एनसीईआरटी समाधान कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 12 शतरंज में मात
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 12 शतरंज में मात – विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय और उनके प्रसिद्ध विदूषक तेनालीरामन पर आधारित एक रोचक नाटक है, जिसमें ईर्ष्यालु दरबारी तेनाली को शतरंज के खेल में फँसाने की चाल चलते हैं, पर तेनाली अपनी चतुराई से हार से बचते हुए मुंडन के दंड को भी सूझबूझ से टाल देते हैं। तीन दृश्यों में बँटे इस नाटक में बातचीत, सोचिए और लिखिए, भाषा की बात तथा पाठ से आगे जैसी गतिविधियाँ दी गई हैं।
एनसीईआरटी कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 12 समाधान
पेज 149 – बातचीत के लिए
1. आपको यह नाटक कैसा लगा और क्यों?
उत्तर:
मुझे यह नाटक बहुत अच्छा लगा। यह नाटक बहुत रोचक और मजेदार है क्योंकि इसमें तेनालीरामन की बुद्धिमानी और चतुराई दिखाई गई है। दरबारियों ने उन्हें फँसाने की कोशिश की, लेकिन तेनालीरामन ने अपनी समझदारी से मुश्किल परिस्थिति को संभाल लिया।
इस नाटक में कई हास्यपूर्ण घटनाएँ हैं, जैसे शतरंज खेलते समय तेनाली का अनाड़ी बनना और अंत में अपनी बुद्धि से मुंडन से बच जाना। इससे यह सीख मिलती है कि कठिन समय में घबराना नहीं चाहिए, बल्कि सोच-समझकर काम करना चाहिए। इसलिए मुझे यह नाटक बहुत अच्छा लगा क्योंकि यह मनोरंजक होने के साथ-साथ हमें अच्छी सीख भी देता है।
2. आपने तेनालीरामन के किस्सों की तरह और किसके बुद्धिमानी के किस्से सुने हैं? उनमें से कोई एक सुनाइए।
उत्तर:
मैंने तेनालीरामन की तरह अकबर और बीरबल के बुद्धिमानी के किस्से भी सुने हैं।
एक बार बादशाह अकबर ने बीरबल से पूछा कि दुनिया में सबसे तेज़ क्या है। दरबारियों ने अलग-अलग उत्तर दिए—किसी ने हवा कहा, किसी ने घोड़ा। लेकिन बीरबल ने कहा कि “सबसे तेज़ मन है, क्योंकि वह पल भर में कहीं भी पहुँच सकता है।” अकबर को बीरबल का उत्तर बहुत पसंद आया और उन्होंने उसकी बहुत प्रशंसा की।
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि समझदारी और सोचने की शक्ति सबसे बड़ी होती है।
3. तेनालीरामन की तरह क्या आपने भी कभी किसी कठिन परिस्थिति को संभाला है? यदि संभाला है तो कैसे?
उत्तर:
हाँ, मैंने भी एक बार कठिन परिस्थिति को संभाला है। एक दिन कक्षा में मेरा होमवर्क पूरा नहीं था और शिक्षक ने सभी बच्चों से कॉपी दिखाने को कहा। मैं बहुत घबरा गया, लेकिन मैंने झूठ नहीं बोला। मैंने शिक्षक से सच-सच बता दिया कि मैं बीमार था, इसलिए होमवर्क नहीं कर पाया।
शिक्षक ने मेरी ईमानदारी देखकर मुझे डाँटा नहीं, बल्कि एक दिन का समय और दे दिया। मैंने उसी दिन मेहनत करके अपना काम पूरा किया।
इस घटना से मैंने सीखा कि कठिन परिस्थिति में घबराने की बजाय सच बोलना और समझदारी से काम लेना चाहिए।
4. यदि तेनालीरामन शतरंज का खेल जानते तो नाटक का अंत क्या होता?
उत्तर:
यदि तेनालीरामन शतरंज का खेल जानते होते, तो नाटक का अंत अलग होता। वे शतरंज बहुत अच्छी तरह खेलते और संभव है कि वे राजा को हरा देते। इससे राजा पहले तो आश्चर्यचकित होते, लेकिन बाद में उनकी बुद्धिमानी से खुश भी होते। दूसरी ओर, यदि राजा जीत जाते, तो भी तेनालीरामन का अपमान नहीं होता क्योंकि वे सही तरीके से खेल रहे होते। दरबारियों की चाल भी सफल नहीं होती, क्योंकि उनका उद्देश्य तेनाली को फँसाना था।
इस प्रकार, नाटक का अंत शांत और सामान्य होता, और तेनालीरामन अपनी बुद्धिमानी के लिए फिर से प्रशंसा पाते।
पेज 149 – सोचिए और लिखिए
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पाठ के आधार पर दीजिए –
(क) सभी दरबारी तेनालीरामन से ईर्ष्या क्यों करते थे?
उत्तर:
सभी दरबारी तेनालीरामन से ईर्ष्या करते थे क्योंकि वे बहुत बुद्धिमान और चतुर थे। राजा हमेशा उनकी बातों की प्रशंसा करते थे और उन्हें अधिक महत्व देते थे। इससे अन्य दरबारियों को लगता था कि उनकी कोई कद्र नहीं हो रही है।
तेनालीरामन अपनी समझदारी से हर समस्या का हल निकाल लेते थे, जिससे उनकी छवि और भी अच्छी बन जाती थी। इसी कारण दरबारियों को उनसे जलन होती थी और वे उन्हें नीचा दिखाने के अवसर खोजते रहते थे।
(ख) दरबारियों ने राजा से तेनालीरामन के बारे में क्या कहा?
उत्तर:
दरबारियों ने राजा से तेनालीरामन के बारे में कहा कि वे शतरंज के बहुत अच्छे खिलाड़ी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि तेनालीरामन बड़े-बड़े खिलाड़ियों को हरा चुके हैं और बहुत चालाक तथा घाघ हैं।
दरबारियों ने जानबूझकर ऐसी बातें कही ताकि राजा तेनालीरामन से शतरंज खेलने के लिए कहें और उन्हें फँसाया जा सके। उनका उद्देश्य तेनालीरामन को मुश्किल में डालना और उनका अपमान करवाना था।
(ग) शतरंज खेलते समय राजा को तेनालीरामन पर क्रोध क्यों आ रहा था?
उत्तर:
शतरंज खेलते समय राजा को तेनालीरामन पर क्रोध आ रहा था क्योंकि तेनालीरामन ठीक से खेल नहीं रहे थे। वे बार-बार गलत और अनाड़ी चालें चल रहे थे, जिससे ऐसा लग रहा था कि वे जानबूझकर हार रहे हैं।
राजा को लगा कि तेनालीरामन उनका अपमान कर रहे हैं और खेल को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इसलिए राजा बार-बार उन्हें समझाते और डाँटते थे, लेकिन जब तेनालीरामन ने फिर भी ठीक से नहीं खेला, तो राजा को बहुत गुस्सा आ गया।
(घ) तेनालीरामन ने मुंडन से बचने के लिए क्या चाल चली?
उत्तर:
तेनालीरामन ने मुंडन से बचने के लिए बहुत चतुर चाल चली। पहले उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने बालों पर पाँच हजार अशर्फियाँ उधार ली हैं, इसलिए जब तक वह ऋण नहीं चुका देंगे, तब तक बाल कटवाना उचित नहीं है।
जब राजा ने पैसे दिलवा दिए, तब भी तेनालीरामन ने एक और चाल चली। उन्होंने कहा कि उनके यहाँ माता-पिता के मरने पर ही मुंडन होता है और अब राजा ही उनके माता-पिता समान हैं। यदि उनका मुंडन हुआ, तो राजा पर संकट आ सकता है।
यह सुनकर राजा डर गए और उन्होंने मुंडन का आदेश वापस ले लिया। इस तरह तेनालीरामन अपनी बुद्धिमानी से बच गए।
(ङ) घर में खेले जाने वाले खेलों में आपको सबसे अच्छा खेल कौन-सा लगता है? वह खेल कैसे खेला जाता है?
उत्तर:
घर में खेले जाने वाले खेलों में मुझे शतरंज खेल सबसे अच्छा लगता है। यह खेल बहुत रोचक और दिमाग से खेलने वाला होता है।
इस खेल में दो खिलाड़ी होते हैं। हर खिलाड़ी के पास राजा, रानी (मंत्री), हाथी, ऊँट, घोड़े और प्यादे होते हैं। सभी मोहरे अलग-अलग तरह से चलते हैं। खेल का मुख्य उद्देश्य सामने वाले खिलाड़ी के राजा को “मात” देना होता है।
यह खेल हमें सोचने, योजना बनाने और धैर्य रखने की सीख देता है। इसलिए मुझे यह खेल बहुत पसंद है।
2. किसने, किससे कहा?

