एनसीईआरटी समाधान कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 11 कविता का कमाल
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 11 कविता का कमाल – एक रोचक लोककथा है, जिसमें गरीब लड़का मदन पैसे कमाने के लिए राजदरबार के कवि-सम्मेलन में पहुँचता है। रास्ते में देखे गए कुत्ते, भैंस, चिड़िया और साँप के आधार पर वह तुकबंदी करके एक अनोखी ‘कविता’ बना लेता है, जो संयोगवश राजा के खजाने में सेंध लगा रहे चोरों को डराकर भगा देती है। इस पाठ में बातचीत के लिए, कविता की बात, मिलान कीजिए, सोचिए और लिखिए, मीडिया और आप जैसी अनेक रोचक गतिविधियाँ दी गई हैं।
एनसीईआरटी कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 11 समाधान
पेज 132 – बातचीत के लिए
1. क्या आपको कथा-कहानी सुनना-सुनाना पसंद है? अपने उत्तर का कारण बताइए।
उत्तर:
हाँ, मुझे कथा-कहानी सुनना और सुनाना दोनों पसंद है, क्योंकि कहानियाँ मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञान भी देती हैं। वे हमें नई बातें सिखाती हैं, कल्पनाशक्ति बढ़ाती हैं और भावनाओं को समझने में मदद करती हैं। कहानियों के माध्यम से हम अलग-अलग समय, स्थान और पात्रों की दुनिया में जा सकते हैं, जो सीखने का एक रोचक तरीका है।
2. इस लोककथा का सबसे रोचक हिस्सा कौन-सा है और क्यों?
उत्तर:
इस लोककथा का सबसे रोचक हिस्सा तब आया जब राजा मदन की कविता छज्जे पर खड़े होकर दोहरा रहे थे। उन्हें क्या पता था, की उनकी आवाज़ चोरों तक जा रही थी। राजा की आवाज़ सुनकर चोर धन्नू शाह घबरा गया और भागने की जगह राजा के पैर पकड़ कर माफ़ी माँगने लगा। राजा को भी इस बात पर बड़ी हैरानी हुई कि यह क्या हो रहा है।
3. राजा का खजाना मदन की कविता के कारण बचा या राजा के कारण जो कविता को ज़ोर-ज़ोर से बोल रहे थे?
उत्तर:
राजा का खजाना राजा के कारण बचा क्योंकिं वह कविता को ज़ोर-ज़ोर से बोल रहे थे और इनकी आवाज़ चोरों तक जा रही थी। यदि राजा छज्जे में ज़ोर-ज़ोर से कविता न बोलते तो चोर राजा के यहाँ चोरी करके चले जाते। राजा की आवाज़ सुनकर चोर धन्नू शाह घबरा गया और भागने की जगह राजा के पैर पकड़ कर माफ़ी माँगने लगा।
4. राजमहल में जब मदन ने अपनी कविता सुनाई तो सुनने वाले एक-दुसरे का मुँह क्यों ताकने लगे?
उत्तर:
राजमहल में जब मदन ने अपनी कविता सुनाई तो सुनने वाले एक-दुसरे का मुँह ताकने लगे क्योंकि किसी को भी मदन कि कविता समझ नहीं आई थी। असल में यह कविता राजा के भी समझ नहीं आई थी। लेकिन वे सभी भरे दरबार में राजा के सामने अपने को मुर्ख नहीं दिखाना चाहते थे।
5. आप इस कहानी का कोई और शीर्षक सुझाइए तथा बताइए कि शीर्षक क्यों देना चाहते हैं।
उत्तर:
इस कहानी का कोई अन्य शीर्षक “कविता का जादू” रखा जा सकता है। क्योंकि राजा के इसी कविता को ज़ोर-ज़ोर से दोहराने के कारण ही राजा का खज़ाना लुटने से बच गया था।
पेज 132 – कविता की बात
1. उपयुक्त शब्द का चयन कर वाक्य पूरा कीजिए –

उत्तर:
1. सुरूर-सुरूर का पीबत है?
2. खुदुर-खुदुर का खोदत है?
