एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 गणित प्रकाश भाग 1 अध्याय 6 संख्याओं का खेल
कक्षा 7 गणित प्रकाश भाग 1 अध्याय 6 ‘संख्याओं का खेल’ के एनसीईआरटी समाधान – अभ्यास के प्रश्नों के हल सत्र 2026-27 के लिए यहाँ दिए गए हैं। इसमें जादुई वर्ग बनाना, विरहांक संख्याएँ और अंकों को अक्षरों से छिपाने वाली अंक पहेलियाँ भी हैं।
एनसीईआरटी कक्षा 7 गणित प्रकाश भाग 1 अध्याय 6 समाधान
कक्षा 7 गणित भाग 1 अध्याय 6 के एनसीईआरटी समाधान हिंदी माध्यम में यहाँ उपलब्ध हैं। कक्षा 6 के इसी नाम वाले अध्याय को आगे बढ़ाते हुए यह अध्याय सम-विषम संख्याओं, योग और गुणनफल के सम या विषम होने तथा जाल में संख्याएँ भरने की खोज कराता है। तर्क पर आधारित प्रश्नों के हल सत्र 2026-27 के अनुसार समझाकर दिए गए हैं।
कक्षा 7 गणित प्रकाश के पेज 128 पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
पेज 128 – पता लगाइए
1. इस पुस्तक के अंत में दिए गए स्टिकर चित्रों के कटआउट को इस प्रकार व्यवस्थित कीजिए अथवा रेखा खंड खींचकर उसकी ऊँचाई के आधार पर ऐसी व्यवस्था बनाइए कि उनका अनुक्रम निम्नलिखित रूप में पढ़ा जाए-
(a) 0, 1, 1, 2, 4, 1, 5
(b) 0, 0, 0, 0, 0, 0, 0
(c) 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6
(d) 0, 1, 0, 1, 0, 1, 0
(e) 0, 1, 1, 1, 1, 1, 1
(f) 0, 0, 0, 3, 3, 3, 3
उत्तर:
मैंने सात अलग-अलग ऊँचाइयाँ लीं। 1 सबसे छोटी ऊँचाई है और 7 सबसे बड़ी। हर बच्चा अपने से पहले खड़े उन बच्चों की संख्या बोलता है जो उससे लंबे हैं।
व्यवस्था बनाने के लिए अंतिम स्थान से शुरू कर सकते हैं। जैसे (a) में अंतिम बच्चा 5 बोलता है। उसके आगे पाँच लंबे बच्चे होने चाहिए, इसलिए उसकी ऊँचाई 2 होगी। अब बची हुई छह ऊँचाइयों में से छठे स्थान के लिए ऊँचाई चुनते हैं। वहाँ बोली गई संख्या 1 है, इसलिए बची हुई ऊँचाइयों में दूसरी सबसे बड़ी ऊँचाई 6 लेते हैं। इसी तरह शेष स्थान भरते हैं।
बाईं ओर से दाईं ओर रेखाखंडों की ऊँचाइयाँ इस क्रम में हैं-
(a) 7, 3, 5, 4, 1, 6, 2
(b) 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7
(c) 7, 6, 5, 4, 3, 2, 1
(d) 2, 1, 4, 3, 6, 5, 7
(e) 7, 1, 2, 3, 4, 5, 6
(f) 5, 6, 7, 1, 2, 3, 4

जैसे (f) में पहले तीन बच्चे बढ़ती ऊँचाई के क्रम में हैं, इसलिए वे 0, 0, 0 बोलते हैं। अंतिम चारों की ऊँचाइयाँ भी 1 से 4 तक बढ़ती जाती हैं। उनमें से हर एक के आगे उससे लंबे केवल पहले तीन बच्चे हैं।
2. नीचे दिए गए कथनों में से प्रत्येक के बारे में सोचिए तथा पहचान कीजिए कि यह कथन सदैव सत्य है या केवल कभी-कभी सत्य है या सदैव असत्य है। अपने तर्क को साझा कीजिए।
(a) यदि कोई व्यक्ति ‘0’ बोलता है तो ऐसे व्यक्ति उस समूह में सबसे लंबे हैं।
(b) यदि कोई व्यक्ति सबसे लंबा है तो उसकी संख्या ‘0’ है।
(c) सबसे पहले व्यक्ति की संख्या ‘0’ है।
(d) यदि कोई व्यक्ति पंक्ति में प्रथम या अंतिम नहीं है (अर्थात ऐसे व्यक्ति जो कहीं बीच में खड़े हैं) तो वह ‘0’ नहीं बोल सकता है।
(e) वह व्यक्ति जो सबसे बड़ी संख्या बोलता है, वह सबसे छोटा है।
(f) 8 व्यक्तियों के समूह में अधिकतम संभावित संख्या क्या है?
