एनसीईआरटी समाधान कक्षा 6 गणित प्रकाश अध्याय 9 सममिति
कक्षा 6 गणित प्रकाश अध्याय 9 ‘सममिति’ के एनसीईआरटी समाधान, अभ्यास के सभी प्रश्नों के सरल हल सत्र 2026-27 के लिए यहाँ दिए गए हैं। कक्षा 6 गणित अध्याय 9 के प्रश्न-उत्तर हिंदी माध्यम में यहाँ उपलब्ध हैं। फूल, तितली, रंगोली और फिरकी जैसे सुंदर उदाहरणों से यह अध्याय बताता है कि किसी आकृति में सममिति कब होती है।
एनसीईआरटी कक्षा 6 गणित प्रकाश अध्याय 9 समाधान
कक्षा 6 गणित प्रकाश अध्याय 9 में सममिति रेखा या अक्ष, एक से अधिक सममिति रेखाओं वाली आकृतियाँ, घूर्णन सममिति, सममिति का कोण और घूर्णन का केंद्र समझाए गए हैं। सममिति रेखाएँ खींचने और सममिति के कोण ज्ञात करने वाले प्रश्नों के हल सत्र 2026-27 की पुस्तक के अनुसार हैं।
कक्षा 6 गणित प्रकाश के पेज 219 पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
पेज 219 – आइए, पता लगाएँ
1. क्या आप इस अध्याय के प्रारंभ में दी गई आकृतियों में सममिति की रेखा देख पाए हैं? बादलों की आकृति के विषय में आपका क्या विचार है?


उत्तर:
हाँ, कुछ आकृतियों में सममिति की रेखाएँ दिखाई देती हैं।
- तितली के शरीर के बीच से खड़ी रेखा लेने पर उसके दोनों पंख लगभग एक-दूसरे के प्रतिबिंब जैसे दिखते हैं।
- फूल की पंखुड़ियाँ भी केंद्र के चारों ओर लगभग बराबर ढंग से लगी हैं। केंद्र से जाने वाली कुछ रेखाओं के दोनों ओर लगभग समान भाग दिखते हैं।
- रंगोली में केंद्र से जाने वाली खड़ी और आड़ी रेखाओं के दोनों ओर समान रंग और आकार के भाग हैं।
- फिरकी के सभी मुड़े हुए पंख एक ही दिशा में हैं। इसे मोड़ने पर दोनों भाग एक-दूसरे को नहीं ढकेंगे, इसलिए इसमें सममिति की रेखा नहीं है।
बादल की आकृति अनियमित है। उसमें ऐसी रेखा नहीं मिलती, जिससे दोनों भाग एक-दूसरे को पूरी तरह ढक लें।
2. निम्न आकृतियों में यदि सममिति की रेखाएँ हैं, तो उन्हें पहचानिए।

उत्तर:
बाएँ से दाएँ आकृतियों को देखते हैं-
- पहली आकृति में एक तिरछी सममिति की रेखा है। यह सबसे बाएँ वाले कोने और अंदर की ओर बने कोने से जाती है।
- दूसरी आकृति में ऊपर और नीचे के सिरों से जाने वाली एक खड़ी सममिति की रेखा है।
- तीसरी आकृति में सममिति की कोई रेखा नहीं है।
- चौथी आकृति में नीचे के बाएँ कोने से ऊपर की दाईं ओर जाने वाली एक तिरछी सममिति की रेखा है।
- पाँचवीं आकृति में सममिति की कोई रेखा नहीं है।

बिंदीदार रेखाओं के अनुदिश मोड़ने पर आकृतियों के दोनों भाग पूरी तरह एक-दूसरे को ढक लेते हैं।
कक्षा 6 गणित प्रकाश के पेज 223 पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
पेज 223 – आइए, पता लगाएँ
पंचिंग खेल
मोड़ सममिति की एक रेखा है। पंचिंग मशीन की सहायता से कागज की एक मुड़ी चौकोर शीट के विभिन्न स्थानों पर छेद कीजिए और विभिन्न सममिति पैटर्न बनाइए।

उत्तर:
मैंने चौकोर कागज से दो पैटर्न बनाए हैं।
पहले पैटर्न के लिए कागज को बीच से खड़ा मोड़कर अलग-अलग स्थानों पर दो छेद किए। कागज खोलने पर हर छेद के सामने उतनी ही दूरी पर दूसरा छेद बना। मोड़ वाली खड़ी रेखा इसकी सममिति की रेखा है।
दूसरे पैटर्न के लिए कागज को पहले खड़ा और फिर आड़ा मोड़ा। एक छेद करके खोलने पर चार छेद बने। दोनों मोड़ों की रेखाएँ इसकी सममिति की रेखाएँ हैं।