3. “आप कौन हैं, साहब?” उत्तर मिला— धन्नू शाह
पेज 133 – मिलान कीजिए
1. नीचे दी गई कविता की पंक्तियों को उनके क्रम से मिलाएँ –

उत्तर:

2. रिक्स्थानों में उपयुक्तपंक्ति लिखिए और चित्र बनाकर उनका मिलान कीजिए –

उत्तर:

पेज 134 – सोचिए और लिखिए
1. “अब मैं तुझे और बिठाकर नहीं खिला सकती।” मदन की माँ ने ऐसा क्यों कहा?
उत्तर:
“अब मैं तुझे और बिठाकर नहीं खिला सकती।” मदन की माँ ने ऐसा इसलिए कहा की वे बहुत गरीग थे और उनके पास कमाई का कोई साधन नहीं था। फिर भी मदन दिनभर खेल-कूद में ही समय बिता देता था। एक दिन परेशान होकर उसकी माँ ने उसे ऐसा कहा था।
2. जब मदन ने महल का रास्ता पूछा तो धन्नू शाह ने ऐसा क्यों कहा कि अगर वह नहीं तो और कौन जानेगा?
उत्तर:
जब मदन ने महल का रास्ता पूछा तो धन्नू शाह ने ऐसा कहा कि अगर वह नहीं तो और कौन जानेगा क्योंकि वह एक बहुत बड़ा नामी चोर था। उसी रात उसने राजा का ख़जाना लूटना था जिसकी उसने सब तैयारी कर रखी थी।
3. कहानी में मदन की कविता को विचित्र कहा गया है। क्या आपको भी ऐसा ही लगता है?
उत्तर:
कहानी में मदन की कविता विचित्र साबित हुई इसी कारण उसे विचित्र कविता कहा गया। यदि यह विचित्र कविता को राजा अपने छज्जे पर टहलते हुए ज़ोर-ज़ोर से न दोहराते तो राजा का सारा खंजाना उस रात को लुट जाता और न ही धन्नू शाह चोर पकड़ा जाता।
4. राजा को मदन की कविता पहेली जैसी लगी। आपको कैसी लगी?
उत्तर:
मदन की कविता सुनने पर पहेली जैसी ही लगती है, जैसे वह किसी व्यक्ति विशेष के बारे में हो। मदन ने तो यह कविता तुक शब्दों के आधार पर ही राजा के महल में आते-आते ही तैयार की थी। मदन ने तो यह कविता राजा के मनोरजन को ध्यान में रखते हुए तैयार कि थी। जो बाद में एक पहेली ही साबित हुई।
पेज 134 – समझ और अनुभव
1. “सुरूर-सुरूर का पीबत है” पंक्ति में पीने के साथ-साथ “सुरूर-सुरूर’ शब्द का प्रयोग क्यों किया गया है?
उत्तर:
“सुरूर-सुरूर का पीबत है” पंक्ति में पीने के साथ-साथ “सुरूर-सुरूर’ शब्द में यह स्वर सुनाई देता है। यह पंक्ति कहानी में भैस के पानी पीने के स्वर को सुनकर प्रयोग में लाई गई थी।
2. राजदरबार में कवि-सम्मेलन हो रहा है। सबसे अच्छी कविता सुनाने वाले को सौ अशर्फियाँ पुरुस्कार में मिलेंगी। सौ अशर्फियों से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
राजदरबार में कवि-सम्मेलन हो रहा है। सबसे अच्छी कविता सुनाने वाले को सौ अशर्फियाँ पुरुस्कार में मिलेंगी। प्राचीन समय में मुद्रा के रूप में राजा-महाराजा ईनाम में सोने के सिक्के व अशर्फियाँ देते थे जो उस समय की मुद्रा थी। सौ अशर्फियों को हम सौ सोने के सिक्के भी कह सकते है।
3. “सरक-सरक कहाँ भागत है” पंक्ति में “सरक-सरक’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है? जहाँ ‘सरक-सरक’ का ही प्रयोग क्यों किया गया है?
उत्तर:
“सरक-सरक कहाँ भागत है” पंक्ति में “सरक-सरक’ साँप के लिए प्रयोग किया गया है। साँप जमीन पर सरक-सरक के स्वर के साथ चलता दिखाई देता है। इसलिए जहाँ कविता में ‘सरक-सरक’ का ही प्रयोग किया गया।
4. “अब कोई चारा नहीं। बस राजा साहब से दया की भीख माँग सकता हूँ।” ऐसा धन्नू शाह ने क्यों सोचा?