उत्तर:
(a) केवल कभी-कभी सत्य। सबसे लंबा व्यक्ति 0 बोलता है, लेकिन पहला व्यक्ति भी 0 बोलता है, चाहे उसके बाद उससे लंबा व्यक्ति खड़ा हो।
(b) सदैव सत्य। सबसे लंबे व्यक्ति के आगे उससे लंबा कोई हो ही नहीं सकता। इसलिए वह 0 बोलता है।
(c) सदैव सत्य। पहले व्यक्ति के आगे कोई खड़ा नहीं है, इसलिए उसकी संख्या 0 है।
(d) केवल कभी-कभी सत्य। बीच के व्यक्ति के आगे उससे लंबा कोई है तो वह 0 नहीं बोलता। लेकिन यदि वह अपने आगे के सभी व्यक्तियों से लंबा है, तो बीच में रहकर भी 0 बोलता है।
(e) केवल कभी-कभी सत्य। यदि सभी सबसे लंबे से सबसे छोटे के क्रम में खड़े हों, तो सबसे छोटा व्यक्ति सबसे पीछे होगा और सबसे बड़ी संख्या बोलेगा। लेकिन यदि ऊँचाइयाँ 1, 4, 3, 2 के क्रम में हों, तो बोली गई संख्याएँ 0, 0, 1, 2 होंगी। यहाँ सबसे बड़ी संख्या 2 बोलने वाला व्यक्ति सबसे छोटा नहीं है।
(f) अधिकतम संभावित संख्या 7 है। यदि सबसे छोटा व्यक्ति अंत में खड़ा हो, तो उसके आगे सातों व्यक्ति उससे लंबे होंगे।
कक्षा 7 गणित प्रकाश के पेज 131 पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
पेज 131 – पता लगाइए
1. विषम और सम संख्याओं के चित्रीय निरूपणों की अपनी समझ का उपयोग करते हुए निम्नलिखित में से प्रत्येक योग की समानता ज्ञात कीजिए-
(a) 2 सम संख्याओं और 2 विषम संख्याओं का योग (सम + सम + विषम + विषम)
(b) 2 विषम संख्याओं और 3 सम संख्याओं का योग
(c) 5 सम संख्याओं का योग
(d) 8 विषम संख्याओं का योग
उत्तर:
किसी सम संख्या के सभी बिंदुओं की जोड़ियाँ बन जाती हैं। किसी विषम संख्या में जोड़ियाँ बनाने के बाद एक बिंदु बचता है। चित्र में नीले बिंदु जोड़ी में हैं और नारंगी बिंदु अकेले बचे हैं।

(a) दोनों विषम संख्याओं से एक-एक बिंदु बचता है। इन दोनों की भी एक जोड़ी बन जाती है। इसलिए योग सम है।
(b) दो विषम संख्याओं से बचे दो बिंदु मिलकर एक जोड़ी बनाते हैं। तीनों सम संख्याओं में पहले से पूरे जोड़े हैं। इसलिए योग सम है।
(c) पाँचों सम संख्याओं में कोई बिंदु अकेला नहीं बचता। इसलिए योग सम है।
(d) आठ विषम संख्याओं से कुल आठ अकेले बिंदु बचते हैं। इनकी चार जोड़ियाँ और बन जाती हैं। इसलिए योग सम है।
2. लता के पास उसके गुल्लक में ₹1 के सिक्के विषम संख्या में हैं, ₹5 के सिक्के विषम संख्या में हैं तथा ₹10 के सिक्के सम संख्या में हैं। उसे कुल धनराशि की गणना करने पर ₹205 प्राप्त हुए। क्या उसने गणना में कोई त्रुटि की? यदि कोई त्रुटि नहीं हुई तो उसके पास प्रत्येक प्रकार के कितने सिक्के हो सकते हैं? यदि उससे कोई त्रुटि हुई तो स्पष्ट कीजिए कि ऐसा क्यों हुआ होगा?