1. दी गई प्रत्येक आकृति में कागज की मुड़ी हुई चौकोर शीट में एक छेद किया गया है और फिर कागज को खोल दिया गया है उस रेखा की पहचान कीजिए जिसके साथ कागज को मोड़ा गया था।
चित्र (d) एक छेद करके बनाया गया है। ज्ञात कीजिए कागज को कैसे मोड़ा गया था।

उत्तर:
a. कागज को बीच की खड़ी रेखा पर मोड़ा गया था। दोनों छेद इस रेखा से बराबर दूरी पर हैं।
b. कागज को ऊपर के दाएँ कोने से नीचे के बाएँ कोने तक जाने वाले विकर्ण पर मोड़ा गया था। इस मोड़ पर दोनों छेद मिल जाते हैं।
c. कागज को बीच की आड़ी रेखा पर मोड़ा गया था। ऊपर और नीचे के छेद एक-दूसरे पर आ जाते हैं।
d. पहले कागज को बीच से खड़ा और फिर बीच से आड़ा मोड़ा गया था। इससे चार परतें बनीं। मुड़े हुए कागज में एक छेद करने पर, खोलने के बाद चारों कोनों के पास चार छेद मिले।

2. सममिति रेखाएँ दी गई हैं; अन्य छेदों को ज्ञात कीजिए-

उत्तर:
दूसरा छेद सममिति की रेखा के दूसरी ओर, उससे उतनी ही दूरी पर बनाएँगे। रेखा पर मोड़ने से दोनों छेद एक-दूसरे पर आने चाहिए।
a. दूसरा छेद विकर्ण के ऊपर, ऊपरी किनारे के पास होगा।
b. दूसरा छेद आड़ी रेखा के ऊपर, पहले छेद के ठीक सामने होगा।
c. दूसरा छेद खड़ी रेखा के दाईं ओर, पहले छेद की ऊँचाई पर होगा।
d. दूसरा छेद तिरछी रेखा के नीचे की ओर, वृत्त के दाएँ भाग में होगा।
e. दूसरा छेद तिरछी रेखा के नीचे की ओर, वृत्त के बाएँ भाग में होगा।

चित्र में पहले छेद नीले और उनके सामने बनने वाले दूसरे छेद नारंगी रंग से दिखाए हैं।
3. नीचे कागज काटने से संबंधित कुछ प्रश्न दिए गए हैं।
एक ऊर्ध्वाधर मोड़ पर विचार कीजिए। उसे हम निम्न प्रकार से दर्शाते हैं-

इसी प्रकार, क्षैतिज मोड़ को निम्न प्रकार से दर्शाते हैं-

उत्तर:
ऊर्ध्वाधर मोड़ में कागज को खड़ी रेखा पर मोड़ते हैं। इससे बायाँ और दायाँ भाग एक-दूसरे पर आ जाते हैं।
क्षैतिज मोड़ में कागज को आड़ी रेखा पर मोड़ते हैं। इससे ऊपर और नीचे के भाग एक-दूसरे पर आ जाते हैं।
कागज खोलने पर मोड़ की रेखा के दोनों ओर कटे हुए भाग एक-दूसरे के प्रतिबिंब जैसे दिखाई देंगे।
4. नीचे दी गई प्रत्येक स्थिति में काटने के पश्चात् जब कागज को खोला जाए तब छेद के आकार का अनुमान लगाकर उसे सत्यापित कीजिए।

उत्तर:
a. कागज खोलने पर बीच में एक छेद बनता है। उसका दायाँ और बायाँ भाग एक-दूसरे का प्रतिबिंब होता है। इसलिए दोनों ओर एक जैसा टेढ़ा-मेढ़ा किनारा बनता है।
b. कागज के बीच में एक छेद बनता है, जिसकी दोनों ओर की अंदर धँसी हुई सीमाएँ एक जैसी होती हैं। मुड़ी हुई खड़ी रेखा इस छेद की सममिति रेखा है।
c. यहाँ कागज पहले खड़ा मोड़ा गया है और फिर ऊपर का भाग नीचे मोड़ा गया है। बायाँ किनारा मोड़ वाला है, जबकि नीचे का किनारा खुला है। खोलने पर बीच में दो आयताकार छेद बनते हैं। ऊपर और नीचे के बाहरी किनारों पर दो-दो आयताकार कटाव भी बनते हैं।
d. बाएँ मोड़ के पास का कट खोलने पर बीच में एक आयताकार छेद बनाता है। खुले दाएँ किनारे का कट दोनों बाहरी किनारों पर एक-एक आयताकार कटाव बनाता है।
कागज को इसी क्रम में मोड़कर और खोलकर इन आकृतियों की जाँच कर सकते हैं।

