एनसीईआरटी समाधान कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 13 हमारा आदित्य
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 13 हमारा आदित्य – कक्षा में अध्यापक और विद्यार्थियों के बीच हुई एक रोचक बातचीत है, जिसमें सूर्य से जुड़े रोचक तथ्यों के साथ-साथ भारत के सौर मिशन आदित्य-एल1, लगरांज बिंदु और इसरो के बारे में सरल भाषा में जानकारी दी गई है। यह पाठ विद्यार्थियों को खेल-खेल में विज्ञान से परिचित कराता है। इस अध्याय में बातचीत के लिए, पाठ के भीतर, सोचिए और लिखिए, अनुमान और कल्पना तथा भाषा की बात जैसी कई गतिविधियाँ दी गई हैं।
एनसीईआरटी कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 13 समाधान
पेज 160 – बातचीत के लिए
1. आपने आकाश में अनेक तारे देखे होंगे। ऐसा कौन-सा तारा है जो हमें सुबह-सुबह जगाने का काम करता है? हमें इस तारे से कौन-से लाभ होते हैं?
उत्तर:
आकाश में जो तारा हमें सुबह-सुबह जगाने का काम करता है, वह सूर्य (आदित्य) है।
सूर्य से हमें कई लाभ होते हैं:
- सूर्य के प्रकाश से दिन होता है, जिससे हम अपने काम कर पाते हैं।
- इसकी गर्मी से हमें सर्दी में राहत मिलती है।
- पौधे सूर्य के प्रकाश से अपना भोजन बनाते हैं, जिससे हमें फल-फूल और अनाज मिलता है।
- सूर्य की किरणों से हमें विटामिन D मिलता है, जो हमारे शरीर के लिए बहुत आवश्यक है।
इस प्रकार सूर्य हमारे जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और हमें ऊर्जा देता है।
2. भारत में मनाए जाने वाले ऐसे त्योहारों या मेलों के बारे में अपनी कक्षा में चर्चा कीजिए जिनका संबंध सूर्य अथवा चंद्रमा से है।
उत्तर:
भारत में कई ऐसे त्योहार और मेले मनाए जाते हैं जिनका संबंध सूर्य और चंद्रमा से होता है। जैसे—
सूर्य से जुड़े त्योहार:
- मकर संक्रांति – इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है, लोग तिल-गुड़ खाते हैं और पतंग उड़ाते हैं।
- छठ पूजा – इसमें सूर्य देव की पूजा की जाती है और उन्हें अर्घ्य दिया जाता है।
- पोंगल – यह दक्षिण भारत का त्योहार है, जिसमें सूर्य देव का धन्यवाद किया जाता है।
चंद्रमा से जुड़े त्योहार:
- करवा चौथ – इस दिन महिलाएँ चाँद को देखकर व्रत खोलती हैं।
- रक्षा बंधन – यह पूर्णिमा (चाँद की पूरी रात) को मनाया जाता है।
- ईद – यह चाँद दिखने पर मनाई जाती है।
इस प्रकार भारत के कई त्योहार सूर्य और चंद्रमा से जुड़े हैं और हमारे जीवन में इनका विशेष महत्व है।
3. आपने कक्षा तीन की पाठ्यपुस्तक ‘वीणा, भाग 1’ में चंद्रयान पर पाठ पढ़ा है न! अपने सहपाठियों को चंद्रयान के बारे में कुछ याद करके बताइए।
उत्तर:
हाँ, मैंने कक्षा 3 में चंद्रयान के बारे में पढ़ा है। चंद्रयान भारत का एक अंतरिक्ष मिशन है जिसे इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) ने भेजा था। इसका मुख्य उद्देश्य चंद्रमा के बारे में जानकारी प्राप्त करना है।
चंद्रयान चंद्रमा की सतह का अध्ययन करता है, वहाँ की मिट्टी, पानी और वातावरण के बारे में जानकारी जुटाता है। इससे हमें यह पता चला कि चंद्रमा पर पानी के अंश मौजूद हैं।
यह मिशन हमारे देश के लिए बहुत गर्व की बात है। इससे यह साबित होता है कि भारत के वैज्ञानिक बहुत होशियार हैं और अंतरिक्ष में नई-नई खोज कर रहे हैं।
4. चंद्रयान-3 की सफलता के बाद सूर्य का अध्ययन करने वाले यान आदित्य-एल 1 के विषय में आपने जो भी सुना, पढ़ा या देखा है, बताइए।
उत्तर:
चंद्रयान-3 की सफलता के बाद भारत ने सूर्य का अध्ययन करने के लिए आदित्य-एल1 नाम का यान भेजा है। इसे इसरो ने 2 सितम्बर 2023 को प्रक्षेपित किया था।
आदित्य-एल1 का मुख्य कार्य सूर्य के बारे में जानकारी जुटाना है। यह सूर्य की गर्मी, उसकी ऊर्जा, गैसों की गतिविधि और उससे पृथ्वी पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करता है।
यह यान सूर्य के पास जाकर सीधे नहीं जाता, बल्कि एक विशेष स्थान एल1 (लगरांज बिंदु) पर रहकर सूर्य का अध्ययन करता है। वहाँ से यह सूर्य के सुंदर चित्र भी भेजता है।
यह मिशन हमारे देश के वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि है और इससे हमें सूर्य के रहस्यों को समझने में मदद मिलती है।
5. नीचे दि ए गए चित्र को ध्यान से देखिए और बताइए कि –