उत्तर:
हाँ, लता से गणना में त्रुटि हुई। ₹1 के सिक्कों की संख्या विषम है, इसलिए उनकी राशि विषम होगी। ₹5 के सिक्कों की राशि भी विषम होगी, क्योंकि 5 को विषम बार जोड़ने पर विषम संख्या मिलती है।
इन दोनों राशियों का योग सम होगा। ₹10 के सिक्कों की राशि भी सम है, क्योंकि वह 10 का गुणज है। इसलिए कुल राशि सम होनी चाहिए, जबकि 205 विषम है। इन सिक्कों की कुल राशि ₹205 नहीं हो सकती।
3. हम जानते हैं कि-
(a) सम + सम = सम
(b) विषम + विषम = सम
(c) सम + विषम = विषम
इसी प्रकार नीचे दी गई स्थितियों के लिए समानता ज्ञात कीजिए-
(d) सम − सम = __________
(e) विषम − विषम = __________
(f) सम − विषम = __________
(g) विषम − सम = __________
उत्तर:
घटाव को जोड़ से जाँच सकते हैं। अंतर में घटाई गई संख्या जोड़ने पर पहली संख्या वापस मिलती है। इसलिए एक ही प्रकार की दो संख्याओं का अंतर सम और एक सम व एक विषम संख्या का अंतर विषम होता है।
(d) सम − सम = सम। जैसे 8 − 4 = 4।
(e) विषम − विषम = सम। जैसे 9 − 5 = 4।
(f) सम − विषम = विषम। जैसे 8 − 3 = 5।
(g) विषम − सम = विषम। जैसे 9 − 4 = 5।
कक्षा 7 गणित प्रकाश के पेज 136 पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
पेज 136 – पता लगाइए
1. 1 से 9 तक की संख्याओं के उपयोग से कितने भिन्न-भिन्न जादुई वर्ग बनाए जा सकते हैं?
उत्तर:
हर पंक्ति, स्तंभ और विकर्ण का योग 15 होता है और केंद्र में 5 आता है। यदि 1 को कोने में रखें, तो उससे होकर एक पंक्ति, एक स्तंभ और एक विकर्ण गुजरेंगे। तीनों के लिए 14 का योग देने वाले तीन अलग-अलग जोड़े चाहिए, पर ऐसे जोड़े केवल 5 और 9 तथा 6 और 8 हैं। इसलिए 1 किसी भुजा के बीच वाले खाने में आएगा। ऐसे 4 खाने हैं। केंद्र के ठीक दूसरी ओर 9 आएगा, क्योंकि 1 + 5 + 9 = 15।
अब 1 वाली उस पंक्ति या स्तंभ को देखें जिसमें 5 नहीं है। उसके दोनों कोनों की संख्याओं का योग 14 होना चाहिए। यहाँ 6 और 8 ही आ सकते हैं। इन्हें दो तरीकों से रख सकते हैं। फिर हर पंक्ति, स्तंभ और विकर्ण का योग 15 रखने पर बाकी खाने तय हो जाते हैं।
इसलिए कुल 4 × 2 = 8 भिन्न जादुई वर्ग बनते हैं।

2. 2 से 10 तक की संख्याओं के उपयोग से एक जादुई वर्ग की रचना कीजिए। ऐसा करने के लिए आप कौन-सी युक्ति अपनाएँगे? इसकी तुलना 1 से 9 तक की संख्याओं से बनाए गए जादुई वर्गों से कीजिए।
उत्तर:
हम 1 से 9 वाले जादुई वर्ग के हर खाने की संख्या में 1 जोड़ते हैं। इससे 1 की जगह 2, 2 की जगह 3 और इसी तरह 9 की जगह 10 आ जाता है।