उत्तर:
जब धन्नू शाह राजा का ख़जाना लुटने के लिए सेंध लगा कर बैठा था, उसी दौरान राजा ने मदन की कविता को ज़ोर-ज़ोर से अपने झज्जे से दोहराना शुरु कर दिया। राजा को धन्नू शाह के चोरी करने का कुछ पता नहीं था। पहले वह कुछ खोद रहा था तभी राजा ने कविता बोलना शुरू किया’ खुदुर-खुदुर का खोदत है’। यह सुनकर धन्नू शाह को लगा उसे कोई सुन रहा है। घबराहट में उसका गला सूखने लगा तो वह पानी पीने लगा। तभी राजा ने कविता की दूसरी पंक्ति दोहराई ‘सुरूर-सुरूर का पीबत है’ यह सुनते ही धन्नू को लगा किसी ने उसे देख लिया है। उसने इधर-उधर झाँकना शुरु किया। तभी राजा ने तीसरी पंक्ति दोहराई ‘ताक-झाँक का खोजत है’ यह सुनकर धन्नू शाह को लगा राजा ने उसे देख लिया है। उसे लगा “अब कोई चारा नहीं। बस राजा साहब से दया की भीख माँग सकता हूँ।
पेज 134 – अनुमान और कल्पना
1. यदि मदन रोजगार की खोज में घर से बाहर नहीं निकलता तो क्या होता?
उत्तर:
यदि मदन रोजगार की खोज में घर से बाहर नहीं निकलता, तो निम्नलिखित परिस्थितियाँ हो सकती थीं:
- आर्थिक स्थिति और खराब हो जाती: उनके पास पहले से ही कमाई का कोई साधन नहीं था, इसलिए यदि मदन घर में ही रहता, तो उनकी आर्थिक हालत और बिगड़ सकती थी। दोनों को जीविका के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता।
- माँ और मदन दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता: भोजन, स्वास्थ्य और दैनिक ज़रूरतों को पूरा करना कठिन हो जाता, जिससे जीवन और भी संघर्षपूर्ण हो जाता।
- माँ पर मानसिक और भावनात्मक दबाव बढ़ता: एक माँ के रूप में वह अपने बेटे को बेरोजगार और असहाय देखती, जिससे उसे मानसिक तनाव होता।
इसलिए रोजगार की तलाश में बाहर निकलना न सिर्फ उनके आर्थिक भविष्य के लिए ज़रूरी था, बल्कि यह आत्मनिर्भरता और जीवन को आगे बढ़ाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम था।
2. अपनी कल्पना और अनुमान से बताइए कि राजमहल कैसा होता होगा?
उत्तर:
राजमहल एक भव्य और शानदार इमारत होती है, जहाँ राजा और उसका परिवार रहता हैं। अपनी कल्पना और अनुमान से राजमहल कुछ इस प्रकार हो सकता है:
- ऊँची और विशाल इमारत – राजमहल बहुत बड़ा होता है, जिसमें कई ऊँचे गुंबद, विशाल दरवाज़े और खिड़कियाँ होती हैं। उसके चारों ओर ऊँची दीवारें और सुरक्षा के लिए पहरेदार होते हैं।
- सुनहरी और कीमती सजावट – महल के अंदर दीवारों पर कीमती पत्थरों की नक्काशी, सोने-चाँदी के पर्दे, झूमर और महंगे कालीन बिछे होते हैं। सब कुछ सुंदरता और वैभव से भरपूर होता है।
- हरियाले बाग-बग़ीचे – महल के चारों ओर सुंदर बग़ीचे होते हैं जिनमें रंग-बिरंगे फूल, फव्वारे और तालाब होते हैं। मोर, हिरन जैसे जानवर खुले में घूमते हैं।
- महल के कई हिस्से – जैसे सभा हॉल (जहाँ राजा दरबार लगाता है), रसोईघर, शयनकक्ष, अतिथि कक्ष, रानी महल और सैनिकों के रहने की जगह। हर स्थान की अपनी विशेषता होती है।
- संगीत और नृत्य का स्थान – राजमहल में एक खास जगह होती है जहाँ संगीत, नृत्य और अन्य मनोरंजन होते हैं।
- गुप्त रास्ते और तहखाने – सुरक्षा और गोपनीयता के लिए राजमहल में कई गुप्त सुरंगें और तहखाने भी हो सकते हैं।
3. राजा के खजाने में क्या-क्या होता होगा और कितना-कितना होता होगा?