(क) इसमें क्या दिखाया गया है?
उत्तर:
इस चित्र में इंद्रधनुष दिखाया गया है।
आकाश में वर्षा के बाद जब सूर्य की किरणें पानी की बूंदों पर पड़ती हैं, तब इंद्रधनुष बनता है। इसमें कई सुंदर रंग दिखाई देते हैं, जो देखने में बहुत आकर्षक लगते हैं।
(ख) क्या आपने इसे कभी देखा है? इसमें कितने रंग होते हैं? अपनी लेखन-पुस्तिका में उन रंगों के नाम क्रम से लिखिए।
उत्तर:
हाँ, मैंने इंद्रधनुष देखा है।
इंद्रधनुष में सात रंग होते हैं। उनके नाम क्रम से इस प्रकार हैं:
- बैंगनी
- जामुनी (नील)
- नीला
- हरा
- पीला
- नारंगी
- लाल
ये सभी रंग बहुत सुंदर लगते हैं और आकाश को रंगीन बना देते हैं।
(ग) आकाश में ऐसा कब और कैसे होता है?
उत्तर:
आकाश में इंद्रधनुष तब दिखाई देता है जब बारिश के बाद सूर्य निकलता है।
यह तब बनता है जब सूर्य की किरणें पानी की छोटी-छोटी बूंदों पर पड़ती हैं। ये बूंदें प्रकाश को मोड़कर (विभाजित करके) अलग-अलग रंगों में बदल देती हैं। इसी कारण हमें आकाश में सात रंगों वाला सुंदर इंद्रधनुष दिखाई देता है।
पेज 161 – पाठ के भीतर
निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर पर सूर्य का चित्र बनाइए। यहाँ एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं।

उत्तर:

पेज 162 – सोचिए और लिखिए
1. पाठ से बनी समझ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए –
(क) हमारे वैज्ञानिकों ने आदित्य-एल 1 का निर्माण क्यों किया?
उत्तर:
हमारे वैज्ञानिकों ने आदित्य-एल 1 का निर्माण सूर्य के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए किया। इस यान के माध्यम से वैज्ञानिक यह जानना चाहते हैं कि सूर्य किस प्रकार काम करता है, उसकी गर्मी और ऊर्जा कितनी होती है तथा उसका पृथ्वी पर क्या प्रभाव पड़ता है। इसके द्वारा सूर्य के चित्र भी लिए जाते हैं और उसके रहस्यों को समझने में मदद मिलती है।
इस प्रकार आदित्य-एल 1 का निर्माण सूर्य के अध्ययन और उसके रहस्यों को जानने के लिए किया गया है।
(ख) “आदित्य-एल 1 चंद्रयान के प्रकार का ही एक यान है।” अध्यापक ने ऐसा अपने विद्यार्थियों से क्यों कहा?
उत्तर:
अध्यापक ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि आदित्य-एल 1 भी चंद्रयान की तरह एक अंतरिक्ष यान है। जैसे चंद्रयान को चंद्रमा के बारे में जानकारी जुटाने के लिए भेजा गया था, उसी प्रकार आदित्य-एल 1 को सूर्य के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए भेजा गया है। दोनों ही यान अंतरिक्ष में जाकर चित्र लेते हैं और वैज्ञानिकों को नई-नई जानकारी देते हैं।
इसलिए अध्यापक ने बताया कि आदित्य-एल 1 भी चंद्रयान के प्रकार का ही एक यान है।
(ग) आदित्य-एल 1 में ‘एल 1ʼ क्या है और उसका क्या कार्य है?
उत्तर:
आदित्य-एल 1 में ‘एल 1’ एक विशेष स्थान है जिसे लगरांज बिंदु कहते हैं। यह अंतरिक्ष में वह जगह होती है जहाँ सूर्य और पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्तियाँ संतुलित रहती हैं। इस कारण वहाँ रखा गया यान स्थिर रहकर सूर्य का अध्ययन कर सकता है।
इसका कार्य यह है कि आदित्य-एल 1 इसी स्थान पर रहकर सूर्य के चित्र लेता है और उसके बारे में जानकारी इकट्ठा करता है। इससे वैज्ञानिकों को सूर्य के रहस्यों को समझने में मदद मिलती है।
(घ) “अध्यापक जी! मैंने सुना है कि सूर्य सात घोड़ों के रथ पर आकाश में यात्रा करने वाला एक राजा है।” वाणी ने अध्यापक से ऐसा क्यों कहा होगा?
उत्तर:
वाणी ने ऐसा इसलिए कहा होगा क्योंकि उसने सूर्य के बारे में कहानियों और पौराणिक कथाओं में ऐसा सुना होगा। हमारी प्राचीन कथाओं में सूर्य देव को एक राजा की तरह बताया गया है, जो सात घोड़ों के रथ पर बैठकर आकाश में घूमते हैं। बच्चे अक्सर ऐसी रोचक बातें सुनकर उन्हें सच मान लेते हैं।
इसी कारण वाणी ने अपनी सुनी हुई बात अध्यापक को बताई।
(ङ) निम्नलिखित वाक्यों में नीचे दिए गए शब्दों का प्रयोग करते हुए रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

i. हम ……………….. बड़े होकर वैज्ञानिक बनेंगे।
ii. रवि अध्यापक की ……………….. अचरज से देखता है।
iii. आदित्य-एल 1 ने सूर्य के कुछ अदभुत चित्र भेजे हैं, उन्हें यदि आप लोग देखेंगे तो देखते ……………….. रह जाएँगे।
iv. भारत के ओडिशा के पुरी जिले में सूर्य देवता का एक ……………….. सुंदर मदिंर बना हुआ है।
v. अध्यापक ने भास्कर से कहा कि इस कक्षा में दो ……………….. आदित्य हैं।
उत्तर:
i. हम भी बड़े होकर वैज्ञानिक बनेंगे।
ii. रवि अध्यापक की ओर अचरज से देखता है।
iii. आदित्य-एल 1 ने सूर्य के कुछ अदभुत चित्र भेजे हैं, उन्हें यदि आप लोग देखेंगे तो देखते ही रह जाएँगे।
iv. भारत के ओडिशा के पुरी जिले में सूर्य देवता का एक बहुत सुंदर मदिंर बना हुआ है।
v. अध्यापक ने भास्कर से कहा कि इस कक्षा में दो और आदित्य हैं।
2. ‘आदित्य’ का अर्थ सूर्य होता है। इसी प्रकार आदित्य के कुछ नाम आप भी खो जकर लिखिए। नीचे एक नाम दिया गया है, शेष नाम आप लिखिए –

उत्तर:

पेज 164 – अनुमान और कल्पना
1. कल्पना कीजिए कि आप वैज्ञानिक बन गए हैं और आपको सूर्य के रहस्य जानने के लिए भेजा जा रहा है, आप
(क) सूर्य की गरमी से बचने के लिए किस तरह की व्यवस्था करेंगे?
उत्तर:
यदि मैं वैज्ञानिक बनकर सूर्य के पास जाऊँगा, तो उसकी गरमी से बचने के लिए विशेष व्यवस्था करूँगा।
मैं एक ऐसे अंतरिक्ष यान का उपयोग करूँगा जिसमें गर्मी से बचाने वाली मजबूत ढाल लगी होगी। मैं विशेष प्रकार का स्पेस सूट पहनूँगा जो बहुत अधिक तापमान को सह सके। यान में ठंडा रखने की मशीन (कूलिंग सिस्टम) भी होगी ताकि अंदर का तापमान सामान्य रहे।
(ख) सूर्य से जुड़े कौन-से रहस्यों को खोजने का प्रयास करेंगे?
उत्तर:
यदि मैं वैज्ञानिक बनूँगा, तो मैं सूर्य से जुड़े कई रहस्यों को जानने का प्रयास करूँगा। मैं यह पता लगाना चाहूँगा कि सूर्य के अंदर इतनी अधिक गर्मी और ऊर्जा कैसे बनती है। मैं यह भी जानना चाहूँगा कि सूर्य की गैसें कैसे चलती और बदलती रहती हैं। इसके साथ ही मैं यह समझने की कोशिश करूँगा कि सूर्य की ऊर्जा का पृथ्वी पर क्या प्रभाव पड़ता है और कभी-कभी उसमें होने वाले विस्फोट कैसे होते हैं।
इस प्रकार मैं सूर्य के रहस्यों को समझकर नई-नई जानकारी प्राप्त करना चाहूँगा।
2. यदि आपको विद्यालय में आदित्य-एल 1 के वैज्ञानिकों से मिलने का एक अवसर मिलता है तो आप उनसे कौन-से प्रश्न पूछना चाहेंगे? कोई चार प्रश्न लिखिए –
(क) ……………………..
(ख) ……………………..
(ग) ……………………..
(घ) ……………………..
उत्तर:
(क) आदित्य-एल 1 को अंतरिक्ष में कैसे भेजा गया?
(ख) यह सूर्य के इतने पास जाकर भी जलता क्यों नहीं है?
(ग) आदित्य-एल 1 सूर्य के कौन-कौन से रहस्यों का पता लगाता है?
(घ) इस यान से हमें पृथ्वी के बारे में क्या नई जानकारी मिलती है?
पेज 164 – भाषा की बात
1. निम्नलिखित वाक्यों में उचित विराम चिह्न लगाइए –

(क) यदि ऐसा है तो वहाँ आग किसने जलाई होगी ………..
(ख) अध्यापक जी ……….. लगरांज 1 क्या होता है ………..
(ग) अच्छा ……….. तभी इसका नाम आदित्य-एल 1 रखा गया है ………..
(घ) जी अध्यापक जी ……….. यह बहुत गरम है ………..
उत्तर:
(क) यदि ऐसा है तो वहाँ आग किसने जलाई होगी?
(ख) अध्यापक जी, लगरांज 1 क्या होता है?
(ग) अच्छा! तभी इसका नाम आदित्य-एल 1 रखा गया है।
(घ) जी अध्यापक जी, यह बहुत गरम है।
2. शब्द-पिटारा में दिए गए शब्दों को नीचे दिए गए उनके संबंधित परिवार में लिखिए –

उत्तर:

3. पाठ में आए ‘प्रभावʼ, ‘अभियानʼ, ‘विशालʼ, ‘सुप्रभात ʼ शब्दों में ‘प्रʼ, ‘अभि ʼ, ‘विʼ और ‘सुʼ शब्दांश उपसर्ग का कार्य कर रहे हैं तथा ‘भावʼ, ‘यानʼ, ‘शालʼ एवं ‘प्रभातʼ मूल शब्द हैं।

उत्तर:

4. पाठ में आया ‘अध्यापक’ शब्द पुल्लिंग है तथा ‘नानी’ शब्द स्त्रीलिंग है। इसके अतिरिक्त पाठ में आए अन्य कोई दो-दो पुल्लिंग और स्त्रीलिंग शब्द खोजकर नीचे लिखिए –

उत्तर:

5. नीचे दिए गए शब्दों के विपरीत अर्थ वाले शब्द वर्ग पहेली में से ढूँढ़कर उनका वाक्य में प्रयोग कीजिए –

उत्तर:

6. पाठ में ‘सूर्य’ शब्द का प्रयोग हुआ है। इस शब्द के अनेक नाम आपने पढ़े और सुने होंगे। इस शब्द का प्रयोग अलग-अलग प्रकार से होता है, जैसे –
• ‘सूर्य’ की किरणों से हम विेंटामिन डी मिलता है।
इस वाक्य में ‘सूर्य’ एक तारा है।
• ‘सुर्य’ हमारी कक्षा में पढ़ता है।
इस वाक्य में ‘सूर्य’ एक विद्यार्थी है।
अब ‘जल’ तथा ‘कर’ शब्दों से जुड़े अलग-अलग अर्थों वाले वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर:
‘जल’ से वाक्य:
1. हमें रोज़ साफ जल पीना चाहिए। (जल = पानी)
2. आग में लकड़ी जल गई। (जल = जलना)
‘कर’ से वाक्य:
1. हमें समय पर अपना काम कर लेना चाहिए। (कर = करना)
2. उसने अपने कर से चित्र बनाया। (कर = हाथ)
पेज 168 – आदित्य-एल 1 और सूर्य की भेंट
1. यहाँ पर आदित्य-एल 1 और सूर्य के बीच बातचीत हो रही है। आप इस बातचीत को आगे बढ़ाइए –

उत्तर:

पेज 169 – पाठ से आगे
1. इस चित्र में क्या दिखाया गया है? अपने घर या आस-पड़ोस में आपने कभी किसी को ऐसा करते देखा है? कक्षा में अपने-अपने अनुभव साझा कीजिए।

उत्तर:
इस चित्र में छठ पूजा का दृश्य दिखाया गया है।
छठ पूजा सूर्य देव की उपासना का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इसमें लोग नदी, तालाब या घाट पर खड़े होकर उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। महिलाएँ व्रत रखती हैं और पूरे नियम व श्रद्धा के साथ पूजा करती हैं।
इस पर्व में साफ-सफाई, पूजा और प्रसाद का विशेष महत्व होता है। लोग सूर्य देव से अपने परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
2. सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने से शरीर को कौन-से लाभ होते हैं? सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।
उत्तर:
सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने से हमारे शरीर को कई लाभ होते हैं:
- सूर्य की किरणों से हमें विटामिन D मिलता है, जिससे हमारी हड्डियाँ मजबूत होती हैं।
- धूप से शरीर को गर्मी मिलती है, जिससे सर्दी कम लगती है।
- सूर्य का प्रकाश हमारे शरीर को स्वस्थ और सक्रिय बनाता है।
- सुबह की धूप से मन प्रसन्न रहता है और हम ताज़गी महसूस करते हैं।
इसलिए हमें रोज़ थोड़ी देर सूर्य के प्रकाश में रहना चाहिए।
3. दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए। यह चित्र सौर ऊर्जा का है। सौर ऊर्जा, सूर्य के प्रकाश से प्राप्त अक्षय (जो समाप्त नहीं होती) ऊर्जा है। शिक्षक के दिशा-निर्देश में कक्षा को चार समूहों मे विभाजित कीजिए। सौर ऊर्जा के बारे में जानकारी प्राप्त कर कक्षा में चार्ट पेपर पर प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर:
सौर ऊर्जा सूर्य के प्रकाश से प्राप्त होने वाली ऊर्जा है, जो कभी समाप्त नहीं होती।
चार्ट पेपर के लिए मुख्य बिंदु:
1. सौर ऊर्जा क्या है?
सौर ऊर्जा सूर्य से मिलने वाली साफ और अक्षय ऊर्जा है।
2. सौर ऊर्जा के उपयोग:
- सोलर पैनल से बिजली बनाना
- सोलर कुकर में खाना पकाना
- सोलर लाइट जलाना
- पानी गरम करना
3. सौर ऊर्जा के लाभ:
- यह कभी खत्म नहीं होती
- प्रदूषण नहीं फैलाती
- पर्यावरण के लिए अच्छी है
4. निष्कर्ष:
हमें सौर ऊर्जा का अधिक उपयोग करना चाहिए ताकि हम ऊर्जा बचा सकें और पर्यावरण को सुरक्षित रख सकें।
इन्हीं बिंदुओं को चित्रों और रंगों के साथ चार्ट पेपर पर सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है।
4. दिए गए चित्र को ध्यान से देखकर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