पहले वर्ग की पहली पंक्ति में 2 + 7 + 6 = 15 था। नए वर्ग में उसी पंक्ति का योग 3 + 8 + 7 = 18 है। हर पंक्ति, स्तंभ और विकर्ण में तीन संख्याएँ हैं, इसलिए हर योग 3 बढ़ा है। नया जादुई योग 18 है और केंद्र की संख्या 5 से बढ़कर 6 हो गई है।
3. एक जादुई वर्ग लीजिए तथा
(a) प्रत्येक संख्या में 1 की वृद्धि कीजिए।
(b) प्रत्येक संख्या को दुगुना कीजिए।
क्या प्रत्येक स्थिति में परिणामी ग्रिड भी एक जादुई वर्ग है? प्रत्येक स्थिति में जादुई योग में किस प्रकार का परिवर्तन होता है?
उत्तर:
हम 1 से 9 वाला जादुई वर्ग लेते हैं, जिसका जादुई योग 15 है।
(a) हर संख्या में 1 जोड़ने पर हर पंक्ति, स्तंभ और विकर्ण का योग 1 + 1 + 1 = 3 बढ़ता है। नया जादुई योग 15 + 3 = 18 है।
(b) हर संख्या को दुगुना करने पर तीनों संख्याओं का योग भी दुगुना हो जाता है। नया जादुई योग 2 × 15 = 30 है।

दोनों स्थितियों में सभी पंक्तियों, स्तंभों और दोनों विकर्णों का योग बराबर रहता है। इसलिए दोनों नए ग्रिड भी जादुई वर्ग हैं।
4. एक जादुई वर्ग पर अन्य कौन-कौन सी संक्रियाएँ की जा सकती हैं ताकि एक अन्य जादुई वर्ग प्राप्त हो जाए?
उत्तर:
हर खाने से एक ही संख्या घटा सकते हैं। जैसे, हर खाने से 2 घटाने पर हर पंक्ति, स्तंभ और विकर्ण का योग 3 × 2 = 6 घटेगा। सभी योग फिर भी बराबर रहेंगे।
हर खाने को एक ही शून्येतर संख्या से गुणा कर सकते हैं। जैसे, 3 से गुणा करने पर जादुई योग भी तीन गुना हो जाता है। इसी तरह, सभी खानों को किसी एक शून्येतर संख्या से भाग दे सकते हैं। यदि सभी संख्याएँ उससे पूरी तरह बँटती हैं, तो नए वर्ग के खानों में भी पूर्णांक मिलेंगे।
वर्ग को 90° घुमाने या उसका दर्पण-प्रतिबिंब बनाने से भी जादुई वर्ग मिलता है। इसमें संख्याओं की जगह बदलती है, पर जादुई योग वही रहता है।
5. किन्हीं भी 9 क्रमागत संख्याओं के संग्रह के उपयोग से (जैसे 2 – 10, 3 – 11, 9 – 17, इत्यादि) एक जादुई वर्ग की रचना करने की विधियों पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
मान लें कि पहली संख्या a है। हम 1 से 9 वाले जादुई वर्ग के हर खाने में a − 1 जोड़ते हैं। इस तरह 1 की जगह a और 9 की जगह a + 8 आता है। हर पंक्ति, स्तंभ और विकर्ण में तीन खाने हैं, इसलिए नया जादुई योग 15 + 3(a − 1) होता है।