5. मान लीजिए कि आपको इनमें से प्रत्येक आकार को कुछ मोड़ों और एक सीधे कट के साथ प्राप्त करना है। आप ऐसा किस प्रकार करेंगे?
a. केंद्र में स्थित छेद एक वर्ग है।

b. केंद्र में स्थित छेद एक वर्ग है।

नोट— उपरोक्त दोनों प्रश्नों के लिए, इसकी जाँच कीजिए कि क्या केंद्र में चार-भुजीय आकृति एक वर्ग के दोनों गुणों की विशेषताओं को इंगित करती है।
उत्तर:
a. पहले कागज को बीच से खड़ा और फिर आड़ा मोड़ते हैं। इससे कागज का चौथाई भाग मिलता है। इसके जिस कोने पर दोनों मोड़ मिलते हैं, उसे O कहते हैं। यह पूरे कागज का केंद्र है।
अब O से जाने वाले विकर्ण पर एक और मोड़ लगाते हैं, जिससे दोनों मुड़े किनारे आपस में मिल जाएँ। O से थोड़ी दूरी पर इस मिले हुए किनारे के लंबवत एक सीधा कट लगाते हैं। O वाला छोटा कटा भाग अलग कर देते हैं। बाकी कागज खोलने पर बीच में सीधा रखा हुआ वर्गाकार छेद मिलता है।

b. कागज को बीच से खड़ा और आड़ा मोड़कर चौथाई भाग लेते हैं। जहाँ दोनों मोड़ मिलते हैं, वह कोना O पूरे कागज का केंद्र है। O से दोनों मुड़े किनारों पर बराबर दूरी के निशान लगाते हैं। इन निशानों को मिलाने वाला एक सीधा तिरछा कट लगाते हैं। O वाला छोटा कटा भाग अलग करके बाकी कागज खोलने पर बीच में घुमाया हुआ वर्गाकार छेद मिलता है।

दोनों छेदों में चारों भुजाएँ बराबर और चारों कोण 90° हैं। इसलिए दोनों वर्ग हैं। दूसरी आकृति का घुमाया हुआ होना उसके वर्ग होने के गुणों को नहीं बदलता।
6. इन आकृतियों में कितनी सममिति की रेखाएँ हैं?
a.

b. समान भुजाओं और समान कोणों वाला एक त्रिभुज

c. समान भुजाओं और समान कोणों वाला एक षट्भुज

उत्तर:
a. पहली आकृति एक वर्ग है। इसमें सममिति की 4 रेखाएँ हैं—दो विकर्ण और सम्मुख भुजाओं के मध्यबिंदुओं को मिलाने वाली दो रेखाएँ। दूसरी, आठ नोकों वाली आकृति में सममिति की 8 रेखाएँ हैं।
b. समान भुजाओं और समान कोणों वाले त्रिभुज में सममिति की 3 रेखाएँ हैं। प्रत्येक रेखा एक शीर्ष से सामने वाली भुजा के मध्यबिंदु तक जाती है।
c. इस षट्भुज में सममिति की 6 रेखाएँ हैं। तीन रेखाएँ सम्मुख शीर्षों को और तीन रेखाएँ सम्मुख भुजाओं के मध्यबिंदुओं को मिलाती हैं।

7. प्रत्येक आकृति का अक्स बनाइए तथा सममिति की रेखाएँ खींचिए, यदि कोई है तो-

उत्तर:
ऊपर की चार आकृतियों में बाएँ से दाएँ—
पहली में 1 खड़ी सममिति रेखा है।
दूसरी, तीसरी और चौथी में 2–2 सममिति रेखाएँ हैं—एक खड़ी और एक आड़ी।
नीचे की चार जाली वाली आकृतियों को पहले ऊपर की पंक्ति और फिर नीचे की पंक्ति में बाएँ से दाएँ लेते हैं—
पहली में 4 रेखाएँ हैं—एक खड़ी, एक आड़ी और दो तिरछी।
दूसरी में 2 रेखाएँ हैं—एक खड़ी और एक आड़ी।
तीसरी में केवल 1 आड़ी रेखा है।
चौथी में 4 रेखाएँ हैं—एक खड़ी, एक आड़ी और दो तिरछी।
चित्र में सममिति रेखाएँ नीले रंग से दिखाई हैं। इन पर मोड़ने से दोनों भाग एक-दूसरे पर पूरी तरह आते हैं।

8. नीचे दिए गए कोलम में सममिति की रेखाएँ ज्ञात कीजिए-

उत्तर:
इस कोलम में सममिति की 6 रेखाएँ हैं। सभी रेखाएँ बीच वाले तारे के केंद्र से गुजरती हैं। इनमें एक खड़ी, एक आड़ी और चार तिरछी रेखाएँ हैं। प्रत्येक रेखा के दोनों ओर तारे और छोटी आकृतियाँ समान क्रम में हैं।