उत्तर:
राजा का खजाना बहुत समृद्ध और कीमती होता होगा। उसमें ऐसी कई वस्तुएँ होती हैं जो देश की दौलत, शक्ति और वैभव का प्रतीक मानी जाती थीं। अपनी कल्पना और अनुमान से राजा के खजाने में निम्नलिखित चीज़ें होती होंगी:
- सोना और चाँदी– बड़ी-बड़ी ईंटों और सिक्कों के रूप में सोना और चाँदी रखी जाती होगी।
ये धन कर (टैक्स), युद्ध में जीते गए राज्यों से, या व्यापार के माध्यम से जमा हुआ होगा। - कीमती रत्न और जवाहरात – हीरा, पन्ना, नीलम, मोती, माणिक, आदि दुर्लभ रत्नों की थालियाँ होती होंगी। ये तिजोरियों में विशेष सुरक्षा के साथ रखे जाते होंगे।
- राजमुकुट और शाही गहने – राजा और रानी के मुकुट, हार, बाजूबंद, कमरबंद, कंगन आदि बहुमूल्य धातुओं और रत्नों से जड़े होते होंगे। ये विशेष अवसरों पर पहनने के लिए रखे जाते थे।
- शाही वस्तुएँ और तोहफ़े – विदेशी राजाओं और व्यापारियों द्वारा दिए गए तोहफ़े जैसे:
- रेशम के कपड़े
- हाथीदाँत की मूर्तियाँ
- चंदन की लकड़ी से बनी चीज़ें
- बहुमूल्य कालीन होते हैं।
4. मदन की कविता से प्रसन्न होकर राजा ने उसे विदा करते समय क्या -क्या उपहार दिए होंगे?
उत्तर:
मदन की कविता से प्रसन्न होकर राजा ने उसे विदा करते समय बहुत से अच्छे-अच्छे उपहार दिए होंगे। जैसे – सोने-चाँदी के सिक्के, सुंदर कपड़े, आभूषण और खाने-पीने की चीजें। राजा ने उसे खुश होकर धन-दौलत से भर दिया होगा, ताकि वह अपनी माँ के साथ अच्छी तरह जीवन बिता सके।
इसके अलावा राजा ने उसे सम्मान और आशीर्वाद भी दिया होगा। संभव है कि उसे रहने के लिए घर बनाने के लिए धन या जमीन भी दी हो। इन उपहारों से मदन बहुत खुश हुआ होगा और अपने गाँव लौटकर अपनी माँ की सहायता की होगी।
5. राजा ने मदन को बहुत सारा धन दिया होगा। उसे यह सब कहाँ-कहाँ खर्च करना चाहिए?

उत्तर:

पेज 135 – कहो कहानी, सुनो कहानी
कहानियाँ सुनना और सुनना सभी को पसंद होता है। नीचे दिए गए निदेशों के अनुसार कक्षा में ‘कविता का कमाल’ कहानी सुनाइए –
1. स्वयं को मदन की जगह रखकर यह कहानी अपनी मातृभाषा या अपनी पसंद की भाषा में सुनाइए।
उत्तर:
मैं मदन हूँ। मैं और मेरी माँ गाँव में रहते थे। हम बहुत गरीब थे और मेरे पास कमाई का कोई साधन नहीं था। मैं दिनभर खेलता-कूदता रहता था। एक दिन मेरी माँ ने परेशान होकर मुझसे कहा, “अब मैं तुझे बिठाकर नहीं खिला सकती। जा, कुछ पैसे कमाकर ला।”
मैं घर से निकल पड़ा। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि पैसे कैसे कमाऊँ। तभी मुझे ढिंढोरा पीटने की आवाज सुनाई दी — “राजदरबार में कवि-सम्मेलन हो रहा है। सबसे अच्छी कविता सुनाने वाले को सौ अशर्फियाँ मिलेंगी।” मैंने सोचा, यह तो सुनहरा मौका है! पर मुझे तो कभी कोई कविता आती ही नहीं थी।
मैं राजमहल की ओर चल पड़ा। रास्ते में मैंने एक कुत्ते को जमीन खोदते देखा, तो मेरे मुँह से निकला — “खुदुर-खुदुर का खोदत है?” फिर एक भैंस को पानी पीते देखकर मैंने कहा — “सुरुर-सुरुर का पीबत है?” एक चिड़िया को झाँकते देखकर बोला — “ताक-झाँक का खोजत है?” और खुद-ब-खुद एक पंक्ति और सूझ गई — “हम जानत का ढूँढ़त है!” फिर मुझे एक साँप दिखा, तो मैंने कहा — “सरक-सरक कहाँ भागत है? जानत हो हम देखत हैं, हमसे न बच सकत है।”
रास्ते में मुझे एक आदमी मिला जिसने अपना नाम धन्नू शाह बताया और मुझे रास्ता दिखाया। मैंने खुश होकर उसे भी अपनी कविता में जोड़ लिया — “धन्नू शाह, भाई धन्नू शाह!”