जैसे, 2 से 10 के लिए हर खाने में 1 जोड़ेंगे, 3 से 11 के लिए 2 जोड़ेंगे और 9 से 17 के लिए 8 जोड़ेंगे। इनके जादुई योग क्रमशः 18, 21 और 39 होंगे।

एक और तरीका यह है कि नौ संख्याओं को छोटे से बड़े क्रम में लिखें और पुराने वर्ग में 1 से 9 तक के स्थानों पर क्रम से पहली, दूसरी, …, नौवीं संख्या रखें। इससे बीच के खाने में पाँचवीं संख्या आएगी।
कक्षा 7 गणित प्रकाश के पेज 137 पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
पेज 137 – पता लगाइए
1. इस व्यापकीकृत रूप के उपयोग से वह जादुई वर्ग ज्ञात कीजिए जब केंद्रीय संख्या 25 है।
उत्तर:
हम केंद्र की संख्या m मानते हैं। 1 से 9 वाले वर्ग में केंद्र 5 है। जैसे, पहली पंक्ति की संख्याएँ 2, 7 और 6 केंद्र से क्रमशः 3 कम, 2 अधिक और 1 अधिक हैं। इसी संबंध से पहली पंक्ति m − 3, m + 2 और m + 1 होगी।
चित्र में पहले पूरे वर्ग का रूप है। फिर हर खाने में m = 25 रखने पर दूसरा वर्ग मिलता है।

पहली पंक्ति का योग 22 + 27 + 26 = 75 है। बाकी पंक्तियों, स्तंभों और दोनों विकर्णों का योग भी 75 है।
2. किसी पंक्ति, स्तंभ या विकर्ण के तीन पदों को जोड़ने पर कौन-सा व्यंजक प्राप्त होता है?
उत्तर:
पहली पंक्ति के तीन पदों का योग है
(m − 3) + (m + 2) + (m + 1) = 3m − 3 + 2 + 1 = 3m।
हर पंक्ति, स्तंभ और विकर्ण में m तीन बार आता है। उससे जुड़ी संख्याओं का योग 0 होता है। इसलिए तीन पदों के योग का व्यंजक 3m है।
3. निम्नलिखित स्थितियों के परिणाम लिखिए –
(a) व्यापकीकृत रूप के प्रत्येक पद में 1 जोड़ने पर।
(b) व्यापकीकृत रूप के प्रत्येक पद को दुगुना करने पर।
उत्तर:
(a) केंद्र m से बदलकर m + 1 हो जाता है। हर पंक्ति, स्तंभ और विकर्ण का योग 3 बढ़ता है। इसलिए नया जादुई योग 3m + 3 = 3(m + 1) है।
(b) केंद्र 2m हो जाता है। हर पद दुगुना होने से हर पंक्ति, स्तंभ और विकर्ण का योग भी दुगुना होगा। इसलिए नया जादुई योग 2 × 3m = 6m है।

4. एक जादुई वर्ग की रचना कीजिए जिसका जादुई योग 60 हो।
उत्तर:
जादुई योग केंद्र की संख्या का तीन गुना होता है। इसलिए केंद्र की संख्या 60 ÷ 3 = 20 होगी।
हम 1 से 9 वाले वर्ग के हर खाने में 20 − 5 = 15 जोड़ते हैं। इससे केंद्र में 20 आता है और 16 से 24 तक की संख्याओं का यह जादुई वर्ग मिलता है।

जाँच करने पर पहली पंक्ति का योग 17 + 22 + 21 = 60 और एक विकर्ण का योग 17 + 20 + 23 = 60 मिलता है। इसी तरह बाकी योग भी 60 हैं।
5. क्या 9 अक्रमागत संख्याओं को भरकर एक जादुई वर्ग प्राप्त करना संभव है?