9. निम्नलिखित का चित्र बनाइए-
a. एक त्रिभुज जिसमें सममिति की केवल एक रेखा हो।
b. एक त्रिभुज जिसमें सममिति की केवल तीन रेखाएँ हों।
c. एक त्रिभुज जिसमें सममिति की कोई रेखा ना हो।
क्या ठीक दो सममित रेखाओं का त्रिभुज बनाना संभव है?
उत्तर:
a. दो बराबर भुजाओं वाला ऐसा त्रिभुज बनाते हैं, जिसकी तीसरी भुजा अलग हो। इसकी केवल 1 सममिति रेखा है।
b. तीनों भुजाएँ बराबर लेकर त्रिभुज बनाते हैं। इसकी 3 सममिति रेखाएँ हैं।
c. तीनों भुजाएँ अलग-अलग लंबाई की लेकर त्रिभुज बनाते हैं। इसकी कोई सममिति रेखा नहीं है।

नहीं, ठीक दो सममिति रेखाओं वाला त्रिभुज नहीं बन सकता। त्रिभुज में दो ऐसी रेखाएँ होने पर तीनों भुजाएँ बराबर हो जाएँगी और तीसरी सममिति रेखा भी होगी।
10. निम्नलिखित का चित्र बनाइए। प्रत्येक स्थिति में, आकृति में कम से कम एक घुमावदार सीमा अवश्य हो।
a. ठीक एक सममिति की रेखा वाला चित्र
b. ठीक दो सममिति की रेखाओं वाला चित्र
c. ठीक चार सममिति की रेखाओं वाला चित्र
उत्तर:
a. एक अर्धवृत्त बनाया है। इसकी ठीक 1 सममिति रेखा है।
b. एक लंबी अंडाकार आकृति बनाई है। इसकी ठीक 2 सममिति रेखाएँ हैं—एक खड़ी और एक आड़ी।
c. एक वर्ग के चारों कोने एक जैसे गोल किए हैं। इसकी ठीक 4 सममिति रेखाएँ हैं—एक खड़ी, एक आड़ी और दो तिरछी।
तीनों आकृतियों की सीमा में घुमावदार भाग है।

11. निम्नलिखित आकृतियों को एक वर्गाकार कागज पर बनाइए। उन्हें इस प्रकार पूरा कीजिए कि नीले रंग की रेखा सममिति की रेखा हो। समस्या (a) को आपके लिए पूरा किया गया है।


संकेत— (c) और (f) के लिए देखिए कि क्या पुस्तक को घुमाने से कुछ सहायता प्राप्त होती है!
उत्तर:
हर रेखाखंड का दूसरा भाग नीली रेखा के पार समान दूरी पर बनाते हैं। पहले उसके सिरों के प्रतिबिंब अंकित करते हैं, फिर उन्हें उसी क्रम में जोड़ते हैं।
(a) और (d) में बाएँ और दाएँ भाग पूरे किए हैं।
(b) और (e) में ऊपर और नीचे के भाग पूरे किए हैं।
(c) और (f) में तिरछी नीली रेखा के दूसरी ओर प्रतिबिंब बनाया है।
इन नीली रेखाओं पर मोड़ने से प्रत्येक आकृति के दोनों भाग पूरी तरह मिलते हैं।

12. निम्नलिखित आकृतियों को एक वर्गाकार कागज पर बनाइए। उनमें से प्रत्येक को इस प्रकार पूरा कीजिए कि परिणामी आकृति में सममिति की रेखाओं के रूप में दो नीली रेखाएँ हों।

उत्तर:
पहले बने हुए भाग का प्रतिबिंब एक नीली रेखा के दूसरी ओर बनाते हैं। फिर बने दोनों भागों का प्रतिबिंब दूसरी नीली रेखा के पार बनाते हैं। हर बिंदु की नीली रेखा से दूरी दोनों ओर बराबर रखते हैं।
(a) और (b) में दोनों तिरछी नीली रेखाओं के अनुसार भाग पूरे किए हैं।
(c), (d), (e) और (f) में खड़ी और आड़ी नीली रेखाओं के अनुसार भाग पूरे किए हैं।
अब प्रत्येक आकृति को किसी भी नीली रेखा पर मोड़ने से दोनों ओर के भाग एक-दूसरे पर आते हैं।

13. निम्नलिखित रेखा आकृतियों को डॉट ग्रिड पर बनाइए। प्रत्येक आकृति के लिए दो और रेखाएँ खींचिए ताकि ऐसी एक आकृति बन सके, जिसमें सममिति की एक रेखा हो।

उत्तर:
मैंने प्रत्येक आकृति में दो रेखाखंड जोड़कर उसे पूरा किया है। सभी नई रेखाओं के सिरे भी ग्रिड के बिंदुओं पर हैं।
ऊपर की पंक्ति में बाएँ से दाएँ, सममिति रेखाएँ तिरछी, खड़ी और खड़ी हैं।
नीचे की पंक्ति में बाएँ से दाएँ, सममिति रेखाएँ तिरछी, खड़ी और आड़ी हैं।
चित्र में नीली बिंदीदार रेखा प्रत्येक आकृति की सममिति रेखा है।