राजदरबार में मैंने अपनी यह अजीब-सी कविता सुनाई। सब लोग एक-दूसरे का मुँह ताकने लगे, पर किसी ने कुछ नहीं कहा। उस रात राजा को नींद नहीं आई और वे मेरी कविता दोहराने लगे। संयोग से उसी समय कुछ चोर राजा का खजाना लूटने आए थे, और वही धन्नू शाह भी उनमें से एक था! मेरी कविता सुनकर चोर डर गए कि राजा ने उन्हें पहचान लिया है, और उन्होंने बिना कुछ चुराए ही राजा से माफी माँग ली।
राजा बहुत खुश हुए और उन्होंने मुझे बुलाकर कहा, “यह सब तुम्हारी कविता का कमाल है!” उन्होंने मुझे सोना-चाँदी देकर विदा किया। मैं खुशी-खुशी अपने गाँव लौट आया, और अब मेरे पास माँ के साथ आराम से रहने के लिए पर्याप्त धन था।
2. मदन आपका मित्र है। मदन ने कुछ समय पहले आपको यह कहानी सुनाई थी। अब आप यह कहानी अपनी कक्षा में सुनाइए।
उत्तर:
दोस्तों, आज मैं आपको अपने दोस्त मदन की कहानी सुनाता हूँ, जो उसने मुझे खुद सुनाई थी।
मदन एक गरीब लड़का था जो अपनी माँ के साथ गाँव में रहता था। उनके पास कमाई का कोई साधन नहीं था, फिर भी मदन दिनभर खेलता रहता था। एक दिन उसकी माँ ने तंग आकर उससे कहा कि वह जाकर कुछ पैसे कमाए।
मदन घर से निकल पड़ा। रास्ते में उसे पता चला कि राजदरबार में कवि-सम्मेलन हो रहा है और सबसे अच्छी कविता सुनाने वाले को सौ अशर्फियाँ मिलेंगी। मदन को कोई कविता नहीं आती थी, पर उसने हिम्मत नहीं हारी। रास्ते में उसने जो भी जानवर देखे — कुत्ता, भैंस, चिड़िया, साँप — उन्हीं को देखकर उसने तुकबंदी करते हुए मज़ेदार पंक्तियाँ बना लीं, जैसे “खुदुर-खुदुर का खोदत है?” और “सरक-सरक कहाँ भागत है?”
रास्ते में उसे धन्नू शाह नाम का एक आदमी मिला, जिसने उसे राजमहल का रास्ता बताया। मदन ने उसका नाम भी अपनी कविता में जोड़ दिया।
दरबार में मदन ने यह अटपटी कविता सुनाई, तो सब हैरान रह गए पर कुछ बोले नहीं। रात को राजा को नींद नहीं आई और वे यही कविता दोहराते रहे। ठीक उसी वक्त कुछ चोर राजा का खजाना चुराने आए थे — और उनमें वही धन्नू शाह भी था! राजा की आवाज़ में अपनी कविता सुनकर चोर डर गए और सोचा कि उन्हें पकड़ लिया गया है। वे राजा के पैरों पर गिर पड़े और बिना कुछ चुराए ही पकड़े गए।
राजा बहुत खुश हुए और उन्होंने कहा, “यह सब तुम्हारी कविता का कमाल है!” उन्होंने मदन को खूब सारा सोना-चाँदी देकर विदा किया। मदन खुशी-खुशी अपने गाँव लौट आया और उसके बाद उसकी और उसकी माँ की ज़िंदगी आराम से कटने लगी।
तो दोस्तों, यही थी मदन की मज़ेदार कहानी — “कविता का कमाल”!