उत्तर:
हाँ। हम 1 से 9 वाले वर्ग के हर खाने की संख्या को दुगुना करके उसमें से 1 घटाते हैं। इस तरह हमें 1, 3, 5, 7, 9, 11, 13, 15 और 17 मिलती हैं। ये नौ अलग-अलग संख्याएँ हैं और क्रमागत नहीं हैं।

हर पंक्ति, स्तंभ और विकर्ण का योग पहले दुगुना होता है, फिर तीन खानों के कारण 3 घटता है। इसलिए नया जादुई योग 2 × 15 − 3 = 27 है। जैसे, पहली पंक्ति में 3 + 13 + 11 = 27 है।
कक्षा 7 गणित प्रकाश के पेज 144 पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर:
पेज 144 – पता लगाइए
1. एक विद्युत बल्ब जलता हुआ (On) है। दिनेश इसके बटन को 77 बार दबाता है। क्या यह बल्ब अब जला हुआ (On) होगा या बंद (Off) होगा? ऐसा क्यों?
उत्तर:
बल्ब बंद होगा। पहली बार बटन दबाने पर बल्ब बंद होता है और दूसरी बार दबाने पर फिर जल जाता है। इसलिए हर दो बार बटन दबाने के बाद वह अपनी पहली अवस्था में आ जाता है।
76 बार दबाने पर ऐसी 38 जोड़ियाँ पूरी होंगी और बल्ब जलता रहेगा। 77वीं बार दबाने पर वह बंद हो जाएगा।
2. ललिता के पास एक बड़ा प्राचीन विश्वकोश है। जब वह इसे खोलती है तब इसके अनेक खुले पृष्ठ गिर जाते हैं। वह कुल 50 पृष्ठ गिनती है जो दोनों ओर छपे हुए हैं। क्या इन खुले पृष्ठों की संख्याओं का योग 6000 हो सकता है? यदि हाँ, तो क्यों अथवा नहीं, तो क्यों नहीं?
उत्तर:
नहीं, योग 6000 नहीं हो सकता। यदि 50 पृष्ठ-संख्याएँ गिनी गई हैं, तो वे 25 पन्नों पर हैं। हर पन्ने की एक ओर विषम और दूसरी ओर उसके ठीक बाद की सम पृष्ठ-संख्या होती है, जैसे 7 और 8। इनका योग विषम होता है। ऐसे 25 विषम योगों को जोड़ने पर विषम संख्या मिलेगी, जबकि 6000 सम है।
यदि 50 पूरे पन्ने गिने गए हैं, तब भी 6000 संभव नहीं है। एक पन्ने की संख्याएँ 2n − 1 और 2n मानें। उनके योग में 1 जोड़ने पर 4n मिलता है। इसलिए 50 पन्नों के कुल योग में 50 जोड़ने पर 4 का गुणज मिलना चाहिए। लेकिन 6000 + 50 = 6050, जो 4 का गुणज नहीं है।
3. यहाँ चित्र में एक 2 × 3 का ग्रिड दिया गया है। प्रत्येक पंक्ति और स्तंभ के लिए योग की समानता घेरे में लिखी हुई है। ‘e’ सम संख्या के लिए है तथा ‘o’ विषम संख्या के लिए है। इन बक्सों को 3 विषम संख्याओं (o) तथा 3 सम संख्याओं (e) से इस प्रकार भरिए कि पंक्ति और स्तंभों के योग की समानता संतुष्ट हो जाए।

उत्तर:
पहले दो स्तंभों का योग सम चाहिए। इसलिए मैंने पहले स्तंभ में दोनों संख्याएँ विषम और दूसरे स्तंभ में दोनों संख्याएँ सम रखीं। तीसरे स्तंभ में ऊपर सम और नीचे विषम रखने से उसका योग विषम हो गया।

पहली पंक्ति में एक विषम संख्या है, इसलिए योग विषम है। दूसरी पंक्ति में दो विषम संख्याएँ हैं, इसलिए योग सम है। इस तरह कुल तीन o और तीन e इस्तेमाल हुए हैं।
4. जादुई योग 0 वाला एक 3 × 3 जादुई वर्ग बनाइए। सभी संख्याएँ शून्य नहीं हो सकती हैं। आवश्यकतानुसार ऋणात्मक संख्याओं का उपयोग कीजिए।
