जिज्ञासा अध्याय 4 को आसानी से कैसे समझ सकते हैं?
अभिभावक बच्चों को निम्न तरीकों से सहायता कर सकते हैं:
- अध्याय में दिए गए चित्र और गतिविधियाँ समझने में मदद करें।
- दैनिक जीवन के उपकरणों के उदाहरण देकर समझाएँ।
- छोटे-छोटे प्रयोगों और प्रश्नों पर चर्चा करें।
जिज्ञासा कक्षा 8 विज्ञान अध्याय 4 को पढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका क्या है?
शिक्षक इस अध्याय को प्रयोग आधारित शिक्षण के माध्यम से पढ़ा सकते हैं।
- गतिविधियाँ और प्रयोग करवाना
- आरेख और मॉडल का उपयोग करना
- वास्तविक जीवन के उदाहरण देना
- इससे छात्रों की अवधारणाएँ अधिक स्पष्ट होती हैं।
कक्षा 8 जिज्ञासा अध्याय 4 के कौन-से विषय परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं?
परीक्षा के दृष्टिकोण से निम्न विषय महत्वपूर्ण हैं:
- विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव
- विद्युत-चुंबक और उसके उपयोग
- विद्युत धारा का तापीय प्रभाव
- सेल और बैटरी का कार्य सिद्धांत
- शुष्क सेल और पुनः आवेशनीय बैटरियाँ
कक्षा 8 विज्ञान अध्याय 4 जिज्ञासा में कौन-से कौशल विकसित होते हैं?
इस अध्याय के माध्यम से छात्रों में निम्न कौशल विकसित होते हैं:
- वैज्ञानिक अवलोकन
- प्रयोगात्मक समझ
- समस्या-समाधान क्षमता
- वैज्ञानिक सोच और तर्क