पेज 136 – पाठ से आगे
1. साँप रेंगकर चलते हैं। रेंगकर चलने वाले जीव-जंतुओं की सूची बनाइए।
उत्तर:
हाँ, साँप रेंगकर चलते हैं। रेंगकर चलने वाले जीव-जंतु अपने शरीर को ज़मीन पर घसीटते हुए या पेट के बल लहराते हुए चलते हैं। नीचे रेंगकर चलने वाले जीव-जंतुओं की सूची:
साँप, गोज, घोंघा, कीड़ा, घड़ियाल ,मगरमच्छ, छिपकली, बिच्छू, केकड़ा, झिंगा और जू आदि है। इनमें से कुछ जीव जैसे साँप और कीड़े पूरी तरह रेंगकर चलते हैं, जबकि कुछ जैसे घड़ियाल और मगरमच्छ चलने और रेंगने दोनों तरीकों का प्रयोग करते हैं।
2. राजमहल में कवि-सम्मेलन की सूचना देने के लिए ढिंढोरा पिटा जा रहा था। आजकल ऐसी सूचनाएँ कैसे दी जाती हैं?
उत्तर:
आजकल ऐसी सूचनाएँ देने के लिए आधुनिक संचार के विभिन्न माध्यमों का उपयोग किया जाता है। ढिंढोरा पीटने की पारंपरिक विधि अब बहुत कम हो गई है। उसकी जगह अब ये माध्यम प्रचलित हैं:
- लाउडस्पीकर द्वारा उद्घोषणा – विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों या छोटे नगरों में अब भी किसी आयोजन की सूचना लाउडस्पीकर के माध्यम से दी जाती है।
- पोस्टर और बैनर – शहरों में सार्वजनिक स्थानों, दीवारों, स्कूलों, बाजारों आदि में पोस्टर-बैनर लगाकर कार्यक्रम की जानकारी दी जाती है।
- समाचार पत्रों में विज्ञापन – अखबारों में छोटे या बड़े विज्ञापन छपवाकर कवि-सम्मेलन या अन्य आयोजनों की सूचना दी जाती है।
- टीवी और रेडियो पर विज्ञापन – बड़े आयोजनों के लिए टीवी चैनलों और रेडियो स्टेशन पर प्रचार किया जाता है।
- सोशल मीडिया और इंटरनेट – आजकल सबसे अधिक उपयोग फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, ट्विटर आदि के माध्यम से किया जाता है। ई-निमंत्रण, कार्यक्रम की जानकारी, स्थान, समय आदि ऑनलाइन साझा किया जाता है।
इस प्रकार, अब सूचनाओं के प्रचार के लिए तकनीकी और डिजिटल माध्यमों का उपयोग अधिक हो गया है।
3. आपके विधालय में कवि-सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। आप इसकी सूचना कैसे देंगे?
उत्तर:
सूचना देने के कई तरीकें अपनाए जा सकते हैं:
- कक्षा में जाकर मौखिक रूप से सूचना देकर
- विद्यालय की नोटिस बोर्ड पर सूचना चिपकाना कर
- विद्यालय की वेबसाइट या व्हाट्सएप ग्रुप पर सूचना साझा करके
- सुबह की प्रार्थना सभा में घोषणा करके
इस तरह से मैं कवि-सम्मेलन की सूचना प्रभावी रूप से दूंगा ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें भाग ले सकें।
पेज 136 – मिडिया और आप
विजेता बनने के बाद मदन को मीडिया के प्रश्नों के उत्तर देने पड़े। अपने को मदन मानते हुए इन प्रश् नों के उत्तर दीजिए —
मीडिया – कवि -सम्मेलन में पुरस्कार पाकर आपको कैसा लग रहा है?
मदन – ……………………………………
उत्तर:
मदन – मुझे कवि-सम्मेलन में पुरस्कार पाकर बहुत खुशी हो रही है। मैं बहुत उत्साहित और गर्व महसूस कर रहा हूँ। मेरी मेहनत सफल हुई और मेरी कविता सबको पसंद आई, इससे मुझे बहुत आनंद मिला है।
मीडिया – आप इस उपलब्धि का श्रेय किसे देना चाहेंगे?