उत्तर:
मैंने 1 से 9 तक की संख्याओं वाला जादुई वर्ग लिया, जिसका जादुई योग 15 है। उसके हर खाने की संख्या में से 5 घटाया। हर पंक्ति, स्तंभ और विकर्ण में तीन संख्याएँ हैं, इसलिए हर योग 15 − 3 × 5 = 0 हो गया।

जाँच के लिए, पहली पंक्ति का योग 3 − 4 + 1 = 0 और पहले स्तंभ का योग 3 − 2 − 1 = 0 है। दोनों विकर्णों के योग भी 3 + 0 − 3 = 0 और 1 + 0 − 1 = 0 हैं।
5. निम्नलिखित रिक्त स्थानों को ‘विषम’ या ‘सम’ से भरिए-
(a) विषम संख्या में सम संख्याओं का योग __________ होता है।
(b) सम संख्या में विषम संख्याओं का योग __________ होता है।
(c) सम संख्या में सम संख्याओं का योग __________ होता है।
(d) विषम संख्या में विषम संख्याओं का योग __________ होता है।
उत्तर:
(a) सम। कितनी भी सम संख्याएँ जोड़ें, उनका योग सम होता है।
(b) सम। विषम संख्याओं की जोड़ियाँ बन जाएँगी और हर जोड़ी का योग सम होगा।
(c) सम। यहाँ भी सभी संख्याएँ सम हैं, इसलिए उनका योग सम होगा।
(d) विषम। जोड़ियाँ बनाने पर एक विषम संख्या बच जाएगी। उसे सम योग में जोड़ने पर योग विषम होगा।
6. 1 से 100 तक की संख्याओं के योग की समानता क्या है?
उत्तर:
योग सम है। हम पहली और आखिरी संख्या की जोड़ी बनाते हैं। 1 + 100 = 101, 2 + 99 = 101 और इसी तरह 50 + 51 = 101। ऐसी 50 जोड़ियाँ हैं। इसलिए कुल योग 50 × 101 = 5050 है, जो सम है।
7. विरहांक अनुक्रम में दो क्रमागत संख्याएँ 987 और 1597 हैं। इस अनुक्रम की अगली दो संख्याएँ तथा पिछली दो संख्याएँ क्या हैं?
उत्तर:
विरहांक अनुक्रम में अगली संख्या पिछली दो संख्याओं के योग से मिलती है।
987 + 1597 = 2584
1597 + 2584 = 4181
पीछे जाने के लिए घटाते हैं। 987 से ठीक पहले की संख्या 1597 − 987 = 610 है। 610 से ठीक पहले की संख्या 987 − 610 = 377 है।
अतः अगली दो संख्याएँ 2584 और 4181 हैं। पिछली दो संख्याएँ अनुक्रम के क्रम में 377 और 610 हैं।
8. अंगद एक 8 पगों वाली सीढ़ी पर चढ़ना चाहता है। उसके खेल का एक नियम है कि एक समय पर वह 1 पग या 2 पग ही ले सकता है। उदाहरणार्थ, उसके पथों में से एक पथ 1, 2, 2, 1, 2 है। तो बताइए कि वह शीर्ष पर कितनी भिन्न विधियों से पहुँच सकता है?
उत्तर:
पहले पग पर पहुँचने की 1 विधि है। दूसरे पग पर पहुँचने की 2 विधियाँ हैं—1 + 1 या सीधे 2।
किसी भी अगले पग पर अंगद या तो पिछले पग से 1 पग चढ़कर आएगा या उससे पहले वाले पग से 2 पग चढ़कर। इसलिए पिछले दो पगों तक पहुँचने के तरीकों की संख्या जोड़ेंगे।
1 से 8 पगों के लिए विधियों की संख्या क्रम से 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34 है।
अतः अंगद 8वें पग पर 13 + 21 = 34 भिन्न विधियों से पहुँच सकता है।
9. विरहांक अनुक्रम के 20वें पद की समानता क्या है?