(क) इस चित्र में पाँच लगरांज बिंदु दिखाए गए हैं। आप के विचार से हमारे वैज्ञानिकों ने आदित्य यान के स्थापन के लिए एल 1 बिंदु को क्यों चुना होगा?
उत्तर:
हमारे वैज्ञानिकों ने आदित्य-एल 1 को एल 1 (लगरांज बिंदु) पर इसलिए स्थापित किया क्योंकि यह स्थान सूर्य और पृथ्वी के बीच एक संतुलित जगह है।
यहाँ से यान बिना रुकावट के लगातार सूर्य को देख सकता है और उसके चित्र ले सकता है। इस स्थान पर सूर्य और पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्तियाँ संतुलित रहती हैं, इसलिए यान को अपनी जगह बनाए रखने में आसानी होती है।
इसी कारण वैज्ञानिकों ने सूर्य का अच्छे से अध्ययन करने के लिए एल 1 बिंदु को चुना।
(ख) चित्र देखकर बताइए कि कौन-कौन से लगरांज बिंदु पृथ्वी की कक्षा (ऑर्बिट) पर हैं?
उत्तर:
चित्र के अनुसार एल 4 (L4) और एल 5 (L5) लगरांज बिंदु पृथ्वी की कक्षा (ऑर्बिट) पर स्थित हैं।
ये दोनों बिंदु पृथ्वी के साथ-साथ सूर्य के चारों ओर घूमते रहते हैं, इसलिए ये पृथ्वी की कक्षा में ही माने जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 13 एक कहानी है या किसी और विधा में लिखा गया है?
यह पारंपरिक कहानी या कविता नहीं, बल्कि कक्षा में अध्यापक और विद्यार्थियों के बीच हुई बातचीत (संवाद) के रूप में लिखा गया पाठ है। कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 13 में सूर्य और आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान से जुड़े तथ्य सवाल-जवाब की शैली में बताए गए हैं, जिससे विषय रोचक और आसानी से समझ में आने वाला बन जाता है।
क्या कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 13 पढ़ने से विज्ञान और सामान्य ज्ञान से जुड़ी जानकारी भी मिलती है?
जी हाँ। कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 13 हिंदी भाषा का पाठ होते हुए भी सूर्य, आदित्य-एल1 मिशन, लगरांज बिंदु (L1) और इसरो (ISRO) जैसी वास्तविक वैज्ञानिक जानकारी देता है। इसलिए यह अध्याय भाषा-कौशल के साथ-साथ विद्यार्थियों के सामान्य ज्ञान को भी समृद्ध करता है।
कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 13 में प्रश्न-उत्तर के अलावा और कौन-सी गतिविधियाँ शामिल हैं?
इस अध्याय में केवल परंपरागत प्रश्न-उत्तर ही नहीं, बल्कि ‘आदित्य-एल1 और सूर्य की भेंट’ नामक संवाद-लेखन गतिविधि, ‘मेरी चित्रकारी’ नामक चित्र बनाने का अभ्यास, तथा लगरांज बिंदुओं के चित्र पर आधारित प्रश्न भी दिए गए हैं। कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 13 इस तरह रचनात्मक लेखन और कल्पनाशीलता को भी बढ़ावा देता है।
क्या कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 13 में आए कठिन वैज्ञानिक शब्दों (जैसे हाइड्रोजन, लगरांज बिंदु) का अर्थ भी समझाया गया है?
जी हाँ, पाठ के भीतर ही अध्यापक के संवादों के माध्यम से हाइड्रोजन, हीलियम, लगरांज बिंदु और सौर ऊर्जा जैसे शब्दों को सरल उदाहरणों सहित समझाया गया है। इसलिए कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 13 पढ़ते समय विद्यार्थियों को अलग से शब्दकोश देखने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