कक्षा 6 गणित प्रकाश के पेज 235 पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
पेज 235 – आइए, पता लगाएँ
1. दी गई आकृतियों में दिए गए चिह्न ● के परित सममिति के कोण ज्ञात कीजिए।

उत्तर:
(a) सममिति के कोण 90°, 180°, 270° और 360° हैं। हर चौथाई चक्कर पर यह + जैसी आकृति पहले जैसी दिखती है।
(b) केवल 360° सममिति का कोण है। आधा चक्कर देने पर दोनों छोटी झंडियाँ बाईं ओर आ जाती हैं, इसलिए आकृति पहले जैसी नहीं दिखती।
(c) सममिति के कोण 180° और 360° हैं। आधा चक्कर देने पर दोनों खड़ी रेखाएँ आपस में स्थान बदलती हैं और आकृति पूरी तरह मिल जाती है।
2. निम्नलिखित में से किस आकृति में एक से अधिक सममिति के कोण हैं?

उत्तर:
ऊपरी पंक्ति की चारों आकृतियों और निचली पंक्ति की पहली दो आकृतियों में एक से अधिक सममिति के कोण हैं।
ऊपरी पंक्ति में बाएँ से दाएँ—
• चार बराबर भागों वाला वृत्त: 90°, 180°, 270°, 360°।
• समबाहु त्रिभुज: 120°, 240°, 360°।
• तीन बराबर भागों वाला वृत्त: 120°, 240°, 360°।
• चार पंखों वाली आकृति: 90°, 180°, 270°, 360°।
निचली पंक्ति में बाएँ से दाएँ—
• X जैसी आकृति: 90°, 180°, 270°, 360°।
• पाँच नोकों वाला तारा: 72°, 144°, 216°, 288°, 360°।
• B जैसी आखिरी आकृति: केवल 360°। इसलिए इसमें एक से अधिक सममिति के कोण नहीं हैं।
3. प्रत्येक आकृति के लिए घूर्णन सममिति का क्रम बताइए-

उत्तर:
एक पूरे चक्कर में आकृति जितनी बार अपनी शुरुआती स्थिति से मिलती है, वही उसका घूर्णन सममिति का क्रम होता है। इसमें 360° पर मिलने को भी गिनते हैं।
ऊपरी पंक्ति में बाएँ से दाएँ-
- पहली आकृति का क्रम 1 है। आधा चक्कर देने पर दोनों झंडियाँ पूरी तरह नहीं मिलतीं। यह केवल 360° पर मिलती है।
- X जैसी आकृति का क्रम 4 है। इसके कोण 90°, 180°, 270°, 360° हैं। बीच का छोटा चाप कोण का संकेत है।
- छह नोकों वाले तारे का क्रम 6 है। इसके कोण 60°, 120°, 180°, 240°, 300°, 360° हैं।
निचली पंक्ति में बाएँ से दाएँ-
- तीन भुजाओं वाली आकृति का क्रम 3 है। इसके कोण 120°, 240°, 360° हैं।
- + जैसी आकृति का क्रम 4 है। इसके कोण 90°, 180°, 270°, 360° हैं।
- पंचभुज को नियमित मानने पर इसका क्रम 5 है। इसके कोण 72°, 144°, 216°, 288°, 360° हैं।
प्रत्येक स्थिति में कोण, न्यूनतम कोण के गुणज हैं। आप उत्साहपूर्वक पूछ सकते हैं कि क्या ऐसा सदैव होता है? आप क्या सोचते हैं?
उत्तर:
हाँ, जिस आकृति का सबसे छोटा धनात्मक सममिति का कोण निश्चित है, उसके बाकी सममिति के कोण उसी के गुणज होते हैं। जैसे, सबसे छोटा कोण 120° हो, तो 120°, 240° और 360° पर आकृति मिलती है। हर बार उतना ही घुमाने पर फिर वही स्थिति आती है।
सत्य या असत्य
• प्रत्येक आकृति का 360° एक सममिति का कोण होगा।
• यदि एक आकृति की सममिति का न्यूनतम कोण एक प्राकृतिक संख्या है, तो वह 360° का एक गुणनखंड होगी।
उत्तर:
• सत्य। 360° का पूरा चक्कर देने पर प्रत्येक आकृति अपनी शुरुआती स्थिति में लौट आती है।
• सत्य। सबसे छोटे कोण को बार-बार जोड़ने पर एक पूरा चक्कर, यानी 360°, बनता है। इसलिए यदि वह कोण प्राकृतिक संख्या में है, तो वह 360 को पूरा-पूरा विभाजित करेगा।
कक्षा 6 गणित प्रकाश के पेज 238 पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
पेज 238 – आइए, पता लगाएँ
1. नीचे दिए गए वृत्त के त्रिज्यखंडों में इस प्रकार रंग भरिए कि आकृति में (i) 3 सममिति के कोण हों। (ii) 4 सममिति के कोण हों। (iii) सममिति के संभव कोणों की संख्या क्या होगी? यदि इन त्रिज्यखंडों को अलग-अलग रंगों से अलग-अलग विधियों द्वारा भरा जाए तो,