उत्तर:
अनुक्रम के पहले छह पद 1, 2, 3, 5, 8, 13 हैं। इनकी समानता विषम, सम, विषम, विषम, सम, विषम है।
अगला पद पिछली दो संख्याओं का योग होता है। इसलिए ‘विषम, सम, विषम’ का समूह दोहराता है। सम पद दूसरे, पाँचवें, आठवें, ग्यारहवें, चौदहवें, सत्रहवें और बीसवें स्थान पर आते हैं। अतः 20वाँ पद सम है।
10. सत्य कथनों की पहचान कीजिए-
(a) व्यंजक 4m − 1 से सदैव विषम संख्याएँ प्राप्त होती हैं।
(b) सभी सम संख्याओं को 6j − 4 के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।
(c) दोनों व्यंजक 2p + 1 और 2q − 1 सभी विषम संख्याओं का वर्णन करते हैं।
(d) व्यंजक 2f + 3 सम और विषम दोनों संख्याओं को व्यक्त करता है।
उत्तर:
यहाँ अक्षरों के मान पूर्णांक लेते हैं।
(a) सत्य। 4m सम है और सम संख्या में से 1 घटाने पर विषम संख्या मिलती है।
(b) असत्य। उदाहरण के लिए, 4 एक सम संख्या है। यदि 6j − 4 = 4 हो, तो 6j = 8 होना चाहिए। लेकिन 8, 6 का गुणज नहीं है।
(c) सत्य। हर विषम संख्या किसी सम संख्या से 1 अधिक और अगली सम संख्या से 1 कम होती है। इसलिए उसे 2p + 1 और 2q − 1, दोनों रूपों में लिख सकते हैं। जैसे 7 = 2 × 3 + 1 = 2 × 4 − 1।
(d) असत्य। 2f सम है और 3 विषम है। इनका योग हमेशा विषम होगा।
अतः (a) और (c) सत्य हैं।
11. निम्नलिखित क्रिप्टारिथम को हल कीजिए-

उत्तर:
इकाई के स्थान पर T और A को जोड़ने पर फिर T ही आता है। इसलिए A = 0 और दहाई में कोई हासिल नहीं जाता।
दो अंकों की दो संख्याओं के योग से सैकड़े में केवल 1 हासिल जा सकता है। सैकड़े पर T है, इसलिए T = 1।
अब दहाई में U + 1 का इकाई अंक A, यानी 0 है और 1 हासिल जाता है। इसलिए U + 1 = 10, अर्थात् U = 9।
इस तरह U = 9, T = 1 और A = 0। जाँच करने पर 91 + 10 = 101 मिलता है।
संख्याओं के खेल वाले प्रश्नों में तर्क कैसे लिखें
इस अध्याय के अधिकतर प्रश्नों में केवल उत्तर नहीं, बल्कि यह भी बताना होता है कि उत्तर सही क्यों है। सम-विषम वाले प्रश्नों में पहले छोटे उदाहरण लेकर नियम जाँचें, फिर कारण शब्दों में लिखें। जादुई वर्ग बनाते समय पहले बीच वाले खाने की संख्या तय करें तथा अंक पहेलियों में हर अंक को एक-एक करके परखें और अंत में पूरा जोड़ करके अपना हल जाँचें।
विरहांक संख्याएँ और जादुई वर्ग जैसी खोजें दिखाती हैं कि गणित केवल गणना नहीं, बल्कि प्रतिरूप पहचानने की कला भी है; यही सोच भाग 2 के ‘सर्वनिष्ठ आधार की खोज’ जैसे अध्यायों में भी काम आती है। आगे की पढ़ाई के लिए कक्षा 7 गणित एनसीईआरटी समाधान पृष्ठ से अगला अध्याय चुनें।