उत्तर:

पेज 150 – भाषा की बात
1. दिए गए शब्दों का मिलान उनके समान अर्थ वाले शब्दों से कीजिए –

उत्तर:

2. मटके में से उपयुक्त विशेषण चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

उत्तर:

3. हर संवाद किसी-न-किसी मनोभाव को अभिव्यक्त करता है। उदाहरण के लिए –
तेनाली – (चकित) शतरंज और मैं! शतरंज के विषय में मैं कुछ नहीं जानता, महाराज।
राजा – (क्रोधित) मुझे सब पता है तेनाली। बात अब छिप नहीं सकती।
(दरबारियों से) क्यों?
आप भी निम्नलिखित मनोभावों को संवाद के रूप में लिखिए –
प्रसन्न – मेरी खोई हुई पुस्तक मिल गई हैं! ………………………..
चकित – …………………………..
शांत – ……………………………
दुखी – ……………………………
उत्तर:
प्रसन्न – मेरी खोई हुई पुस्तक मिल गई है! अब मैं खुशी-खुशी पढ़ाई करूँगा।
चकित – अरे! यह कैसे हो गया? मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा!
शांत – कोई बात नहीं, हम धीरे-धीरे इस समस्या का समाधान निकाल लेंगे।
दुखी – आज मेरा प्रिय खिलौना टूट गया, मुझे बहुत बुरा लग रहा है।
4. नीचे दी गई सूचना के आधार पर नए शब्दों का निर्माण कीजिए –