उत्तर:
वृत्त में 12 बराबर त्रिज्यखंड हैं। प्रत्येक का कोण = 360° ÷ 12 = 30°।
(i) चार अलग रंगों का एक समूह बनाकर उसे तीन बार दोहराते हैं। चार त्रिज्यखंडों के बाद वही रंग-क्रम मिलता है। इसलिए सबसे छोटा सममिति का कोण = 4 × 30° = 120° होगा। तीन सममिति के कोण 120°, 240° और 360° हैं।
(ii) तीन अलग रंगों का समूह बनाकर उसे चार बार दोहराते हैं। अब सबसे छोटा सममिति का कोण = 3 × 30° = 90° होगा। चार सममिति के कोण 90°, 180°, 270° और 360° हैं।

(iii) 12 त्रिज्यखंडों और उनकी विभाजन-रेखाओं को रखते हुए सममिति के कोणों की संभव संख्याएँ 1, 2, 3, 4, 6 और 12 हैं। ये सभी 12 के गुणनखंड हैं। रंगों के क्रम को अलग-अलग ढंग से दोहराने पर ये स्थितियाँ मिलती हैं। सभी त्रिज्यखंड एक जैसे रंगने पर 12 सममिति के कोण मिलते हैं।
2. वृत्त और वर्ग को छोड़कर, ऐसी अन्य दो आकृतियाँ बनाइए, जिनमें परावर्तीय सममिति और घूर्णन सममिति दोनों हों।
उत्तर:
मैंने एक समबाहु त्रिभुज और एक नियमित षट्भुज बनाया है।
• समबाहु त्रिभुज की 3 सममिति रेखाएँ हैं। यह 120°, 240° और 360° पर अपने ऊपर मिलता है।
• नियमित षट्भुज की 6 सममिति रेखाएँ हैं। यह 60°, 120°, 180°, 240°, 300° और 360° पर अपने ऊपर मिलता है।
इसलिए दोनों में परावर्तीय और घूर्णन सममिति है।

3. जहाँ भी संभव हो, निम्नलिखित का एक कच्चा स्केच खींचिए-
a. एक त्रिभुज, जिसमें न्यूनतम दो सममिति की रेखाएँ हों तथा न्यूनतम दो सममिति के कोण हों।
b. एक त्रिभुज, जिसमें केवल एक सममिति की रेखा हो लेकिन कोई घूर्णन सममिति न हो।
c. घूर्णन सममिति वाला ऐसा चतुर्भुज, जिसमें कोई परावर्तीय सममिति न हो।
d. एक परावर्तीय सममिति वाला चतुर्भुज, जिसमें कोई घूर्णन सममिति न हो।
उत्तर:
a. समबाहु त्रिभुज बना सकते हैं। इसमें 3 सममिति रेखाएँ और 3 सममिति के कोण होते हैं, इसलिए दोनों शर्तें पूरी होती हैं।
b. ऐसा समद्विबाहु त्रिभुज बनाते हैं, जिसकी तीसरी भुजा बाकी दोनों से अलग हो। इसकी केवल एक सममिति रेखा है और 360° से कम किसी घुमाव पर यह अपने ऊपर नहीं मिलता।
c. ऐसा समानांतर चतुर्भुज बनाते हैं, जिसकी पास-पास की भुजाएँ असमान हों और कोण समकोण न हों। यह 180° पर अपने ऊपर मिलता है, लेकिन इसकी कोई परावर्तन सममिति रेखा नहीं है।
d. ऊपर और नीचे की समानांतर भुजाएँ अलग-अलग लंबाई की तथा बाकी दोनों भुजाएँ बराबर लेकर समलंब चतुर्भुज बनाते हैं। इसकी एक खड़ी सममिति रेखा है, लेकिन 360° से कम किसी घुमाव पर यह अपने ऊपर नहीं मिलता।