मदन – मैं इस उपलब्धि का श्रेय अपनी माँ को देना चाहूँगा। उन्होंने मुझे प्रेरित किया और मेहनत करने के लिए कहा। उनकी सीख और आशीर्वाद से ही मैं यह सफलता प्राप्त कर सका।
मीडिया – आपको राजदरबार में कविता सुनाकर कैसा लगा?
मदन – मुझे राजदरबार में कविता सुनाकर बहुत अच्छा लगा। शुरुआत में मुझे थोड़ा डर लग रहा था, लेकिन बाद में मैं आत्मविश्वास के साथ अपनी कविता सुनाने लगा। जब सभी लोगों ने ध्यान से मेरी कविता सुनी, तो मुझे बहुत खुशी और गर्व महसूस हुआ।
मीडिया – आगे आपकी क्या योजनाएँ हैं?
मदन – आगे मेरी योजना है कि मैं अपनी माँ की अच्छी तरह देखभाल करूँ और अपने जीवन को बेहतर बनाऊँ। मैं पढ़ाई भी करना चाहता हूँ और और अच्छी कविताएँ सीखकर आगे बढ़ना चाहता हूँ, ताकि भविष्य में और सफलता प्राप्त कर सकूँ।
मीडिया – बहुत-बहुत धन्यवाद मदन जी।
मदन – आपका भी बहुत-बहुत धन्यवाद। मुझे अपने विचार साझा करने का अवसर देने के लिए मैं आपका आभारी हूँ।
पेज 137 – भाषा की बात
1. मुहावरे हमेशा एक विशेष अर्थ देते हैं जो उनके शाब्दिक अर्थ से भिन्न होता है। जैसे–
‘फूला न समानाʼ मुहावरे का अर्थ है – अत्यधिक प्रसन्न होना।
वाक्य प्रयोग – विद्यालय की खेल प्रतियोगिता में पुरस्कृत होकर राजू फूला न समा रहा था।
आप अपनी लेखन-पुस्तिका में निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखते हुए उनका वाक्य में प्रयोग कीजिए।
(क) मन में लड्डू फूटना
(ख) मुँह ताकना
उत्तर:
(क) मन में लड्डू फूटना
अर्थ: बहुत अधिक खुशी होना।
वाक्य: परीक्षा में अच्छे अंक देखकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे।
(ख) मुँह ताकना
अर्थ: किसी से उम्मीद लगाकर देखना या सहायता की प्रतीक्षा करना।
वाक्य: जब शिक्षक ने प्रश्न पूछा तो कुछ बच्चे एक-दूसरे का मुँह ताकने लगे।
2. निम्नलिखित गद्यांश में कहीं-कहीं विराम चिन्हों का प्रयोग हुआ है। इस गद्यांश को उचित ठहराव के साथ पढ़िए।
उसे दखे ते ही मदन के मुँह से निकल पड़ा, “ताक-झाँक का खोजत है” तीनों पंक्तियों को रटते हुए वह चलता गया। रटते-रटते उसे अपने आप एक और पंक्ति सूझ गई, “हम जानत का ढूँढ़त है।”
उत्तर:
उसे देखते ही मदन के मुँह से निकल पड़ा, (यहाँ अल्पविराम “,” पर छोटा-सा रुकें) “ताक-झाँक का खोजत है (यहाँ प्रश्नवाचक चिह्न “?” पर स्वर को थोड़ा ऊपर उठाते हुए रुकें, जैसे सचमुच कोई प्रश्न पूछ रहे हों) ?” तीनों पंक्तियों को रटते हुए वह चलता गया (यहाँ पूर्ण विराम “।” पर पूरी तरह रुकें, जैसे वाक्य समाप्त हो गया हो)। रटते-रटते उसे अपने आप एक और पंक्ति सूझ गई, (यहाँ फिर अल्पविराम पर छोटा ठहराव) “हम जानत का ढूँढ़त है (यहाँ पूर्ण विराम पर पूरा रुकें)।”
3. नीचे लिखे वाक्यों में उपयुक् विराम चिह्न लगाकर वाक्य पूरा कीजिए –
(क) क्या ताक झाँक कर रहे हो …………………….