उत्तर:

पेज 151 – पाठ से आगे
1. शतरंज के प्रत्येक मोहरे की चाल अलग-अलग होती है। शतरंज के मोहरों की चाल पता कीजिए और लिखिए –
| घोड़े की चाल | ___________________________ |
| हाथी की चाल | ___________________________ |
| मंत्री की चाल | ___________________________ |
| राजा की चाल | ___________________________ |
| ऊँट की चाल | ___________________________ |
| प्यादे (सिपाही) की चाल | ___________________________ |
उत्तर:
| घोड़े की चाल | घोड़ा ‘एल (L)’ के आकार में चलता है, यानी दो घर सीधा और एक घर बगल में कूदता है। |
| हाथी की चाल | हाथी सीधी रेखा में आगे, पीछे, दाएँ या बाएँ जितने चाहें उतने घर चल सकता है। |
| मंत्री की चाल | मंत्री सीधा और तिरछा, दोनों दिशाओं में जितने चाहें उतने घर चल सकता है। |
| राजा की चाल | राजा एक बार में केवल एक घर किसी भी दिशा में चल सकता है। |
| ऊँट की चाल | ऊँट तिरछी दिशा में जितने चाहें उतने घर चलता है। |
| प्यादे (सिपाही) की चाल | प्यादा पहली चाल में एक या दो घर आगे बढ़ सकता है, उसके बाद एक-एक घर चलता है। यह एक घर तिरछा मारता है। |
2. चित्र के साथ खेल के नाम का मिलान कीजिए। साथ ही यह भी लिखिए कि आप की स्थानीय भाषा में इस खेल को क्या कहते हैं –

उत्तर:

पेज 153 – शतरंज की भूल-भुलैया
केवल नाम वाले शब्दों (संज्ञा) को एक-दूसरे से मिलाते हुए मंत्री को राजा तक पहुँचाइए। ध्यान रहे कि आपको संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण तथा क्रिया को आपस में नहीं मिलाना है।

उत्तर:
संज्ञा शब्दों को मिलाकर मंत्री से राजा तक पहुँचने का सही मार्ग इस प्रकार है –
मंत्री → केरल → कृष्णदेव राय → दरबार → महल → तेनालीरामन → अशर्फी → भवन → नदी → गंगा → राजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 12 किस विधा की रचना है – कहानी, कविता या नाटक?
कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 12 गद्य या पद्य कविता नहीं, बल्कि एक पूर्ण नाटक है, जो संवाद-शैली में तीन दृश्यों में लिखा गया है। कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 12 में हर पंक्ति किसी-न-किसी पात्र (राजा, तेनालीरामन, दरबारी, नाई आदि) के संवाद के रूप में दी गई है, इसलिए इसे पढ़ते समय पात्रों के भाव-भंगिमा (जैसे क्रोधित, चकित, प्रसन्न) पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
क्या कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 12 का मंचन (अभिनय) कक्षा में करवाया जा सकता है?
जी हाँ, बल्कि पाठ्यपुस्तक में स्वयं शिक्षकों के लिए यह सुझाव दिया गया है कि कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 12 का मंचन कक्षा में कराया जाए। यदि पूर्ण मंचन संभव न हो, तो विद्यार्थियों को अलग-अलग पात्रों की भूमिका देकर वे अपनी जगह खड़े होकर संवाद बोल सकते हैं — जिससे उच्चारण, अभिनय और आत्मविश्वास तीनों का अभ्यास होता है।
कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 12 में कुल कितने दृश्य और पात्र हैं?
कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 12 में कुल तीन दृश्य हैं — पहला दृश्य (शतरंज की चुनौती), दूसरा दृश्य (शतरंज का खेल) और तीसरा दृश्य (मुंडन का दंड)। मुख्य पात्रों में राजा कृष्णदेव राय, तेनालीरामन, चार दरबारी, एक सेवक और नाई शामिल हैं — कक्षा में भूमिका बाँटते समय यह जानकारी उपयोगी रहती है।
कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 12 को कम समय में समझने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
सबसे आसान तरीका है इसे दृश्यवार पढ़ना – पहले दृश्य में दरबारियों की साज़िश, दूसरे में शतरंज का खेल, और तीसरे में मुंडन से बचने की तरकीब को अलग-अलग समझें। चूँकि संवाद छोटे और नाटकीय हैं, कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 12 को ज़ोर से बोलकर पढ़ने पर यह जल्दी याद हो जाता है और लगभग 45 मिनट में पूरा समझा जा सकता है।