4. एक आकृति में सममिति का न्यूनतम कोण 60° है। इस आकृति के अन्य सममिति के कोण क्या हैं?
उत्तर:
60° में बार-बार 60° जोड़ते हैं। अन्य सममिति के कोण 120°, 180°, 240°, 300° और 360° हैं।
5. एक आकृति में एक सममिति का कोण 60° है। इस आकृति के दो सममिति के कोण 60° से कम हैं। सममिति का न्यूनतम कोण क्या होगा?
उत्तर:
60° से पहले दो सममिति के कोण आते हैं। इसलिए 60° सबसे छोटे कोण का तीसरा गुणज है।
सबसे छोटा कोण = 60° ÷ 3 = 20°।
60° से छोटे दो सममिति के कोण 20° और 40° हैं। अतः न्यूनतम सममिति का कोण 20° है।
6. क्या हम घूर्णन सममिति के साथ एक ऐसी आकृति प्राप्त कर सकते हैं, जिसमें सममिति का न्यूनतम कोण
(a) 45° है?
(b) 17° है?
उत्तर:
(a) हाँ। 360° ÷ 45° = 8 है। नियमित अष्टभुज की सबसे छोटी घूर्णन सममिति 45° होती है।

(b) नहीं। 17 × 21 = 357 और 17 × 22 = 374 है। इसलिए 17, 360 का गुणनखंड नहीं है। अतः 17° न्यूनतम सममिति का कोण नहीं हो सकता।
7. यह दिल्ली में स्थित नए संसद भवन का चित्र है-

a. क्या इस चित्र की बाहरी परिसीमा (boundary) में परावर्तन सममिति है? यदि ऐसा है, तो सममिति की रेखाएँ खींचिए। वे कितनी हैं?
b. क्या इसकी अपने केंद्र के परित घूर्णन सममिति है? यदि ऐसा है, तो घूर्णन सममिति के कोण ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
a. हाँ, बाहरी आकृति की 3 परावर्तन सममिति रेखाएँ हैं। हर रेखा एक छोटी भुजा और उसके सामने की बड़ी भुजा के बीच से जाती है।
b. हाँ, यह बाहरी आकृति अपने केंद्र के चारों ओर 120°, 240° और 360° घुमाने पर अपने ऊपर मिलती है। इसका घूर्णन सममिति का क्रम 3 है।

8. अध्याय 1, सारणी 3 में पहले आकृति अनुक्रम नियमित बहुभुज आकार अनुक्रम आकृतियों में सममिति की कितनी रेखाएँ हैं? आपको कौन-सा संख्या अनुक्रम मिलता है।
उत्तर:
नियमित बहुभुज में जितनी भुजाएँ होती हैं, उतनी ही सममिति रेखाएँ होती हैं।
समबाहु त्रिभुज में 3, वर्ग में 4, नियमित पंचभुज में 5 और नियमित षट्भुज में 6 सममिति रेखाएँ हैं।
इसलिए संख्या अनुक्रम 3, 4, 5, 6, 7, … मिलता है।
9. अध्याय 1 की सारणी 3 में पहले आकृति अनुक्रम नियमित बहुभुज के आकार अनुक्रम की आकृतियों में सममिति के कितने कोण हैं? आपको कौन-सा संख्या अनुक्रम प्राप्त होता है?
उत्तर:
नियमित बहुभुज में सममिति के कोणों की संख्या भी उसकी भुजाओं की संख्या के बराबर होती है। इसमें 360° को भी गिनते हैं।
त्रिभुज में 3, वर्ग में 4, नियमित पंचभुज में 5 और नियमित षट्भुज में 6 सममिति के कोण हैं।
अतः संख्या अनुक्रम 3, 4, 5, 6, 7, … है।
10. अध्याय 1 की सारणी 3 में अंतिम आकृति अनुक्रम कोच स्नोफ्लेक के आकार अनुक्रम में आकृतियों में सममिति की कितनी रेखाएँ हैं? सममिति के कितने कोण हैं?
उत्तर:
शुरुआती समबाहु त्रिभुज की 3 सममिति रेखाएँ और 3 सममिति के कोण हैं। इसके कोण 120°, 240° और 360° हैं।
उसके बाद बनने वाली कोच स्नोफ्लेक आकृतियों में 6 सममिति रेखाएँ और 6 सममिति के कोण होते हैं। ये कोण 60°, 120°, 180°, 240°, 300° और 360° हैं।
शुरुआती समबाहु त्रिभुज को भी गिनने पर दोनों की संख्या का अनुक्रम 3, 6, 6, 6, … मिलता है।
11. अशोक चक्र में कितनी सममिति की रेखाएँ और सममिति के कोण होते हैं?