(ख) अरे वाह क्या चौका मारा है …………………….
(ग) आइए राजा से मिलवाता हूँ ……………………..
(घ) दादी देखते ही बोली कहाँ जा रहे हो ………………..
उत्तर:
(क) क्या ताक-झाँक कर रहे हो?
(ख) अरे वाह! क्या चौका मारा है!
(ग) आइए, राजा से मिलवाता हूँ।
(घ) दादी देखते ही बोली, “कहाँ जा रहे हो?”
पेज 138 – आपकी सूझ-बूझ
एक व्यक्ति के घर के बाहर दस मीटर ऊँचा एक खजूर का पेड़ था। एक बंदर उस पर चढ़ने लगा। वह पेड़ की चोटी पर पहुँचना चाहता था। समस्या यह थी कि वह दिन के समय तो 5 मीटर चढ़ जाता था परंतु जब रात होती तो वह 4 मीटर नीचे फिसल जाता था। क्या आप बता सकते हैं कि बंदर पेड़ की चोटी पर पहुँचने में कितने दिन में सफल होगा?
उत्तर:
बंदर दिन में 5 मीटर चढ़ता है और रात में 4 मीटर फिसल जाता है, यानी एक दिन में वह 1 मीटर ऊपर बढ़ता है।
जब बंदर 9 मीटर तक पहुँच जाएगा, तो अगले दिन वह 5 मीटर चढ़कर सीधे 10 मीटर (चोटी) पर पहुँच जाएगा और फिर नीचे नहीं फिसलेगा।
इसलिए, 9 मीटर पहुँचने में उसे 9 दिन लगेंगे।
और 10वें दिन वह चोटी पर पहुँच जाएगा।
अतः बंदर 10 दिनों में पेड़ की चोटी पर पहुँच जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 11 ‘कविता का कमाल’ किस प्रकार की रचना है?
यह एक लोककथा है, जो छत्तीसगढ़ राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के सहयोग से इस पाठ्यपुस्तक में शामिल की गई है। इसीलिए इसमें किसी एक व्यक्ति विशेष का नाम रचनाकार के रूप में नहीं दिया गया है, क्योंकि लोककथाएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप से चलती आई कहानियाँ होती हैं।
क्या कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 11 ‘कविता का कमाल’ एक कविता है या कहानी?
नाम में “कविता” शब्द होने के बावजूद कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 11 वास्तव में गद्य रूप में लिखी गई एक लोककथा है, पद्य (कविता) नहीं। शीर्षक में “कविता” इसलिए आया है क्योंकि कहानी का पात्र मदन अपनी तुकबंदी वाली पंक्तियों को खुद “कविता” कहकर सुनाता है। इसलिए विद्यार्थियों को कोई छंदबद्ध कविता याद करने का भ्रम नहीं होना चाहिए।
कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 11 में कुल कितने अभ्यास खंड दिए गए हैं?
इसमें ‘बातचीत के लिए’, ‘कविता की बात’, ‘मिलान कीजिए’, ‘सोचिए और लिखिए’, ‘समझ और अनुभव’, ‘अनुमान और कल्पना’, ‘कहो कहानी सुनो कहानी’, ‘पाठ से आगे’, ‘मीडिया और आप’, ‘आपकी कविता’, ‘भाषा की बात’, ‘कलाकारी’ और ‘आपकी सूझ-बूझ’ – कुल तेरह खंड हैं। यह वीणा पुस्तक के अपेक्षाकृत लंबे अध्यायों में से एक है, इसलिए इसे एक ही बैठक में पूरा करने के बजाय दो-तीन भागों में बाँटकर पढ़ना बेहतर रहता है।
कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 11 को जल्दी दोहराने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
सबसे आसान तरीका है कहानी को घटनाक्रम में याद रखना — मदन का घर से निकलना, कुत्ता-भैंस-चिड़िया-साँप को देखकर पंक्तियाँ बनाना, धन्नू शाह से मिलना, और अंत में चोरों का पकड़ा जाना। मदन की छह पंक्तियों वाली पूरी ‘कविता’ को क्रम से ज़ोर से बोलकर दोहराने से यह जल्दी याद हो जाती है, क्योंकि इसकी तुकबंदी सरल और लयबद्ध है।