उत्तर:
अशोक चक्र में समान दूरी पर 24 तीलियाँ हैं। इसकी 24 सममिति रेखाएँ हैं और सममिति के कोण भी 24 हैं।
सबसे छोटा सममिति का कोण = 360° ÷ 24 = 15°।
सममिति के कोण 15°, 30°, 45°, …, 345°, 360° हैं।
कक्षा 6 गणित प्रकाश के पेज 239 पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
पेज 239 – टाइल्स के साथ खेलिए
a. पुस्तक के अंत में दी गई रंगीन टाइल्स का उपयोग करके इस आकृति को पूरा कीजिए जिससे इसकी केवल दो सममिति की रेखाएँ हों।

उत्तर:
मैंने दोनों विकर्णों को सममिति की रेखाएँ बनाया है।
- ऊपर के बाएँ भाग का प्रतिबिंब ऊपर-दाएँ से नीचे-बाएँ जाने वाले विकर्ण के दूसरी ओर बनाकर नीचे का दायाँ भाग भरते हैं।
- ऊपर के दाएँ भाग की हर टाइल में ऊपर-दाईं ओर नीला और नीचे-बाईं ओर पीला रंग रखते हैं।
- नीचे के बाएँ भाग की हर टाइल में ऊपर-दाईं ओर पीला और नीचे-बाईं ओर नीला रंग रखते हैं।
दोनों विकर्णों पर रंग पूरी तरह मिलते हैं। बीच की खड़ी और आड़ी रेखाओं पर रंग नहीं मिलते। इसलिए इस डिजाइन की केवल 2 सममिति रेखाएँ हैं।

b. 16 ऐसी ही टाइल्स का प्रयोग करके ऐसी आकृति बनाइए जिसमें ठीक
1. एक सममिति की रेखा हो।
2. दो सममिति की रेखाएँ हों।
उत्तर:
1. मैंने 16 टाइल्स को 4 पंक्तियों और 4 स्तंभों में रखा है। बाईं ओर के रंगों का प्रतिबिंब दाईं ओर बनाया है। ऊपर और नीचे के रंग अलग रखे हैं। इसलिए केवल बीच की खड़ी रेखा सममिति रेखा है।

2. इसमें बाएँ और दाएँ तथा ऊपर और नीचे दोनों ओर रंगों को प्रतिबिंब के अनुसार रखा है। विकर्णों के दोनों ओर रंग नहीं मिलते। इसलिए बीच की खड़ी और आड़ी रेखाएँ ही इसकी 2 सममिति रेखाएँ हैं।

c. इन टाइल्स का प्रयोग करके रचनात्मक सममित डिजाइन बनाइए।
उत्तर:
मैंने 16 टाइल्स से नीचे दिखाया गया डिजाइन बनाया है। इसकी बीच की खड़ी रेखा, आड़ी रेखा और दोनों विकर्णों पर रंग एक-दूसरे से मिलते हैं। इसलिए इसकी 4 सममिति रेखाएँ हैं।

कक्षा 6 गणित प्रकाश के पेज 241 पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
पेज 241 – खेल
एक 6×6 का ग्रिड (grid) खींचिए। दो खिलाड़ी दो आसन्न वर्गों को भरते हुए, बारी-बारी से एक रेखा खींचते हैं। यह रेखा क्षैतिज या ऊर्ध्वाधर किसी भी रूप में खींची जा सकती है। ये रेखाएँ अतिआच्छादित नहीं हो सकती हैं। यह खेल तब तक जारी रहता है, जब तक कि कोई खिलाड़ी कोई और रेखा नहीं खींच पाता है। वह खिलाड़ी जो आगे रेखा नहीं खींच पाता, खेल में हार जाता है।
इस खेल को जीतने की क्या रणनीति होनी चाहिए?

उत्तर:
मैं दूसरी बारी लूँगा और 180° की घूर्णन सममिति का उपयोग करूँगा।
- पहले खिलाड़ी की हर रेखा को ग्रिड के केंद्र के चारों ओर आधा चक्कर घुमाने पर जिस स्थान पर रेखा पहुँचेगी, मैं वहाँ अपनी रेखा खींचूँगा।
- मेरी चाल के बाद भरी हुई जगह फिर से केंद्र के चारों ओर सममित हो जाएगी। इसलिए पहले खिलाड़ी के लिए कोई नई जगह खाली होगी, तो मेरी उसके सामने वाली जगह भी खाली होगी।
- 6×6 ग्रिड में किसी चाल की रेखा और उसकी आधे चक्कर वाली रेखा एक ही वर्ग को नहीं भरतीं। इसलिए मैं उसकी हर चाल का उत्तर दे सकूँगा।

इस प्रकार आखिरी चाल मेरी होगी। पहले खिलाड़ी को अगली चाल के लिए जगह नहीं मिलेगी और मैं जीत जाऊँगा।
अध्याय 9 के लिए कागज को मोड़कर और काटकर सममित आकृतियाँ बनाएँ तथा अपने आस-पास की वस्तुओं और रंगोली के नमूनों में सममिति रेखाएँ और घूर्णन सममिति पहचानने का अभ्यास करें। ‘गणित प्रकाश’ के सभी अध्यायों के समाधान कक्षा 6 गणित एनसीईआरटी समाधान पृष्ठ पर देखें।
